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शनिवार, 13 जून 2020

महाशंख  क्या होता है ?

                      महाशंख के विषय में समस्त प्रभावशाली तथ्य केवल कुछ शाक्त ही जानते हैं |इसके अलावा सभी लोग tantra में शंख का प्रयोग इसी महाशंख के कारण करते हैं |लेखक लोग शंख को ही तांत्रिक सामग्री मानकर ग्रन्थ पूर्ण कर देते हैं |में आपसे यह स्पष्ट करना चाहता हूँ की शंख और महाशंख दोनों अलग हैं |यह क्या है और इसके tantra प्रयोग क्या हैं यह हम स्पष्ट करते हैं |शंख को बजाना शुभ होता है |शंख के द्वारा अर्ध्य दिया जाता है |शंख द्वारा देव स्नान कराया जाता है ,कुछ सेवन किया जाता है ,|इसके आलावा शंख के tantra में कोई प्रयोग नहीं होते |दक्षिणावर्ती शंख भी पूजन में ही प्रयुक्त होता है जिसका प्रयोग लक्ष्मी उपासना में किया जाता है ,इसके अतिरिक्त बहुत प्रयोग tantra में शंख के नहीं हैं ,जबकि महत्त्व बहुत दिया जाता है ,इसका कारण यही महाशंख है जिसके बारे में हम आगे बताने जा रहे हैं |वास्तव में शंख और महाशंख में बहुत भेद होता है |
                   व्यक्ति के प्राणांत हो जाने पर उसी शव से यह महाशंख प्राप्त होता है ,जबकि शंख तो समुद्र में जीव का खोल है |इसे हमेशा याद रखना चाहिए |स्त्री और शूद्र से चांडाल की उत्पत्ति होती है तथा "तज्जायश्चेव चांडाल सर्व मंत्र विवर्जितः " इसी कारण यह लोग मन्त्रों से हीन होते हैं |"मंत्रहीनेतुस्थ्यादिसर्ववर्ण विभुषिताम" जो लोग मन्त्रों से हीन होते हैं उन्ही की अस्थियों में सभी वर्ण रहते हैं |
                     जो साधक महाशंख की माला से जप करता है वह निःसंदेह अणिमा आदि सिद्धियों को प्राप्त करता है |यह माला बनानी तथा प्राप्त करनी तो सरल है क्योकि इसमें धन का कोई व्यय नहीं होता किन्तु खतरनाक अवश्य है |धन के विषय में जितनी सरल है उतनी ही स्वर्ग से भी दुर्लभ है ,क्योकि स्वर्ग तो आपको प्राप्त हो जाएगा परन्तु इस माला की प्राप्ति किसी व्यावसायिक व्यक्ति से नहीं होती |यहाँ तक की आज के तथाकथित बड़े बड़े तांत्रिक और स्वयंभू साधक तक इसके बारे में जानते तक नहीं ,पानी और देखनी तो दूर की बात है |इसे प्राप्त करने के लिए श्मशान में घूमना पड़ता है अथवा यह माला भाग्यवश ही गुरुकृपा से प्राप्त होती है |व्यक्ति इसे बना सकता है अगर खुद भी प्रयास करे तो |इस माला के द्वारा सही मन्त्रों का जप करना चाहिए |मंत्र के सभी दोषों को यह माला समाप्त कर देती है |मंत्र किसी भाँती के दोष से युक्त हो सकता है परन्तु यह माला कभी भी दोषी नहीं होती है |इसी कारण    महाशंख सर्वत्र तेषु योजितम अर्थात महाशंख ही सब प्रकार के मन्त्रों से लाभ प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ है |
पूर्वजन्म के शुभ तथा सफल कर्मो के प्रयास से यदि कभी किसी को महाशंख की माला प्राप्त हो जाती है तो वह व्यक्ति तो क्या उसका समस्त परिवार ही समस्त साधनाओं का लाभ प्राप्त कर लेता है |
क्या है महाशंख
-------------------- महाशंख के विषय में समस्त प्रभावशाली तथ्य केवल कुछ शाक्त ही जानते हैं |इसके अलावा सभी लोग तंत्र में शंख का प्रयोग इसी महाशंख के कारण करते हैं |लेखक लोग शंख को ही तांत्रिक सामग्री मानकर ग्रन्थ पूर्ण कर लेते हैं |इसका कारण यह है की लेखक अच्छे साधक ही मुश्किल से होते हैं उस पर वे उच्च स्तर के शाक्त साधक हों बेहद मुश्किल है |खुद साधना और मूल तंत्र का अनुभव न होने से यहाँ वहां से सुनी हुई बातों और पुराने शास्त्रों को तोड़ मरोड़कर कुछ अपनी कल्पनाएँ घुसेड़कर एक किताब लिख देते हैं और कर्तव्य की इतिश्री मान लेते हैं |वास्तविक तंत्र एक तो वैसे भी गोपनीय होता है जो इन लेखकों को पता ही नहीं चलता उस पर खुद साधना ज्ञान न होना कोढ़ में खाज हो जाता है और सतही षट्कर्म की किताब सामने होती है |आज तंत्र की दुर्दशा का यह बहुत बड़ा कारण है और मूल तंत्र के लोप का भी |
सामान्य शंख को बजाना शुभ होता है |शंख के द्वारा अर्ध्य दिया जाता है |शंख द्वारा कुछ सेवन किया जाता है |शंख द्वारा देव स्नान भी कराते हैं |इसके अलावा तंत्र में शंख के कोई काम नहीं होते जबकि शंख का महत्त्व बहुत अधिक है |तो आखिर वह कौन सा शंख है जो इतना महत्त्व पूर्ण है |तंत्र में दक्षिणावर्ती शंख का प्रयोग लक्ष्मी प्राप्ति हेतु जरुर किया जाता है ,किन्तु यह पूजन होता है |वास्तव में शंख और महाशंख में बहुत बड़ा अंतर होता है |
व्यक्ति के प्राणांत हो जाने पर उसी शव से यह महाशंख प्राप्त होता है जबकि शंख की प्राप्ति सबको मालूम है |चांडाल लोग मन्त्रों से हीन होते हैं और जो लोग मन्त्रों से हीन होते हैं उन्ही की अस्थियों में सभी वर्ण होते हैं |हिंदी की शब्दमाला को ही वर्ण या वर्णमाला कहते हैं |इन्ही वर्णों पर अं की मात्रा लगाने से यह वर्ण बीज वर्ण बन जाते हैं |अ से लेकर क्ष तक के सभी वर्ण अस्थियों के मध्य सदा विद्यमान रहते हैं |प्रस्तुत चित्र के अनुसार दर्शाए गएँ अंगों पर चिन्ह के स्थानों की अस्थि लेकर माला बनाने पर वह महाशंख की माला कहलाती है |
इस माला के द्वारा जप करने पर समस्त सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं |इन स्थानों की अस्थियाँ लेकर स्थानानुसार ही माला में पिरोया जाता है ||इस माला को सर्प की भाँती बनाया जाता है अर्थात आगे से मोती होती होती पीछे जाकर पतली हो जाए |स्पष्टतः यह समझ लें की माला का मूल मोटा और फिर क्रमशः पतला होता चला जाता है |माला को बनाते समय पहले मोती अस्थि डाली जाती है ,फिर उससे पतली ,फिर और उससे पतली अस्थि पिरोते जाते हैं |जहाँ जहाँ चित्र में चिन्ह लगे हैं वहां वहां की अस्थि ली जाती है |सर से पैर तक की अस्थियाँ क्रम से पिरोई जाती हैं |जब माला बन जाती है तो प्रणव की गाँठ लगाईं जाती है |इसके उपर एक लम्बी अस्थि डालकर पुनः ब्रह्मगाँठ लगाईं जाती है |इसे बनाकर प्राण प्रतिष्ठा की जाती है |प्राण प्रतिष्ठा का विधान अत्यंत गोपनीय होता है |
इस माला को गोपनीय रखा जाता है और इस पर जप की शुरुआत मोटी तरफ से करके समापन पतली तरफ किया जाता है |पुनः मोती तरफ से शुरुआत होती है |इस भाँती जप करने से निश्चित सिद्धि प्राप्त होती है |
महाशंख की माला बनाने के लिए स्त्री ,ब्राह्मण तथा मन्त्र दीक्षित व्यक्ति के शव की अस्थियाँ नहीं ली जाती |शव साधना में भी स्त्री का शरीर उपयोग नहीं किया जाना चाहिए |महाशंख की माला हेतु बिना दीक्षित ,जो ब्राह्मण न हो उसके शव की अस्थियाँ उपयुक्त होती हैं इसीलिए शूद्र अथवा चांडाल की अस्थियाँ अधिक उपयुक्त होती हैं |.................................................................हर-हर महादेव 

गुरुवार, 16 अप्रैल 2020

स्त्रियों के लिए रक्षा ताबीज

भूत बाधा /अभिचार नाशक कवच [केवल स्त्रियों के लिए ]
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                         सामान्य रूप से भूत–प्रेत ,आत्माएं ,वायव्य बाधाएं ,तांत्रिक टोटके और अभिचार स्त्रियों को अधिक और शीघ्र प्रभावित करते हैं |इसका कारण स्त्रियों की शारीरिक और मानसिक बनावट भी होती है और स्त्रियों के प्रति कामुक पुरुष आत्माओं का आकर्षण भी होता है |स्त्रियों का खून अक्सर पतला होता है और भूत– प्रेत पतले खून वालों को शीघ्र प्रभावित करते हैं ,पतले खून वाले और ठंडी प्रकृति वाले पुरुष भी इसी कारण शीघ्र इनकी चपेट में आ जाते हैं |स्त्रियाँ कोमल भावनाओं और ह्रदय वाली होती हैं ,मानसिक बल और कठोरता कम होने से आत्माओं को कम प्रतिरोध मिलता है और वह शीघ्र प्रभावी हो जाते हैं |अक्सर दुर्घटनाओं अथवा आकस्मिक रूप में मरे ही भूत–प्रेत बनते हैं और असंतुष्ट होते हैं ,अपनी तृप्ति के लिए इन्हें स्त्रियाँ आसन शिकार मिलती हैं और उनसे यह अपनी इच्छा पूर्ती करते हैं |
                                कभी -कभी असावधानीवश ,दुर्घटनावश ,अपवित्र स्थिति में अथवा अन्य किसी कारणवश अक्सर किसी अविवाहित अथवा कुँवारी कन्या ,लड़की या किसी भी महिला पर यकायक भूत /जिन्न /प्रेत /आसेब इत्यादि का साया हो जाता है जो की उस स्त्री का जीवन नरक सामान बना देता है |ऐसी परिस्थितियों में यदि उसे अभिमत्रित ” भूत बाधा नाशक कवच ” गले में धारण करा दिया जाए तो चमत्कारिक रूप से लाभ दिखाई देने लग जाते हैं |यह कवच महाविद्या काली की शक्ति से संपन्न होता है और नकारात्मक ऊर्जा का तीब्र प्रतिरोधक होता है ,चाहे वह कोई भी नकारात्मक या वायव्य ऊर्जा या शक्ति हो |इससे स्त्री सुरक्षित रहती है और कहीं भी उसे इन बाधाओं का भय नहीं होता |बच्चे के जन्म काल और बाद में भी स्त्री को इन आत्माओं से सर्वाधिक भय होता है ,|इस काल में भगवती का यह यन्त्र कवच उनकी पूर्ण सुरक्षा करता है |अगर पहले से किसी बाधा से प्रभावित कोई स्त्री इन्हें धारण करती है तो क्रमशः शरीर की शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा वृद्धि के साथ उस शक्ति का प्रभाव कम हो जाता है और अंततः वह छोड़ देती है |कवच की शक्ति से किसी तांत्रिक द्वारा किये गए अभिचार से भी बचाव होता है और अगरपहले से कोई अभिचार है तो उसका प्रभाव क्रमशः नष्ट होता है |अतः स्त्रियों को सुरक्षा हेतु भगवती का कवच धारण करना चाहिए |……………………………………………………………..हर–हर महादेव 

टोने -टोटके से बचाव हेतु ताबीज

 अभिचार रक्षा कवच
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                                      मनुष्य के स्वभाव के कुछ गुण दूसरों को कष्ट देते हैं ,जैसे ईर्ष्या ,द्वेष ,दुश्मनी ,टांग खीचने की आदत आदि मनुष्यगत दुर्गुण हैं |यह गुण या दुर्गुण बहुतों में पाए जाते हैं |लोग अपनी क्षमता से आगे बढने की बजाय दूसरों की टांग खींचते हैं जिससे उसकी वृद्धि रोक सकें ,कारण लोग लोग खुद के दुखों से कम दुखी और दुसरे के सुखों से अधिक दुखी होते हैं |भले वह बेचारा परेशान ही खुद क्यों न हो |दुश्मनी में तो लोग दुसरे का नुकसान करते ही हैं ,ईर्ष्या ,जलन ,द्वेष में अधिक नुक्सान करते हैं |खुद सामने आने से बचने के लिए ऐसे लोग अक्सर tantra और टोटकों का भी सहारा लिया करते हैं और अभिचार और टोटके करते रहते हैं |ऐसे में बहुत से लोग जिन्होंने किसी का कुछ बिगाड़ा भी नहीं और खुद की मेहनत से जीवन यापन कर रहे हैं इनसे पीड़ित हो जाते हैं |कभी -कभी, कोई -कोई लोग तांत्रिक क्रियाओं के चपेट में बेवजह भी आ जाते हैं ,जैसे मार्ग में की हुई क्रिया पर ध्यान नहीं दिया और वह साथ लग गई |अँधेरे ,सुनसान ,दोपहर आदि में कोई क्रिया साथ हो ली आदि आदि |इन क्रियाओं /अभिचारों के कारण व्यक्ति की मानसिक /आर्थिक / पारिवारिक स्थितियों में कष्ट आ जाते हैं और वह समझ भी नहीं पाता|गृह कुछ कहते हैं और उसके साथ होता कुछ है |इन्हें tantra द्वारा ही हटाया जा सकता है |सामान्य उपायों का इन पर कोई प्रभाव नहीं होता |
                                अक्सर हमारे यहाँ इस तरह की शिकायतें आती हैं और विश्लेषण पर हम उपरोक्त समस्या पाते हैं |इन्ही कारणों से हमने इनसे बचने के तरीके के रूप में सुरक्षा कवच निर्मित किये |यदि आप किसी भी प्रकार की भूत -प्रेतादि , उपरी बाधा के शिकार हैं अथवा किसी शत्रु ने दुर्भावनावश आपके ऊपर तांत्रिक अभिचार कर्म अथवा तंत्र प्रयोग या टोना -टोटका करवा दिया है और आप लाख प्रयत्नों के बाद भी उन तांत्रिक दुष्कर्मों से छुटकारा नहीं पा सके हों तो आप हमारे केंद्र के तंत्र विशेषज्ञों द्वारा वर्षों की साधना और दिव्य शक्तियों के संयोग से सिद्धिकाल में विशेष रूप से निर्मित ” तंत्र रक्षा कवच “को मंगवाकर सदैव के लिए अपने गले में धारण करके वांछित लाभ प्राप्त कर सकते हैं |इस दिव्य कवच पर किसी भी प्रकार का जादू -टोना असर नहीं डाल सकता है |ऐसा देखा गया है क्योंकि यह कवच महाविद्याओं की शक्तियों से संपन्न होते हैं जो इस ब्रह्माण्ड की सर्वोच्च शक्तियां हैं |जीवन में समस्त उपरी बाधाओं से रक्षा हेतु सदैव के लिए इस प्रचंड शक्तिशाली कवच को अपने गले में धारण अवश्य ही करना चाहिए |इससे आप अभिचार /टोन– टोटके /tantra /वायव्य बाधा से सुरक्षित रहेंगे और नकारात्मक ऊर्जा से आपका बचाव होगा |…………………………………………………………….हर–हर महादेव 

पति जब घर तबाह करे तो ?

