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मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

क्यों किसी को प्रभावित नहीं कर पाते ?

क्यों होती है तेजस्विता में कमी या प्रभावित करने में अक्षमता
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                              अक्सर हम विभिन व्यक्तियों से रोज मिलते हैं ,अनेकों से हमारा सामना होता है ,कुछ हमें प्रथम बार में ही बहुत प्रभावित करते हैं ,कुछ बिलकुल प्रभावित नहीं करते और कुछ धीरे -धीरे प्रभावित करते हैं ,जो की विशिष्ट गुणों के कारण अधिक होता है  ,,प्रथम बार में ही प्रभावित या अप्रभावित करना कई कारणों पर निर्भर करता है ,जैसे सुन्दरता ,बनावट, चाल-चलन, बात-चीत के ढंग,आदि ,इसमें शरीर से उत्पन्न होने वाले फेरोमोंस-हारमोंस की भी यद्यपि अपनी एक भूमिका होती है ,किन्तु सबसे अधिक प्रभावी व्यक्ति की औरा या प्रभामंडल होती है ,यह वह शक्ति है हर व्यक्ति विशेष से जुडी हुई होती है और जो उसकी प्रभावशालिता हेतु सर्वाधिक उत्तरदाई होती है ,,इसके ही प्रभाव से व्यक्ति का तेज बनता है या वह निस्तेज होता है ,इसी के कारन व्यक्ति लोगो पर प्रभाव डाल पाता है स्वयमेव या उसका प्रथम द्रिस्टया कोई प्रभाव नहीं पड़ता ,
                                      व्यक्ति की औरा या प्रभामंडल भौतिक शरीर और आत्मा के बीच की कड़ी सूक्ष्म शरीर से सम्बंधित होती  है| ,इसका सीधा सम्बन्ध व्यक्ति के विद्युतीय परिपथ और उर्जा चक्रों से होता है और इसकी प्रकृति का निर्माण विशिष्ट सक्रिय चक्र के अनुसार होता है |यह व्यक्ति में चक्र विशेष की विशेष सक्रियता पर भी निर्भर करता है |इसका सीधा सम्बन्ध व्यक्ति के आत्मबल से होता है |व्यक्ति सुदर है या नहीं ,महत्व नहीं रखता ,अगर उसकी औरा प्रबल है और प्रकाशित है तो वह कहीं भी कभी भी प्रभावित कर ही देता है ,यह व्यक्ति के आत्मविश्वास को भी प्रभावित करता है और व्यक्ति प्रस्तुति को भी |इससे व्यक्ति में एक अनजानी आकर्षण शक्ति उत्पन्न होती है और सम्मोहन की क्षमता उसके आसपास बिखरी होती है |यह व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर भी निर्भर करता है ,व्यक्ति सबल और स्वस्थ है तो यह शरीर को प्रकाशवान बनाये रखती है |
                                      हम सभी जानते हैं की शरीर में एक ऊर्जा परिपथ होता है |शरीर कोशिकाओं से मिलकर बनता है और कोशिकाओं में माइटोकांड्रिया नामक अवयव से ऊर्जा उत्पादन होता है ,यही पूरे शरीर की गर्मी या ऊर्जा और जीवन के नियमन के लिए आवश्यक शक्ति प्रदान करता है |इसकी ऊर्जा व्यक्ति के भोजन के प्रकार पर निर्भर करती है |समस्त शरीर की कोशिकाओं में माइटोकांड्रिया से ऊर्जा उत्पादन होता है और सभी की उर्जायें मिलकर एक अदृश्य ऊर्जा संरचना का निर्माण करते है ,इनका संरक्षण भी होता रहता है और यही सूक्ष्म शरीर का भौतिक अस्तित्व है ,और यही आभामंडल का भी निर्माण करते हैं |सूक्ष्म शरीर अदृश्य रहता है पर इसी ऊर्जा परिपथ से वह जुड़ा रहता है और इसी की प्रकृति पर उसकी भी प्रकृति निर्भर करती है जब तक की कोई अन्य विशेष साधना या क्रिया न की जाए |यही सूक्ष्म शरीर आत्मा और भौतिक शरीर के बीच की कड़ी होता है |इसी सूक्ष्म शरीर में विभिन्न चक्र होते हैं जिनसे सम्बंधित शक्तियां या देवता/देवी होते हैं |चक्र विशेष की विशेष क्रियाशीलता पर इस सूक्ष्म शरीर और प्रकारांतर से आभा मंडल की क्रियाशीलता निर्भर करती है | इसी आभामंडल पर व्यक्ति की तेजस्विता या प्रभावित करने की क्षमता निर्भर करती है |
                                                     यदि व्यक्ति का आभामंडल कमजोर है तो व्यक्ति में तेजस्विता अपने आप कम हो जाएगी |उसके शरीर और चेहरे से तेज और चमक गायब हो जायेगी ,आत्मविश्वास कम हो जाएगा |शरीर एक आतंरिक कमजोरी महसूस करेगा |व्यक्ति किसी को प्रभावित नहीं कर पाता |असुंदर चेहरा भी अगर आभायुक्त है तो वह लोगों को आकर्षित कर लेता है और प्रभावित कर देता है |किसी को प्रथम बार देखने पर ही उसके चेहरे की आभा या चमक ही सबसे अधिक उसके प्रभावित करने की क्षमता के लिए उत्तरदाई होती है और यह आभामंडल पर निर्भर करता है |[प्रस्तुत लेख अपने पेज अलौकिक शक्तियां पेज के लिए लिखा है ]|                                                आभामंडल सबमे होता है |किसी में अधिक किसी में कम ,किसी में सकारात्मक ,किसी में नकारात्मक ,,किसी को देखते ही आप उसे नापसंद करते हैं यह उसकी नकारात्मक आभामंडल के कारण होता है ,इसका कोई सम्बन्ध उसके चेहरे की बनावट से हो जरुरी नहीं होता ,पर आपको समझ में नहीं आता |इसका कारण यह भी हो सकता है की उस व्यक्ति की आभामंडल या औरा आपसे मैच नहीं कर रही है और प्रतिकर्षण हो रहा है जिससे सूक्ष्म शरीर से संकेत मिलने पर अंतरात्मा उसे नापसंदगी के रूप में व्यक्त करती है |कभी-कभी ऐसा भी होता है की कोई व्यक्ति आपको अचानक बहुत पसंद हो जाता है ,इसका मूल कारण होता है की उससे आपकी औरा मैच कर जाती है और एक आकर्षण उत्पन्न हो जाता है ,जबकि वाही व्यक्ति अन्य को नहीं पसंद आता अथवा वह सुन्दर भी नहीं होता |यह सब औरा या आभामंडल और उससे उत्पन्न तेजस्विता पर निर्भर करता है |प्रबल आभामंडल का तेजस्वी व्यक्ति समूह को आकर्षित कर लेता है |सभी उसके आकर्षण में उसकी बात मानाने को विवश हो जाते हैं |
                                यदि आपमें कोई आतंरिक कमी है, आपका आत्मविश्वास हिला हुआ है ,आप व्यभिचारी हैं ,आप नशेबाज हैं ,आपका स्वयं पर नियंत्रण नहीं है ,क्रोधी-ईर्ष्यालु हैं ,किसी भी रूप में बीमार हैं ,मानसिक रोगी हैं ,नकारात्मक ऊर्जा से प्रभावित हैं ,दिनचर्या अव्यवस्थित है ,कमजोर आत्मबल के हैं ,मानसिक चंचलता बहुत अधिक है,परोपकार-दया की भावना कम है,बहुत समय से प्रतिद्वंदिता की भावना से ग्रस्त हैं ,बहुत समय से मानसिक तनाव से ग्रस्त हैं ,हमेश उलझन में रहते हैं ,परिवार में कलह का माहौल रहता हो , तो आपका आभामंडल और तेजस्विता कम हो सकती है और आप लोगो को प्रभावित कर ले मुश्किल है |अगर आप अनावश्यक क्रोधी हैं ,किसी गंभीर नकारात्मक ऊर्जा की चपेट में हैं ,घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास है ,अति ईर्ष्यालु है ,व्यभिचार की अधिकता से क्षीण शरीरी हैं ,बुरी मानसिक भावनाओं से ग्रस्त हैं ,दूसरों का सदैव अहित चाहने वाले हैं ,बहुत लम्बे समय से बीमार हैं ,आपके चक्र असंतुलित हो गए हैं ,शारीरिक संतुलन बिगड़ा हुआ है ,दब्बू अथवा हीन भावना से ग्रस्त हैं तो आपकी औरा अथवा आभामंडल नकारात्मक भी हो सकती है ,जिसके कारण लोग आपको नापसंद भी कर सकते हैं अथवा आप किसी को प्रभावित करने की कोसिस करें और वहा और बिदक जाए ,ऐसा भी संभव है इसके कारण |आभामंडल का सीधा सम्बन्ध सूक्ष्म शरीर से होता है और आप बाहर से किसी से कुछ भी कहें किन्तु आपका अवचेतन उसे हमेश विश्लेषित करके सूक्ष्मशरीर के माध्यम से आत्मा को बताता रहता है और तदनुरूप आपका औरा या आभ्मंडल निर्मित होता है |औरा या आभामंडल ,सूक्ष्मशरीर पर निर्भर करती है और सूक्ष्मशरीर चेतन के साथ ही अवचेतन से समस्त सूचनाएँ ग्रहण करता रहता है और तदनुरूप ही आपके चक्रों और आभामंडल का प्रभाव बन जाता है |...................................................................हर-हर महादेव  

सोमवार, 13 अप्रैल 2020

हीन भावना आपको असफल तो नहीं बना रही ?

हीन भावना के कारण असफल तो नहीं आप ?
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                          मनुष्य की भावना ,उसका व्यक्तित्व ,खुद को व्यक्त करने का तरीका ,व्यक्तिगत सोच ,उसकी सफलता असफलता में मुख्य कारक होता है |कुछ लोग ऐसे होते हैं जो कम योग्य होते हुए भी खुद को अच्छे तरीके से व्यक्त कर पाते हैं ,साहसी होते हैं ,अवसरों का अधिक लाभ उठा पाते हैं ,किसी का भी सामना करने ,बात चीत करने को तैयार रहते हैं इसलिए अधिक सफल भी हो जाते हैं |जबकि कुछ लोग अधिक योग्य होते हए भी खुद को व्यक्त नहीं कर पाते ,खुद को साबित नहीं कर पाते ,किसी के सामने जाने में ,वार्तालाप में घबराते हैं ,हिचकते हैं ,किसी के सामने पड़ने पर जो जानते हैं वह भी नहीं बता पाते ,अपने को कमतर मानते हुए अवसरों को छोड़ देते हैं और असफल रह जाते हैं |
                             कुछ लोग बहुत बुद्धिमान होते हैं ,एकांत में अकेले में उनकी समस्त बुद्धि ,योग्यता ,क्षमता काम करती है |अपने परिवार और मित्रों के बीच बहुत वाकपटु होते हैं ,अच्छा बहस भी कर लेते हैं ,परीक्षा में अच्छे नमबर भी लाते हैं किन्तु नौकरी ,आजीविका ,व्यवसाय में असफल या कम सफल हो जाते हैं |उनसे कम बुद्धिमान ,कम क्षमता वाला आगे निकल जाता है और वह पीछे रह जाते हैं |इसक कारण उनकी हीन भावना होती है |जब प्रतियोगिता ,सामने वार्तालाप की बारी आती है तो उन्हें अपनी क्षमता कम लगती है ,किसी को फेस करने में मानसिक दबाव में आ जाते हैं |अधिक प्रतियोगी देखकर या कई लोगों के सामने इंटरव्यू देते समय उन्हें लगता है उनका तो चयन होने से रहा ,इतने अधिक लोग प्रतियोगी हैं ,इतने बड़े बड़े डिग्री धारी हैं ,इतने बड़े बड़े सोर्स वाले हैं ,इतने धनवान ,उच्च वर्गीय लोग हैं ,इतने अच्छे विद्यालयों -कालेजों से पढ़े लोग हैं ,इनके सामने हमारी क्या बिसात ,हमारा तो चयन मुश्किल है |यह हीन भावना है |इस भावना के आते ही जो उन्हें आता रहता है ,जो उनकी योग्यता ,क्षमता है वह भी कम हो जाती है |कुछ भूल जाते है तो कुछ किसी के सामने पड़ने पर हकलाने लगते हैं |
                                  हम आपको अवचेतन की कार्यप्रणाली बताते हैं जो की अक्षरशः आपके जीवन पर सत्य उतरती है |यदि आप बार बार दोहराते रहें की यह काम आपसे नहीं होगा ,आपकी क्षमता से बाहर है तो कुछ दिनों में आपका अवचेतन यह मान लेगा की सचमुच आपने वह क्षमता नहीं है ,,जबकि सच्चाई यह होती है की आपमें वह योग्यता होती है किन्तु अपनी हीन भावना के कारण ,अपने को कमजोर मानने के कारण ,साहस की कमी के कारण ,परिस्थितितियों से घबराने के कारन आप खुद को कमतर मानते हैं और सोचते हैं की आपसे वह काम नहीं होगा |अवचेतन में बैठने पर जब कुछ उस प्रकार की परिस्थिति आएगी तो अवचेतन आपको कोई सलाह नहीं देगा या अचनत आपके मन में आयेगा की यह काम मुझसे नहीं होगा ,परिणाम यह होगा की जो आपको यद् होगा वह भी अवचेतन नहं बताएगा ,खुद की जानकारी तो नहीं ही देगा |जबकि अगर अवचेतन चाहे तो आपको आपके सैकड़ो जन्मो की जानकारी उपलब्ध करा सकता है और हर स्थिति में बेहतरीन सलाह दे सकता है आपको सफल बना सकता है |इस तरह यह हीन भावना ,खुद को कमतर मानने की भावना आपकी सफलता उन्नति को रोक देती है |
                          आपको किसी भी तरह के पद ,नौकरी ,व्यवसायिक गतिविधि के लिए वैसी सोच उत्पन्न करनी होती है |मैनेजर की परीक्षा खुद को मैनेजर मानकर देने पर ही सफल होगी ,,आई ए एस की परीक्षा खुद को आई ए एस मानकर देने पर ही सफल होगी ,मजदूर मानकर परीक्षा देने पर आपकी मानसिकता अधिकारी जैसी नहीं होगी अतः आप सफल नहीं होंगे |किसी को सूटेड बूटेड देखकर ,किसी की बड़ी गाडी ,अच्छे कपडे ,बड़ा पद देखकर आप दबाव में आये तो उसके सामने आपकी आवाज नहीं निकलेगी और जो आपकी योग्यता है वह सामने न आने से आप असफल होन्गे |आप पहले से एक निश्चित स्थिति में हैं ,इससे तो कोई और नीचे ले नहीं जाएगा ,फिर क्यों आप हीन भावना से ग्रस्त होते हैं ,क्यों खुद को कमजोर मानते हैं |क्यों न आप यह सोचें की जो होगा देखा जाएगा ,कोई आपको और तो नहीं ही गिरा देगा ,यहाँ नहीं तो कहीं और सही ,अगर आपमें क्षमता है तो सफलता जरुर मिलेगी |कोई बड़ा अधिकारी ,सूटेड बूटेड ,बड़ी ,गाडी ,बंगला ,पद वाला होगा तो अपने लिए आपको न तो कुछ दे देगा न आपका कुछ ले लेगा ,तो क्यों उससे घबराए |
                               यह विचार मात्र हैं ,,यह विचार आते ही आपकी हीन भावना ,आपकी हिचकिचाहट ,घबराहट कम हो जायेगी ,बोल्डनेस बढ़ जायेगी और आप सामना कर पायेंगे आप किसी का भी ,किसी परीक्षा का भी ,,,खुद को कम न मानिए तो आपकी पूरी योग्यता ,क्षमता बाहर आएगी और जो आपकी क्षमता योग्यता होगी और जितना भाग्य में होगा मिलेगा |हीन भावना ,खुद को कमतर मानने का मानसिक दबाव आपको प्रयास नहीं करने देता ,मानसिक रूप से कमजोर बनता है ,आपकी क्षमता को ,योग्यता को कम करता चला जाता है ,अवसरों का लाभ नहीं उठाने देता या उनके प्रति उदासीन बनता है |आप अपनी उन्नति ,के लिए दूसरों का मुंह देखते हैं की कोई मदद कर दे ,बजाय इसके की आप खुद आगे बढ़ अवसर पकड़ लें |आपको लगता है की आप सफल नहीं होंगे ,आप हिचकिचाते हैं डरते हैं |लड़ने से पहले ही हार मान लेते हैं जबकि आप जीत सकते हैं |यह मानसिकता ही अधिकतर लोगों की असफलता का कारण होती है ,जिसने इससे पार पा लिया वह अपनी योग्य का अपने भाग्य का पूरा पाता है और सफल रहता है |
                           यदि आप हीन भावना से ग्रस्त हैं ,खुद को कम मानते हैं ,खुद पर अविश्वास है ,या आपके किसी परिजन के साह ऐसी कोई समस्या है तो ,आप दो स्टारों पर कार्य करें |पहला यह की आप अपना अवचेतन सक्रिय करें ,उसे सुधारें |किसी मनोचिकित्सक ,या सलाहकार ककी मदद ले सकते हैं |कुछ शब्द उनके द्वारा बनवाएं ,उन शब्दों को उनके अनुसार बार बार दोहराएँ ,अवचेतन में बिठाएं |अपनी भावना बदलें ,सोच बदलें ,परिवर्तन अपने आप आने लगेंगे |आपकी हिचक ,डर ,हीनभावना ,समाप्त हो जायेगी |आप परिस्थितियों ,परीक्षा ,प्रतियोगिता अथवा लोगों का सामना कर पायेंगे ,खुद को व्यक्त कर पायेंगे ,खुद को साबित कर पायेंगे |दूसरा काम यह करें की किसी अच्छे ज्योतिषी की भी सलाह लें और पता करें की किसी ग्रह आदि के कारण तो आपमें भय उत्पन्न नहीं होता या लोगों या परिस्थितियों का सामना करने में आप नहीं डरते |या आप किसी अच्छे सम्बंधित महाविद्या साधक से बगलामुखी या काली का यन्त्र बनवाकर ,अभिमंत्रित कराकर ताबीज में धारण करें |इससे आपमें साहस ,बोल्डनेस उत्पन्न होगी और भय ,उत्साहहीनता ,आलस्य समाप्त होगी |आप भले यह सोचें की यन्त्र क्या करेगा किन्तु यह विशिष्ट शक्तियों से पूर्ण होने के कारण आतंरिक ऊर्जा उत्पन्न करता है जिससे परिवर्तन आते हैं |खुद को व्यक्त करने ,आतंरिक योग्यता निकालने में यह सहायक होते हैं |सामने वाले पर इनका अनुकूल प्रभाव पड़ता है |
                  यदि हीनभावना ,खुद को कम मानने ,खुद में कमी की भावना समाप्त हो जाए तो आप अधिक प्रयास कर पाते हैं ,हर स्थिति में खुद को ढालने ,हर स्थिति से संघर्ष करने ,हमेशा उन्नति करने और कहीं भी न हिचकिचाने वाले हो जाते हैं ,इससे आपकी सफलता कई गुना बढ़ जाती है |खुद को सक्षम मानिए ,खुद को व्यक्त कीजिये ,किसी भी स्थिति या व्यक्ति के पोजीसन के दबाव में न आकर खुद को साबित कीजिये ,अपना पूर्ण और शतप्रतिशत प्रयास कीजिये आप सफल होंगे |.............................................................हर-हर महादेव 