पति जब देवता न बन पाए ,घर तबाह करे तो 
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                                  दाम्पत्य जीवन स्त्री -पुरुष के एक संकल्प के साथ एक होकर चलने के भावना से शुरू होता है |इसमें लड़का और लड़की दोनों दो पहिये होते हैं और इनकी इस सम्बन्ध में अपनी सोच ,कल्पनाएँ ,भावनाएं होती हैं |विवाह के पूर्व लडकी अपने मन में अपने भावी वैवाहिक जीवन और पति को लेकर असंख्य कल्पनाएँ करती है ,उसकी अनेक भावनाएं होती है | वह अपने पति को सौम्य ,सरल ,सीधा ,बात मानने वाला ,प्यार करने वाला ,उसका सम्मान करने वाला ,चरित्रवान ,समझदार ,सुख दुःख में साथ देने वाला कल्पित करती हैं |विवाह पूर्व वह कलह ,विवाद ,ईगो ,चारित्रिक दोष की कल्पना नहीं कर पाती और सोचती है की पति को अपने अनुकूल ढाल लेगी |विवाह बाद अधिकतर मामलों में इसका उल्टा हो जाता है |आधुनिक समय में लगभग २० प्रतिशत दम्पति अलग हो जाते हैं विभिन्न कारणों से |इनमे पुरुषों की कमी से अलगाव अधिक होता है लेकिन स्त्री के कारण अलगाव का प्रतिशत भी तेजी से बढ़ रहा है |80 प्रतिशत दम्पतियों में से 75 प्रतिशत एडजस्ट करते हैं मजबूरी में एक दुसरे की कमी को देखते समझते हुए भी |केवल 5 प्रतिशत की लाइफ शान्ति से चल पाती है और वे यह कह सकते हैं की उनका पार्टनर सहयोगी है और वह संतुष्ट हैं |इन 5 प्रतिशत को अगर छोड़ दें तो अलग होने वाले मामलों सहित कुल दम्पतियों में से अधिकतर में कलह होता है ,|इनके कारण अलग अलग हो सकते हैं |पति पत्नी दोनों की कमियां इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं ,विभिन्न दोष ,कारण ,प्रभाव इनके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं किन्तु कलह बहुत से मामलों में स्त्री द्वारा ही अधिक किया जाता है ,जबकि गलती पुरुषों की हो सकती है |स्त्री मजबूरी में भी कलह करती है जबकि उसका वश न चले |
                                       विवाह पूर्व की सोच से जब वर्तमान मेल नहीं खाता तो क्षुब्धता ,क्रोध उत्पन्न होता है |स्वभाव न मिलने पर तो कलह होता ही है अथवा एक दुसरे से असंतुष्टि तो कलह कराता ही है ,विभिन्न प्रकार कमियां इसे और बढ़ा देते हैं |विभिन्न दोष ,कमियां ,किया कराया ,ग्रहीय स्थितियां भी इसे बढाते हैं किन्तु हमारा विषय यह नहीं की यह क्यों होता है ,क्योकि इस पर हम कुछ पोस्ट पहले लिख चुके हैं |आज हम यह देखते हैं की स्थितियां जो भी हो ,इन पर कैसे नियंत्रण किया जा सकता है |यदि पति बिगड़ा है ,या झगड़ालू है ,मार पीट करता है ,या स्वार्थी है ,या चारित्रिक रूप से कमजोर है ,या किसी और से सम्बन्ध रखता हो ,नशे अथवा दुर्व्यसन पाल रखा है ,परिवार -घर की चिंता नहीं करता ,आलसी हो ,उन्नति से उदासीन हो ,खुद की कमियों से अभाव में जीने को मजबूर कर दे ,अनावश्यक शक करे ,समस्याएं होने पर भी पत्नी की न सुने ,पत्नी को कुछ न करने दे ,अनावश्यक हमेशा टोका टाकी करे अथवा प्रतिबन्ध लागू करे ,सम्मान न करे ,उपेक्षित रखे ,असहयोगी है और आपकी मजबूरी भी है की उसे साथ लेकर चलना भी है तो कैसे उसे सुधारा जाए ,कैसे उसे अनुकूल किया जाए ,कैसे उसकी कमियों को हटाया जाए |हमारे पास अक्सर इस तरह के मामले आते रहे हैं चूंकि हम तंत्र और ज्योतिष से जुड़े रहे हैं अतः इसके लिए हमारे कुछ सुझाव हैं |यदि आप या आपका कोई परिचित इस तरीके की समस्या में घिरा हो जहाँ पुरुष के कारण घर नरक बन रहा हो तो यदि आपको उचित लगता है तो अपनी सुविधानुसार आजमायें अथवा उन्हें सुझाएँ ,हमें उम्मीद है की आपकी समस्या सुलझ सकती है |
१. प्रथम कार्य तो यह करें की पुरुष की कुंडली किसी विद्वान् ज्योतिषी को दिखाएँ और उग्रता ,स्वार्थ ,आलस्य अथवा कामुकता उत्पन्न करने वाले ग्रह के प्रभाव को सिमित करने का प्रयास करें ,साथ ही ज्योतिषी के परामर्श के अनुसार बौद्धिक स्तर उठाने वाले ,दाम्पत्य सुख दिलाने वाले ,स्वभाव में मधुरता लाने वाले ग्रह की शक्ति मजबूत करें |
२. अपने घर के वास्तु पर ध्यान दें |स्थान कैसा भी हो ,घर कैसा भी हो उसे ठीक किया जा सकता है ,अतः ऐसी व्यवस्था वास्तु अनुसार करें की शान्ति बढ़े ,तनाव कम हो ,कलह कम हो ,दिमाग पर बोझ न हो ,प्यार उत्पन्न हो |
३. पुरुष को ,उसकी जिम्मेदारियों को ,पारिवारिक संस्कार और स्थिति को समझने का प्रयत्न करें |उसकी सोच ,शैली ,देखें और तदनुरूप व्यवहार करें |उसे उसकी जिम्मेदारियों ,अपनी आवश्यकता को प्यार से समझाएं |कभी उसके ईगो को हर्ट न करें और किसी अन्य का तुलनात्मक उदाहरण बिलकुल भी न दें ,अपितु उसे प्रेरित करें की वह बहुत अच्छा है और वह सब कुछ कर सकता है |और अच्छा हो सकता है और उन्नति कर सकता है |
४. पुरुष से मिलने जुलने वालों ,उसके दोस्तों मित्रों और उसको सुझाव देने वालों पर ध्यान दें |उसके द्वारा की जा रही तुलना अथवा दिए जा रहे उदाहरण को समझने का प्रयत्न करें ,क्यों और किस ओर यह इशारा कर रहे |उसके बाद अपनी प्रतिक्रिया संतुलित रूप से दें |उसके अवचेतन की धारणाओं को समझकर उन्हें अपरोक्ष रूप से बदलने का प्रयत्न करें |उसकी कुंठाओं को दूर करने का प्रयत्न करें |हमेशा कमियां इंगित न करें |कहीं से घर आने पर तुरंत कोई शिकायत अथवा फरमाइश अथवा उलझन न व्यक्त करें |
5. यह देखें की विवाह पूर्व अथवा बाद में किसी द्वारा किसी स्वार्थ के लिए अथवा अपने दोष हटाने के लिए किसी द्वारा कोई तांत्रिक क्रिया तो नहीं की गयी आपके दाम्पत्य जीवन पर अथवा पुरुष पर | इससे भी कलह होता है और विभिन्न कमियां उत्पन्न हो जाती है |कोई दोनों को अलग तो नहीं करना चाहता अथवा कोई पुरुष को अपनी ओर तो नहीं खीचना चाहता या ऐसा कर चूका है |
६. उस घर के पितरों ,कुलदेवता आदि की स्थिति पता करें की वे संतुष्ट हैं की नहीं ,उनकी पूजा ठीक से हो रही की नहीं |जो परिवारीजन अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए हैं उनकी शान्ति के प्रयत्न करें ,पितरों को श्राद्धादी से संतुष्ट करवाने का प्रयत्न करें और कुलदेवता की वार्षिक पूजा सुनिश्चित कराएं |इनके कारण भी पारिवारिक माहौल बिगड़ता है और अभाव ,कमियां लोगों में उत्पन्न होती हैं |
7. ज्यादा टोटके न आजमायें ,न ही बार बार अलग -अलग ज्योतिषी की सलाह लें |एक बार ही खूब सोच समझकर सलाह लें और उपाय करें |हर वस्तु की अपनी ऊर्जा होती है |यदि सही स्थान पर न लगे तो व्यतिक्रम भी उत्पन्न होता है |किसी उपाय को लगातार उसके निश्चीत समय तक करें |घबराकर जल्दी जल्दी उपाय न बदलें |यहाँ वहां से पढकर या सुनकर उपाय न आजमायें बल्कि जानकार से समझकर अपनी स्थितियों के अनुसार उनका विश्लेष्ण कर उपाय करें |बहुत उपायों की ऊर्जा आपस में टकराकर निष्क्रिय भी हो जाती है और अगले उपाय के लिए असफलता का रास्ता भी बना देती है |
८. पति या पुरुष पर किसी नकारात्मक शक्ति ,किये कराये ,टोने -टोटके ,वशीकरण  आदि का प्रभाव लगे तो उसे किसी उग्र शक्ति जैसे काली ,तारा ,कामाख्या ,बगला ,भैरव ,के यन्त्र इनके सिद्ध साधक से बनवाकर और कम से कम २१००० मन्त्रों से अभिमंत्रित करा कवच में धारण कराएं |यदि वह इन्हें न पहने तो उसके तकिये अथवा बिस्तर आदि के नीचे रखें |
९. यदि पुरुष में चारित्रिक दोष हो अथवा स्वभाव में अधिक उग्रता हो ,सौमनस्य का अभाव हो ,कोई अभाव हो ,कोई शारीरिक कमी हो तो उसे षोडशी त्रिपुरसुन्दरी का यन्त्र इनके सिद्ध साधक से बनवाकर और २१००० मन्त्रों से अभिमंत्रित करा कवच में धारण कराएँ |इससे स्वभाव -शरीर की कमियों का नियंत्रण होता है और अच्छे बुरे को समझने की शक्ति का विकास होने के साथ दाम्पत्य सुख -समृद्धि की वृद्धि होती है |
१०. यदि पुरुष अधिक स्वतंत्र हो ,किसी को कुछ न समझता हो ,बड़े छोटो को समझने ,सहयोग ,सम्मान की भावना न हो ,किसी नशे आदि की समस्या से लिप्त हो ,कोई जुआ आदि की लत हो ,गलत लोगों की संगत में हो ,तो षोडशी यन्त्र धारण कराने के साथ ही उसे खुद के प्रति वशीभूत करें जिससे वह आपकी बात को माने और आपके कहे अनुसार चले |उसकी अच्छे बुरे को सोचने समझने की शक्ति का विकास हो |
११. यदि आपको लगता हो की पुरुष के किन्ही अन्य स्त्रियों या किसी अन्य स्त्री से भी सम्बन्ध हो सकते हैं या लगता हो की उसके कार्यक्षेत्र में किसी से सम्बन्ध बन सकते हैं तो ,प्रकृति उच्चाटन के प्रयोग करें और साथ ही आप खुद श्यामा मातंगी यन्त्र इसके सिद्ध साधक से बनवाकर ,अभिमंत्रित कराकर धारण करें ,जिससे उसका झुकाव आपकी ओर बढ़े और वह आपके प्रति आकर्षित और वशीभूत हो |
१२. यदि आपको लगता हो की घर -परिवार में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव है ,किसी द्वारा दाम्पत्य में बाधा डालने हेतु कुछ किया गया है ,पारिवारिक उन्नति रोकने हेतु कुछ किया गया है ,तो आप चमत्कारी दिव्य गुटिका की प्रतिदिन रोज सुबह पूजा करें और रात में काली सहस्त्रनाम का पाठ करें |इससे नकारात्मक प्रभाव ,किया कराया का प्रभाव समाप्त हो जाएगा और शान्ति उत्पन्न होगी |
उपरोक्त प्रयोग गंभीर प्रकृति के और दीर्घकालिक प्रभाव के हैं |इनके अतिरिक्त अनेक टोटके और प्रयोग दाम्पत्य कलह ,पति को सुधारने ,समस्या निवारण के लिए शास्त्रों में दिए गए हैं |चूंकि विषय पति की कमियों का है अतः कुछ टोटकों का दिया जाना प्रासंगिक होगा |
१.  जिन स्त्रियों के पति किसी अन्य स्त्री के मोहजाल में फंस गये हों या आपस में प्रेम नहीं रखते हों, लड़ाई-झगड़ा करते हों तो इस टोटके द्वारा पति को अनुकूल बनाया जा सकता है।  गुरुवार अथवा शुक्रवार की रात्रि में 12 बजे पति की चोटी (शिखा) के कुछ बाल काट लें और उसे किसी ऐसे स्थान पर रख दें जहां आपके पति की नजर न पड़े। ऐसा करने से आपके पति की बुद्धि का सुधार होगा और वह आपकी बात मानने लगेंगे। कुछ दिन बाद इन बालों को जलाकर अपने पैरों से कुचलकर बाहर फेंक दें। मासिक धर्म के समय करने से अधिक कारगर सिद्ध होगा| 
२.  कई बार पति किसी दूसरी स्त्री के चंगुल में आ जाता है तो अपनी गृहस्थी बचाने के लिए स्त्रियां यह प्रयोग कर सकती हैं। गुरुवार रात 12 बजे पति के थोड़े से बाल काटकर उसे घर के बाहरी दरवाजे अथवा गेट पर ले जाकर जला दें व बाद में पैर से मसल दें ,वापस आते समय पीछे न देखें ,अवश्य ही जल्दी ही पति सुधर जाएगा।
३. पति पत्नी के क्लेश के लिए पत्नी बुधवार को तीन घंटे का मोंन रखें |शुक्रवार को अपने हाथ से साबूदाने की खीर में मिश्री डाल कर खिलाएं तथा इतर दान करें व अपने कक्ष में भी रखें |इस प्रयोग से प्रेम में वृद्धि होती है|
४. यदि निरंतर घर में कलह का वातावरण बना रहता हो,अशांति बनी रहती हो.व्यर्थ का तनाव बना रहता हो तो.थोड़ी सी गूगल लेकर " ॐ ह्रीं मंगला दुर्गा ह्रीं ॐ " मंत्र का १०८ बार जाप कर गूगल को अभी मंत्रित कर दे और उसे कंडे पर जलाकर पुरे घर में घुमा दे.ये सम्भव न हो तो गूगल ५ अगरबत्ती पर भी ये प्रयोग किया जा सकता है.घर में शांति का वातावरण बनने लगेगा।
५. शनिवार की रात्रि में 7 लौंग लेकर उस पर 21 बार पति का  नाम लेकर फूंक मारें और अगले रविवार को इनको आग में जला दें। यह प्रयोग लगातार 7 बार करने से अभीष्ट व्यक्ति पति का वशीकरण होता है। अगर आपके पति किसी अन्य स्त्री पर आसक्त हैं और आप से लड़ाई-झगड़ा इत्यादि करते हैं। तो यह प्रयोग आपके लिए बहुत कारगर है,|
६. प्रत्येक रविवार को अपने घर तथा शयनकक्ष में गूगल की धूनी दें। धूनी करने से पहले उस स्त्री का नाम लें और यह कामना करें कि आपके पति उसके चक्कर से शीघ्र ही छूट जाएं। श्रद्धा-विश्वास के साथ करने से निश्चिय ही आपको लाभ मिलेगा |
७. अगर पति का पत्नी के प्रति प्यार कम हो गया हो तो श्री कृष्ण का स्मरण कर तीन इलायची अपने बदन से स्पर्श करती हुई शुक्रवार के दिन छुपा कर रखें। जैसे अगर साड़ी पहनतीं हैं तो अपने पल्लू में बांध कर उसे रखा जा सकता है और अन्य लिबास पहनती हैं तो रूमाल में रखा जा सकता है।
शनिवार की सुबह वह इलायची पीस कर किसी भी व्यंजन में मिलाकर पति या प्रेमी को खिला दें। मात्र तीन शुक्रवार में स्पष्ट फर्क नजर आएगा।
८. जब आपको लगे की आपके पति किसी महिला के पास से आ रहें हैं तो आप किसी भी बहाने से अपने पति का आंतरिक वस्त्र लेकर उसमे आग लगा दें और राख को किसी चौराहे पर फैंक कर पैरों से रगड़ कर वापिस आ जाएं.
९. यह प्रयोग शुक्ल पक्ष में करना चाहिए |एक पान का पत्ता लें ! उस पर चंदन और केसर का पाऊडर मिला कर रखें ! फिर दुर्गा माता जी की फोटो के सामने बैठ कर दुर्गा स्तुति में से चँडी स्त्रोत का पाठ 43 दिन तक करें ! पाठ करने के बाद चंदन और केसर जो पान के पत्ते पर रखा था, का तिलक अपने माथे पर लगायें ! और फिर तिलक लगा कर पति के सामने जांय ! यदि पति वहां पर न हों तो उनकी फोटो के सामने जांय ! पान का पता रोज़ नया लें जो कि साबुत हो कहीं से कटा फटा न हो ! रोज़ प्रयोग किए गए पान के पत्ते को अलग किसी स्थान पर रखें ! 43 दिन के बाद उन पान के पत्तों को जल प्रवाह कर दें ! शीघ्र समस्या का समाधान होगा |
१०.शराब छुड़ाने के लिए - आप किसी भी रविवार को एक शराब की उस ब्रांड की बोतल लायें जो ब्रांड आपके पति सेवन करते हैं| रविवार को उस बोतल को किसी भी भैरव मंदिर पर अर्पित करें तथा पुन: कुछ रूपए देकर मंदिर के पुजारी से वह बोतल वापिस घर ले आयें|जब आपके पति सो रहें हो अथवा शराब के नशे में चूर होकर मदहोश हों तो आप उस पूरी बोतल को अपने पति के ऊपर से उसारते हुए २१ बार "ॐ नमः भैरवाय"का जाप करें| उसारे के बाद उस बोतल को शाम को किसी भी पीपल के वृक्ष के नीचे छोड़ आयें|कुछ ही दिनों में आप चमत्कार देखेंगी|
११. जिस महिला से आपके पति का संपर्क है उसके नाम के अक्षर के बराबर मखाने लेकर प्रत्येक मखाने पर उसके नाम का अक्षर लिख दें|उस औरत से पति का छुटकारा पाने की अपने ईष्ट से प्रार्थना करते हुए उन सारे मखानो को जला दें तथा किसी भी प्रकार से उसकी काली भभूत को पति के पैर के नीचे आने की व्यवस्था करें |
१२.  होली के दिन 5-5 रत्ती के 5 मोतियों का ब्रेसलेट पहनें। इसके अतिरिक्त हर पूर्णिमा को चांदी के पात्र में कच्चा दूध डालकर चन्द्रमा को अर्ध्य दें, पति-पत्नी की आपसी संबंधों में मधुरता आयेगी।
इन टोटकों के अतिरिक्त अनेक टोटके ,मन्त्र ,उपाय पति को सुधारने के ,दाम्पत्य प्रेम बढाने के शास्त्रों में दिए गए हैं |जैसी जिस उपाय की शक्ति और ऊर्जा वैसा वह कार्य करती है |.....................................................हर हर महादेव  


पत्नी जब बर्बादी पर उतारू हो तो ?

घर की लक्ष्मी घर नर्क बना दे तो ?
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                                          विवाह के पूर्व हर लड़के के मन में अपने भावी वैवाहिक जीवन और पत्नी को लेकर असंख्य कल्पनाएँ होती हैं ,अनेक भावनाएं होती हैं |कितना भी माडर्न व्यक्ति हो अथवा रुढ़िवादी हो वह अपनी पत्नी को सौम्य ,सरल ,सीधा ,बात मानने वाली ,प्यार करने वाली ,परिवार -खानदान की मर्यादा और संस्कार को समझने योग्य ,चरित्रवान ,समझदार ,सुख दुःख में साथ देने वाली ,सबका सहयोग करने वाली और परिवार को एक सूत्र में बांधकर चलने वाली ,माता -पिता का ध्यान देने वाली कल्पित करता हैं |विवाह पूर्व कोई कलह ,विवाद ,ईगो ,चारित्रिक दोष की कल्पना नहीं कर पाता और सोचता है की पत्नी को अपने अनुकूल ढाल लेगा |विवाह बाद अधिकतर मामलों में इसका उल्टा हो जाता है |आधुनिक समय में लगभग २० प्रतिशत दम्पति अलग हो जाते हैं विभिन्न कारणों से |इनमे यद्यपि प्रतिशत तो अभी पुरुषों की कमी से अलगाव का अधिक है ,तथापि स्त्री के कारण अलगाव का प्रतिशत भी तेजी से बढ़ रहा है |80 प्रतिशत दम्पतियों में से 75 प्रतिशत एडजस्ट करते हैं मजबूरी में एक दुसरे की कमी को देखते समझते हुए भी |केवल 5 प्रतिशत की लाइफ शान्ति से चल पाती है और वे यह कह सकते हैं की उनका पार्टनर सहयोगी है और वह संतुष्ट हैं |इन 5 प्रतिशत को अगर छोड़ दें तो अलग होने वाले मामलों सहित कुल दम्पतियों में से अधिकतर में कलह होता है ,|इनके कारण अलग अलग हो सकते हैं |पति पत्नी दोनों की कमियां इसके लिए जिम्मेदार हो सकती हैं ,विभिन्न दोष ,कारण ,प्रभाव इनके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं किन्तु कलह बहुत से मामलों में स्त्री द्वारा ही अधिक किया जाता है |
                                        संस्कार और वातावरण माता -पिता और खानदान का दिया होता है जो वाह्य तौर पर व्यक्ति को एक परिधि में रखता है ,किन्तु जब बात खुद की आती है और स्वतंत्र सोच कार्य करने लगती है तब संस्कार ,वातावरण भूलने लगता है और जो बेसिक नेचर है वह सामने आने लगता है | आज तो माता -पिता ही लगभग स्वतंत्र हो रहे अथवा उनके पास समय ही नहीं की वह बच्चों पर ध्यान दे सकें खानदान से तो बहुतों की दूरी बन चुकी है |ऐसे में जिन कन्याओं पर सबसे अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए उन्हें स्वतंत्र छोड़ दिया जा रहा |कुछ कमियां सोसल मिडिया ,इंटरनेट ,टी वी ,सिनेमा ,डेली सोप और नारी स्वतंत्रता की वकालत करने वाले उत्पन्न कर रहे जिससे संस्कार और गंभीरता का क्षय होता जा रहा और व्यक्तिगत स्वार्थ ,महत्वाकांक्षा ,सहयोग का अभाव ,संवेदनशीलता का अभाव ,संतोष और सहनशीलता का अभाव उत्पन्न हो रहा |आज तो माता -पिता तक अपनी बेटी को सहनशीलता और सहयोग न सिखाकर यह समझाते हैं की अपना हित पहले देखो |अपने कैरियर ,स्वार्थ ,स्वतंत्रता से समझौता जरुरी नहीं |परिणाम होता है की लड़की विवाह पूर्व ही सपने पाल लेती है की वह अकेले रहेगी पति के साथ |उसका पति केवल उसकी सुनेगा ,केवल उसकी बात मानेगा ,सारी कमाई उसे ही देगा ,वह स्वतंत्र रहेगी ,कोई रोक टोक नहीं होगा ,वह अपनी इच्छा से जीवन जियेगी आदि आदि |इन सबसे ऐसी मनोवैज्ञानिक स्थिति उत्पन्न हो जाती है की वह सिर्फ अपना हित देखने वाली बन जाती है |कुछ तो पहले से ही इतना स्वतंत्र और मुक्त विचारधारा की होती हैं की वह कोई बात अथवा संस्कार या दबाव मानने को तैयार ही नहीं होती |
                                       इसके बाद शुरू होती है घर के नरक बनने की कहानी |पहले की सोच से जब वर्तमान मेल नहीं खाता तो जबरदस्ती उसे पाने की चाहत उत्पन्न होती है ,अथवा स्वतंत्र होकर खुद का स्वार्थ देखने की भावना पनपती है |स्वभाव न मिलने पर तो कलह होता ही है अथवा एक दुसरे से असंतुष्टि तो कलह कराता ही है ,विभिन्न प्रकार के पूर्वाग्रह इसे और बढ़ा देते हैं |विभिन्न दोष ,कमियां ,किया कराया ,ग्रहीय स्थितियां भी इसे बढाते हैं किन्तु हमारा विषय यह नहीं की यह क्यों होता है ,क्योकि इस पर हम कुछ पोस्ट पहले लिख चुके हैं |आज हम यह देखते हैं की स्थितियां जो भी हो ,इन पर कैसे नियंत्रण किया जा सकता है |यदि पत्नी बिगड़ी है ,या झगड़ालू है ,या स्वार्थी है ,या चारित्रिक रूप से कमजोर है ,असहयोगी है और आपकी मजबूरी भी है की उसे साथ लेकर चलना भी है तो कैसे उसे सुधारा जाए ,कैसे उसे अनुकूल किया जाए ,कैसे उसकी कमियों को हटाया जाए |हमारे पास अक्सर इस तरह के मामले आते रहे हैं चूंकि हम तंत्र और ज्योतिष से जुड़े रहे हैं अतः इसके लिए हमारे कुछ सुझाव हैं |यदि आप या आपका कोई परिचित इस तरीके की समस्या में घिरा हो जहाँ स्त्री के कारण घर नरक बन रहा हो तो यदि आपको उचित लगता है तो अपनी सुविधानुसार आजमायें अथवा उन्हें सुझाएँ ,हमें उम्मीद है की आपकी समस्या सुलझ सकती है |
१. प्रथम कार्य तो यह करें की स्त्री की कुंडली किसी विद्वान् ज्योतिषी को दिखाएँ और उग्रता ,स्वार्थ अथवा कामुकता उत्पन्न करने वाले ग्रह के प्रभाव को सिमित करने का प्रयास करें ,साथ ही ज्योतिषी के परामर्श के अनुसार बौद्धिक स्तर उठाने वाले ,दाम्पत्य सुख दिलाने वाले ग्रह की शक्ति मजबूत करें |
२. अपने घर के वास्तु पर ध्यान दें |स्थान कैसा भी हो ,घर कैसा भी हो उसे ठीक किया जा सकता है ,अतः ऐसी व्यवस्था वास्तु अनुसार करें की शान्ति बढ़े ,तनाव कम हो ,कलह कम हो ,दिमाग पर बोझ न हो |
३. स्त्री को समझने का प्रयत्न करें ,मनोवैज्ञानिक रूप से उसकी विचारधारा ,सोच ,अवचेतन की कुंठाओं को बदलने का प्रयत्न करें |अकस्मात् होने वाली उसके द्वारा प्रतिक्रिया पर ध्यान दें और उसका कारण खोजने का प्रयत्न करें ,यह उसके अवचेतन की कहानी व्यक्त कर देगा |अपनी कमियों पर भी बराबर ध्यान दें |मनोवैज्ञानिक सुझाव और संपर्क बहुत कारगर होते हैं |
४. पत्नी या स्त्री को नीचा दिखाने का प्रयत्न न करें ,न आपके परिवार का कोई ऐसा करे ,यह आक्रोश उत्पन्न करता है |कभी भी उसके मायके की कमियां न निकालें न बुराई करें |मायका कैसा भी हो पत्नी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है |उसे बच्चों के उदाहरण आदि पर समझाएं की हम जो संस्कार आज अपने बच्चों के सामने अपने माता -पिता के प्रति दिखाएँगे वह उनका अनुसरण कर सकते हैं |
५. पत्नी या स्त्री की किसी से तुलना न करें |उसके साथ कुछ समय जरुर प्यार से बिताएं |उसकी थोड़ी प्रशंशा भी करें |उसकी कमियों पर झुंझलायें नहीं अपितु किसी और तरीके से उसे ही महसूस करने दें की उसमे यह कमी है | प्रशंशा बहुत अधिक भी न करें उसकी हर समय की वह खुद को ही सबसे ऊपर मानने लगे |
६. स्त्री से मिलने जुलने वालों और उसको सुझाव देने वालों पर ध्यान दें |उसके द्वारा की जा रही तुलना अथवा दिए जा रहे उदाहरण को समझने का प्रयत्न करें ,क्यों और किस ओर यह इशारा कर रहे |उसके बाद अपनी प्रतिक्रिया संतुलित रूप से दें |
७. यह देखें की विवाह पूर्व अथवा बाद में किसी द्वारा किसी स्वार्थ के लिए अथवा अपने दोष हटाने के लिए किसी द्वारा कोई तांत्रिक क्रिया तो नहीं की गयी आपके दाम्पत्य जीवन पर अथवा स्त्री पर | इससे भी कलह होता है और विभिन्न कमियां उत्पन्न हो जाती है |
८. अपने पितरों ,कुलदेवता आदि की स्थिति पता करें की वे संतुष्ट हैं की नहीं ,उनकी पूजा ठीक से हो रही की नहीं |जो परिवारीजन अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए हैं उनकी शान्ति के प्रयत्न करें ,पितरों को श्राद्धादी से संतुष्ट करें और कुलदेवता की वार्षिक पूजा सुनिश्चित कराएं |इनके कारण भी पारिवारिक माहौल बिगड़ता है और अभाव ,कमियां लोगों में उत्पन्न होती हैं |
९. ज्यादा टोटके न आजमायें ,न ही बार बार अलग -अलग ज्योतिषी की सलाह लें |एक बार ही खूब सोच समझकर सलाह लें और उपाय करें |हर वस्तु की अपनी ऊर्जा होती है |यदि सही स्थान पर न लगे तो व्यतिक्रम भी उत्पन्न होता है |
१०. पत्नी या स्त्री पर किसी नकारात्मक शक्ति ,किये कराये ,टोने -टोटके ,वशीकरण ,कोख बंधन आदि का प्रभाव लगे तो उसे किसी उग्र शक्ति जैसे काली ,तारा ,कामाख्या के यन्त्र इनके सिद्ध साधक से बनवाकर और कम से कम २१००० मन्त्रों से अभिमंत्रित करा कवच में धारण कराएं |ऐसी शक्तियों के यन्त्र न धारण कराएं जिनमे अशुद्धि का डर हो क्योकि स्त्री बार बार अशुद्ध होगी ही |
११. यदि स्त्री में चारित्रिक दोष हो अथवा स्वभाव में अधिक उग्रता हो ,चंचल स्वभाव हो ,सौमनस्य का अभाव हो ,कोई अभाव हो ,कोई शारीरिक कमी हो तो उसे षोडशी त्रिपुरसुन्दरी का यन्त्र इनके सिद्ध साधक से बनवाकर और २१००० मन्त्रों से अभिमंत्रित करा कवच में धारण कराएँ |इससे स्वभाव -शरीर की कमियों का नियंत्रण होता है और अच्छे बुरे को समझने की शक्ति का विकास होने के साथ दाम्पत्य सुख -समृद्धि की वृद्धि होती है |
१२. यदि स्त्री अधिक स्वार्थी हो ,स्वतंत्र हो ,किसी को कुछ न समझती हो ,बड़े छोटो को समझने ,सहयोग ,सेवा की भावना न हो तो षोडशी यन्त्र धारण कराने के साथ ही उसे खुद के प्रति वशीभूत करें जिससे वह आपकी बात को माने और आपके कहे अनुसार चले |इस हेतु वशीकरण प्रयोग अच्छा काम करते हैं |
१३. यदि आपको लगता हो की पत्नी अधिक आकर्षक है अथवा सुंदर है और आप अपेक्षाकृत कम ,या वह किसी और के प्रति भी आकर्षित हो सकती है ,अथवा वह भी कामकाजी महिला है जो अनेक लोगों के सम्पर्क में होती है तो आप श्यामा मातंगी यन्त्र अभिमंत्रित करा कवच में धारण करें |इससे आपकी आकर्षण -वशीकरण शक्ति बढती है और चूंकि पत्नी सबसे अधिक समय साथ होती है अतः उसपर सबसे अधिक प्रभाव होगा ,यद्यपि प्रभाव सभी मिलने वालों पर होगा |
उपरोक्त प्रयोग गंभीर प्रकृति के और दीर्घकालिक प्रभाव के हैं |इनके अतिरिक्त अनेक टोटके और प्रयोग दाम्पत्य कलह के लिए शास्त्रों में दिए गए हैं |चूंकि विषय कलह का है अतः कुछ टोटकों का दिया जाना प्रासंगिक होगा |
१. यदि पति पत्नी का आपस में बिना बात के झगड़ा होता है और झगडे का कोई कारण भी नही होता तो अपने शयनकक्ष में पति अपने तकिये के नीचे लाल सिन्दूर रखे व पत्नी अपने तकिये के नीचे कपूर रखे|प्रात: पति आधा सिन्दूर घर में ही कहीं गिरा दें और आधे से पत्नी की मांग भर दें तथा पत्नी कपूर जला दे|
२. पति पत्नी के क्लेश के लिए पत्नी बुधवार को तीन घंटे का मोंन रखें |शुक्रवार को अपने हाथ से साबूदाने की खीर में मिश्री डाल कर खिलाएं तथा इतर दान करें व अपने कक्ष में भी रखें |इस प्रयोग से प्रेम में वृद्धि होती है|
३.  यदि निरंतर घर में कलह का वातावरण बना रहता हो,अशांति बनी रहती हो.व्यर्थ का तनाव बना रहता हो तो.थोड़ी सी गूगल लेकर " ॐ ह्रीं मंगला दुर्गा ह्रीं ॐ " मंत्र का १०८ बार जाप कर गूगल को अभी मंत्रित कर दे और उसे कंडे पर जलाकर पुरे घर में घुमा दे.ये सम्भव न हो तो गूगल ५ अगरबत्ती पर भी ये प्रयोग किया जा सकता है.घर में शांति का वातावरण बनने लगेगा।
४.अगर आपके परिवार में अशांति रहती है और सुख-चैन का अभाव है तो प्रतिदिन प्रथम रोटी के चार भाग करें, जिसका एक गाय को, दूसरा काले कुत्ते को, तीसरा कौवे को तथा चौथा टुकड़ा किसी चौराहे पर रखवादें तो इसके प्रभाव से समस्त दोष समाप्त होकर परिवार की शांति तथा सम्रद्धि बढ़ जाती है | 
5. कांच के एक कटोरे में लघु मोती शंख रख कर उसे अपने बिस्तर के नजदीक किसी टेबल आदि पर अथवा पास की किसी जगह पर रखें। इससे कमरे के आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी और पति-पत्नी में प्रेम बढ़ेगा।
६. ग्यारह गोमती चक्र लेकर लाल सिंदूर की डिब्बी में भरकर अपने घर में रखने से दाम्पत्य प्रेम बढ़ता है।
इनके अतिरिक्त अनेकानेक प्रयोग और टोटके हैं जो दाम्पत्य कलह ,स्त्री को वशीभूत करने के लिए दिए गए हैं ,पर इन्हें बहुत सोच समझकर ,पूर्ण विधि जानकार ही करना चाहिए |....[ अगले भाग में - पति जब देवता न रह जाए -घर बर्बाद करने पर उतारू हो तो ]..................................................हर-हर महादेव  