टोना -टोटका ,तंत्र क्रिया हटायें खुद से एक दिन में

 किये -कराये ,टोन -टोटके ,तंत्र क्रिया हटाने का उपाय 
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                                        हमारे समाज में कुछ लोग स्वाभाविक रूप से दूसरों को परेशान करने में सुख महसूस करने वाले होते हैं |कुछ ऐसे लोग होते हैं जिन्हें अपने सुख से ख़ुशी नहीं मिलती अपितु दुसरे को दुखी देखकर या दुसरे को दुःख देकर ख़ुशी मिलती है |कुछ अपने ही परिवार -रिश्तेदारी के लोग होते हैं जो हमें रोग -शोक ,बीमारी कष्ट में देखना चाहते हैं ,हमारी उन्नति रोकना चाहते हैं |यह सभी लोग अक्सर सामने न आकर टोन टोटकों का भी प्रयोग करते हैं |यह दूसरों पर रोग ,शोक ,दुःख -दरिद्रता का प्रकोप कर अथवा करा देते हैं |इसके लिए तांत्रिक का सहारा लेते हैं या खुद तांत्रिक क्रियाएं करते हैं |मूठ ,बाण ,मारण आदि तक की क्रियाएं यह लोग करते हैं ,टोन -टोटके तो बहुत आम हैं |यदि कोई ऐसा करके किसी को बीमार कर दे ,रोग दे दे ,शारीरिक समस्या दे दे तो इसका इलाज चाहे बड़े बड़े डाक्टर से ही क्यों न करवा लें लाभ नजर नहीं आता |कुछ तंत्र क्रियाएं तो व्यक्ति के हार्ट पर असर करके ठिकाने तक लगा देती हैं तो कुछ कैंसर जैसी जहरबाद रोग उत्पन्न कर देती हैं |हमने अनेक ऐसे रोगियों को देखा है जिन्हें ब्रह्म आदि भेजकर ब्रेन टी वी उत्पन्न करा दी गयी ,डाक्टर इलाज नहीं कर पाए जबकि पूजा से व्यक्ति ठीक हो गया |जिस प्रकार विष की औषधि विष से ही निकलती है उसी तरह तंत्र मंत्र की काट तंत्र मंत्र से ही संभव है |ऐसी परिस्थिति में जब कोई आप पर कुछ कर दे या करा दे तो आप कुछ प्रयोग खुद से कर सकते हैं ,यद्यपि बड़ी समस्या के लिए तो आपको अच्छे साधक की ही मदद लेनी होगी |
१. आपको लगता है की आप पर तंत्र क्रिया है और आप पर ठीक से दवा काम नहीं कर रही तो आप एक सकोरे या मिटटी के पात्र में गंगा जल भरकर प्रातः काल के समय इस गंगाजल को मन्त्र से १०८ बार अभिमंत्रित करें और पिए ,आप खुद नहीं कर सकते तो आपके परिवार का कोई व्यक्ति इसे करे |इससे कुकृत्य दूर होता है और व्यक्ति को आरोग्य प्राप्त होता है |
मंत्र - ॐ सं सां सिं सीं सु सूं सें सैं सों सौं सं सः वं वां विं वीं वुं वूं वें वैं वों वौं वं वः हँसः अमृत वर्च्चसे स्वाहा |
२. यदि आप शत्रु के अभिचार को नष्ट करना चाहते हैं ,व्यक्ति पर से हटाना चाहते हैं तो यह दूसरा प्रयोग आप कर सकते हैं |ताम्र पात्र में गंगाजल भरकर ,गंगाजल न मिल सके तो सात हैण्ड पम्प या सात कुएं के जल में तुलसी पत्र डालकर अपने हाथ में लें और भगवान् महामृत्युंजय शिव का स्मरण करते हुए इस मंत्र को सात बार पढकर जल में फूंक मारें और जल स्वयं पी लें |इस मन्त्र में मा तथा में के स्थान पर व्यक्ति स्वयम का नाम ले |
मन्त्र - मां भयात सर्वतोरक्ष श्रियं वर्धय सर्वदा | शरीरारोग्यं में देहि देव देव नमोस्तुते  |
३. यदि आपको लगता है की किसी पर या आप पर नकारात्मक ऊर्जा ,बुरी शक्ति ,भूत -प्रेत आदि का प्रभाव है तो इस मंत्र से १०८ बार गंगाजल अभिमंत्रित करके जिस किसी व्यक्ति को पिलाया जाएगा उसके शरीर से भूत -प्रेत -पिशाच ,नकारात्मक ऊर्जा ,बुरी शक्ति का प्रभाव कम होगा अथवा दूर हो जाएगा |रोग आदि का प्रभाव खत्म होगा और मानसिक स्थिति ,पागलपन ठीक होगा |  
मन्त्र - ॐ हं हाँ हिं हीं हुँ हूँ हें हैं हों हौं हं हः क्षं क्षां क्षिं क्षीं क्षुं क्षूं क्षें क्षैं क्षों क्षौ क्षं क्षः हं |
कई बार पुरानी जमीन ,मकान ,खँडहर ,घर में भूत प्रेत रहते हैं ,उस पर बहुत बड़ा मकान निर्मित करा दिया जाता है परन्तु फिर भूत -प्रेत उस मकान मालिक को और वहां रहने वालों को दुखी करते रहते हैं ,ऐसे में भी उपरोक्त मंत्र का ही प्रयोग किया जाता है |१२ अंगुल पलाश की लकड़ी की कील को उक्त मंत्र से १०००० बार अभिमंत्रित करके जिस घर में गाड़ दिया जाता है वहां से सभी प्रकार के स्थावर ,जंगम एवं कृत्रिम विष दूर हो जाते हैं तथा भूत -प्रेत ,पिशाच ,दुष्ट नर ,विषैले प्रभाव आदि की पीडाओं से मुक्ति मिल जाती है |यह प्रयोग हमारा अनुभूत है और हमने अनेक लोगों के मकानों में यह प्रयोग किया है तथा इसके परिणाम देखे हैं |
                         यह कुछ साधारण प्रयोग थे जो आप स्वयं कर सकते हैं और किये -कराये ,टोन -टोटके ,तांत्रिक अभिचार से मुक्त हो सकते हैं ,यद्यपि सारा खेल शक्ति संतुलन का होता है किन्तु यदि कोई सामान्य टोन टोटके लगातार कर रहा हो तो यह सभी प्रयोग कारगर हैं |अधिक उच्च शक्ति को कोई भेजा हो या सीधे कोई तांत्रिक in क्रियाओं में शामिल हो तब बड़ी क्रियाएं करनी होती हैं अथवा अच्छे साधक से सम्पर्क करना बेहतर होता है |हम एक और प्रयोग अपने अगले विडिओ में बताएँगे जिससे किसी भी तरह की तांत्रिक क्रिया हो उसे हटाया जा सकता है चाहे सीधे तांत्रिक हो क्यों न विरोध में हो |हमारा ब्लॉग tantricsolution.blogspot.com और हमारे वेबसाईट alaukik-shaktiya.xyz पर यह सभी प्रयोग प्रकाशित हैं पहले से जहाँ से आप इनका लिखित रूप पढ़ सकते हैं |.....................................................हर हर महादेव 

शुक्रवार, 13 मार्च 2020

रोग नहीं फिर भी बीमार हैं :: कारण क्या है ?

बीमारी नहीं ,फिर भी बीमार हैं तो ध्यान दीजिए 
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                        कभी कभी हमारे सामने ऐसी भी समस्याएं आती हैं ,जब व्यक्ति महसूस करता है कि वह बीमार है ,किंतु मेडिकल जांच में कोई रोग ,कोई समस्या नहीं निकलती ।व्यक्ति सालों साल बीमार रहता है पर न कोई दवा काम करती है न समझ आता है कि उसे हुआ क्या है ।डाक्टर कोई दिक्कत नहीं पाता ,व्यक्ति अस्वस्थ भी होता है ।धीरे धीरे व्यक्ति घर -परिवार ,समाज से कटता जाता है ,चिड़चिड़ा हो जाता है ,कमजोर होता जाता है ,दिनचर्या अव्यवस्थित हो जाती है ,न नींद ठीक से आती है न भूख ठीक से लगती है ।बुरे ख्याल ,बुरे सपने आते हैं ,हीन भावना ,निराशा घेरे रहती है और अंततः सचमुच रोगों का आक्रमण होने लगता है क्योंकि प्रतिरोधक क्षमता समाप्त हो जाती है ।
                                ऐसी स्थिति का समाधान विज्ञान के पास नहीं होता ,क्योकि भौतिक प्रमाणों पर आधुनिक विज्ञान आधारित होता है और यहाँ भौतिक प्रमाण मिलते नहीं ।यह समस्या नकारात्मक ऊर्जाओं से उतपन्न होती है ।यह नकारात्मक ऊर्जा ग्रह दोष से उतपन्न हुई हो सकती है ।पित्र दोष से उतपन्न हुई हो सकती है ।वास्तु दोष ,सीलन आदि से उतपन्न हुई हो सकती है ।पर्याप्त प्रकाश ,धुप न मिलने से हुई हो सकती है ।देवी देवताओं की पूजा में हुई गलतियों से हो सकती है ।कुलदेवी देवता की रुष्टता से उतपन्न हुई हो सकती है ।किसी द्वारा टोना टोटका करने से हुई हो सकती है ।अपने या अपने लोगों द्वारा बेहतरी के लिए किये गए कई उपाय ,कई टोटकों के व्यतिक्रम उतपन्न होने से हुई हो सकती है ।रास्ते में या अँधेरे अथवा दोपहरी में अकेले आते जाते किसी शक्ति से प्रभावित हो जाने से हुई हो सकती है ।कभी किसी शक्ति की खानदान में पूजा होती रही हो और उसे वर्तमान में बन्द कर दिया गया हो ।किसी जमीन में कुछ दबा हो सकता है जिस पर आज का मकान बना हो सकता है ।ये कुछ कारण ऐसी समस्या के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं ।
                        उपरोक्त कारण जरूरी नहीं की घर के सभी सदस्यों को प्रभावित करें ।किसी की ग्रह दशा कमजोर चल रही उसे पकड़ प्रभावित करना शुरू कर दिया ।कोई कमजोर दिल का है उसे प्रभावित जल्दी कर देते हैं ।किसी का ब्लड पतला हो उस पर प्रभाव जल्दी पड़ता है ।कोई भावुक एकांत प्रिय अधिक हो उसे जल्दी प्रभावित करते है ।कोई किसी परेशानी में चिंतित हो और आत्मबल कमजोर हो उसे प्रभावित करना शुरू कर सकते हैं ।किसी को लक्ष्य कर कोई शक्ति या अभिचार भेज दिया जाए ,कर दिया जाए तो ऐसा हो सकता है ।ऐसे अनेक कारण होते हैं कि घर का कोई एक ही व्यक्ति ऐसी समस्या से ग्रस्त हो सकता है ।कभी कभी परिवार के कई लोग एक ही तरह की समस्या से ग्रस्त हो सकते हैं ।कभी कभी रिश्तेदारी या खानदान में कई पीढ़ियों में एक सी समस्या दिख सकती है ।
                             ऐसी समस्याओं को सरसरी तौर पर नहीं देखना चाहिए ।जब तक मूल कारण नहीं मिलता समस्या समाधान नहीं हो सकता ।इसके लिए किसी उच्च जानकार की मदद लेनी चाहिए ।यहाँ वहां के टोटके उपाय नहीं आजमाने चाहिए न लगातार उपाय बदलना चाहिए ।मूल कारण पता करके बताए उपाय लगातार करने चाहिए ।उपायों के अतिरिक्त कुछ क्रियाएं ,सावधानियां व्यक्ति के स्वस्थ होने में मदद करती हैं ,इन्हें करना चाहिए ।जैसे व्यक्ति को पर्याप्त प्रकाश ,धुप आदि मिलना चाहिए ,घर में सीलन ,अँधेरा आदि नहीं रखना चाहिए ।व्यक्ति के मनोबल को बढ़ाना चाहिए ,उसे हमेशा आशावादी रखना चाहिए ।एकांत से ,अकेलेपन से बचाना चाहिए ।उसके प्रति व्यवहार सौहार्द्र पूर्ण रखना चाहिए ।उसे घूमने फिरने ,खेलने कूदने ,लोगों से मिलने जुलने को कहना चाहिए ।उसे व्यस्त रखना चाहिए ।उग्र और पराक्रमी देवी देवताओं की पूजा करवानी चाहिए ।प्रेरक कथाएं ,जोश पूर्ण कहानियां पढ़ने को प्रेरित करनी चाहिए ।इसके साथ योग्य ज्ञानी के बताए उपाय बिना तोड़ मरोड़ किये गम्भीरता से करने चाहिए ।.................................हर हर महादेव


आपके घर में किसी अदृश्य की अनुभूति तो नहीं होती ?