दाम्पत्य जीवन में तंत्र कितना लाभप्रद ?

                               .यद्यपि दाम्पत्य जीवन का विषय बहुत विस्तृत है और हर समस्या दाम्पत्य जीवन से जुडी होती है ,किन्तु एक समस्या के रूप में यदि हम दम्पति युगल के संबंधो को देखे तो आधुनिक परिवेश में इसमें तंत्र के उपयोग की सम्भावना भी नजर आती है और आवश्यकता भी ..पहले के समय में संस्कारो के कारण दाम्पत्य जीवन में कटुता ,अन्मुक्ताता ,अवहेलना कम थी ,समर्पण और त्याग की भावना थी ,किन्तु आज वास्तविक प्यार ,लगाव ,संवेदनशीलता कम हो रहा है ,दाम्पत्य जीवन समझौते की तरह हो रहा है ,स्वार्थपरता ,स्व की भावना ,त्याग -समर्पण का आभाव अक्सर दिख रहा है ,अतः बड़ी संख्या में दम्पति युगलों में कलह-कटुता -असंतुष्टि दिखाई देती है ,दोनों में से कोई कभी उन्मुक्त व्यवहार कर सकता है ,बेपरवाही पनप रही है ,इससे दाम्पत्य की मधुरता कम हो रही है ,विघटन बढ़ रहे है ,मानसिक अशांति ,उन्नति में अवरोध आ रहे है ,,अतः तंत्र की भूमिका यहाँ पहले से अधिक दिख रही है |तंत्र अजूबा नहीं इसका उपयोग तो हर घर में हो ही रहा है ,हर दम्पति कर ही रहा है किन्तु वह जानता नहीं की जो कुछ वह कर रहा वह तंत्र है |कोई टोटका कर रहे तो तंत्र है ,कोई उपाय कर रहे तो तंत्र है ,देवी देवता को विशेष चीज चढ़ा रहे वह तंत्र है |काली ,दुर्गा ,गणेश ,भैरव ,शिव की पूजा कर रहे तो वह तंत्र है |हर जगह तंत्र का उपयोग किया जा रहा |यदि समस्या विशेष पर तंत्र का सही उपयोग किया जाए तो समस्या का समाधान हो सकता है |
                  तंत्र प्रकृति की शक्तियों पर आधारित क्रिया प्रणाली है जो व्यक्ति के शारीरिक चक्रों ,रासायनिक क्रियाओं ,उर्जा संरचना को प्रभावित करता है ,यदि समस्या विशेष के अनुसार इसका उपयोग किया जाए तो व्यक्ति की उर्जा संरचना ,रासायनिक क्रिया को नियंत्रित कर उसके सोच और स्वभाव में परिवर्तन किया जा सकता है ,सोच की दिशा बदल सकती है ,पसंद-ना पसंद बदल सकती है ,वह किसी के अनुकूल या किसी के प्रतिकूल हो सकता है ,व्यवहार में परिवर्तन हो सकता है |कोई भी अपने जीवन साथी की अवहेलना करता हो ,प्रताड़ित -उत्पीडित करता हो ,किसी अन्य के प्रति लगाव या झुकाव रखता हो ,दाम्पत्य जीवन या साथी के प्रति गंभीर न हो तो दाम्पत्य जीवन में आने वाले कष्टों में कमी तंत्र के उपयोग से उस पुरुष या स्त्री के स्वभाव आदि में परिवर्तन कर किया जा सकता है ,व्यक्ति को नियंत्रित कर किसी और तरफ झुकाया जा सकता है |व्यक्ति को नियंत्रित कर सही रास्ते पर लाया जा सकता है |व्यक्ति के स्वभाव -व्यवहार ,आदतों ,सोच ,संवेदनशीलता में परिवर्तन किया जा सकता है |कोई अपने परिवार पर ध्यान नहीं दे रहा ,नशे ,विलाश ,गलत आदतों का शिकार है तो उस आदत को तंत्र से छुडाया जा सकता है |कोई आलसी है ,अकर्मण्य बन रहा ,उन्नति की ओर ध्यान नहीं दे रहा ,परिवार कष्ट पा रहा पर वह निष्क्रिय बना हुआ है तो इसे भी तंत्र से सुधारा जा सकता है ,आदि आदि ,|यह तंत्र का सदुपयोग भी है |तंत्र का उपयोग इसी तरह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में किया जा सकता है…………………………………………………………………….हर-हर महादेव

मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

काले जादू के लक्षण और बचाव

कौन लोग काला जादू कर सकते हैं ,कौन प्रभावित हो सकता है
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                                काला जादू मुख्य रूप से कर्ता की मानसिक शक्ति से जुड़ा हुआ है इसलिए काला जादू या Black-Magic से कर्ता जितना ज्यादा जुड़ा होता है उसका असर उतना ही मजबूत होता है। अगर आपको किसी की सच्चाई जाननी है तो उससे बात करे, उसके पास जाए. अगर आप उनसे बात करते है तो उनकी ऊर्जा आपके औरा क्षेत्र को घेरने लगती है. कुछ देर बात करने के बाद अगर आप खुद को अपने नियंत्रण से बाहर महसूस करे, सामने वाले की बातो को नजरअंदाज नहीं कर पाए तो समझ ले की वो आपसे ज्यादा आध्यात्मिक और भौतिक स्तर पर शक्तिशाली है। जब आप ऐसे लोगो के पास जाये तो उनके पास खड़े होने पर आप वातावरण में अनजानी ऊर्जा महसूस होने लगती है। क्यों की इनका औरा क्षेत्र सामान्य क्षेत्र से कही ज्यादा होता है। इसलिए ज्यादा समय इनके साथ बिताने की वजह से आपका आज्ञाचक्र आपकी समझ ख़त्म होने लगती है।आप कमजोर आत्मबल के हैं ,पतले रक्त प्रकृति के हैं ,हीन भावना से ग्रस्त है ,मानसिक दबाव ,तनाव में हैं पूर्णिमा ,अमावस्या के आसपास जन्म है ,सप्तम -अष्टम या लग्न में चन्द्रमा है ,राहू -केतु का आप पर प्रभाव है ,कुलदेवता सुरक्षा नहीं दे रहे ,पित्र असंतुष्ट हैं ,किसी प्रबल ईष्ट की कृपा प्राप्त नहीं हैं ,किन्ही मजार ,चौकी जैसी आत्मिक शक्तियों के स्थान पर जाकर आपने अपनी पारिवारिक दैवीय शक्तियों को रुष्ट कर लिया है तो आपके काले जादू से प्रभावित होने की अधिक संभावना है |
काले जादू के प्रभाव के लक्षण
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                          काले जादू का प्रभाव हमेशा दिखे या समझ आये यह जरूरी नहीं |काला जादू को ही तंत्र में अभिचार भी कहा जाता है |इसमें प्रयुक्त शक्ति ,प्रयोग करने वाले साधक की शक्ति के अनुसार ही लक्षण उत्पन्न होते हैं |भेजी जा रही या प्रक्षेपित शक्ति अगर आत्मा रूपी हुई तो उसके प्रभाव तीव्र होते हैं ,जबकि स्वयं यह साधक की अर्जित ऊर्जा रुपी हुई तो इसके प्रभाव धीमे होते हैं ,यद्यपि यह बहुआयामी हो सकते हैं |कभी कभी काले जादू हेतु दैवीय शक्तियों को भी मजबूर किया जाता है और वह मजबूरी में साधक की इच्छाओं से बंधकर किसी का क्षति भी करते हैं |काले जादू के प्रयोग होने पर ,सबकुछ ठीक होने पर भी व्यक्ति को अशुभ लक्षण दिखने लगते हैं ,स्वास्थ्य  विपरीत हो सकता है जबकि कोई बीमारी नहीं पकड में आती |अक्सर नकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं ,मन उचाट होता है |उद्विग्नता ,तनाव ,चिंता ,हानि ,दुर्घटना ,अपयश अनायास होने लगती है |घर में कलह ,विवाद ,मतभिन्नता .खिन्नता ,उदासी उत्पन्न होता है |व्यक्ति केन्द्रित प्रयोग हो तो व्यक्ति अनायास कष्ट पाता है या अचानक मृत्यु भी पा सकता है |अंग विशेष पर क्रिया हो अथवा पुतली प्रयोग हो तो अंग विशेष में कष्ट अथवा निष्क्रियता आने लगती है |घातक प्रयोगों पर घुटन ,सांस रुकना ,हृदयाघात ,रक्तस्राव ,मानसिक विकलांगता ,दुर्घटना आदि हो सकती है |
काले जादू से बचाव और वापसी
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                            काले जादू से बचाव आसान है किन्तु एक बार काले जादू का किसी पर प्रक्षेपण हो जाए तो फिर उसकी समाप्ति या वापसी मुश्किल होती है |इसके लिए सम्बंधित शक्ति अथवा साधक से अधिक शक्ति की आवश्यकता होती है ,जिससे उस शक्ति अथवा साधक को मजबूर कर सके |कुछ काले जादू को वापस नहीं किया जा सकता और उनकी शक्ति को कम अथवा समाप्त करना ही विकल्प होता है |कुछ मामलों में समान्तर जीवनी ऊर्जा अथवा सफ़ेद जादू ,जिससे व्यक्ति की शक्ति बढ़ सके भी करना पड़ जाता है | अगर आपको इनके असर को बेअसर करना है तो पहले इनकी सच्चाई जाने ,प्रकार को समझें ,शक्ति का आकलन हो ,फिर अपने आत्मबल को मजबूत करें ,क्यों की प्राण ऊर्जा और आत्मबल बड़े से बड़े जादू को बेअसर या कमजोर कर सकता है।इसका मूल यह होता है की आत्मबल की मजबूती जीवनी ऊर्जा बढ़ा देती है | अगर हमारी सेहत में गिरावट महसूस की जाती है। इसका मतलब हमारी ऊर्जा का स्तर कम हुआ है। अगर हमें बाह्य प्रभाव को दूर करना है, अगर हमें स्वस्थ जीवन बिताना है तो हमारे प्राण ऊर्जा का स्तर सही रहना जरुरी है। जिसके लिए नियमित ध्यान सबसे अच्छा माध्यम है। ध्यान हमारे प्राण ऊर्जा के स्तर को बढ़ाता है |
                        काले जादू से बचाव में सात्विक शक्तियाँ बहुत कारगर नहीं होती |यह सकारात्मक या धनात्मक ऊर्जा बढ़ा तो सकती हैं किन्तु न तो यह किसी अभिचार को रोकती हैं न हटाती हैं |धनात्मक ऊर्जा बढने से नकारात्मक ऊर्जा की मात्रा कम जरुर हो जाती है और प्रभाव धीमा हो जाता है किन्तु यह समाप्त नहीं होता और अपना लक्ष्य देर से ही सही पर पूर्ण जरुर करता है |काले जादू से बचाव हेतु उग्र शक्तियों की आराधना ,उपासना कारगर होती हैं |काली ,बगला ,भैरव ,हनुमान ,रूद्र ,दुर्गा आदि की उपासना काले जादू के प्रभाव को रोकती है ,यद्यपि इनकी उपासना सभी सही तरीके से नहीं कर पाते |इन शक्तियों के योग्य साधक द्वारा अभिमंत्रित इनके कवच /ताबीज से काले जादू का प्रभाव रोका जा सकता है ,सीमित किया जा सकता है |
                            काला जादू यदि व्यक्ति केन्द्रित हो और आत्मिक शक्तियों के साथ भेजी गयी हो अथवा वुडू या पुतली आदि का प्रयोग हो तो त्वरित प्रभाव देता है और इसे रोकना बेहद कठिन होता है ,चूंकि जब तक पता चलता है यह प्रभाव दे चूका होता है या घातक हो जाता है |बेहद ऊच्च स्तर का साधक ही यहाँ सफल हो सकता है |काला जादू यदि परिवार के लिए हो ,व्यवसाय के लिए हो ,सामूहिक हो अथवा केवल पीड़ित /बीमार /अक्षम करने के लिए हो अथवा जिसमे समय सीमा न हो उसे बगला प्रत्यंगिरा ,महा विपरीत प्रत्यंगिरा ,शत चंडी ,बगलामुखी अनुष्ठान ,काली अनुष्ठान ,भैरव अनुष्ठान आदि से समाप्त किया जा सकता है या हटाया जा सकता है |इसके साथ सिद्ध साधक से इन शक्तियों के अभिमंत्रित यन्त्र कवच में धारण करने से शारीरिक हानि की संभावना कम हो जाती है |स्वयं द्वारा अथवा परिवार के लोगों द्वारा किये अनुष्ठान अधिक कारगर होते हैं ,चूंकि ऊर्जा पूर्ण प्राप्त होती है |.....................................................हर-हर महादेव

काला जादू [Black Magic] क्या है ?