क्या आपके साथ ऐसा होता है 
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                            कभी कभी कुछ लोगों को अहसास होता है कि उनके आस पास कोई और भी है ,पर नजरें घुमाने पर कोई दिखाई नहीं देता ।कभी अकेले कमरे या एकांत में महसूस होता है कि कमरे में आपके अलावा भी कोई है जबकि वास्तव में सशरीर केवल आप वहां होते हैं ।ऐसा कभी एकाध बार तो बहुतों को महसूस होता है ,किंतु कुछ लोगों को बार बार या कई बार ऐसा महसूस होता है ।जिन्हें बार बार ऐसा महसूस होता है उसे कोई न कोई कमी या समस्या भी परेशान करती है ,चाहे घर परिवार की हो ,कमाई धंधे की हो ,सन्तान की हो ,स्वास्थ्य की हो या किसी और प्रकार की ।एकाध बार की अनुभूति तो भ्रम से भी हो सकती है ,किंतु बार बार का महसूस होना भ्रम नहीं होता ।इसके अपने कारण होते हैं ।यद्यपि यहाँ तक की समस्या बहुत गम्भीर नहीं होती ,क्योकि कोई प्रत्यक्ष शरीर को प्रभावित नहीं कर रहा होता ।
                             कभी कभी किसी किसी को महसूस होता है कि कोई उसे छू गया ,कभी किसी को महसूस होता है कि कोई आगे से चला गया ,कोई पीछे से चला गया ।कभी कभी पूजा करते समय भी ऐसा महसूस हो सकता है ।कभी किसी किसी को सोते समय अर्ध निद्रा में महसूस होता है कि कोई सीने पर आकर बैठ गया ,कभी किसी को लगता है कि कोई गला दबा रहा है ।कभी किसी को लगता है की कोई छाया सी आकर उस पर छा गयी या उसे दबा लिया ।यहाँ तक की स्थिति थोड़ी गम्भीर हो जाती है और यह किसी अशरीरी के जुड़ाव या प्रभाव की ओर संकेत करता है ।
                               कभी कभी किसी किसी को सोते समय अपने बिस्तर पर किसी की उपस्थिति महसूस होती है ।कभी कभी किसी किसी को सीधे स्पर्श भी महसूस होता है ।किसी को अंग विशेष तो किसी को हाथ ,किसी किसी को पूरा शरीर का स्पर्श महसूस होता है ।कुछ मामलों में देखा गया है कि कोई अशरीरी जी दिखाई तो नहीं देता पर जिसका अनुभव होता है ,किसी के साथ शारीरिक सम्बन्ध भी बनाता है ।किसी को इससे अपार कष्ट तो किसी को बेहद सुखद अनुभूति होती है ।कभी किसी गिर कर चोट खाने वाले को लगता है कि किसी ने अनायास धक्का दे दिया ,जबकि वहां कोई ऐसा नहीं होता ।यहाँ तक की स्थिति बेहद गम्भीर हो जाती है और इनका निराकरण बड़े बड़े स्वनाम धन्य तांत्रिक ,सिद्ध भी नहीं कर पाते ।
                                  उपरोक्त अनुभव विभिन्न क्रम की शक्तियों द्वारा व्यक्ति विशेष को प्रभावित करने के कारण होते हैं ।प्रथम चरण की अनुभूतियां सामान्य नकारात्मक शक्तियों जो घर परिवार के आस पास होती है उनके कारण होती हैं ।जबकि दूसरे तरह की अनुभूतियों और तीसरे तरह की अनुभूतियों के कई कारण हो सकते हैं ।यह शक्ति सम्पन्न शक्तियों के प्रभाव होते हैं जो किसी उद्देश्य से प्रभावित कर रही होती हैं ।द्वितीय और तृतीय प्रकार के मामलों में सामाय पूजा पाठ ,जप आदि काम नहीं करते ।तृतीय प्रकार में केवल अत्यंत उच्च शक्ति सम्पन्न साधक का ही प्रभाव पड़ता है ।यदि ऐसा कुछ महसूस हो तो बजाय खुद कोई उपाय करने के किसी अच्छे साधक ,तांत्रिक से सम्पर्क करना चाहिए ।खुद के छोटे मोटे उपाय ,पूजा जप आदि किसी शक्ति को छेड़कर छोड़ देने जैसे हो जाते हैं ,जिससे वह और अधिक उग्र हो क्षति की या प्रभावित कोशिश करता है ।अतः खूब सोच समझकर योग्य साधक के मार्गदर्शन में ही उपाय करने और करवाने चाहिए ....................................हर हर महादेव

हानिकारक शक्तियों से प्रभावित तो नहीं हैं आप ?

हानिकारक शक्तियों से प्रभावित तो नहीं हैं आप 
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                        प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा या शक्ति हमारे लिए लाभदायक और नकारात्मक उर्जा या शक्तिया नुक्सान करने वाली या परेशानी उत्पन्न करने वाली होती है ,,,यह समस्त प्रकृति दो प्रकार की शक्तियों या उर्जाओं से बनता है ,धनात्मक और रिनात्मक ,सूर्य और अपनी ऊर्जा से प्रकाशित ग्रह -नक्षत्रों से उत्पन्न होने वाली या प्राप्त होने वाली ऊर्जा धनात्मक मानी जाती है ,जबकि पृथ्वी और ग्रहों से उत्पन्न ऊर्जा या शक्ति प्रकृति के परिप्रेक्ष्य में ऋणात्मक होती है ,,यह दोनों ही उर्जाये हमारे लिए सकारात्मक ही होती हैं ,इन दोनों के संतुलन और प्राप्ति से ही समस्त प्राणी और जीव -वनस्पतियों की उत्पत्ति और स्थिति होती है ,,,इन प्राकृतिक शक्तियों के अतिरिक्त दो अन्य पारलौकिक शक्तिया व्यक्तियों को प्रभावित करती है ,सकारात्मक और नकारात्मक ,,सकारात्मक वह है जिनकी शक्ति आपके लिए लाभदायक है जैसे आपके ईष्ट ,आपके कुल देवता ,महाविद्यायें,देवी-देवता आदि और नकारात्मक वह है जो आपके लिए समस्या ही उत्पन्न करते है जैसे भूत-प्रेत-पिशाच-ब्रह्म राक्षस-जिन्न-शाकिनी-डाकिनी आदि ,
                          आज के समय में नकारात्मक ऊर्जा शक्तियों का प्रभाव सामान्यतया घरों परिवारों पर बहुत दिखने लगा है ,जबकि उन्हें पता ही नहीं होता की वे इनसे प्रभावित है ,उनके द्वारा बताये जाने वालो लक्षणों से प्रथम दृष्टया अकसर इनकी समस्या घरों में मिलती है ,इनके कारण वास्तु दोष ,घरों में सूर्य के प्रकाश की कमी ,गलत जगह गलत हिस्सों का बना होना ,पित्र दोष ,कुल देवता का दोष ,ईष्ट प्रबलता की कमी ,रहन-सहन की स्थिति ,विजातीयता ,धार्मिक श्रद्धा की कमी ,खुद की गलतियाँ ,प्रतिद्वंदिता ,अभिचार आदि हो सकते हैं ,
यदि घर से बाहर से घर पहुचने पर सर भारी हो जाए ,घर में अशांति का वातावरण हो ,कलह होता हो,पति-पत्नी में अनावश्यक अत्यधिक कलह हो ,पूजा-पाठ में मन न लगे ,पूजा पाठ से सदैव मन भागे ,पूजा पाठ करते समय सर भारी हो,लगे कोई आसपास है ,जम्हाई अधिक आये ,पूजा पाठ करने से दुर्घटनाएं या परेशानियां बढ़ जाएँ ,पूजा पाठ आदि धार्मिक क्रियाओं में अवरोध उत्पन्न हो ,बीमारियाँ अधिक होती हों ,आय-व्यय का संतुलन बिगड़ा हो ,आकस्मिक दुर्घटनाएं अधिक होती हों ,रोग हो किन्तु कारण पता न चले ,सदस्यों में मतभेद रहते हों ,मन हमेशा अशांत रहता हो ,खुशहाली न दिखे ,प्रगति रुकी लगे अथवा अवनति होने लगे ,संताने विरुद्ध जाने लगें ,संतान बिगड़ने लगे ,उनके भविष्य असुरक्षित होने लगे ,संतान हीनता की स्थिति हो ,अधिक त्वचा रोग आदि हों ,अपने ही घर में भय लगे ,लगे कोई और है आसपास ,अपशकुन हो ,अनावश्यक आग आदि लगे ,मांगलिक कार्यों में अवरोध उत्पन्न हो तो समझना चाहिए की घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश है, इस स्थिति में इनका पता लगाने का प्रयास करके इन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए |
                                  जब आपके कुल देवता /देवी को ठीक से पूजा न मिले तो वे नाराज हो सकते हैं अथवा निर्लिप्त हो सकते हैं ,कमजोर भी हो सकते हैं ,ऐसे में नकारात्मक ऊर्जा को रोकने वाली मुख्य शक्ति हट जाती है और वह परिवार पर प्रभावी हो सकती है,कभी कभी कुलदेवता की नाराजगी या निर्लिप्तता से या नकारात्मक ऊर्जा अधिक प्रबल होने से वह कुलदेवता या ईष्ट को दी जाने वाली पूजा खुद लेने लगती है जिससे उसकी शक्ति बढने लगती है और कुलदेवता/देवी कमजोर या रुष्ट होते जाते हैं और ईष्ट को भी पूजा नहीं मिलती है ,आपके ईष्ट कमजोर हों या कोई ईष्ट ही न हों या आप पूजा पाठ ठीक से न करते हों तो भी नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव घर में हो सकता है ,,किसी से दुश्मनी हो तो वह भी आभिचारिक क्रिया करके किसी नकारात्मक ऊर्जा को आप पर भेज सकता है ,,आपके घर में पित्र दोष है तो पितरों के साथ अन्य शक्तियां भी जुड़ जाती हैं जिन्हें आपके परिवार से कोई लगाव नहीं होता है ,पित्र भले नुक्सान कभी कभी न करें किन्तु साथ जुडी शक्तिया अवश्य अपनी अतृप्त इच्छाएं आपके परिवार या आप से पूर्ण करने का प्रयास करती हैं |ऐसी स्थिति में प्रत्यक्ष तो लगता है की ४ लोग घर में हैं किन्तु खर्च १० लोगों के बराबर होता है और कोई न कोई समस्या उत्पन्न होती ही रहती है |
                         कभी कभी कोई नकारात्मक शक्ति किसी पर आधिपत्य करके अपने को देवी या देवता बताती है ,और पूजा प्राप्त करने लगती है जिससे उसकी शक्ति तो बढती ही है, उसके निकाले जाने की भी संभावना कम हो जाती है |घर में अन्धेरा हो तो भी नकारात्मक शक्तिया घर में स्थान बना लेती हैं क्योकि ऐसी जगहों पर उन्हें अच्छा लगता है रहना ,,फलतः वे वहां रहने वालों के लिए समस्या उत्पन्न करते हैं |कभी कभी कोई नकारात्मक ऊर्जा आशक्तिवश भी किसी के पीछे लग जाती है और उससे अपनी अतृप्त वासनाएं पूर्ण करने का प्रयास करती है |कभी कभी किसी जमीन में नकारात्मक उर्जाओं का स्रोत होता है ,और उस पर मकान बना लेने पर वह वहां रहने वालों को परेशान करती है |कभी कभी बहुत अधिक दुर्घटनाएं अथवा हत्याएं भी किसी घर को इनका डेरा बना देते हैं ,यदि व्यक्ति को लगे की उसके घर में या उस पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव है तो उसे किसी योग्य जानकार व्यक्ति ,सिद्ध व्यक्ति या उच्च स्तर के तांत्रिक से मिलना चाहिए ,,इनसे मुक्ति का उपाय करना चाहिए ,पित्र दोष ,कुल देवत/देवी दोष ,ईष्ट दोष ,गृह दोष का उपचार करना चाहिए ................................................................हर-हर महादेव

आपकी समस्या ऐसी तो नहीं ?

आप परेशान हैं और आपकी समस्या ऐसी तो नहीं ?
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                     आपके जीवन में उलझनें ,समस्याएं ,कठिनाइयाँ ,असफलता ,विवाद ,अवनति है तो इनके कारण ग्रह दशा के साथ कुछ और भी शक्तियां हो सकती हैं |यदि बाहर से घर में पहुँचने पर सर भारी हो जाये ,घर में अशांति का वातावरण हो ,कलह होता हो ,पूजा पाठ व्यर्थ लगता हो या इनमे मन न लगता हो ,पूजा पाठ करने पर और समस्या बढ़ जाती हो ,पूजा पाठ करते समय सर भारी हो जाए अथवा जम्हाई ,निद्रा ,सुस्ती आये ,कभी लगे की कोई आसपास है ,पूजा पाठ करने से दुर्घटनाएं अथवा परेशानियां और बढ़ जाएँ ,पूजा पाठ अथवा धार्मिक अथवा मांगलिक क्रियाओं में अवरोध उतपन्न हो ,पति -पत्नी में अनावश्यक कलह हो तो मान लीजिए की आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा या शक्ति का प्रभाव है जिसका निराकरण आपकी पूजा पाठ से नहीं हो पा रहा ।
                               यदि घर में बार बार बीमारियों का आक्रमण हो रहा हो ,डाक्टर के अनुसार कोई बीमारी न हो किंतु फिर भी कोई सदस्य बीमार हो ,आय व्यय का संतुलन बिगड़ा हो ,आकस्मिक दुर्घटनाएं अधिक होती हों ,रोग हो किंतु कारण पता न चले ,सदस्यों में मतभेद हो ,मन हमेशा अशांत रहता हो ,सब ठीक लगने पर भी मन अशांत रहे अथवा अनजाना भय लगे ,घर में खुशहाली न दिखे जबकि सब सुविधा उपलब्ध हों ,प्रगति रुकी लगे अथवा अवनति होने लगे तो समझ लीजिए की आपके घर में किसी प्रकार की नकारात्मक शक्ति का प्रवेश हो चूका है ।
                         यदि सन्तान बिगड़ने लगे ,संतानें विरुद्ध जाने लगे ,उनके भविष्य असुरक्षित लगने लगे ,उनकी उन्नति यथायोग्य न हो पा रही हो अथवा घर में संतानहीनता की स्थिति उतपन्न हो ,संतानों के विवाह आदि मांगलिक कार्यों में व्यवधान आ रहे हों ,कभी अपने ही घर में भय लगे अथवा अकेले में लगे की कोई और है घर में या आसपास ,अधिक त्वचा रोग हो ,बार बार अपशकुन हो ,अनावश्यक आग आदि लगे ,नौकरी अथवा व्यवसाय में उन्नति रुक जाए ,कार्य व्यवसाय के प्रति उत्साहहीनता हो अथवा उसमे मन उचट जाए ,कर्मचारियों -सहयोगियों -अधिकारियों से मतभेद हो अधिक समय तक ,स्वभाव में कटुता अथवा चिड़चिड़ापन बना रहे ,असंतुष्टि हमेशा हावी रहे ,आय व्यय का संतुलन बिगड़ा रहे ,कर्ज हो जाए और उतर न पा रहा हो ,बार बार नौकरी अथवा काम छूट रहा हो और मन माफिक न मिल पा रहा हो तो समझिए आप और घर नकारात्मक शक्ति अथवा ऊर्जा से प्रभावित हैं ।
                               यदि आप द्वारा अक्सर अथवा रोज पूजा पाठ करने ,मंदिर आदि जाने ,धर्म कर्म करने ,सदाचार बरतने ,किसी का अहित न करने पर भी आप सुखी न हों ,आपके पत्नी -पति अथवा बच्चे सुखी न हों ,कन्याएं अपने ससुराल में और पुत्र अपने कार्य व्यवसाय परिवार में सुखी न हों ,किसी का वैवाहिक जीवन बिगड़ रहा तो किसी का व्यावसायिक जीवन ,किसी को संतान नहीं हो रही तो किसी की होकर भी योग्य बन रही ,कोई रोग से परेशान तो कोई शत्रु -दुर्घटना से तो मान लीजिये की समस्या पुरानी और गंभीर हो चुकी है जो अब पीढ़ियों को कष्ट देने लगी है |आपने समय पर ध्यान नहीं दिया था और आपकी ही गलती से आज आपकी पीढियां यह भुगत रही |कुछ ऐसे दोष हैं जो पूरे परिवार को कष्ट दे रहे अलग अलग रूपों में |
                              यह समस्या कुलदेवता / देवी दोष ,पित्र दोष ,स्थान दोष ,वास्तु दोष ,ग्रह दोष ,अभिचार दोष ,भूत प्रेत दोष ,पूजा पाठ में हुई गलतियों से उतपन्न विक्षोभ ,किसी वाह्य शक्ति के कुलदेवता आदि का स्थान लेने आदि से हो सकती है ।किसी पूर्वज द्वारा की गयी किसी गलती के कारण किसी शक्ति के परिवार को प्रभावित करने के कारण हो सकत है |किसी द्वारा अपनी समस्या किसी अन्य परिवार पर भेजने या उलटने से हो सकती है |किसी जमीन में दबी किसी शक्ति के रुष्ट होने से हो सकती है |किसी गलती के कारण किसी शक्ति के साथ लग जाने से हो सकती है |बेहतर है किसी अच्छे जानकार से विश्लेषण कराएं अथवा कुछ ऐसा उपाय करें की समस्या कहीं से भी हो समाप्त हो जाए ,क्योकि जितने लोगों से मिलेंगे उतने तरह के दोष बताए जा सकते हैं अगर वास्तविक जानकार बताने वाला न हुआ तो ।..................................हर हर महादेव

आपके पति या पत्नी पर टोना -टोटका तो नहीं हुआ ?