काला जादू [Black Magic]
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                          काला जादू यानि Black Magic हमेशा से एक कोतुहल का विषय रहा है जिसकी वजह रही है इसके मार्ग पर चलने वाले लोगो का जीवन ,जो की रहस्यात्मक और भयात्म्क रहा है । काला जादू,  नकारात्मक ऊर्जा को स्थानांतरित करने का माध्यम है। जिसकी वजह से हम किसी में भी अपनी नकारात्मक ऊर्जा भेज कर उसकी खुद की जीवनी ऊर्जा को नष्ट करते है। लेकिन क्या आप ये जानते है की इतनी बड़ी मात्रा में नकारात्मक ऊर्जा को कोई कैसे अपने अंदर कण्ट्रोल रख सकता है। और उसे दूसरे में प्रवाहित कर सकता है।
क्या है काला जादू
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जादू शब्द अपने आप में कई तत्वो,चीजो का मिश्रण है जिसे समझना बेहद जरुरी है। काला जादू / जादू आम भाषा में पूजा, इशारो, हाव-भाव और शब्दो के मेल से बनता है। इन सबके मिश्रण से उत्पन्न शक्ति या ऊर्जा को एकाग्रता से एक माध्यम से दूसरे माध्यम में स्थानांतरित किया जाता है। यह ऊर्जा लौकिक ( कर्ता की खुद की ऊर्जा ) और पारलौकिक ( दूसरे आयाम जैसे प्रेत लोक या किसी दूसरे की ऊपरी ऊर्जा ) दोनों ही हो सकती है। जादू की प्रक्रिया में जिन चीजो का महत्व है उनमे से कुछ हाथो की मुद्रा, स्थिति, और निर्देशो का समूह ,वस्तुओं की ऊर्जा ,मन्त्रों की ऊर्जा होता है।
                        काले जादू और सफेद जादू में सबसे बड़ा फर्क यही है की काले जादू की ऊर्जा पारलौकिक योनि के भटकते आत्माओ की ऊर्जा है ,अथवा नकारात्मक विचारों के साथ अहित चाहने की व्यक्ति की ऊर्जा होती है, वही दुसरो और सफ़ेद जादू आध्यात्मिक ध्यान, और आध्यात्मिक ऊर्जा ,सद्विचारों ,किसी का हित चाहने की भावना का रूप है। काले जादू का प्रयोग अपने आप को महत्वपूर्ण दिखाने के लिए, नियत्रण के लिए,किसी का अहित करने के लिए या फिर शक्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है | हमारा संसार दोनों ही प्रकृति में बंधा हुआ है। क्यों की हर चीज के पीछे उसका विपरीत रूप का अस्तित्व है।किसी भी ऊर्जा के दोनों पहलु होते हैं |एक ही तरह की ऊर्जा से अहित भी हो सकता है और हित भी हो सकता है |
                            काले जादू की ये परिभाषाए हमें किताबो और इन्टरनेट पर बताई गई है लेकिन असल में सच्चाई से परे इसका और भी गहरा मतलब है जिसे समझना बेहद जरुरी है। इसके पीछे छिपे विज्ञानं के अनुसार ये बहुआयाम की मायाजाल होता है जो हमारे सुनने, देखने, और समझने की क्षमता को अपने असर में ले लेती है। हमारे धर्मगुरु सदियो से हमें इसका ज्ञान देते आये है की कैसे दिखाई ना देने वाली ऊर्जा से बचाव किया जाये।उनका अपने हित में प्रयोग किया जाए |जादू की शक्ति एक जिम्मेदारी भी होती है। मानव सभ्यता के कल्याण मात्र के लिए सदियो से ऐसे महापुरुष होते आये जो इन शक्तियों को जिम्मेदारी से धारण किये हुए है। शायद इसलिए कुछ लोग इन्हें फरिश्ता कहते है कितने आश्चर्य की बात है एक जैसी समझ वाले इंसान के आध्यात्मिक पथ अलग अलग होते है।अधिकतर यह सद्कार्यों में ही शक्ति का प्रयोग करते हैं ,किन्तु इनके साथ ही कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो स्वार्थ से अथवा दुराग्रह से अथवा दुश्मनी आदि से अहित करने हेतु भी शक्ति प्रयोग करते हैं ,इन्ही लोगों के प्रयोग काले जादू की श्रेणी में आते हैं |
काले जादू के सूत्र
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                   काला जादू मुख्य रूप से नकारात्मक ऊर्जा का एक माध्यम से दूसरे माध्यम में स्थानांतरण है जो की मानसिक एकाग्रता और बुरे विचारो पर काम करता है। काले जादू के लिए कर्ता को खुद ऊर्जा को धारण करना होता है। इसलिए काला जादू जितना दुसरो के लिए हानिकारक है उतना ही खुद कर्ता के लिए। काला जादू तभी काम कर सकता है जब कर्ता पूरी तरह से नकारात्मक प्रवृति को अपना लेता है। इसके लिए वो हर उस काम का त्याग करता है जो हमें सात्विक बनाता है। काले जादू की नकारात्मक ऊर्जा ,मानसिक ऊर्जा में बदल कर माध्यम के ऊर्जा क्षेत्र पर दबाव बनाती है. असल में जब 2 ऊर्जा का आपस में टकराव होता है तो जो ज्यादा एकाग्रता से अपना दबाव बनाती है वही दूसरे पर हावी होती है। जब काले जादू की नकारात्मक ऊर्जा माध्यम पर अपना असर डालने लगती है तो शुरुआत में माध्यम अपने आसपास उस ऊर्जा को महसूस करने लगता हैं क्यों की मानसिक ऊर्जा हमारे आज्ञाचक्र को अपने कंट्रोल में लेने की कोशिश करती है।आज्ञा चक्र पर प्रभाव के बाद उस चक्र पर इसका असर होता है जिसे लक्ष्य किया गया होता है ,जिससे सम्बंधित अंग की जीवनी ऊर्जा कम या समाप्त होने लगती है जिससे उसकी क्रियाशीलता कम होने लगती है |ऐसे में हम खुद की ऊर्जा में अथवा सम्बंधित अंग की शक्ति या ऊर्जा में गिरावट महसूस कर सकते है। यदि लक्ष्य जीवनदायी अंगों जैसे ह्रदय  ,मष्तिष्क आदि पर हुआ तो व्यक्ति के प्राण संकट में आ जाते हैं |
                                       अगर काला जादू निम्न स्तर का होता है तो घर के मंदिर में रखा हुआ कलावा, नाळ हाथो में बांध लिया जाए तो ऊर्जा का नियत्रण होने लगता है।किन्तु यदि यह उच्च स्तर का अथवा उच्च स्तर के साधक द्वारा किया गया हो तो यह केवल खुद उच्च स्तर की शक्ति रखने पर ही नियंत्रित की जा सकती है ,जो की सामान्य लोगों के लिए संभव नहीं | जैसे जैसे नकारात्मक ऊर्जा हम पर हावी होने लगती है वैसे वैसे हम खुद को अकेला महसूस करने लगते है उस नकारात्मक ऊर्जा की मात्रा जितनी ज्यादा होती है ऊर्जा साकार होने की संभावना  उतनी ही बढ़ जाती है। जिसका मतलब है हमें प्रत्यक्ष रूप से ऊर्जा शरीर या आकृति दिखने लगती है अथवा यदि यह आत्मिक उर्जा न हुई तो अंग काम करना बंद करने लगते हैं |अक्सर ऐसे समय वैज्ञानिक अथवा चिकित्सकीय रूप से कोई समस्या शरीर के साथ नहीं होती फिर भी स्वास्थय गिरता जाता है अथवा व्यक्ति काल के गाल में समा जाता है ,अथवा किसी अंग से विकृत हो जाता है |.......................................हर हर महादेव 

नवरात्र में देवी की शक्ति प्राप्ति

दिव्य गुटिका धारकों के लिए
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                             नवरात्र को भगवती दुर्गा की पूजा /आराधना  का समय माना जाता है ,यद्यपि वास्तव में यह शक्ति साधना का समय होता है ,फिर वह शक्ति चाहे दस महाविद्या हो ,दुर्गा हो अथवा कोई भी शक्ति |साधकों की और कर्मकांडियों की अपनी तकनीक और अपनी पद्धति होती है जिस पर वह चलते हुए शक्ति साधना करते हैं और अपनी क्षमता -पद्धति अनुसार शक्ति प्राप्त करते हैं ,किन्तु जन सामान्य को नवरात्र बड़े धूमधाम से मनाने ,व्रत -उपवास रखने ,कलश स्थापना आदि करने ,सप्तशती पाठ करवाने आदि के बाद भी बहुत लाभ होता महसूस नहीं होता |बहुत से लोग कहते मिलते हैं नवरात्र में कलश रखते हैं ,सप्तशती करते हैं अथवा पंडित से करवाते हैं ,व्रत रहते हैं ,पूर्ण परहेज बरतते हैं |जब इनके सामान्य समस्या का आकलन किया जाता है तो इनमे से अधिकतर अनेक समस्याओं से ग्रस्त ही मिलते हैं जबकि बहुत सी समस्याएं नवरात्र के पाठ आदि से समाप्त हो जानी चाहिए |दुर्गा सर्वशक्तिशाली शक्ति हैं फिर भी इन लोगों की वह समस्याएं भी हल नहीं होती जो सामान्य सी पूजा से हो जानी चाहिए |नकारात्मक ऊर्जा ,छोटी -मोटी भूत -प्रेत बाधा ,अमंगल ,अकारण रोग -दुर्घटना आदि समाप्त हो जानी चाहिए ,किन्तु बहुत से मामलों में ऐसा नहीं होता |उसके बाद यह लोग किस्मत की बात मान कर खुद को संतोष देते हैं की किस्मत ही खराब हो तो दुर्गा क्या करेंगी |
                                जब हम इन बातों पर गंभीरता से सोचते हैं तो पाते हैं की वास्तव में दुर्गा की शक्ति तो आपको मिल ही नहीं रही ,जो ऊर्जा आनी चाहिए आई ही नहीं इसलिए आपकी समस्याएं यथावत हैं ,जो बाधाएं आपके लिए रुकावट हैं वह ही नहीं हट पा रही तो पूरा भाग्य का भी नहीं मिल पा रहा इसलिए कोई सुधार नहीं हुआ |शक्ति साधना ,मात्र भावना का पर्व या अवसर नहीं होता ,इसकी अपनी विशिष्टता अपनी तकनीक होती है |इस समय मात्र व्रत ,उपवास ,कलश रखने ,पाठ करवाने से बहुत कुछ होने वाला नहीं ,महत्त्व यह होता है की आप कितना खुद प्रयास कर रहे ,आपने कितना खुद में शक्ति लाने की कोशिश की |दुर्गा देवी या ऊर्जा या शक्ति है ,स्त्री नहीं ,स्त्री रूप तो कल्पना है ,उन्हें मनुष्य या स्त्री मान मात्र पूजन से बहुत कुछ नहीं होना ,उन्हें ब्रह्माण्ड में फैली विशेष ऊर्जा मान खुद में लाने का प्रयास होता है तभी वास्तविक शक्ति प्राप्त होती है और लाभ महसूस होता है |
                            आपने व्रत रखा ,शरीर शुद्ध हुआ ,आपने कलश रखा ,परहेज किया ,भावना शुद्ध हुआ ,आपने मांस -मदिरा ,तामसिक का परित्याग किया ,सात्विकता का संचार हुआ किन्तु मात्र इतना करने से दुर्गा की शक्ति आपमें तो नहीं आ गयी |सप्तशती पंडित से कराई ,अगर उन्होंने शुद्ध भी किया तो अधिकतर ऊर्जा अंश उन्हें मिली और कुछ अंश आपके पूजा स्थान पर व्याप्त हुई |अगर थोड़ी गलती या अशुद्धि हुई तो नुक्सान आपका |आपने सप्तशती पढ़ी और शुद्ध पढ़ी तो आपको अच्छी ऊर्जा मिली पर अगर कहीं प्रिंटिंग में अशुद्धि हुई अथवा आपको पढने नहीं आया तो उच्चारण -नाद दोष के कारण ऊर्जा विकृत हुई और आपको उलटे परिणाम मिलने निश्चित |भूल जाइए की माँ है और माँ सब क्षमा करती है |यही गलती सोचते तो आपके कष्ट कम नहीं हो रहे |माँ एक शक्ति है और एक सर्वत्र व्याप्त ऊर्जा है वह तभी अनुकूल होगी जब उसके अनुकूल प्रयास होगा |आपकी गलती उसको गाली देकर बुलाने सा हो जाएगा और वह रुष्ट होगी खुश नहीं ,फिर आप कितना भी पाठ के बाद गलती की क्षमा मांगे ,विकृत ऊर्जा नहीं सुधरने वाली |यह कुछ वैसा ही हो जाता है जैसे आप किसी को गाली देकर बुलाते हैं ,बार बार बुलाते हैं फिर क्षमा मांगते हैं ,क्या वह इससे खुश होगा या आपको थप्पड़ मारेगा |यही कारण है शक्ति उपासना में थोड़ी भी गलती के परिणाम कई गुना अधिक कष्टकारक हो जाते हैं |इसलिए अगर ज़रा भी अपने पाठ की शुद्धता पर संदेह हो या लगे की पंडित जी जल्दबाजी कर रहे खाना पूर्ती कर रहे तो आप बचिए |पद्धति ठीक से पता न हो तो मत अपनाइए मात्र भावना से हाथ जोड़ काम चला लीजिये कम से कम नुक्सान तो नहीं होगा |
                           जो सामान्य लोग हैं अगर वास्तव में कल्याण चाहते हैं ,नवरात्र में शक्ति अनुभव करना चाहते हैं तो रात्री में अधिक देर जागरण करें ,भगवती का चिंतन करें और रात्री में मंत्र जप करें ,अगर शुद्ध पाठ कर सकते तो खुद से पाठ -स्तोत्र करें |मंत्र जप करें |सुबह सामान्य पूजा करें |महत्त्व संख्या को न दें ,महत्त्व शुद्धता ,सही उच्चारण और एकाग्रता को दें |आपको अधिक आभ होगा |जो हमारे दिव्य गुटिका /डिब्बी के धारक हैं उनके लिए हम एक सामान्य सी उपासना पद्धति बता रहे हैं जो किसी भी साधना से अधिक प्रभावकारी साबित होगी और उन्हें वास्तव में नवरात्र में शक्ति अनुभव होगा |उनके बहुत से कष्ट -समस्याएं समाप्त हो जायेगी |किसी कर्मकांड की जरूरत नहीं ,किसी व्रत की जरूरत नहीं ,किसी विशेष पद्धति की जरूरत नहीं ,किसी विशेष कलश स्थापना की जरूरत नहीं ,[[यदि कलश रखते हैं तो भी कोई दिक्कत नहीं ,अगर पाठ आपके यहाँ चलता है तो उसे चलने दे ]]दैनिक कार्य करते हुए आप इसे कर सकते हैं और आपको ऊर्जा /शक्ति उतनी ही मिलेगी जितनी किसी सामान्य साधक को मिलती है |
                                  आप नवरात्र में सुबह अपने पूजा स्थान में दुर्गा जी की चित्र लगाएं |सामने अपनी दिव्य गुटिका /डिब्बी स्थापित करें |यह प्राण प्रतिष्ठित है ,प्राण प्रतिष्ठा आदि की जरूरत नहीं |हाथ में जल अक्षत पुष्प और एक सिक्का लेकर संकल्प करें ,संस्कृत नहीं आती तो शुद्ध हिंदी में कि-  मैं [अपना नाम ] पुत्र [पिता का नाम ] स्थान [अपना पता ] आज सम्बत [२०७४ ] में चैत्र मॉस के शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि अर्थात नवरात्र के पहले दिन ,दिन [बुधवार ] को यह संकल्प लेता हु की में आज से पूरे नवरात्र में प्रतिदिन ११ माला भगवती दुर्गा का मंत्र जप करूँगा |भगवती मेरे परिवार की सुरक्षा करें ,मेरा कल्याण करे ,मेरे समस्त कष्टों दुखों का नाश करें ,मेरे अथवा मेरे परिवार में व्याप्त बाधाओं का शमन करें ,मेरे सर्वविध उन्नति में सहायता करें | अब जल अक्षत पुष्प आदि उनके सामने छोड़ दें |अब गुटिका और भगवती की सामान्य पूजा करें ,अगर षोडशोपचार पूजा आता है तो वह करें अन्यथा जितना आता है मात्र उतना करें |कोई आडम्बर नहीं ,कोई भ्रम न पालें और खुद का दिमाग न उलझाएँ |पूजन बाद आप आरती कर उठ जाए |अब आपका जप रात में होगा |
                          रात के समय १० बजे के बाद आप पुनः स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहन दुर्गा जी और गुटिका के सामने धुप अगर बत्ती लगाकर ,घी का दीपक जलाएं और सामने उनी कम्बल बिछाकर बैठ जाएँ |हाथ में जल लेकर भावना करें की भगवती आपको शुद्ध पवित्र करें और जल आप खुद पर और आसपास छिडक लें |अब एक रुद्राक्ष की माला लेकर [[ रुद्राक्ष की माला या लाल चन्दन की माला की व्यवस्था पहले से रखें ,साथ ही माला करना भी सीख लें ,अंगूठे -मध्यमा -अनामिका इन्ही अँगुलियों के माध्यम से माला फेरें ,तर्जनी और कनिष्ठिका का स्पर्श न हो ]], पहले एक माला महामृत्युंजय मंत्र का जप करें |इसके बाद आप ११ माला दूर्गा जी के नवार्ण मंत्र का जप करें |आपका ध्यान पूरी तरह दुर्गा जी पर एकाग्र हो | रोज ११ माला करें ,एक माला पूर्व में महामृत्युंजय का जरूर रोज करें |पहले दिन अधिक श्रम जरुर लगेगा किन्तु अगले दिन से आदत हो जायेगी |नावें दिन जप के बाद अथवा १० वें दिन आम की लकड़ी पर हवन सामग्री से हवन करें |रोज जप के बाद अपने जप को भगवती के बाएं हाथ में समर्पित करें |समर्पित करने के बाद क्षमा मांग आरती करें और उठ जाएँ |रोज इतना ही करना है |
                          हवन के बाद हवन की राख अपने घर में चारो कोनों में गमलों में डाल सकते हैं अथवा उन्हें प्रवाहित कर दें अन्य पूजन सामग्रियों के साथ |किसी सात्विक -सदाचारी ब्राह्मण को दक्षिणा प्रदान करें |दिव्य गुटिका और दुर्गा जी का चित्र पूजन स्थान पर ही लगा रहने दें और रोज पूजन मात्र करते रहें |या जो अन्य प्रयोग हैं वह आप दिव्य गुटिका पर करने को स्वतंत्र हैं |मात्र इतने जप और हवन से आप खुद में और अपने घर में एक अलौकिक ऊर्जा का अनुभव करेंगे जो आपको बहुत से कर्मकांड करने के बाद भी महसूस होना मुश्किल है |......................................................हर-हर महादेव 