आपके पति या पत्नी पर टोना -टोटका तो नहीं हुआ ?
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                            एक कहावत है की ,किसी को अपने बच्चे और दुसरे की बीबी अधिक अच्छी लगती है या किसी को अपने बच्चे और दुसरे का पति ज्यादा सक्षम नजर आता है |तुलना और तर्क करते देखिये आपके यहाँ भी यह देखने को मिलेगा |पुरुष दुसरे की पत्नी को प्रशंसा और प्यार की दृष्टि से देखता मिलेगा तो पत्नी बार -बार किसी अन्य से आपकी तुलना करती मिलेगी |यह हर घर की कहानी है ,हालांकि इसके अपवाद भी होते हैं किन्तु यह सामान्यतया देखा ही जाता है |यहाँ तक तो सब सामान्य रहता है क्योकि यह मनुष्य का स्वभाव है |बहुत कम मिलेंगे जो खुद में या खुद से संतुष्ट रहें |समस्या तब उत्पन्न हो जाती है जब कोई अपनों से पूरी तरह या अधिक असंतुष्ट हो जाता है या अपने स्वभाव की कमियों से मजबूर हो जाता है |कोई किसी दुसरे की तरफ आकर्षित इतना हो जाता है की उसे पाने के लिए कोई भी प्रयास करने लगता है |कोई अपनी समस्या से तंग आकर किसी और को खुद से जोड़ने का प्रयास करता है |कोई अपनी तरक्की का हथियार किसी को बनाने का प्रयास करता है या कोई अपनी अतृप्त वासनाओं की पूर्ती का माध्यम किसी को बनाने का प्रयत्न करता है |
                      कुछ लोगों का स्वभाव भी होता है की उन्हें अपने से अधक दुसरे में रूचि होती है या कुछ लोगों का स्वभाव होता है की वह यहाँ वहां मुंह मारते घूमते रहते हैं |इन्हें जल्दी संतुष्टि नहीं मिलती अथवा इन्हें वास्तविक लगाव किसी से न होकर केवल स्वार्थ की भूख होती है |यह अपने मतलब के लिए तंत्र अभिचारों का सहारा ले सकते हैं जिससे यह इच्छित को पा सकें |कुछ लोग अपनों से असंतुष्ट होकर कभी -कभी दूसरी तरफ देखने लगते हैं तो कुछ लोग दूसरों से अधिक पाने की इच्छा में अपने के अलावा किसी दुसरे से भी जुड़ जाते हैं |कुछ लोग भावनात्मक मूर्ख भी होते हैं जो दुसरे द्वारा भावना उभारकर स्वार्थ सिद्धि का माध्यम बन जाते हैं |कुछ लोग दुसरे से इतना आकर्षित हो जाते हैं की उन्हें अपनों में कमियाँ ही कमियाँ नजर आने लगती हैं |यह स्थिति अधिक दिन रहने पर उनके अन्दर एक गहरा खालीपन उत्पन्न हो जाता है जो उन्हें कहीं भी संतुष्ट नहीं रहने देता और वह यहाँ वहां अथवा उसे पाने का प्रयत्न करते हैं जिसके प्रति आकर्षित हों अथवा जो उन्हें अपनों से अधिक सक्षम लगे |ऐसे लोग भी तंत्र अभिचारों का सहारा लेते हैं उस लक्ष्य को अथवा अपने लक्ष्यों को पाने के लिए |
                             कुछ लोग अपने आसपास के किसी को अथवा अपने सहकर्मी को अथवा अपने रिश्तेदार को अथवा अपने पडोसी को अथवा अपने क्लासमेट को देखकर उसमे इतने इंटरेस्टेड हो जाते हैं की उसे पाने का हर संभव प्रयत्न करते हैं ,यहाँ तक की यहाँ वहां तांत्रिकों के यहाँ दौड़ते रहते हैं |कोई -कोई तो किसी -किसी का कहीं निश्चित रिश्ता तक तुडवाने का प्रयत्न करता है तो कोई किन्ही पत्नी पत्नी के रिश्ते को तोडना चाहता है |कुछ लोग अपने बॉस ,उच्चाधिकारी अथवा उच्च स्तर के महिला /पुरुष को अपनी उन्नति का माध्यम बनाने के प्रयास में उन्हें वशीभूत करने का प्रयत्न करते हैं और तंत्र का सहारा लेते हैं |इससे होता यह है की व्यक्ति उनकी ओर आकर्षित होता है और अपने बीबी अथवा पति से उसका लगाव कम होने लगता है |अधिक प्रभाव होने पर व्यक्ति उस अभिचार करने वाले के बारे में पहले सोचता है और पति या पत्नी के बारे में बाद में |
                    उपरोक्त स्थितियों में ली गयी तांत्रिक प्रणालियों की क्षमता करने वाले पर निर्भर करती हैं की व्यक्ति कितना प्रभावित होता है ,किन्तु यह बिलकुल सत्य है की इनका अच्छा जानकार या अच्छी क्षमता रखने वाला साधक यह क्रियाये करवा सकता है |सभी क्रियाओं का ,यहाँ तक की टोटकों का भी कुछ प्रभाव तो हो ही जाता है ,जबकि मान्त्रिक अनुष्ठानों का प्रभाव अधिक होता है |परिणाम यह होता है की व्यक्ति दुसरे के तरफ आकर्षित हो अपनों से विमुख होने लगता है |वह खर्च भी दुसरे के लिए करता है और अपने बीबी ,बच्चों अथवा घर के दायित्व से मुंह मोड़ने लगता है |उसे अपनी पत्नी अच्छी नहीं लगती ,उसे उसमे कोई आकर्षण नजर नहीं आता |वह पत्नी और प्रेमिका की तुलना करता है और पत्नी को किसी लायक नहीं पाता ,भले पत्नी अधिक सुन्दर ,सक्षम और बुद्धिमान हो ,क्योकि व्यक्ति की बुद्धि पर तो अभिचार का पर्दा पड़ा होता है और वह आसक्ति में इतना डूबा होता है की उसे सही गलत का भान नहीं रहता |वह तर्क भी करता है तो खुद को ही सही मानता है |यदि अभिचार ग्रस्त स्त्री है तो उसे अपने पति में कमियां ही कमियां नजर आने लगती हैं ,वह पति से असंतुष्ट हो जाती है |दूसरा व्यक्ति उसे अधिक आकर्षक ,सक्षम और सुन्दर लगता है |वह उसकी ओर झुकती और अपनों से दूर होने लगती है |कुछ दिन में दूरियां बहुत बढ़ जाती हैं जो कभी कभी अलगाव का भी कारण बन सकती हैं अगर स्त्री सक्षम हुई तो ,अन्यथा कलह तो रोज आम हो जाती हैं |
                             एक समस्या इससे भी अधिक गंभीर देखि जाती है सामान्य जीवन में |लोग दुसरे की उन्नति से अधिक दुखी होते हैं बजाय अपने दुखों के |उन्हें दुसरे की ख़ुशी देखि नहीं जाती भले खुद उनके यहाँ कोई कमी न हो |कुछ लोग अपनी कमियां और कमजोरियां कम करने ,अपनी समस्या दूर करने की बजाय दुसरे को नीचे लाने का प्रयत्न भी करते देखे जाते हैं |यह सोचते हैं की भले हम नहीं उन्नति कर पा रहे किन्तु अगला भी नहीं करना चाहिए |वह कैसे अमसे आगे चला जाएगा |इस हेतु भी कुछ लोग अभिचार का सहारा लेकर दुःख-कष्ट -बीमारी का आक्रमण दूसरों पर करवा देते हैं अथवा कर देते हैं |अक्सर तोनो-टोटकों का सहारा लेते हैं |तांत्रिकों से जाकर कहते हैं की अमुक हमें परेशां कर रहा अथवा हमारे ऊपर टोन -टोटके कर रहा ,हमें भी कुछ ऐसा दे दीजिये या कर दीजिये की उसकी उन्नति रुक जाए या उसका नुक्सान हो |
                 सामान्य तांत्रिक यह नहीं देख पाता की व्यक्ति गलत बोल रहा है या सही ,वह कुछ क्रियाएं कर देता है या बता देता है बिना सोचे की इसका गलत उपयोग हो सकता है |इससे घर में पति-पत्नी और बच्चों पर कष्ट -रोग आ जाते हैं या नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न हो सकता है या वायव्य बाधाएं प्रभावित कर सकती हैं |घर में अशांति और दुःख उत्पन्न हो जाता है |कुछ लोग अपनी बीमारी का भी उतारा करके दुसरे को दे देते हैं |आप माने या न माने किन्तु यह होता है और उतारा जिसको दिया जाता है उसे वह बीमारी हो जाती है |कभी कभी उतारा करके सड़क-चौराहे पर रख दिया जाता है और उसको लांघने वाला उस सम्बंधित कष्ट की चपेट में आ जाता है |कभी कभी तो किसी स्त्री को बच्चे न होने पर उसका उतारा किसी अन्य स्त्री पर कर दिया जाता है |कभी किसी का दाम्पत्य जीवन सुखी न होने पर या किन्ही पत्नी -पति पर कोइ क्रिया होने पर उसका उतारा करके किसी अन्य को भी दे दिया जाता है |उपरोक्त सभी क्रियाये आप पर या आपके पति-पत्नी या बच्चों पर हो सकती हैं |अगर आपके कुलदेवता शशक्त नहीं हैं तो यह क्रियाएं आपको अधिक प्रभावित करती हैं |
                                                                    उपरोक्त समस्याएं अगर पहले से उत्पन्न हो चुकी हैं तब तो उन्हें समाप्त होने में समय लगता है और कभी कभी सक्षम तांत्रिक की मदद लेनी होती है किन्तु इनसे बचने का उपाय पहले से किया जा सकता है |यदि पति अथवा पत्नी अथवा बच्चों को किसी अच्छे साधक द्वारा उच्च और उग्र शक्तियों के यन्त्र बनाकर और उन्हें अच्छे से अभिमंत्रित करके धारण कराया जाए तो इस तरह होने वाली तांत्रिक क्रियाओं से बचाव हो जाता है |यदि समस्या उत्पन्न हो चुकी है और कोई अभिचार किया जा चूका है तो वह धीरे-धीरे कम हो जाता है और पुनः कोई क्रिया प्रभावित नहीं करती |यद्यपि इन कवचों की शक्ति साधक की शक्ति और अभिमंत्रित मन्त्रों की संख्या पर निर्भर करती हैं और गंभीर और विशेष लक्षित तांत्रिक क्रियाओं को रोक ही लें आवश्यक नहीं होता किन्तु सामान्य तांत्रिक क्रियाओं को यह रोक लेती हैं और व्यक्ति को इनसे प्रभावित होने से बचा लेती हैं अथवा धीरे -धीरे पहले की क्रियाओं के प्रभाव को समाप्त कर देती हैं |विशेष व्यक्ति को लक्ष्य कर की गयी गंभीर क्रियाओं की समाप्ति हेतु अच्छे तांत्रिक की मदद लेनी चाहिए |यदि पहले से सुरक्षा रहे तो ऐसी स्थिति बहुत कम ही आती है ,क्योकि ऐसी क्रियाओं के लिए खुद व्यक्ति को क्रियाएं करनी होती हैं |
                               जिन व्यक्तियों के घर परिवार में उपरोक्त समस्या नजर आये वे यह न मानें की यह अपने आप हो रहा है या विचार नहीं मिल रहे या यह व्यक्ति का स्वभाव होता है |अचानक अगर कोई परिवर्तन दिखे अथवा लगे की कोई किसी से जुड़ रहा है अथवा अपनों से विमुख हो रहा है तो इस पर जरुर ध्यान दें |यह अभिचार या वशीकरण-आकर्षण का प्रभाव हो सकता है |कोई आपका अहित चाहकर कोई क्रिया कर अथवा करवा सकता है |आप भले आधुनिकता और अपनी वैज्ञानिक समझ का लोहा मानते हुए इन्हें न मानें पर यह होता है और इनमे भी उसी वैज्ञानिक ऊर्जा की तकनिकी का उपयोग होता है जो रासायनिक और भौतिक क्रियाओं में होता है |यह सारा खेल ऊर्जा प्रक्षेपण और ऊर्जा ग्रहण का है |जिस पर पर जैसी ऊर्जा फेंकी जाती है उस पर वैसा प्रभाव होता है |तेज़ाब या आग या पानी फेंकने पर वह दीखता है पर तरंगों का प्रभाव दिखता नहीं होता अवश्य है |जैसे निश्चित ध्वनि आवृत्ति की तरंगे व्यक्ति को मौत भी दे सकती हैं ,जैसे विशेष सूर्य तरंगे व्यक्ति पर विशेष प्रभाव डालती हैं जैसे सौर तरंगें इलेक्ट्रानिक उपकरणों को प्रभावित कर देती हैं और दिखती नहीं उसी तरह यह तरंगे भी प्रभाव डाल देती हैं और दिखती नहीं |
                                                     अगर लगे की कोई समस्या है तब तो अवश्य ध्यान दीजिये ,नहीं दिखे तब भी पहले से सुरक्षा करके रखे |कब कौन क्या सोचे ,क्या करे कोई भरोसा नहीं |हर व्यक्ति खुद के स्वार्थ और दुसरे के सुख से चिंतित है |कोई आपके बारे में नहीं सोचता सब अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं |सुरक्षा कवच धारण करें और अपने प्रिय को धारण कराकर रखें ,कब कौन क्या क्रिया उसपर कर दे |इसके लिए भले खुद को आधुनिक समझते हों और आपको लगता हो की कवच पहनने से लोग आपको पिछड़ा न समझ लें ,भले इसे छिपाकर धारण करें और कराएं |क्योकि आने वाले कष्ट इस सोच से बड़े हो सकते हैं |इस हेतु काली ,बगलामुखी ,भैरव ,नृसिंह आदि शक्तियों के यन्त्र के साथ अभिचार रोकने और नष्ट करने वाली तांत्रिक वस्तुओं का उपयोग किया जाता है जो इस तरह के अभिचार के प्रभाव को क्रमशः कम करते हैं और कोई नया अभिचार होने से रोकते हैं |अगर समस्या उत्पन्न हो चुकी हो और कवच धारण आपका प्रियजन नहीं करता तो उसके तकिये आदि में इसे रखें अथवा उसे यह कहकर धारण कराएं की यह उसकी उन्नति और सुख के लिए है ,लोग आकर्षित और प्रभावित होंगे |इस तरह कहकर उसे धारण कराये |गंभीर समस्या उत्पन्न हो चुकी है तो अच्छे तांत्रिक की मदद लें तथा प्रति तांत्रिक क्रिया करें |अन्य उपाय उसके बताये अनुसार करें || [कवच के लिए दिए हुए मोबाइल नम्बर पर संपर्क किया जा सकता है ]|.........................................................हर-हर महादेव