मुकदमा जीतें तंत्र शक्ति से

मुकदमे /विवाद और तंत्र शक्ति का प्रयोग
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                        आज के समय में विवाद ,मुकदमे ,कानूनी लड़ाई अथवा वर्चस्व की लड़ाई ,सम्पत्ति विवाद ,पारिवारिक विवाद ,आम हो गए हैं |पहले के समय में संस्कार ,बड़े -छोटो के सम्मान ,आपसी पंचायत ,विवाद से बचने और एक दुसरे के प्रति सहिष्णुता के कारण लोग विवाद अथवा मुकदमे आदि से बचने का प्रयत्न करते थे ,कभी कभी कुछ हानि पर भोग इनसे बचते थे ,पर आज की स्थिति उल्ट गयी है |छोटी -छोटी बातों पर ,छोटे -छोटे मुद्दों पर लोग कोर्ट -कचहरी चले जा रहे ,आपस में लड़ जा रहे ,मारपीट कर ले रहे |संपत्ति विवाद ,दहेज़ उत्पीडन ,पति -पत्नी विवाद ,फौजदारी ,मारपीट ,झूठे आरोप ,धोखा ,व्यापारिक विवाद ,साझेदारी के विवाद ,नौकरी आदि के विवाद मुख्यतया कानूनी लड़ाई में बदलते हैं और मुकदमे शुरू होते हैं |इनमे कितना पक्ष में निर्णय आएगा अनिश्चित होता है और सम्बंधित व्यक्ति लगातार तनावग्रस्त होने के साथ ही अपनी क्षमता योग्यतानुसार कार्य भी नहीं कर पाता ,जो हानि आदि हो रही हो वह अलग से |
                         कुछ मामले तो बड़े कष्टदायक होते हैं ,जबकि किसी को झूठा किसी केस -मुकदमे में फंसा दिया जाता है ,जैसे झूठा दहेज़ उत्पीडन का मुकदमा ,कोई आत्महत्या कर ले या किसी की ह्त्या हो जाए और किसी और को कोई फंसा दे या पुलिस किसी और के विरुद्ध केस बना दे ,किसी कर्मचारी को बिन गलती निलम्बित कर दिया जाए या नौकरी से हटा दिया जाए ,कोई किसी की संपत्ति हड़प ले झूठे आधार प्रस्तुत कर उसे उसके अधिकार से वंचित करे ,कोई किसी को बिना मतलब किसी मुकदमे में उलझा दे ,आदि आदि |ऐसी स्थितियों में सम्बंधित व्यक्ति बेवजह उलझ कर पीड़ित होता है |अनेक उपरोक्त मामले सामने आने पर हमें यह लेख लिखने की प्रेरणा मिली और कुछ तंत्रिकीय सुझाव देने का विचार आया जिससे मुकदमों आदि में उलझे लोगों को इससे मुक्ति मिल सके अथवा उनके मुकदमे /विवाद उनके पक्ष में हो सके |हम कारणों का विश्लेष्ण न कर सीधे उपाय और तरीके लिखते हैं क्योंकि कारण बहुत सारे हो सकते हैं जिनके लिए कई लेख कम पड़ जायेंगे |कुछ उपाय मुकदमे में विजय या अनावश्यक इस तरह के कष्ट से निकलने के निम्न हो सकते हैं |
१. सामान्यतया पारंपरिक ज्योतिषी ,कर्मकांडी ,पुरोहित आदि किसी तरह के कष्ट ,समस्या ,विपत्ति ,संकट पर चंडी पाठ ,सप्तशती ,महामृत्युंजय ,हनुमान उपासना ,रुद्राभिषेक आदि की सलाह देते हैं |यह क्रियाएं और पूजा -अनुष्ठान सकारात्मक ऊर्जा बढाती हैं ,व्यक्ति की शक्ति बढाती हैं ,संकट कम करती हैं ,हानि कम करती हैं किन्तु सीधे मुकदमे आदि विवाद से इनका कम सम्बन्ध होता है ,यद्यपि इनका प्रभाव विस्तृत होता है किन्तु समग्रता लिए होता है |यदि मुकदमे आदि के लिए इन्हें किया जाए तो संकल्प पूर्ण रुपें मुकदमे के लिए होना चाहिए ,तब यह उसी दिशा में क्रिया करेंगे |
२. मुकदमे /विवाद आदि के लिए सबसे सटीक प्रयोग बगलामुखी का प्रयोग होता है ,जो शत्रु का स्तम्भन कर देता है और विजय दिलाता है |साथ ही शत्रु स्वयं हतबुद्धि हो अपना विनाश कर लेता है |बेहतर तो यह होता है की जो व्यक्ति मुकदमे से सम्बंधित हो वह खुद बगलामुखी के मंत्र का अनुष्ठान /जप करे और बगलामुखी का यन्त्र धारण करे ,किन्तु यदि वह सक्षम नहीं है तो योग्य बगला साधक से दो तरह के यंत्र बनवाये |एक बगलामुखी का यन्त्र और दूसरा मुकदमा विजय का गदाधारी यन्त्र या हनुमान यंत्र |दोनों की अलग अलग प्राण प्रतिष्ठा कराये और फिर इन्हें बगला मंत्र से अभिमंत्रित कराये |इसके बाद दोनों को चांदी के ताबीज में प्रतिष्ठित करा धारण करे |चूंकि बगला ,विष्णु की आराध्या और ब्रह्मास्त्र शक्ति हैं और हनुमान रुद्रावतार होने के साथ विष्णु के सहायक |इस प्रकार इन शक्तियों का तालमेल एक ऐसा प्रभाव उत्पन्न करता है की व्यक्ति के पक्ष में विवाद /मुकदमे होने की संभावना बन जाती है |यदि भाग्य बिलकुल ही विपरीत न हुआ तो व्यक्ति हर प्रकार से विजयी होता जाता है |
३. मुकदमे /विवाद में विजय हेतु बगलामुखी अनुष्ठान की ही तरह भगवती काली का भी अनुष्ठान किया जा सकता है |यह भी सर्वत्र विजय दिलाती हैं बस अंतर इतना आता है की यह शत्रुता -विवाद समाप्त करने की बजाय शत्रु ही समाप्त कर सकती हैं ,क्योकि इनकी प्रकृति सम्पूर्ण विनाश और अपने भक्त की सर्वत्र हर प्रकार से विजय की होती है |काली के रूपों में दक्षिण काली ,श्मशान काली ,भद्रकाली आदि का प्रयोग आवश्यकतानुसार किया जा सकता है |इनके यंत्रों का प्रयोग एकल रूप में ही किया जाता है धारण करने के लिए |
४. भूमि /संपत्ति सम्बन्धी विवाद /मुकदमे के लिए वराह मंत्र अथवा वाराही साधना बहुत उपयोगी होता है जो स्थिर संपत्ति के लिए बहुत कारगर है |वाराही शक्ति भगवती त्रिपुरा की सहायक शक्ति है जो स्तम्भन और आकर्षण दोनों कार्य करती है |यह शत्रु को ताड़ित भी करते हैं और सम्पति पक्ष में करने में भी सहायक हैं |इनके साथ वाराही यन्त्र का धारण करना लाभ कई गुना बढ़ा देता है |वाराही के कई रूप भी होते हैं जो उद्देश्य विशेष के अनुसार पूजित हैं |
५. जब शत्रु पक्ष प्रबल हो और अधिक हानि होने की संभावना हो तब शत्रुनाशक प्रयोग में भद्रकाली के मन्त्रों का प्रयोग किया जाता है |तीव्र प्रयोगों के लिए इनके मन्त्रों के साथ सप्तशती के सम्पुट से पाठ किया जाता है अथवा दक्षिण काली के मंत्र के सम्पुट से पाठ किया जाता है |
६. मुकदमे में विजय और शत्रु संहार के लिए बगलामुखी की सहायक शक्ति ज्वालामुखी को प्रमुख स्थान तंत्र में दिया जाता है |यह देवी शत्रु का संहार करती है और अपने भक्त को अभय प्रदान करती है |इनकी आराधना के साथ इनके यन्त्र की पूजा भी होनी चाहिए |यह षट्कर्म भी सिद्ध करती हैं और विजय भी दिलाती हैं |
७. शत्रु नाश अथवा विजय के लिए जातवेद दुर्गा का भी प्रयोग किया जा सकता है |जिनका मंत्र वैदिक ऋचा मन्त्र है और यह संकटों से रक्षा करती हैं |इसी प्रकार शत्रु उच्चाटन के लिए पक्षी दुर्गा अथवा भ्रमर दुर्गा का भी प्रयोग किया जा सकता है |
८. शत्रु अथवा विवाद में विजय के लिए कालरात्रि प्रयोग भी किया जा सकता है जो शत्रु का संहार करने के साथ ही उसका सम्मोहन भी करती हैं |यह शक्ति दुर्गा की एक रूप हैं किन्तु इनका प्रयोग बगला ,प्रत्यंगिरा ,शरभराज आदि के साथ भी किया जा सकता है |शत्रुनाश के लिए चामुंडा प्रयोग भी श्रेष्ठ होता है जो काली रूप अथवा दुर्गा रूप हो सकता है |
९. शत्रुनाश और विजय के लिए रुद्रावतार क्रोध भैरव साधना /उपासना भी शीघ्र फलदायी होती है यद्यपि यह पूर्ण तंत्रोक्त साधना है जो बहुत दक्षता के साथ की जानी चाहिए |बटुक भैरव उपासना ज्ञानी के मार्गदर्शन में करने से संकटों का और शत्रु का नाश होता है |
इसके अतिरिक्त अनेक टोटके भी मुकदमों के लिए अपनाए जाते हैं ,किन्तु टोटकों की एक सीमा होती है और इनकी शक्ति निश्चित होती है |करने को तो हर मुकदमे में उलझा व्यक्ति अनेक उपाय और टोटके करता रहता है ,लाभ कितना और किसको किसको होता है व्यक्ति ही जानता है |विषयवश इन्हें भी स्थान दिया जा रहा है |
1.जब भी आप अदालत मे जायें तो किसी भी हनुमान मंदिर में धूप अगरबत्ती जलाकर, लड्डू या गुड़ चने का भोग लगाकर ,एक बार हनुमान चालीसा और बजरंग बान का पाठ करके संकटमोचन बजरंग बलि से अपने मुक्दमे से सफलता की प्रार्थना करे |निसंदेह सफलता प्राप्त होगी।
2. आप जब भी अदालत जाऍं तो गहरे रंग के कपड़े ही पहन कर जाऍ |
3.अपने अधिवक्ता को उसके काम की कोई भी वस्तु जैसै पैन गिफ्ट करें |
4.अपने कोर्ट के केस की फाइलें घर मे बने मंदिर ,धार्मिक स्थान मे रखकर ईश्वर से अपनी सफलता अपनी रक्षा के लिए प्रार्थना करे।
5.मुकदमे मे विजय पाने के लिये कोर्ट जाने से पहले 4 गोमती चक्र को अपनी जेब मे रखकर ,जो स्वर चल रहा हो वह पांव पहले कोर्ट मे रखे अगर स्वर सुनाई न दे रहा हो या समझ ना आ रहा हो ,.तो दाहिना पैर यानी लेफ्ट पैर आगे रखें |मुकदमे मे निर्णय आपके पक्ष मे होने की संभावना प्रबल होगी।
६. शत्रु शमन के लिए साबुत उड़द की काली दाल के 38 और चावल के 40 दाने मिलाकर किसी गड्ढे में दबा दें और ऊपर से नीबू निचोड़ दें। नीबू निचोड़ते समय शत्रु का नाम लेते रहें, उसका शमन होगा और वह आपके विरुद्ध कोई कदम नहीं उठाएगा। 
७. यदि शत्रु अधिक तंग कर रहें हो तो मोर के पंख पर हनुमान जी के मस्तक के सिन्दूर से मंगलवार या शनिवार रात्री में उसका नाम लिख कर अपने घर के मंदिर में रात भर रखें प्रातःकाल उठकर बिना नहाये धोए चलते पानी में भा देने से शत्रु, शत्रुता छोड़ कर मित्रता का व्यवहार करने लगता है |
८. जब आपका मुकदमा चल रहा हो तो आप थोड़े से चावल अपने साथ घर से ले आजायें और कोर्ट में चावल डाल दें |बेहतर हो जिस कोर्ट में मुकदमा चल रहा हो उसके आहार चावल डाल दें |ध्यान रहे की आपको चावल ले जाते और कोर्ट में बिखेरते कोई देखे नहीं ,नहं तो आपका काम नहीं बनेगा |
९. जिस दिन आपको कोर्ट कचहरी जाना हो उस दिन एक कागजी नीम्बू अपने ईष्ट को समर्पित करें फिर बलि की भावना से उसमे चारो कोनों में किसी नुकीली चीज से छिद्र करें और चारो छिद्रों में एक एक लौंग डाल दें |इस नीम्बू को आप अपने साथ ले जाएँ और वापस आने पर किसी मंदिर अथवा वृक्ष के नीचे डाल दें |
१०. यदि आपको लगता है की आप सही हैं और आपको फंसाया गया है तो लाल कनेर के फूल पीसकर उसे अपने ईष्ट को समर्पित कर उसका तिलक करके जाएँ |परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना बनेगी |
११. रविवार अथवा मंगलवार को एक मुट्ठी तिल में थोड़ी शक्कर मिलाएं तथा अपने उपर से सात बात उतारे और किसी सुनसान तिराहे पर उसे डाल दें और चुपचाप घर आकर हाथ पाँव धो लें |ध्यान दें आपको कोई ऐसा करते न देखे न टोके |तिराहे पर डालते समय ईश्वर से प्रार्त्न करें की आपके कष्ट दूर हों और आपको मुकदमे में विजय मिले |
उपरोक्त टोटकों के अतिरिक्त हजारों टोटके विभिन्न ,मार्गों ,सम्प्रदायों ,धर्मों में प्रचलित हैं ,जिनका प्रयोग लोग करते रहे हैं |..........................................................हर-हर महादेव

शिव जी को कौन से पुष्प -पत्र प्रिय हैं ?

शिव उपासना में विहित और क्रमशः प्रभावी पत्र -पुष्प
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 शिव की उपासना में बिल्वपत्र का चढ़ावा बहुत ही शुभ और पुण्य देने वाला होता है। शिवपुराण के मुताबिक भी बिल्वपत्र का शिव को चढ़ावा जन्म-जन्मान्तर के पाप और दोषों का नाश करता है। किंतु शास्त्रों के मुताबिक  फूल-पत्तों में कुछ ऐसे भी हैं, जिनको शिव पूजा में चढ़ाना बिल्वपत्र से भी ज्यादा पुण्य और फल देने वाला माना गया है। अमंगल को दूर रखने वाला यह पेड़ हैं- शमी वृक्ष।
- शास्त्रों के मुताबिक शिव पूजा में एक आंकड़े का फूल चढ़ाना सोने के दान के बराबर फल देता है।
- इसी तरह एक हजार आंकड़े के फूल के बराबर शुभ फल एक कनेर का फूल शिवलिंग पर चढ़ाने से मिल जाते हैं।
- एक हजार कनेर के फूल के बराबर एक बिल्वपत्र फल देता है।
- हजार बिल्वपत्रों के बराबर एक द्रोण या गूमा फूल फलदायी होता है।
- हजार गूमा के बराबर शुभ फल एक चिचिड़ा चढ़ाने से ही मिल जाता है।
- हजार चिचिड़ा के बराबर शुभ फल एक कुश का फूल चढ़ाने मिल जाता है।
- हजार कुश फूलों के बराबर फल एक शमी का पत्ता ही दे देता है।
- हजार शमी के पत्तो के बराबर शुभ फल एक नीलकमल देता है।
- हजार नीलकमल से ज्यादा एक धतूरा और,
- हजार धतूरों से भी ज्यादा एक शमी का फूल शुभ और पुण्य देने वाला बताया गया है।
इस तरह शमी का फूल शिव को चढ़ाना शिव भक्ति से तमाम मनचाही कामनाओं को पाने का सबसे श्रेष्ठ उपाय है।
हर दिन व तिथि पर खास तौर पर सवेरे शिवालय में तांबे के कलश में गंगाजल या पवित्र जल में गंगाजल, अक्षत, सफेद चंदन मिलाकर शिवलिंग पर 'ॐ नम: शिवाय' यह मंत्र बोलते हुए अर्पित करें।
- जल अर्पण के बाद शिव की अक्षत, रौली, बिल्वपत्र, सफेद वस्त्र, जनेऊ व घी की मिठाई के साथ खासतौर पर
शमी पत्र नीचे लिखे मंत्र बोल यश, धन व जाने-अनजाने पापों के नाश की कामना करते हुए चढ़ाएं-
अमंगलानां च शमनीं शमनीं दुष्कृतस्य च।
दु:स्वप्रनाशिनीं धन्यां प्रपद्येहं शमीं शुभाम्।।
- जल अर्पण, पूजा व शमी पत्र चढ़ावे के बाद शिव की धूप, दीप व कर्पूर आरती कर प्रसाद ग्रहण करें। ................................................................हर-हर महादेव 

बिल्व पत्र पूजन में कितना महत्त्वपूर्ण


बिल्व पत्र की महत्ता 
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विल्व पत्र या बेल पत्र भगवान् शिव को बहुत प्रिय है |कहते हैं शिव को विल्वपत्र चढाने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है |विल्व पत्र पेड़ की पत्तियों की खासियत यह है की ये तीन के समूह में मिलती हैं |विल्व वृक्ष को महादेव का रूप माना जाता है |ऐसी मान्यता है की विल्व वृक्ष की जड़ में महादेव का वास रहता है ,इसलिए इस पेड़ की जड़ में महादेव की पूजा की जाती है। इतना ही नहीं, कहते हैं बिल्व वृक्ष को सींचने से सभी तीर्थों का फल मिल जाता है। हालांकि बिल्वपत्र को हमेशा नहीं तोड़ सकते | 
- शिव उपासना के प्रमुख दिन सोमवार को बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिए |
- चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को बिल्वपत्र नहीं तोडऩा चाहिए | 
- किसी माह में संक्राति के दिन भी बिल्वपत्र तोड़ना उचित नहीं है |
अगर इन तिथियों में शिवपूजा में बिल्वपत्र की आवश्यकता हो तो उसके लिए यह नियम है कि, आप शिव पूजा में उपयोग किए गए बिल्वपत्र को फिर से धोकर शिव को अर्पित कर सकते हैं |
पूजा में महत्व- बिल्व वृक्ष या बेल का पेड़ हमारे लिए एक उपयोगी वनस्पति है, जो हमारे कष्टों को दूर करता है | भगवान शिव को बिल्व वृक्ष की पत्तियां चढ़ाने का अर्थ यह होता है कि जीवन में हम भी लोगों के संकट में उनके काम आएं | दूसरों के दुख के समय काम आने वाला व्यक्ति या वस्तु भगवान शिव को प्रिय है |
औषधीय गुण- बिल्वपत्र का सेवन, त्रिदोष, यानी वात (वायु), पित्त (ताप), कफ (शीत) व पाचन क्रिया के दोषों से पैदा बीमारियों से रक्षा करता है | यह त्वचा रोग और डायबिटीज के बुरे प्रभाव बढ़ने से भी रोकता है व तन के साथ मन को भी चुस्त-दुरुस्त रखता है |...........................................................हर-हर महादेव 

देवी पूजा में बेल पत्र जरुर चढ़ाएं

देवी पूजा में विल्व पत्र की महत्ता
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                          पूजन में पूजन सामग्री का बहुत महत्त्व होता है |देवी या देवता के अनुकूल पूजन सामग्री का उपयोग पूजा में होता है और उन्हें अर्पित किया जाता है |जैसी पूजा -साधना हो उस प्रकार की सामग्री उपयोग में लाइ जाती है |पूजा और सामग्री सात्विक ,राजसिक और तामसिक तीनो ही प्रकार की होती है ,परन्तु पाद्य ,अर्ध्य ,आचमन , गंध ,पुष्प ,धुप ,दीप आदि की व्यवस्था तो सभी पद्धतियों में करनी ही पड़ती है |पुष्प के क्रम में उसके साथ पत्र पूजा का भी महत्व शास्त्रों में बतलाया गया है |देवी की पूजा सामग्री में रक्त चन्दन ,रक्त पुष्प के साथ विल्व पत्र आवश्यक रूप में होना चाहिए |श्री मद देवी भागवत पुराण का ऐसा कथन है | 
                            सामान्यतया हम विल्व पत्र का अर्पण शिव को करते हैं और बहुतायत में लोग यही जानते हैं की शिव को ही विल्व पत्र चढ़ता है ,किन्तु यह भारी भ्रम है |विल्व पत्र का बहुत ही अधिक महत्त्व शक्ति साधना अर्थात देवी साधना में है और लगभग सभी देवियों को विल्व पत्र अर्पित किया जाता है ,सभी देवियों को विल्व पत्र अर्पित किया जाना चाहिए |महाविद्या साधना में तो यह आवश्यक तत्व होता है | सामग्री के निर्धारण क्रम में विल्व पत्र की महत्ता शास्त्रों में बतलाई गयी है |धन प्राप्ति ,देवी की कृपा एवं पृथ्वी पर राज्य सुख प्राप्त करने के लिए शक्ति आराधना में विल्व पत्र ,भगवती को अवश्य अर्पित करना चाहिए |विल्व पत्र की मान्यता कमल विशेशतः रक्त कमल से लाख गुना अधिक बतलाई गयी है |भगवती को यह कमल की अपेक्षा लाख गुना अधिक प्रिय है क्योकि यह तो भगवती का ही प्रतिरूप है अर्थात भगवती की दूसरी [साक्षात जीवंत ] मूर्ती के रूप में यह है |
                         भगवती ने प्रसन्नता पूर्वक विल्व वृक्ष को अपना नाम दिया है और श्री वृक्ष कहकर इसका नाम करण किया है |जहाँ विल्व के अनेक वृक्ष होते हैं वहां लक्ष्मी अपने पति [नारायण-विष्णु ] के साथ स्थिर रूप में निवास करती हैं |उसी प्रकार उमा-पार्वती भी अपने पति शिव के साथ और ब्रह्मा के साथ उनकी पत्नी सरस्वती भी वहां निवास करती हैं |अर्थात जहाँ बेल के वृक्षों का वन अथवा एक वृक्ष हो वहां भगवती उमा [महाकाली] .रमा [महालक्ष्मी ] ,और भारती [सरस्वती] अपने -अपने पतियों क्रमशः भगवान् शिव ,विष्णु और ब्रह्मा के साथ स्थित रहती हैं |अतएव विल्व वृक्ष को जहाँ कही भी देखा जाए ,देखते ही उसे प्रणाम व् यदि संभव हो तो उसकी प्रदक्षिणा करनी चाहिए |विल्व वृक्ष की उपेक्षा करके जाने वाले अथवा देवी की पूजा में विल्व पत्र अर्पण न करने वाले पर लक्ष्मी की कृपा नहीं होती |
                          ब्रह्मा -विष्णु-शिव आदि देव अपनी पत्नियों सहित तथा समस्त तीर्थ और वेद मन्त्र ये सभी विल्व वृक्ष के मूल में सर्वदा निवास करते हैं |इस वृक्ष के मूल में [वृक्ष के जड़ के पास ] बैठकर मन्त्रों का जप -अनुष्ठान करने वाले को शीघ्र ही जिस प्रकार की मन्त्र सिद्धि होती है ,वैसी सिद्धि अन्य किसी स्थल पर जप करने से नहीं होती |इतना ही नहीं भगवती को बेल की लकड़ी का घिसा चन्दन [या इसकी सुगंध ],विल्व काष्ठ से निर्मित मणि [दाने ] की माला ,तथा इसी लकड़ी से निर्मित चौकी [पीठ] ये सब वस्तुएं बड़ी प्रिय लगती हैं | इन वस्तुओं को अर्पण करने से उन्हें संतोष प्राप्त होता है |
                   विल्व पत्र कभी भी बासी नहीं माना जाता है |विल्व पत्रों के उपलब्ध न होने पर पुराने चढ़े हुए विल्व पत्रों को शुद्ध जल से धोकर पुनः चढाने की आज्ञा शास्त्रों ने दी है |यदि विल्व पत्र कई दिनों के बासी हो गये हों और ताजे विल्व पत्र न मिल रहे हों तो पुराने विल्व पत्रों के चूर्ण को भी भगवती को अर्पित किया जा सकता है |यह व्यवस्था एकमात्र विल पत्र के लिए ही है |इसी से विल्व पत्र की महत्ता समझी जा सकती है |भगवती की विल्व रहित पूजा करने पर वह की हुई पूजा निष्फल होती है |अतः छिद्र रहित ,कोमल सुन्दर -सुन्दर तीन पत्तों वाले विल्व पत्रों से भगवती की पूजा करनी चाहिए |.................................................................हर-हर महादेव