दाम्पत्य जीवन में कलह के कारण

दाम्पत्य जीवन में कलह के कुछ कारण यह भी
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                             विवाह के पूर्व हर लड़के -लड़की के मन में अपने भावी वैवाहिक जीवन और पति /पत्नी को लेकर असंख्य कल्पनाएँ होती हैं ,अनेक भावनाएं होती हैं |कितना भी माडर्न परिवार हो अथवा रूढ़िवादी सभी अपने पति /पत्नी को सौम्य ,सरल ,सीधा ,बात मानने वाला /वाली ,प्यार करने वाला /वाली ,परिवार -खानदान की मर्यादा और संस्कार को समझने योग्य ,चरित्रवान कल्पित करते हैं |विवाह पूर्व कोई कलह ,विवाद ,ईगो ,चारित्रिक दोष की कल्पना नहीं कर पाता और सोचता /सोचती है की पति या पत्नी को अपने अनुकूल ढाल लेगा /लेगी |विवाह बाद 90% मामलों में इसका उल्टा हो जाता है |आधुनिक समय में लगभग २० प्रतिशत दम्पति अलग हो जाते हैं विभिन्न कारणों से और बचे 80 प्रतिशत में से 75 प्रतिशत एडजस्ट करते हैं ,केवल 5 प्रतिशत की लाइफ शान्ति से चल पाती है और वे यह कह सकते हैं की उनका पार्टनर सहयोगी है और वह संतुष्ट हैं |साथ रहने वाले अथवा अलग होने वाले दम्पतियों में कलह के ,दूरी के कारण यद्यपि अनेक होते हैं ,जैसे संस्कार का न मिलना ,विचारधारा ,स्वतंत्रता की इच्छा अथवा एक दुसरे से असंतुष्टि अथवा गंभीरता का अभाव आदि ,किन्तु इनके अलावा भी कुछ बड़े कारण हैं जो दम्पतियों में कलह ,दूरी ,मन मुटाव ,विवाद के कारण बनते हैं और जिन पर साबसे अधिक ध्यान देना चाहिए पर कोई पहले ध्यान देता नहीं है |
                          दाम्पत्य में कलह अथवा दूरी का एक कारण दोनों की ग्रह स्थितियां होती हैं ,जिससे उनकी प्रकृति ,चरित्र ,सोच ,बनावट आदि का निर्माण होता है |संस्कार और वातावरण माता -पिता और खानदान का दिया होता है जो वाह्य तौर पर व्यक्ति को एक परिधि में रखता है ,किन्तु जब बात खुद की आती है और स्वतंत्र सोच कार्य करने लगती है तब संस्कार ,वातावरण भूलने लगता है और जो बेसिक नेचर है वह सामने आने लगता है |यहाँ ग्रहों के कारण निर्मित स्वभाव ,सोच आदि सामने आती हैं और वह गंभीर प्रभाव डालते हैं जिससे तालमेल न बैठ पाने पर कलह ,कटुता ,विवाद का जन्म होता है और दूरी बनने लगती है |इसीलिए पूर्व से हमारे पूर्वजों से विवाह पूर्व ग्रह [कुंडली ]मिलान आदि की व्यवस्था की और इसकी गंभीरता को समझा |यद्यपि सभी के विवाह ऐसे हुए हों जरुरी नही पर बहुत में ऐसा होता था |पुराने समय में भी सब कुछ होता था पर समाज ऐसा था की लोग मजबूरी में एडजस्ट करके समय काट दिया करते थे ,पर आज समाज खुल गया है और लड़का -लडकी स्वतंत्र निर्णय ले रहे |गृह स्थितियां न मिलने से दाम्पत्य जल्दी टूट भी रहे |प्रेम विवाह के अक्सर टूट जाने अथवा कलह आदि का यह एक बड़ा कारण होता है |ग्रह स्थितियां मिलने पर भी दाम्पत्य न टूटे जरुरी नहीं पर उनके कारण अलग होते हैं फिर ,जिन्हें हम नीचे विश्लेषित करने का प्रयत्न कर रहे |
                                 दाम्पत्य में कलह ,कटुता ,दूरी ,विवाद का अथवा टूटने का सबसे प्रमुख कारण परिवार अथवा व्यक्तियों से जुडी नकारात्मक ऊर्जा होती है |यह नकारात्मकता वास्तु दोष से उत्पन्न हुई हो सकती है ,जमीन के अंदर की किसी वस्तु से उत्पन्न हुई हो सकती है ,कुल-देवता /देवी की सुरक्षा न मिलने से उत्पन्न हुई हो सकती है ,पितरों के असंतुष्ट होने से उत्पन्न हो सकती है ,किसी द्वारा पति या पत्नी पर या पूरे परिवार पर किसी टोने -टोटके से उत्पन्न हुई हो सकती है ,कहीं से कोई वायव्य बाधा जैसे भूत -प्रेत -जिन्न ,ब्रह्म आदि लडके -लडकी के साथ लगे होने पर उत्पन्न हुई हो सकती है ,किसी अन्य द्वारा लड़के या लड़की पर या पति -पत्नी पर वशीकरण या उच्चाटन या विद्वेषण की क्रिया से उत्पन्न हुई हो सकती है |संतान आदि की उत्पत्ति रोकने के लिए की गयी किसी क्रिया से उत्पन्न हुई हो सकती है |प्रतिद्वंदिता वश किये गए किसी अभिचार से उत्पन्न हुई हो सकती है ,किसी मकान या स्थान पर उपस्थित किसी नकारात्मक प्रभाव से उत्पन्न हुई हो सकती है ,चारित्रिक दोष के कारण किसी ऐसे से सम्बन्ध बनने पर उत्पन्न नकारात्मकता से उत्पन्न हुई हो सकती है जिससे औरा नकारात्मक हो जाए |आज के समय में यह बहुत बड़े कारण हो गए हैं कलह ,कटुता और दूरी के |आप माने या न माने पर ऐसे मामले हमारे पास अक्सर आ रहे ,जिससे अपने ब्लॉग पर हमें यह पोस्ट लिखने की प्रेरणा मिली ,ताकि आप समझ सकें और दाम्पत्य बिगड़ने पर उन्हें सुधार सकें |हम क्रमशः इन्हें विश्लेषित करते हैं की कैसे यह दाम्पत्य में परेशानी उत्पन्न करते हैं |
                             कुलदेवता /देवी की सुरक्षा न होने से किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा सीधे परिवार के व्यक्तियों को प्रभावित कर देते हैं जिससे व्यक्तियों को अनेक दिक्कते होने लगती हैं ,ईष्ट की पूजा आराध्य देवता तक नहीं पहुचती |पित्र असंतुष्ट या रुष्ट होने से अभाव और रोग -दुर्घटनाएं उत्पन्न होती हैं जिससे कलह -विवाद -मानसिक परेशानी उत्पन्न होते हैं |वास्तु दोष से अनेक शारीरिक -मानसिक -आर्थिक परेशानियां उत्पन्न होती हैं जिससे व्यक्ति उलझ कर अशांत रहता है और चिडचिडा अथवा रोगी हो जाता है | किसी द्वारा अगर परिवार या व्यक्तियों पर कोई अभिचार -टोना -टोटका कर दिया जाता है तो मानसिक -शारीरिक परेशानी उत्पन्न हो जाती है जिससे व्यक्ति अनमना हो जाता है और कलह होने लगती है ,कभी कभी तो कलह -कटुता के लिए ही अथवा पति -पत्नी तक को अलग करने को अभिचार कर दिए जाते हैं |ऐसे में व्यक्ति अथवा पति -पत्नी में हजार कमियां नजर आने लगती हैं ,उनमे बिना बात झगड़े हो जाते हैं और समझ का गंभीर अभाव हो जाता है |कभी कभी लोग प्रतिद्वंदिता वश भी किसी पर कोई तंत्र क्रिया कर देते हैं जिससे व्यक्ति के काम बिगड़ने लगते हैं ,दुर्घटनाएं होती हैं ,हानि होते हैं और व्यक्ति के स्वभाव में परिवर्तन आने से कलह होने लगती है |
                  कभी -कभी किसी -किसी लड़के अथवा लड़की के साथ कोई आत्मा विवाह पूर्व से अथवा बाद में आकर्षित हो जुड़ जाती है तथा अपनी इच्छाओं की पूर्ती का माध्यम बनाना चाहती है |ऐसे मामलों में जब भी पति पत्नी साथ होने की कोशिश करते हैं कोई न कोई बाधा उत्पन्न होती है |किन्ही मामलों में तो यह आत्मा पति अथवा पत्नी को दूर फेंक देता है |कभी कभी ऐसा भी होता है की यह पति या पत्नी को इतना रोगी बना देता है की वह उसके द्वारा प्रभावित व्यक्ति के लायक ही न बचे |कभी कभी यह संतान नहीं उत्पन्न होने देते जो अंततः कलह और दूरी का कारण बन जाता है |कभी कभी यह आत्मा अर्ध स्वप्न में सम्भोग तक करती हैं ,कभी कभी अकेले में अपनी स्पर्शानुभुती भी कराती हैं |ऐसे लोगों का दाम्पत्य जीवन अक्सर नष्ट हो जाता है क्योकि वह अपने पति अथवा पत्नी के प्रति विमुख हो जाता है या इस लायक ही नहीं रहता /रहती की वह पति /पत्नी को संतुष्ट रख सके |
                                    आज के समय में यह भी देखा जा रहा की लोग किसी लड़के या लड़की अथवा किसी के पति या पत्नी पर वशीकरण करवा दे रहे ,या कर रहे ताकि वह उनकी ओर आकृष्ट हो |इसका प्रभाव यह होता है की पति अथवा पत्नी की सोच अन्य दिशा में भटकने लगती है जिससे दाम्पत्य में कटुता -कलह -विवाद उत्पन्न होती है |कभी कभी तो दाम्पत्य टूट भी जाता है क्योकि दूसरा पार्टनर इसे विश्वासघात मान दूर हो जाता है ,दाम्पत्य न भी टूटे तो यह जीवन भर के लिए कटुता उत्पन्न कर देता है |कभी कभी कुछ लोग किन्ही को सुखी देख नहीं पाते और पति पत्नी को अलग करने का भी प्रयत्न करते हैं जिसके लिए वह उच्चाटन अथवा विद्वेषण जैसी क्रिया तक करवा देते हैं जिससे वे अलग हो जाएँ |इसमें करने या करवाने वालों के अलग अलग स्वार्थ हो सकते हैं अथवा दुश्मनी वश भी ऐसा हो सकता है |खुले समाज का एक दोष यह भी है की आज लोग शारीरिक सम्बन्ध के प्रति कम गंभीर हो गए हैं जिसका परिणाम यह होता है की कभी कभी किसी किसी से दुसरे की पति पत्नी से भी सम्बन्ध बन जा रहे |ऐसे में यदि व्यक्ति किसी गंभीर नकारात्मकता से ग्रस्त है और वह किसी से सम्बन्ध बना लेता है तो सामने वाला भी गंभीर नकारात्मकता से लिप्त हो जाता है |धीरे धीरे उसके शरीर का तेज नष्ट होने लगता है और उसकी औरा ऐसी हो जाती है की पति या पत्नी अनचाहे ही उससे दूरी बनाने लगते हैं जिससे कलह और दूरी बन जाती है |
                            प्रतिद्वंदिता में अथवा स्वार्थ में किये गए अभिचार -टोने -टोटके -वशीकरण -विद्वेषण -उच्चाटन की क्रिया हो या जमीन में दबी कोई नकारात्मक ऊर्जा हो या किसी मकान आदि में उपस्थित कोई नकारात्मक शक्ति हो अथवा पित्र दोष हों ,अथवा वास्तु दोष हो यह कुछ प्रभाव एक समान देते हैं जैसे चिंता ,तनाव ,दुर्घटनाएं ,हानि ,अपयश ,मानसिक चंचलता ,उद्विग्नता ,घबराहट ,मन न लगना ,घर में रहते सर भारी होना ,कुछ अच्छा न लगना ,एकांत पसंद अथवा बाहर अच्छा लगना ,संतान बिगड़ना ,रोग -बीमारी होना आदि |ऐसे में व्यक्ति जब खुद उलझा हो ,परेशान हो तो उसका स्वभाव -रुचियाँ बदल सकती हैं ,उसे बहुत कुछ अच्छा नहीं लग सकता ,वह दुसरे भावनाओं पर ध्यान नहीं दे पाता ,चिडचिडा हो सकता है ,फलतः कलह -कटुता उत्पन्न होने लगती है ,जो समय के साथ बढती जाती है |सीधे कोई नकारात्मक ऊर्जा प्रभावित कर रहा हो तब तो स्थिति ही विकत हो जाती है और एक दुसरे के प्रति नापसंदगी भी हो सकती है और दाम्पत्य टूट भी सकता है |विवाह पूर्व अच्छे खासे रहने वाले लड़के -लड़की विवाह बाद कलह कटुता में जीते दुखी हो जाते हैं इन नकारात्मक प्रभावों से |
                         अगर किन्ही व्यक्तियों के साथ अथवा पति-पत्नी के साथ ऐसा हो रहा ,आपस में नहीं बन रही ,कलह -कटुता -विवाद है तो उन्हें तुरंत कोई निर्णय लेने की बजाय पहले जानने की कोशिश करनी चाहिए की ऐसा हो क्यों रहा है |कही उपरोक्त कोई कारण तो नहीं जो उनके नैसर्गिक गुणों में परिवर्तन कर रहा ,स्वभाव अथवा शरीर प्रभावित कर रहा |किसी अच्छे ज्योतिषी से ग्रह स्थितियों की विवेचना करानी चाहिए |किसी अच्छे तांत्रिक से नकारात्मक प्रभावों की पड़ताल करानी चाहिए ,क्योकि इन्हें सुधारा जा सकता है |जीवन भर अलग होने की कसक से अथवा लड़ते -झगड़ते -घुटते जीने से अच्छा कारण जान उन्हें दूर करना और सुखी -संतुष्ट रह जीवन जीना है |हमने अधिकतर मामलों में ऐसे कारण पाए हैं अतः एक बार इन्हें जरुर समझना चाहिए |जरुरी नहीं की आप माडर्न हों ,अथवा बड़े फ़्लैट /बिल्डिग या पाश इलाके में रहते हों ,पैसे से ,आर्थिक रूप से समृद्ध हों तो आपको नकारात्मक प्रभाव छू ही नहीं सकते |हो सकता है उनकी प्रकृति अलग हो और वह किन्ही और रूप में आपको प्रभावित कर रहे हों |भाग्य से आप समृद्ध हों किन्तु नकारात्मकता किसी और रूप में प्रभावित कर रही हो |हो सकता है पति /पत्नी का स्वास्थ्य अनुकूल न हो ,स्वभाव न मिले ,चारित्रिक दोष उत्पन्न हो जाए ,एक दुसरे में रूचि न रहे ,स्वतंत्रता की भावना बढ़ जाए ,किसी और से जुड़ाव हो जाए आदि आदि |अतः कारण समझें और सुखी रहें |...........................................................हर-हर महादेव  

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020

कर्ज /ऋण क्यों नहीं ख़त्म होता ?