सोमवार, 13 अप्रैल 2020

पौरुष ,प्रतिरोधक शक्ति बढाता है सफ़ेद मूसली

  सफ़ेद मूसली के चमत्कार
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                               भारत प्राचीन काल से ही सांस्कृतिक धरोहर के साथ जड़ी-बूटियों के लिए भी प्रसिद्ध रहा है। यहां विभिन्न औषधीय पौधे पाए जाते हैं। इसी लिए यहां विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों जैसे, आयुर्वेद, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा आदि प्राचीन काल से ही न केवल चलन में हैं, बल्कि विज्ञान और तकनीक के विकास के बाद भी इनकी प्राथमिकता कम नहीं हुई है। सफेद मूसली भी ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है, जो शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए काफी मशहूर है।  यह एक प्रकार का पौधा है, जिसके अंदर छोटे सफ़ेद फूल होते हैं। वैसे तो सफ़ेद मूसली के फ़ायदे अनेक हैं, लेकिन इसका सबसे बड़ा योगदान पुरुषों में यौन शक्ति बढ़ाने में और नपुंसकता का इलाज करने में किया जाता है।  इसके अलावा भी सफेद मूसली के कई लाभ हैं,सफ़ेद मुसली (क्लोरोफाइटम बोरिविलियनम) एक ऐसा पौधा है जिसका आयुर्वेद में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है क्योंकि इसमें उपचार के गुण हैं। सफ़ेद मुसली के सबसे महत्वपूर्ण लाभों में से एक है यौन कमजोरी और नपुंसकता को ठीक करने की क्षमता है। इसे “भारतीय वियाग्रा” या “हर्बल वियाग्रा” के नामों से भी जाना जाता है| 
                          यह इतनी पौष्टिक तथा बलवर्धक होती है की इसे दूसरे शब्दों में शिलाजीत की संज्ञा दी गई है। चीन, उत्तरी अमेरिका में पाए जाने वाले मूसली के पौधे जिनका वानस्पतिक नाम पेनेक्स जिंन्सेग है। इन जिंन्सेग से फलेक्स बनाए जाने पर भी कार्य चल रहा है, जो नाश्ते के रूप में इस्तेमाल किए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त इससे मां का दूध बढाने, प्रसव के बाद होने वाली बीमारियों तथा शिथिलता को दूर करने के एव मधुमेह आदि जैसे अनेकों रोगों के निवारण हेतु भी दवाईया बनाई जाती है।सफ़ेद मुसली विटामिन, अल्कलॉइड, प्रोटीन, स्टेरॉयड, कार्बोहाइड्रेट और पॉलीसैकराइड्स से भरपूर होता है।इसमें फाइबर, सैपोनिन, कैल्शियम, पोटैशियम व मैग्नीशियम जैसे पौष्टिक तत्व मौजूद हैं। सफ़ेद मुसली का अंग्रेजी नाम इंडियन स्पाइडर प्लांट है।सफ़ेद मूसली में कई गुण हैं, जो आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद हैं। ऐसे ही ज़रूरी सफ़ेद मूसली के लाभ के बारे में हम नीचे लिख रहे हैं।
1. शरीर में ऊर्जा व रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है
यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है कि सफ़ेद मुसली शरीर की प्रतिरक्षा में सुधार करता है और इसे मजबूत बनाता है। एक अच्छी प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ  शरीर रोगों से लड़ सकता है और मजबूत हो सकता है। सफ़ेद मुसली आपके समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है और अधिक जीवन शक्ति उत्पन्न करके सामान्य कमजोरी का मुकाबला करता है।
अगर आपको हमेशा सर्दी-ज़ुकाम हो या आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, तो सफ़ेद मूसली का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके सेवन से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कई बीमारियों से छुटकारा मिलता है। यह संक्रमण से आपका बचाव करेगी। 
अगर आपको अक्सर बदन दर्द की शि‍कायत बनी रहती है, तो प्रतिदिन सफेद मूसली की जड़ का सेवन फायदेमंद होता है। उच्च रक्तचाप, गठिया रोग में भी यह लाभकारी है। पेशाब में जलन की शिकायत होने पर तो सफेद मूसली की जड़ को पीसकर इलायची के साथ दूध में उबालकर पीना बेहद फायदेमंद होता है। दिन में दो बार इस दूध को पीना लाभदायक होगा।
2. जोड़ों के दर्द और अर्थराइटिस में फायदेमंद
बढ़ती उम्र के साथ लोगों में हड्डियों और जोड़ों की शिकायत भी बढ़ने लगती है। ऐसे में सफ़ेद मूसली के सेवन से अर्थराइटिस, जोड़ों और हड्डियों के दर्द में कुछ हद तक आराम मिल सकता है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट व विटामिन जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो आपके शरीर और हड्डियों के लिए ज़रूरी होते हैं।
सफ़ेद मुसली में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द, गठिया और गठिया के इलाज में बहुत कुशल होते हैं। यह श्लेष द्रव के बनने को प्रभावित करता है और जोड़ों के क्षरण को रोकता है। 
सफ़ेद मुसली(Safed Musli)को एक बेहतरीन एंटी-ऑक्सिडेंट कहा जाता है जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है। यह शरीर से मुक्त कणों को खत्म करता है और स्वस्थ बनाता है। यह तनाव मुक्त करने और ऑक्सीडेटिव तनाव संबंधी परेशानियों का इलाज करने में भी मदद करता है।
3.महिलाओं के लिए मूसली अत्यधिक लाभकारी होती है। यह उम्र के असर को कम कर सुन्दरता बढ़ाने में भी मददगार साबित होती है। इसके अलावा अन्य नारी प्रमुख समस्याओं में भी इसका सेवन फायदेमंद होता है।  गर्भावस्था में भी सफ़ेद मूसली अच्छी औषधि है। प्रेग्नेंसी में सफ़ेद मूसली का सेवन करने से महिला और होने वाला शिशु स्वस्थ रहता है। सिर्फ़ गर्भावस्था के दौरान ही नहीं, बल्कि डिलीवरी के बाद भी मां मूसली का सेवन करें तो दूध की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार होता है।  हालांकि, गर्भावस्था में सफ़ेद मूसली का प्रयोग करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से इस बारे में सलाह ज़रूर कर ले लें।सफ़ेद मुसली(Safed Musli) एक गलाक्टागोग के रूप में काम करता है। गन्ने, ब्राउन शुगर और जीरा के साथ मिलाने पर यह स्तनपान कराने वाली माताओं में दूध को बढ़ाता है।सफ़ेद मुसली के लाभों में महिलाओं में फ्रिजिडिटी और योनि के सूखेपन को कम करना भी शामिल है। 
4.यह मधुमेह से पीड़ित मरीजों के लिए भी अच्छी औषधि है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीहाइपरग्लिसिमिक (antihyperglycemic) और एंटीडाइबिटिक गुण होते हैं और ये सभी गुण मधुमेह के मरीज़ के उपचार में काम आते हैं। यहां तक कि यह एलोपैथिक दवा गिलबेक्‍लामाइड (Glibenclamide) से भी ज्यादा फ़ायदेमंद है।हालांकि, यह भी माना जाता है कि यह पतले या कम वज़न वाले मधुमेह के मरीज़ों के लिए ज्‍यादा फ़ायदेमंद है, वहीं मधुमेह के जो मरीज़ मोटे होते हैं, उस पर इसका असर कम हो सकता है।
5.तनाव को कम करता है
मूसली का सेवन करने से तनाव भी कम होता है। हालांकि, इसका अभी तक कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन माना जाता है कि इसमें मौजूद पोषक तत्व काफ़ी हद तक तनाव को दूर कर मानसिक तौर पर स्वस्थ रखते हैं।
6. नपुंसकता में सहायक
सफेद मुसली (क्लोरोफाइटम बोरिविलिनम एल.) के मूल कंदों के क्लिनिकल मूल्यांकन और वीर्य और टेस्टोस्टेरोन पर इसके प्रभाव के बारे में एक शोध ने निष्कर्ष निकाला कि स्पर्म की गिनती और स्पर्म की गतिशीलता बढ़ाने में सफ़ेद मुसली बहुत प्रभावी है। इसने सीमेन और टेस्टोस्टेरोन के स्तर की मात्रा में भी बहुत महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है।
                    चाईनीस जर्नल ओफ़ इंटीग्रेटड मेडिसन में प्रकाशित एक रपट के अनुसार पोलीसेकेराईड और सेपोनिन से भरपूर इस जडीबूटी को सेक्सुअल डिसफंक्शन जैसी समस्याओं के निवारण के लिए सटीक माना गया है, इसके क्लिनिकल प्रमाण वाकई चौकाने वाले हैं।आर्काइव्स ओफ़ सेक्सुअल बिहेवियर जर्नल में भी ऐसी ही शोध पर रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी हैं, इसके अलावा सैकडों ऐसे शोधपत्र हैं जिनमें इसके गुणों का बखान किया गया है और अनेक एनिमल स्ट्डीस भी की गयी।
                     कई शोध ये भी बताते हैं कि डायबिटीज के बाद होने वाली नपुंसकता की शिकायतों में भी सफेद मूसली सकारात्मक असर दिखाती है। सफ़ेद मुसली पुरुषों को शारीरिक तौर पर पुष्ट बनाने के अलावा इनके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढाने में मददगार है। सफ़ेद मूसली से वीर्य की गुणवत्ता बढ़ती है और नपुंसकता जैसी बीमारी से भी काफ़ी हद तक छुटकारा मिलता है। कई बार मधुमेह या अन्य किसी बीमारी के वजह से इरेक्टाइल डिसफंक्शन (इसमें संभोग के दौरान लिंग उत्तेजित नहीं होता) की आशंका होती है, ऐसे में मूसली के सेवन से इसे ठीक किया जा सकता है। इसका प्रभाव स्पर्म काउंट यानी शुक्राणुओं पर भी होता है, जिससे यौन शक्ति बढ़ती है। शीघ्रपतन में भी इसका उपयोग किया जाता है।  सफ़ेद मुसली( Safed Musli) का उपयोग उम्र की वजह से कुछ यौन कठिनाइयों जैसे कि प्रीमैच्योर ईजेकुलेशन और इरेक्टाइल डिसफंक्शन को ठीक करने के लिए किया जाता है। यौन कामेच्छा बढ़ाने के लिए यह जड़ी बूटी एक टॉनिक के रूप में काम करती है। 
इस चूर्ण का सेवन लम्बे समय तक करने पर भी किसी तरह की परेशानी नहीं। चाहे वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम हो, नपुंसकता की शिकायत हो या स्वप्नदोष, मूसली हमेशा हर्बल जानकारों द्वारा सुझाई जाती है।सफेद मूसली शीघ्रपतन के देसी इलाज के काफी मशहूर है। कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बनाकर एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम एक कप दूध के साथ लेने से शीघ्रपतन और वीर्य की कमी जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं। कामोत्तेजना बढ़ाने में भी मूसली काफी लाभदायक होती है। इसके लिए कौंचबीज चूर्ण, सफेद मूसली, तालमखाना, अश्वगंधा चूर्ण को बराबर मात्रा में तैयार कर 10 ग्राम ठंडे दूध के साथ सेवन करना होता है। ये काफी कारगर नुस्खा माना जाता है। 
7.बॉडी बिल्डिंग में मदद करता है
मूसली से शारीरिक शक्ति तो बढ़ती ही है, साथ ही इससे वज़न भी बढ़ता है। अगर कोई अपना वज़न बढ़ाना चाहता है, तो वो मूसली का सेवन कर सकता है। मूसली में मौजूद पोषक तत्व कुपोषण से पीड़ित शरीर को पोषण प्रदान कर वज़न बढ़ने में मददगार साबित होते हैं। 
सफ़ेद मुसली(Safed Musli) मांसपेशियों की वृद्धि, टिश्यूओं की बहाली और वसूली से संबंधित लाभ देता है। ये गुण इसे शरीर के सौष्ठव के लिए एक आदर्श पूरक बनाते हैं। सभी बॉडी बिल्डरों को यह सलाह दी जाती है कि वे अपने काम को नियमित करने में सहायता के लिए एक निश्चित मात्रा में सफ़ेद मुसली का सेवन करें।शारीरिक शिथिलता को दूर कर ऊर्जा को बढ़ाने में सफेद मूसली बेहद लाभकारी होती है, यही कारण है कि कई तरह की दवाइयों के निर्माण में सफेद मूसली का प्रयोग किया जाता है।   
8.वजन कम करने में मदद करता है
यदि आप वजन कम करना चाहते हैं तो सफेद मुसली का सेवन बहुत मददगार साबित हो सकता है। यह पाचन तंत्र को ठीक रखता है और मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है। यह शरीर को ताकत भी देता है और थकान से छुटकारा पाने में मदद करता है। अगर आपको वज़न घटाना है, तो आप गर्म पानी में आधा चम्मच मूसली पाउडर मिलाकर पिएं। इससे आपका वज़न काफ़ी हद तक कम हो सकता है। वहीं, अगर आपको वज़न बढ़ाना है, तो आप दूध के साथ इसका सेवन कर सकते हैं।
 9.पथरी यानि स्टोन की समस्या में सफेद मूसली बहुत कारगर उपाय है। इसे इन्द्रायण की सूखी जड़ के साथ बराबर मात्रा (1-1 ग्राम) में पीसकर, एक गिलास पानी में डालकर खूब मिलाएं। इस मिश्रण को मरीज को हर दिन सुबह पिलाने से महज सात दिन में ही प्रभाव दिखता है। इसके सेवन से बड़ी पथरी भी गल जाती है।
आयुर्वेद ने मुंह के इन्फेक्शन के इलाज में शक्ति या सफद मुसली की व्याख्या की है। सफ़ेद मुसली की जड़ का पाउडर घी में तलकर और गले और मुंह के इन्फेक्शन को कम करने के लिए सेवन किया जाता है।
10.डायरिया का इलाज करता है
सफ़ेद मुसली(Safed Musli) के लाभों में से एक दस्त और पेचिश जैसे पाचन संबंधी मुद्दों से संबंधित है। सफ़ेद मुसली के सेवन से इनसे प्रभावी रूप से निपटा जा सकता है। यहां तक ​​कि शिशुओं में दस्त का इलाज करने के लिए सफ़ेद मुसली की एक छोटी खुराक दी जा सकती है
सफेद मूसली के नुकसान – 
हर चीज़ के फ़ायदे और नुकसान दोनों होते हैं। इसलिए, सफ़ेद मूसली के भी फ़ायदे के साथ कुछ नुकसान भी हैं। नीचे हम ऐसे ही कुछ नुकसानों के बारे में आपको बता रहे हैं।
• पचने में वक़्त लगता है, इसलिए पाचन तंत्र पर प्रभाव पड़ सकता है।
• कब्ज़ की परेशानी हो सकती है।
• भूख कम हो सकती है।
• इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह कफ की परेशानी को बढ़ा सकता है।
• त्वचा संबंधी एलर्जी हो सकती है।
सफेद मूसली खाने के तरीके – 
इसका सेवन करने से हमें फायदा हो, इसके लिए यह जानना ज़रूरी है कि इसकी कितनी ख़ुराक ली जाए। इसकी खुराक व्यक्ति की उम्र और शरीर पर निर्भर करता है। नीचे हम सफेद मूसली खाने की विधि के बारे में आपको बता रहे हैं। इससे आप आसानी से समझ सकेंगें कि सफ़ेद मूसली का उपयोग कैसे कर सकते हैं ? जानिए क्या है सफ़ेद मूसली खाने का तरीका।
बच्चों को एक ग्राम तक मूसली दे सकते हैं, लेकिन पहले बार सेवन करने के बाद बच्चे को पेट संबंधी या कोई और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो, तो इसे न दें।
13 से 19 वर्ष के किशोर दो ग्राम तक सफ़ेद मूसली का सेवन कर सकते हैं।
60 वर्ष तक के लोग 6 ग्राम तक मूसली का सेवन कर सकते हैं।वैसे तो गर्भवती महिलाएं या स्तनपान कराने वाली मां दो ग्राम तक मूसली खा सकती है, लेकिन इस बारे में एक बार अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।सफ़ेद मुसली को भोजन के दो घंटे बाद लेना चाहिए।
              इसके उपयोग के कई तरीक़े हैं, आप चाहे तो इसका कैप्सूल खा सकते हैं या फिर दूध व शहद के साथ मिलाकर इसके पाउडर का सेवन कर सकते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे खाना पसंद करेंगे।मूसली बेहद गुणकारी औषधि है। इसका सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने से यह शरीर के लिए वरदान साबित हो सकती है।
                     एक फार्मास्युटिकल्स कंपनी अपनी वेबसाइट पर ये दावा करते हैं कि मूसली के कोई ज्ञात नकारात्मक साइड इफेक्ट नहीं हैं और क्योंकि यह पूरी तरह कार्बनिक हर्बल सामग्री से बनाया जाता है, इसलिए मानव उपभोग के लिए सुरक्षित है। कंपनी दावा करती है कि इस उत्पाद को उच्च रक्तचाप, रुमेटी गठिया वाले तथा स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी इसका सेवन सुरक्षित है। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने कोई चिकित्सकीय प्रमाण नहीं दिया। ……………………………..हर हर महादेव 

महाशंख  क्या होता है ?

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