कर्ज की समस्या -हजार टोटके पर भी परिणाम शून्य क्यूँ ?
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कर्ज की समस्या :: टोटके -उपाय हजार फिर भी जस का तस
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कर्ज एक ऐसी समस्या है जिससे हर दस में से एक व्यक्ति कभी न कभी परेशान हो ही जाता है |धनवान होकर भी कभी कभी लोगों को कर्ज लेना पड़ जाता है ,गरीब की तो बात ही क्या ,उसे तो हमेशा जरूरत होती है धन की |अधिकतर कर्ज की समस्या से मध्यम वर्ग परेशान होता है |आधुनिक भौतिकता वादी संस्कृति में सुख सुविधाओं के लिए लोग कर्ज लेते हैं ,शिक्षा के लिए लेते हैं ताकि अच्छी उच्च शिक्षा प्राप्त के अच्छा जीवन जी सकें |मकान -दूकान -व्यवसाय के लिए कर्ज लेते हैं तो कभी डूबने से बचने की उम्मीद में कर्ज लेते हैं की कल स्थिति सुधर जायेगी और कर्ज उतार देंगे |आजकल तो बैंक भी खूब कर्ज देते हैं ,जबकि पहले साहूकार देते थे |दोनों ही तरह से शोषण तो होता ही है और जितना कर्ज उसका आधा तो व्याज भरना ही हो जाता है अगर समय से भी दिया तो |पर ऐसा कर पाना 90 प्रतिशत के लिए मुश्किल होता है |कर्ज ऐसा सर चढ़ के बोलता है की सामने का भोजन भी अच्छा नहीं लगता ,किसी की अच्छी बात भी अच्छी नहीं लगती |प्यार -मुहब्बत  -ख़ुशी सब गायब हो जाती है और सवार हो जाता है एक खामोश तनाव जो व्यक्तित्व को तोड़ डालता है जिससे व्यक्ति में योग्यता होते हुए भी वह अपना शतप्रतिशत कहीं नहीं दे पाता और हर समय अगले क़िस्त की या पूरे कर्ज की एक अनजानी चिंता और भय में अपना बहुमूल्य समय गवाने को मजबूर होता है |
यहाँ शुरू होती है कर्ज उतारने के अलौकिक उपायों की शुरुआत |जब अपनी क्षमता और सामने दिख रहे स्रोत से पूर्ती नहीं होती और कर्ज परेशान करता है तो व्यक्ति टोन -टोटकों ,ज्योतिषीय उपायों की ओर भागता है ताकि किसी तरह इस कर्ज के जाल से मुक्त हो सके ,पर ऐसा अक्सर नहीं हो पाता |कर्ज बढ़ता ही जाता है ,उपाय पर उपाय होते रहते हैं |धीरे -धीरे इन सबसे विश्वास उठता जाता है और तब स्थिति विस्फोटक हो जाती है |जब तक उपाय करता है कोई व्यक्ति तब तक उम्मीद का दामन पकडे रहता है और जीता रहता है पर जब उम्मीदें टूटती हैं और कोई सहारा नहीं नजर आता तो व्यक्ति कभी कभी आत्मघाती कदम उठाने तक को मजबूर हो जाता है |कभी कभी उपाय करते करते थक कर कहता है की सब बेकार है ,कुछ नहीं होता इन सबसे |जो भाग्य में है वाही होता है ,जबकि ऐसा होता नहीं ,जो भाग्य में है वाही तो नहीं मिल पा रहा और आप कहते हो की जो भाग्य में है वाही होगा |भाग्य में यह नहीं होता |अगर भाग्य में ऐसा होता तो आपको इतना कर्ज मिल ही नहीं पाता ,आपको उतना ही मिला होता है जितना आप चूका सको |
ऐसा नहीं की किये जाने वाले उपायों में शक्ति नहीं ,वह कार्य नहीं करते पर अक्सर होता यह है की ,जैसे डाक्टर ही जानता है की किस मर्ज में कौन सी दवा दी जाए जबकि बाजार तो दवाओं से पटा होता है उसी तरह केवल बहुत योग्य ही उपाय बताने वाला यह समझ पाता है की समस्या है कहाँ और किस तरह का उपाय प्रभावी हो पायेगा |लेकिन सामान्यतया होता यह है की नीम हकीम की तरह उपाय बताने वाले भी सामान्यतया इस तरह की विशेषज्ञता नहीं रखते और पकड़ नहीं पाते की वास्तविक समस्या है कहाँ ,क्यों कर्ज की स्थिति आई ,क्यों व्यक्ति नहीं चूका पा रहा कर्ज ,क्यों उसके आय में अवरोध है ,क्यों उसकी क्षमताएं कम हैं |वह तो कर्ज का नाम सूना और किताबों में लिखे टोटके पकड़ा देता है |विश्लेषण करने की न क्षमता है न वह जानता है इसके कारण |यहाँ जरूरत होती है मूल कारण पकड़ने की |
 हम कर्ज की स्थिति को देखते हैं तो पाते हैं की कर्ज आपको उतना ही मिल पाता है जितना आपके भाग्य में आय हो या जितना आप चूका सकते हों  |आपके भाग्य में अगर लाख रुपये मिलने हैं तो आपको कर्ज करोड़ रुपये कभी नहीं मिल सकता |क्योकि प्रकृति कभी असंतुलित कार्य नहीं करती ,वह हमेशा भाग्य में संतुलन बनाकर ही भेजती है अर्थात भाग्य में जितना देती है उतना ही आप कर्ज ले सकते हैं या आपको मिल सकता है उससे अधिक आप कितना भी प्रयास करें आपको नहीं मिलेगा |धनवान को ही अधिक कर्ज भी मिलता है और गरीब को कर्ज मिल नहीं पाता |इसका कारण सामने दिख रही आर्थिक स्थति ही नहीं होती ,इसका कारण यही भाग्य है जो जितना दे सकता है उतना ही आप कर्ज ले सकते हैं ताकि उसे भर सकें |प्रकृति भाग्य में कभी आत्महत्या वाली स्थिति नहीं रखती भले कुछ लोग अपने स्वबाव से किसी का कर्ज न दें या कोई अपनी कमियों से या अपने पूर्वजों की कमियों से अपने कर्ज न भर पाए |
कर्ज केवल उपायों से या टोटकों से नहीं भरा जा सकता अगर अधिक कर्ज है |कर्ज भरा जा सकता है आय के स्रोत बढाने से ,अपनी क्षमता की वृद्धि से ,अपने को नियंत्रित करने से |सामान्य उपाय -टोटके आय स्रोत बढाने ,आपकी क्षमता में वृद्धि के लिए नहीं होते |वह तो छोटी मोटी बाधाएं मात्र हटा सकते हैं ,छोटी मोटी नकारात्मकता हटा सकते हैं |जैसे हुआ आपको कैंसर है और टेबलेट दी जाए मात्र बुखार उतारने की |इससे कैंसर नहीं ठीक होगा ,तात्कालिक बुखार ही उतरेगा और कैंसर तो और बढ़ता ही जाएगा |ऐसा ही है टोटको -छोटे उपायों और नीम -हकीम उपाय बताने वालों के साथ जो कुकरमुत्ते की तरह उग आये हैं इंटरनेट पर |उपाय दर उपाय कराते जाते हैं फीस पर फीस लेते रहते हैं पर ठुक ठुक करवाते रहते हैं जबकि जरुरत हथौड़े की होती है |जहाँ जरुरत तलवार की हो वहां सुई काम नहीं करती ,वहां तो तलवार ही चाहिए होगा वर्ना कुरेदने से समस्या और बढ़ेगी ही |अतः आय के स्रोत बढाने और व्यक्ति की क्षमता में वृद्धि के उपाय किये जाने चाहिए जो की टोटकों और ज्योतिषीय छोटे मोटे उपायों से नहीं होता |स्तोत्र और टोटके इसके लिए अधिक प्रचलित हैं |स्तोत्र में आप किसी शक्ति से अपनी कर्ज उतारने की प्रार्थना करते हैं ,और टोटको से इसमे आ रही बाधा हटाने का कार्य होता है |इनकी अपनी ऊर्जा स्तर होती है |अगर बाधा या कर्ज अधिक हुआ तो यह सुई चूभोने जैसा काम कर जायेंगे ,समस्या पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं होगा |स्तोत्र में आप प्रार्थना करके करेंगे क्या उससे बाधा तो हटेगी नहीं |वह शक्ति छह कर भी कैसे दे पायेगा जब आपके भाग्य को किसी और शक्ति द्वारा बाधित किया जा रहा है |इस तरह इनसे बहुत फायदा अक्सर नहीं होता ,क्योकि तुलनात्मक अध्ययन बिना किये उपाय बताये गए होते हैं |कितनी शक्ति की जरुरत है यह ध्यान दिए बिना किया गया कोई भी प्रयास असफल होगा ही |दीवार गिराने को क्रेन की जरुरत है और आप उसे हाथ से थपथपाकर सोच रहे वह गिर जाएगा |
प्रकृति जब यह संतुलन बनाकर रखती है की आपको उतना ही कर्ज मिले जितना आप भर सकें तो आप उसे भर क्यों नहीं पाते |मतलब कहीं तो झोल है |क्या प्रकृति ऐसा नहीं करती |यह हो नहीं सकता |प्रकृति अन्याय नहीं करती |तब जरुर कहीं और समस्या है |आपके भाग्य के आय के अनुपात में कर्ज मिला या आपने उससे भी कम कर्ज लिया तब भी नहीं भर पा रहे ,इसका मतलब की आपके भाग्य में जो लिखा है वह आपको पूरा नहीं मिल पा रहा |अगर मिलता तो आप भर लेते |सामान्य ज्योतिषी और भाग्यवादी व्यक्ति इस बात को कत्तई नहीं मानेंगे की जो भाग्य में है उसे भी रोका जा सकता है ,किन्तु यह सत्य है की ऐसा होता है और आपके भाग्य का लिखा भी आपको अक्सर नहीं मिलता |अगर पूरा मिल जाता तो हर ज्योतिषी की बात सबके लिए सच हो जाती |किन्तु अधिकतर भविष्यवानियाँ आपके भविष्य की गलत निकल जाती हैं अगर वह आपके लिए शुभ हों जबकि अशुभ घटनाएँ अधिक सामने आती हैं जो की कुंडली तक नहीं बताती या जो भाग्य में कम होती है |
ऐसा होता है आपके नकारात्मक उर्जाओं से प्रभावित होने के कारण |विभिन्न प्रकार के दोष और हानिकारक उर्जायें आपको प्रभावित करती हैं और आपको आपके भाग्य में लिखे सभी लाभों तक नहीं पहुँचने देती |ऐसा वह आपमें ही कमी उत्पन्न कर करती हैं या आपके पारिवारिक माहौल ,आसपास के वातावरण को प्रभावित करती हैं |इसका परिणाम यह होता है की आपके भाग्य में कर्ज भर पाना लिखा है किन्तु आपकी आय इन प्रभावों के कारण रोक दी जा रही है |ऐसे में कर्ज उतारने के टोटके काम कैसे करेंगे |यहाँ तो जरुरत नकारात्मक ऊर्जा हटाने की है |आप कितना भी धन प्राप्ति के उपाय कर लें पर पायेंगे अपने भाग्य के अनुसार ही वह भी तब जब आप किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त होंगे |यदि यह प्रभाव हैं तो आप कितना भी धन प्राप्ति के उपाय कर लें आपको नहीं मिलेगा और कर्ज आप नहीं चूका पाएंगे |इन नकारात्मक उर्जाओं के प्रभाव से आपमें आलस्य ,प्रमाद ,उश्रृंखलता ,दुर्व्यसन ,लापरवाही ,बदजुबानी आदि कमियां भर गई है ,आपकी क्षमता कम हो गई है ,आप सही समय सही निर्णय नहीं कर पा रहे न उन्नति के सतत प्रयास कर पा रहे ,जबकि आपमें यह क्षमताएं हैं |आपका पारिवारिक माहौल बिगड़ गया है ,आसपास का वातावरण प्रभावित है नकारात्मक प्रभावों से जो आपको उन्नति की दिशा में कार्य नहीं करने दे रहा या जब अवसर अत है कोई न कोई समस्या कड़ी हो जाती है ,और आप उपाय कर रहे हैं कर्ज उतारने की ,आपको तो जरुँरत हैं नकारात्मक प्रभाव हटाने की जिससे आपकी क्षमता बढ़ सके और आप अपने भाग्य का बस पूरा पा सकें |आपका कर्ज खुद उतर जाएगा |
अगर आप कर्ज से परेशान हैं तो यहाँ -वहां मत दौडिए और यहाँ वहां लिखे टोन -टोटके मत कीजिये इससे आपकी समस्या गंभीर ह होगी और आप एक भ्रम में बंधे रहेंगे की आप इतने उपाय कर रहे हैं ,क्योकि न आपको पता है की समस्या है कहाँ और न उस टोटके लिखने वाले को की यह काम कहाँ करेगा और इसका प्रभाव क्या होगा |ध्यान दीजिये यदि आपको किसी प्रकार की ऊर्जा की जरुरत नहीं है और आप उसे उत्पन्न करते हैं तो वह कहीं न कहीं तो क्रिया करेगी ही |क्या पता उससे आपका अहित ही हो रहा हो या वह कोई और कमी उत्पन्न कर रही हो कहीं फायदा करने के साथ |सबसे अच्छा तरीका यह की आप पहले किसी विद्वान् ज्योतिषी से मिलिए व्यक्तिगत रूप से और उससे अपनी कुंडली पर डिस्कस कीजिये |जो ग्रह खराब हो उसका उपाय कीजिये ,कर्ज उतारने का उपाय मत कीजिये बिना सोचे समझे |ग्रह का उपाय अधिक बेहतर होगा |दूसरा आप किसी अच्छे तांत्रिक की मदद लीजिये ,हाँ केवल मदद लीजिये उनसे कोई उपाय करने को मत कहिये |उनसे नकारात्मक ऊर्जा की स्थिति देखने को कहिये और उपाय बताने को कहिये [[ यदि तांत्रिक जानकार है तो आपके फोटोग्राफ को देखकर वह नकारात्मक ऊर्जा की प्रकृति को भांप लेगा और तदनुकूल उपाय बता देगा ]],उपाय करेंगे उपाय आप खुद |इससे बड़ा फायदा होगा |एक तो यह की नकारात्मक ऊर्जा हट जायेगी ,दुसरे आपकी क्षमता बढ़ जायेगी जो हमेशा आपके काम आएगी |यहाँ आप पूजा की बजाय साधना ,उपासना को प्राथमिकता दीजिये |ध्यान रहे ,पूजा ,आराधना ,उपासना और साधना में बड़ा अंतर है |पूजा ,आराधना श्रद्धा और समर्पण की प्रक्रिया है |जबकि साधना ,उस सम्बंधित शक्ति को खुद में अंगीकार करने की प्रक्रिया है |आप साधना कीजिये ,यही आपकी क्षमता भी बढ़ाएगा और आपके आसपास सहित पारिवारिक नकारात्मकता को भी समाप्त करेगा |इसके लिए विशेषज्ञ की जरुँरत होगी |इसके बाद आप चाहें तो धन संबन्धिन क्रयाएँ ,टोटके ,उपाय भी कर सकते हैं यद्यपि इसकी जरुँरत होगी नहीं |इस तरह आपके कर्ज भी उतर जायेंगे और फिर कभी आपको किसी कर्ज की न जरुँरत होगी न ऐसी स्थिति ही आएगी |आप हर समस्या से खुद निकलने में सक्षम होंगे बजाय यहाँ वहां दौड़ने के ,क्योकि आपकी क्षमताएं पूरी तरह कार्य करेंगी और आपके भाग्य का आपको पूरा मिलेगा |......................................................................हर -हर महादेव

क्या आप और आपका बच्चा सुरक्षित है ?

बच्चे और अपनी सुरक्षा पर ध्यान दें
ताकि आप और बच्चा सुरक्षित रहें
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आज के समय में सुरक्षा को लेकर हर व्यक्ति कहीं न कहीं से परेशान रहता है |घर और बाहर की भौतिक की व्यक्तियों से सुरक्षा तो व्यक्ति कर लेता है क्योकि वह अपने स्थान और स्तर के अनुसार जानता है की उसे कहाँ और कैसी सुरक्षा चाहिए |किन्तु वह ऐसे व्यक्तियों ,प्रभावों अथवा अभिचारों से सुरक्षित नहीं हो पाता जो दिखाई न दे ,जो समझ में न आये ,जो केवल नज़रों से अथवा छोटी क्रियाओं से असुरक्षित कर दें |यह अभिचार हो सकते हैं ,नजर दोष हो सकते हैं ,अनायास आकर्षित कोई वायव्य बाधा हो सकती है |इनसे प्रभावित होने पर कुछ स्पष्ट न दिखने पर भी समस्या होती है ,स्वास्थ्य प्रभावित होता है ,मानसिक स्तर प्रभावित होता है और कभी कभी जान के खतरे भी उत्पन्न हो जाते हैं |यह सब अधिकतर महिलाओं और बच्चों के साथ होता है ,क्योकि यह भावुक होते हैं ,इनका आत्मबल कमजोर होता है ,इनका ब्लड पतला होता है ,यह जल्दी प्रभावित हो जाते हैं |
अक्सर लोगों को नजर लगाने वाले अपने होते हैं ,अक्सर अभिचार करने करने वाले नजदीकी ही होते हैं जिनकी पहुँच आप तक हो और जो आपसे जलन या ईर्ष्या रखते हों |कुछ ऐसे भी अपने या नजदीकी होते हैं जो आपकी सही तरीके से हो रही उन्नति भी नहीं देख पाते और चाहते हैं की आप उन्नति न कर पायें ,आपकी उन्नति रुक जाए ,अथवा आप उनसे आगे न निकल पायें ,भले आपमें क्षमता अधिक हो और आप अधिक मेहनत करते हों |कुछ सहकर्मी अथवा व्यावसायिक प्रतिद्वंदी भी सामने आने से बचते हुए आपका अहित करने के लिए अभिचार का सहारा लेते हैं |कुछ पडोसी और नजदीकी भी छोटी छोटी बातों पर रुष्ट होकर आपका अहित करने के लिए टोटकों -टोनों- अभिचार का सहारा लेते हैं |कभी -कभी अपनी भी नजर अपने ही बच्चों को लग जाती है |कभी कभी -कोई कोई काली जुबान का होता है अथवा उनकी नज़रों में विशेष तीक्ष्णता होती है ,उनके कहने अथवा देखने मात्र से आप अथवा बच्चा प्रभावित हो जाता है |
कभी -कभी ऐसे मामले हमारे पास आते हैं की  किसी अपने अथवा नजदीकी ने ही जलन -ईर्ष्या वश किसी बच्चे पर कुछ टोटके /टोन करवा दिए जिससे बच्चे का मन पढ़ाई से उचाट जाए ,उसकी उन्नति रुक जाए ,वह बीमार हो जाए जिससे आपकी पारिवारिक वृद्धि और उन्नति प्रभावित हो |आप कैसे उन्नति कर रहे जबकि उनका बच्चा अथवा वह नहीं कर रहे या आप किसी तरह से आगे न बढ़ पायें |कभी कभी ऐसा भी देखा जाता है की कुछ लोग अपने बच्चे की समस्या का उतारा करके किसी नजदीकी के बच्चे पर क्रिया कर देते हैं और वह निर्दोष बच्चा पीड़ित हो जाता है |कुछ लोग दुशमनी अथवा विरोध बस किसी के बच्चे की बुद्धि और स्वास्थय बिगाड़ने का भी प्रयत्न करते हैं |अगर सीधे बरगलाने पर अथवा माँ बाप के विरिद्ध करने पर बच्चा नहीं मानता तो तंत्र क्रियाओं के सहारे बच्चे को अपने से मिला लेते हैं और माँ बाप -परिवार के विरुद्ध कर देते हैं या उसमे दुर्व्यसन अथवा गलत आदतें उत्पन्न कर देते हैं |आपको शायद इस सब पर यकींन न हो किन्तु ऐसा होता है और हमारे पास ऐसे बहुत से मामले आते हैं |ऐसे बच्चों की नींद प्रभावित होती है |उन्हें भय अँधेरे अथवा अकेले में लग सकता है |अचानक उनका स्वभाव बिगड़ सकता है अथवा उग्र हो सकता है |अक्सर ऐसे कार्य करते हैं जो माँ बाप के स्वभाव और परिवार के संस्कारों से मेल नहीं खाता |बुरी संगत ,बुरी आदतें अच्छी लगती हैं बुरी लत लग जाती है |
कभी कभी कुछ लोगों की की हुई आपकी बड़ाई भी आपको लग जाती है और आपका उस बड़ाई से सम्बंधित क्षेत्र में नुक्सान होने लगता है |कभी -कभी कोई कह देता है की अरे आज तो बहुत अच्छे लग रहे हैं ,अथवा बहुत तेज दिमाग है ,बहुत अच्छी सफलता पा रहा है |यह प्रशंशा का भाव भी कभी आपको अथवा आपके बच्चे को लग जाता है और स्वास्थ्य बिगड़ जाता है या पढ़ाई लिखाई से मन उचाट जाता है अथवा प्रशंसा के क्षेत्र में असफलता मिलने लगती है |यदि गर्भ में बच्चा हो तो महिलाओं के वायव्य बाधाओं से प्रभावित होने की बहुत अधिक सम्भावना होती है |कहीं सुनसान अथवा एकांत अथवा तेज दोपहर अथवा अकेले रात्री में इनके डरने और प्रभावित होने की संभावना होती है |इस समय बच्चे को भी खतरा होता है |वायव्य आत्माएं ऐसी महिलाओं की ओर आकर्षित होती हैं ,जिनमे कुछ की प्रवृत्ति बच्चे के लिए घातक होती है |यह डराने और नुकसान का प्रयास करती हैं |आज के आधुनिक युग में लोग भले न माने पर पुराने समय में इसीलिए घर की बुजुर्ज महिलाए और पुरुष इसे समझते हुए विशेष ध्यान देते थे |
यह सब नजर का दुष्प्रभाव ,जबान का दुष्प्रभाव ,अभिचार अथवा टोन -टोटकों का दुष्प्रभाव हो सकता है ,जो दिखाई नहीं देता |चूंकि इनका पता स्पष्ट रूप से नहीं चलता और करने वाले का पता भी नहीं होता ,इसलिए समझ में नहीं आता और क्षति होती रहती है |पढ़े -लिखे और ज्यादा शिक्षित आधुनिक कहे जाने वाले लोग ही इनसे अधिक प्रभावित होते हैं क्योकि बह मानते नहीं इन्हें और उनकी समझ में यह सब आता ही नहीं |वह तो हर बात के लिए डाक्टर के यहाँ भागते हैं जहाँ इनका कोई इलाज होता नहीं |कभी -कभी तो डाक्टर के अनुसार कुछ होता ही नहीं फिर भी बच्चा या आप बीमार होते हैं |आज के आधुनिक लोगों में ही गर्भपात की समस्या बहुत अधिक है ,गर्भ में बच्चे के ख़तम होने की समस्या अधिक है |बच्चों के बिगड़ने की समस्या अधिक है ,जबकि अशिक्षित कहे जाने वाले अथवा ग्रामीण अथवा पुराने संस्कारों के परिवारों में लोगों के कई कई बच्चे होते हैं ,सब सुरक्षित रहते हैं |माँ और बच्चा दोनों गर्भावस्था में भी सुरक्षित होते हैं और बाद में भी |वह स्वस्थ भी रहते हैं ,क्यों ,क्योंकि वह इन सब बातों को जानते हैं ,समझते हैं और उपाय करते हैं |
यद्यपि जो समस्या से पहले से उत्पन्न कर दी गयी हो उसके समाप्त होने में तो समय लगता है और अचानक उसे समाप्त नहीं किया जा सकता ,किन्तु आगे ऐसी समस्या कम आये ऐसा उपाय पहले से किया जा सकता है |इसके लिए अपने घर के बच्चों को ,महिलाओं को ,गर्भवती महिलाओं को कवच /ताबीज जरुर पहनाना चाहिए |ताकि उनपर नजर ,अभिचार ,टोन-टोटके ,वायव्य -भूत -प्रेत अथवा अनचाही -अनजान आत्मा या शक्ति का प्रभाव रोका जा सके ,जो उनका नुकसान कर सकता हो |उन नजदीकी लोगों ,पड़ोसियों ,रिश्तेदारों अथवा विरोधियों से सुरक्षा रहे जो आपसे जलन -ईर्ष्यावश आपके यहाँ अभिचार कर सकते हों |आपके बच्चे की उन्नति रोक सकते हों ,आपको कष्ट दे सकते हों |इसके लिए सुरक्षा कवच /ताबीज सबसे बेहतर उपाय है जो इस तरह की बाधाओं से बचाता है |किसी अच्छे तंत्र साधक से बनवाया और अभिमंत्रित किया हुआ कवच उन्नति और स्वास्थ्य में उत्पन्न बाधाओं को रोकता  भी है और शमन भी करता है |जिस साधक के जैसे ईष्ट हों वह उस तरह की शक्ति का उपयोग इन ताबीज में करता है ,जैसे हम भगवती काली की कृपा का उपयोग करते हैं
|इस तरह के ताबीजों /कवच में ईष्ट की शक्ति के साथ विभिन्न नजर दोष निवारक ,अभिचार रक्षक /निवारक ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा देने वाली तांत्रिक वस्तुओं का उपयोग होता है जिन्हें विशिष्ट तांत्रिक मुहूर्तों में निकालकर या प्राप्त कर ,अभिमंत्रित करके ,प्राण प्रतिष्ठित करके भरा जाता है |उसके बाद व्यक्ति के नाम से अभिमंत्रित भी किया जा सकता है और सीधे भी उपयोग में लिया जा सकता है |यद्यपि इस तरह के सुरक्षा कवच का निर्माण हम खुद भी करते हैं किन्तु व्यक्ति इसे किसी भी अच्छे साधक से बनवाकर अपने प्रियजन को धारण करा सकता है जिससे वह सुरक्षित -स्वस्थ रह उन्नति कर सकें और अपने भाग्य का पा सकें ,कोई उनके भाग्य का लिखा पाने में बाधा न उत्पन्न करे |व्यक्ति की सुविधा और विश्वास सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है |पोस्ट का उद्देश्य अपने ब्लॉग अपने दोनों फेसबुक पेजों के पाठकों को जागरूक करना तथा उन्हें इन समस्याओं के बारे में बताना है ,क्योकि इस तरह की समस्याएं हमारे सामने पीड़ित लोगों द्वारा अक्सर लाइ जाती हैं |यदि आपको आपके आसपास कोई इस तरह का साधक नहीं मिलता तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं |..........................................................हर-हर महादेव

रविवार, 2 फ़रवरी 2020

पूजा में विघ्न और नकारात्मक शक्तियां

नकारात्मक ऊर्जा की छाया हो तो पूजा में भी बाधा पड़ती है 
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                        सामान्यतया हममें जो भी आस्तिक हैं ,वे अपने घर-परिवार-कार्यस्थल आदि पर सामान्य पूजा -पाठ करते रहते हैं ,ईश्वर में श्रद्धा रखते हैं और बिना किसी विशेष उद्देश्य के अपनी मंगलकामना के साथ अपनी क्षमता के अनुसार अपने ईष्ट आदि को प्रसन्न रखने का प्रयास भी करते हैं |मंदिर - दरगाह -गिरजाघर भी आते जाते रहते हैं |यहांतक तो सब सामान्य चलता रहता है और कोई विशेष परिवर्तन नहीं महसूस होता ,जो भाग्य में है ,जो ग्रह स्थितियां होती हैं मिलता है ,कभी कम कभी पूरा [अधिक किसी को नहीं मिलता ,कम भले मिल जाए ],सामान्य व्यक्ति समझ भी नहीं पता की कम मिल रहा है या पूरा |किन्तु जब कभी किसी विशिष्ट उद्देश्य के साथ ,संकल्पित हो कोई पूजा-अनुष्ठान-साधना शुरू की जाती है अनेकानेक बाधाएं शुरू हो जाती हैं ,घर में कलह हो सकता है ,कार्यों में व्यवधान हो सकता है ,दुर्घटनाएं हो सकती हैं ,अशुभ-अमंगल शकुन होने लगते हैं, पूजा-साधना के समय लगता है जैसे कोई और भी हो साथ में ,कोई आगे से चला गया -कोई पीछे से चला गया .कभी छाया सी महसूस हो सकती है ,कभी आग लग सकती है ,और भी बहुत कुछ डरावना हो सकता है , ऐसे में व्यक्ति घबरा जाता है और पूजा-साधना बीच में छोड़ने की सोचने लगता है |क्यों होता है ऐसा इस पर विचार करें तो कुछ कारण समझ में आते हैं |[अलौकिक शक्तियां पेज के अतिरिक्त अन्य कही भी प्रकाशित यह पोस्ट यहाँ से कापी -पेस्ट होगी ]
                               सबसे मुख्य कारण इसका होता है की जब आप पूजा-आराधना-साधना एक निश्चित संकल्प और पद्धति के साथ शुरू करते हैं तो मानसिक बल ,मंत्र ,पूजा पद्धति ,ईश्वरीय ऊर्जा के आगमन से सकारात्मक ऊर्जा का आसपास संचार होने लगता है ,,ऐसे में अगर आपके आसपास नकारात्मक ऊर्जा का संचार या छाया हुई तो उसे सकारात्मकता से कष्ट होता है और वह उत्पात या उपद्रव शुरू कर देता है जिससे उसकी उग्रता से स्थितियां उपद्रवकारी होने लगती हैं ,एक समस्या शुरू होने से दूसरी समस्याएं क्रमशः उत्पन्न होने लगती हैं और व्यक्ति घबरा जाता है और सोचने लगता है उससे जरुर गलती हो रही है और स्थितियां बिगड़ रही हैं ,पर मूल कारण वह नहीं समझ पाता की कोई और नहीं चाहता की परिवर्तन हो अतः वह ऐसा कर रहा है ,क्योकि परिवर्तन और सकारात्मकता के संचार से उसे स्थान छोड़ना पड़ जायेगा |यद्यपि इससे इनकार नहीं किया जा सकता की कभी कभी ऐसा पूजा-पाठ की गलतियों अथवा आ रही ऊर्जा को न संभाल पाने के कारण भी होता है |पर मुख्य कारण नकारात्मक ऊर्जा ही होती है |यह नकारात्मक ऊर्जा पित्र दोष हो सकता है ,बाहर से आई आत्माएं हो सकती हैं ,पितरों के साथ जुडी कोई आत्मा हो सकती है ,किसी पर आसक्त कोई आत्मा हो सकती है ,वास्तु दोष के कारण उत्पन्न नकारात्मक उर्जायें हो सकती है ,तांत्रिक अभिचार के कारण आई नकारात्मक ऊर्जा हो सकती है अथवा अन्य किसी प्रकार की नकारात्मकता हो सकती है |
                         यदि परिवार की उन्नति रुक जाए ,अवनति दिखने लगे ,कलह-उपद्रव अनावश्यक हो ,कार्यों में व्यवधान हो ,अशुभ-अमंगल शकुन अधिक होने लगे ,बुरे स्वप्न आये ,सपनो में भय लगे ,कभी छाया आदि लगे आसपास या घर में ,बच्चे बिगड़ने लगे ,परिवार में सौमनस्य समाप्त होने लगे ,पति-पत्नी में अनावश्यक कलह हो ,शारीरिक स्वास्थय में अनावश्यक उतार-चढाव आये बार बार ,कोई बीमार भी हो और कारण भी न समझ में आये ,हर काम में असफलता मिलने लगे ,पैसे की आय पर्याप्त होने पर भी पूर्ती मुश्किल से हो ,समझ में न आये कहाँ खर्च हो रहे हैं ,आय-व्यय में असंतुलन आ जाए ,कर्जों की स्थिति आये ,बार-बार कार्य-व्यवसाय में उतार-चढाव,हानि-लाभ हो ,कहीं स्थिरता न रहे तो समझना चाहिए की आप किसी न किसी प्रकार से नकारात्मक उर्जाओं की चपेट में हैं और आपको इनका उपचार करना चाहिए |
                             इनके उपचार का सबसे अच्छा उपाय सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ाना है ,जिसका एक माध्यम पूजा-साधना है |यदि घर में या आप पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव है या उपरोक्त लक्षण घर में या आप पर हैं तो पूजा-साधना पर उपद्रव भी हो सकते हैं ,विघ्न आ सकते हैं ,अतः पहले से सोचे रहें की ऐसा होगा और सतर्क रहें ,अपने कार्य-व्यवहार को संतुलित रखे और विवादों से बचें ,एक बार जब साधना-अनुष्ठान शुरू कर दें तो बीच में कदापि न छोड़ें [ यह जरुर पहले सुनिश्चित कर लें की आप गलती से भी पूजा में गलती न करें ],कुछ दिन में सब सामान्य होने लगेगा और आपकी साधना-अनुष्ठान पूर्ण होने पर सफलता की भी आप उम्मीद कर सकते हैं |सकारात्मकता बढने से परिवर्तन जरुर होंगे और लाभ भी होंगे |.....................................................................हर-हर महादेव

नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव आप पर तो नहीं

आप पर या घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव हो सकता है 
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प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा या शक्ति हमारे लिए लाभदायक और नकारात्मक उर्जा या शक्तिया नुक्सान करने वाली या परेशानी उत्पन्न करने वाली होती है ,,,यह समस्त प्रकृति दो प्रकार की शक्तियों या उर्जाओं से बनता है ,धनात्मक और रिनात्मक ,सूर्य और अपनी ऊर्जा से प्रकाशित ग्रह -नक्षत्रों से उत्पन्न होने वाली या प्राप्त होने वाली ऊर्जा धनात्मक मानी जाती है ,जबकि पृथ्वी और ग्रहों से उत्पन्न ऊर्जा या शक्ति प्रकृति के परिप्रेक्ष्य में रिनात्मक होती है ,,यह दोनों ही उर्जाये हमारे लिए सकारात्मक ही होती हैं ,इन दोनों के संतुलन और प्राप्ति से ही समस्त प्राणी और जीव -वनस्पतियों की उत्पत्ति और स्थिति होती है ,,,इन प्राकृतिक शक्तियों के अतिरिक्त दो अन्य पारलौकिक शक्तिया व्यक्तियों को प्रभावित करती है ,सकारात्मक और नकारात्मक ,,सकारात्मक वह है जिनकी शक्ति आपके लिए लाभदायक है जैसे आपके ईष्ट ,आपके कुल देवता ,महाविद्यायें,देवी-देवता आदि और नकारात्मक वह है जो आपके लिए समस्या ही उत्पन्न करते है जैसे भूत-प्रेत-पिशाच-ब्रह्म राक्षस-जिन्न-शाकिनी-डाकिनी आदि ,
आज के समय में नकारात्मक ऊर्जा शक्तियों का प्रभाव सामान्यतया घरों परिवारों पर बहुत दिखने लगा है ,जबकि उन्हें पता ही नहीं होता की वे इनसे प्रभावित है ,उनके द्वारा बताये जाने वालो लक्षणों से प्रथम दृष्टया अकसर इनकी समस्या घरों में मिलती है ,इनके कारण वास्तु दोष ,घरों में सूर्य के प्रकाश की कमी ,गलत जगह गलत हिस्सों का बना होना ,पित्र दोष ,कुल देवता का दोष ,ईष्ट प्रबलता की कमी ,रहन-सहन की स्थिति ,विजातीयता ,धार्मिक श्रद्धा की कमी ,खुद की गलतियाँ ,प्रतिद्वंदिता ,अभिचार आदि हो सकते हैं ,
यदि घर से बाहर से घर पहुचने पर सर भारी हो जाए ,घर में अशांति का वातावरण हो ,कलह होता हो,पति-पत्नी में अनावश्यक अत्यधिक कलह हो ,पूजा-पाठ में मन न लगे ,पूजा पाठ से सदैव मन भागे ,पूजा पाठ करते समय सर भारी हो,लगे कोई आसपास है ,जम्हाई अधिक आये ,पूजा पाठ करने से दुर्घटनाएं या परेशानियां बढ़ जाएँ ,पूजा पाठ आदि धार्मिक क्रियाओं में अवरोध उत्पन्न हो ,बीमारियाँ अधिक होती हों ,आय-व्यय का संतुलन बिगड़ा हो ,आकस्मिक दुर्घटनाएं अधिक होती हों ,रोग हो किन्तु कारण पता न चले ,सदस्यों में मतभेद रहते हों ,मन हमेशा अशांत रहता हो ,खुशहाली न दिखे ,प्रगति रुकी लगे अथवा अवनति होने लगे ,संताने विरुद्ध जाने लगें ,संतान बिगड़ने लगे ,उनके भविष्य असुरक्षित होने लगे ,संतान हीनता की स्थिति हो ,अधिक त्वचा रोग आदि हों ,अपने ही घर में भय लगे ,लगे कोई और है आसपास ,अपशकुन हो ,अनावश्यक आग आदि लगे ,मांगलिक कार्यों में अवरोध उत्पन्न हो तो समझना चाहिए की घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश है, इस स्थिति में इनका पता लगाने का प्रयास करके इन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए |
जब आपके कुल देवता /देवी को ठीक से पूजा न मिले तो वे नाराज हो सकते हैं अथवा निर्लिप्त हो सकते हैं ,कमजोर भी हो सकते हैं ,ऐसे में नकारात्मक ऊर्जा को रोकने वाली मुख्य शक्ति हट जाती है और वह परिवार पर प्रभावी हो सकती है,कभी कभी कुलदेवता की नाराजगी या निर्लिप्तता से या नकारात्मक ऊर्जा अधिक प्रबल होने से वह कुलदेवता या ईष्ट को दी जाने वाली पूजा खुद लेने लगती है जिससे उसकी शक्ति बढने लगती है और कुलदेवता/देवी कमजोर या रुष्ट होते जाते हैं और ईष्ट को भी पूजा नहीं मिलती है ,आपके ईष्ट कमजोर हों या कोई ईष्ट ही न हों या आप पूजा पाठ ठीक से न करते हों तो भी नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव घर में हो सकता है ,,किसी से दुश्मनी हो तो वह भी आभिचारिक क्रिया करके किसी नकारात्मक ऊर्जा को आप पर भेज सकता है ,,आपके घर में पित्र दोष है तो पितरों के साथ अन्य शक्तियां भी जुड़ जाती हैं जिन्हें आपके परिवार से कोई लगाव नहीं होता है ,पित्र भले नुक्सान कभी कभी न करें किन्तु साथ जुडी शक्तिया अवश्य अपनी अतृप्त इच्छाएं आपके परिवार या आप से पूर्ण करने का प्रयास करती हैं ,,ऐसी स्थिति में प्रत्यक्ष तो लगता है की ४ लोग घर में हैं किन्तु खर्च १० लोगों के बराबर होता है और कोई न कोई समस्या उत्पन्न होती ही रहती है ,कभी कभी कोई नकारात्मक शक्ति किसी पर आधिपत्य करके अपने को देवी या देवता बताती है और पूजा प्राप्त करने लगती है जिससे उसकी शक्ति तो बढती ही है उसके निकाले जाने की भी संभावना कम हो जाती है ,,घर में अन्धेरा हो तो भी नकारात्मक शक्तिया घर में स्थान बना लेती हैं क्योकि ऐसी जगहों पर उन्हें अच्छा लगता है रहना ,फलतः वे वहां रहने वालों के लिए समस्या उत्पन्न करते हैं ,,कभी कभी कोई नकारात्मक ऊर्जा आशक्तिवश भी किसी के पीछे लग जाती है और उससे अपनी अतृप्त वासनाएं पूर्ण करने का प्रयास करती है ,,कभी कभी किसी जमीन में नकारात्मक उर्जाओं का स्रोत होता है और उस पर मकान बना लेने पर वह वहां रहने वालों को परेशान करती है ,,कभी कभी बहुत अधिक दुर्घटनाएं अथवा हत्याएं भी किसी घर को इनका डेरा बना देते हैं ,यदि व्यक्ति को लगे की उसके घर में या उस पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव है तो उसे किसी योग्य जानकार व्यक्ति ,सिद्ध व्यक्ति या उच्च स्तर के तांत्रिक से मिलना चाहिए ,,इनसे मुक्ति का उपाय करना चाहिए ,पित्र दोष ,कुल देवत/देवी दोष ,ईष्ट दोष ,गृह दोष का उपचार करना चाहिए ................................................................हर-हर महादेव

पति /पत्नी पर जादू /टोना

किसी ने आपके पति या पत्नी पर कुछ किया तो नहीं
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एक कहावत है की ,किसी को अपने बच्चे और दुसरे की बीबी अधिक अच्छी लगती है या किसी को अपने बच्चे और दुसरे का पति ज्यादा सक्षम नजर आता है |तुलना और तर्क करते देखिये आपके यहाँ भी यह देखने को मिलेगा |पुरुष दुसरे की पत्नी को प्रशंसा और प्यार की दृष्टि से देखता मिलेगा तो पत्नी बार -बार किसी अन्य से आपकी तुलना करती मिलेगी |यह हर घर की कहानी है ,हालांकि इसके अपवाद भी होते हैं किन्तु यह सामान्यतया देखा ही जाता है |यहाँ तक तो सब सामान्य रहता है क्योकि यह मनुष्य का स्वभाव है |बहुत कम मिलेंगे जो खुद में या खुद से संतुष्ट रहें |समस्या तब उत्पन्न हो जाती है जब कोई अपनों से पूरी तरह या अधिक असंतुष्ट हो जाता है या अपने स्वभाव की कमियों से मजबूर हो जाता है |कोई किसी दुसरे की तरफ आकर्षित इतना हो जाता है की उसे पाने के लिए कोई भी प्रयास करने लगता है |कोई अपनी समस्या से तंग आकर किसी और को खुद से जोड़ने का प्रयास करता है |कोई अपनी तरक्की का हथियार किसी को बनाने का प्रयास करता है या कोई अपनी अतृप्त वासनाओं की पूर्ती का माध्यम किसी को बनाने का प्रयत्न करता है |
कुछ लोगों का स्वभाव भी होता है की उन्हें अपने से अधक दुसरे में रूचि होती है या कुछ लोगों का स्वभाव होता है की वह यहाँ वहां मुंह मारते घूमते रहते हैं |इन्हें जल्दी संतुष्टि नहीं मिलती अथवा इन्हें वास्तविक लगाव किसी से न होकर केवल स्वार्थ की भूख होती है |यह अपने मतलब के लिए तंत्र अभिचारों का सहारा ले सकते हैं जिससे यह इच्छित को पा सकें |कुछ लोग अपनों से असंतुष्ट होकर कभी -कभी दूसरी तरफ देखने लगते हैं तो कुछ लोग दूसरों से अधिक पाने की इच्छा में अपने के अलावा किसी दुसरे से भी जुड़ जाते हैं |कुछ लोग भावनात्मक मूर्ख भी होते हैं जो दुसरे द्वारा भावना उभारकर स्वार्थ सिद्धि का माध्यम बन जाते हैं |कुछ लोग दुसरे से इतना आकर्षित हो जाते हैं की उन्हें अपनों में कमियाँ ही कमियाँ नजर आने लगती हैं |यह स्थिति अधिक दिन रहने पर उनके अन्दर एक गहरा खालीपन उत्पन्न हो जाता है जो उन्हें कहीं भी संतुष्ट नहीं रहने देता और वह यहाँ वहां अथवा उसे पाने का प्रयत्न करते हैं जिसके प्रति आकर्षित हों अथवा जो उन्हें अपनों से अधिक सक्षम लगे |ऐसे लोग भी तंत्र अभिचारों का सहारा लेते हैं उस लक्ष्य को अथवा अपने लक्ष्यों को पाने के लिए |
कुछ लोग अपने आसपास के किसी को अथवा अपने सहकर्मी को अथवा अपने रिश्तेदार को अथवा अपने पडोसी को अथवा अपने क्लासमेट को देखकर उसमे इतने इंटरेस्टेड हो जाते हैं की उसे पाने का हर संभव प्रयत्न करते हैं ,यहाँ तक की यहाँ वहां तांत्रिकों के यहाँ दौड़ते रहते हैं |कोई -कोई तो किसी -किसी का कहीं निश्चित रिश्ता तक तुडवाने का प्रयत्न करता है तो कोई किन्ही पत्नी पत्नी के रिश्ते को तोडना चाहता है |कुछ लोग अपने बॉस ,उच्चाधिकारी अथवा उच्च स्तर के महिला /पुरुष को अपनी उन्नति का माध्यम बनाने के प्रयास में उन्हें वशीभूत करने का प्रयत्न करते हैं और तंत्र का सहारा लेते हैं |इससे होता यह है की व्यक्ति उनकी ओर आकर्षित होता है और अपने बीबी अथवा पति से उसका लगाव कम होने लगता है |अधिक प्रभाव होने पर व्यक्ति उस अभिचार करने वाले के बारे में पहले सोचता है और पति या पत्नी के बारे में बाद में |
उपरोक्त स्थितियों में ली गयी तांत्रिक प्रणालियों की क्षमता करने वाले पर निर्भर करती हैं की व्यक्ति कितना प्रभावित होता है ,किन्तु यह बिलकुल सत्य है की इनका अच्छा जानकार या अच्छी क्षमता रखने वाला साधक यह क्रियाये करवा सकता है |सभी क्रियाओं का ,यहाँ तक की टोटकों का भी कुछ प्रभाव तो हो ही जाता है ,जबकि मान्त्रिक अनुष्ठानों का प्रभाव अधिक होता है |परिणाम यह होता है की व्यक्ति दुसरे के तरफ आकर्षित हो अपनों से विमुख होने लगता है |वह खर्च भी दुसरे के लिए करता है और अपने बीबी ,बच्चों अथवा घर के दायित्व से मुंह मोड़ने लगता है |उसे अपनी पत्नी अच्छी नहीं लगती ,उसे उसमे कोई आकर्षण नजर नहीं आता |वह पत्नी और प्रेमिका की तुलना करता है और पत्नी को किसी लायक नहीं पाता ,भले पत्नी अधिक सुन्दर ,सक्षम और बुद्धिमान हो ,क्योकि व्यक्ति की बुद्धि पर तो अभिचार का पर्दा पड़ा होता है और वह आसक्ति में इतना डूबा होता है की उसे सही गलत का भान नहीं रहता |वह तर्क भी करता है तो खुद को ही सही मानता है |यदि अभिचार ग्रस्त स्त्री है तो उसे अपने पति में कमियां ही कमियां नजर आने लगती हैं ,वह पति से असंतुष्ट हो जाती है |दूसरा व्यक्ति उसे अधिक आकर्षक ,सक्षम और सुन्दर लगता है |वह उसकी ओर झुकती और अपनों से दूर होने लगती है |कुछ दिन में दूरियां बहुत बढ़ जाती हैं जो कभी कभी अलगाव का भी कारण बन सकती हैं अगर स्त्री सक्षम हुई तो ,अन्यथा कलह तो रोज आम हो जाती हैं |
एक समस्या इससे भी अधिक गंभीर देखि जाती है सामान्य जीवन में |लोग दुसरे की उन्नति से अधिक दुखी होते हैं बजाय अपने दुखों के |उन्हें दुसरे की ख़ुशी देखि नहीं जाती भले खुद उनके यहाँ कोई कमी न हो |कुछ लोग अपनी कमियां और कमजोरियां कम करने ,अपनी समस्या दूर करने की बजाय दुसरे को नीचे लाने का प्रयत्न भी करते देखे जाते हैं |यह सोचते हैं की भले हम नहीं उन्नति कर पा रहे किन्तु अगला भी नहीं करना चाहिए |वह कैसे अमसे आगे चला जाएगा |इस हेतु भी कुछ लोग अभिचार का सहारा लेकर दुःख-कष्ट -बीमारी का आक्रमण दूसरों पर करवा देते हैं अथवा कर देते हैं |अक्सर तोनो-टोटकों का सहारा लेते हैं |तांत्रिकों से जाकर कहते हैं की अमुक हमें परेशां कर रहा अथवा हमारे ऊपर टोन -टोटके कर रहा ,हमें भी कुछ ऐसा दे दीजिये या कर दीजिये की उसकी उन्नति रुक जाए या उसका नुक्सान हो |सामान्य तांत्रिक यह नहीं देख पाता की व्यक्ति गलत बोल रहा है या सही ,वह कुछ क्रियाएं कर देता है या बता देता है बिना सोचे की इसका गलत उपयोग हो सकता है |इससे घर में पति-पत्नी और बच्चों पर कष्ट -रोग आ जाते हैं या नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न हो सकता है या वायव्य बाधाएं प्रभावित कर सकती हैं |घर में अशांति और दुःख उत्पन्न हो जाता है |
कुछ लोग अपनी बीमारी का भी उतारा करके दुसरे को दे देते हैं |आप माने या न माने किन्तु यह होता है और उतारा जिसको दिया जाता है उसे वह बीमारी हो जाती है |कभी कभी उतारा करके सड़क-चौराहे पर रख दिया जाता है और उसको लांघने वाला उस सम्बंधित कष्ट की चपेट में आ जाता है |कभी कभी तो किसी स्त्री को बच्चे न होने पर उसका उतारा किसी अन्य स्त्री पर कर दिया जाता है |कभी किसी का दाम्पत्य जीवन सुखी न होने पर या किन्ही पत्नी -पति पर कोइ क्रिया होने पर उसका उतारा करके किसी अन्य को भी दे दिया जाता है |उपरोक्त सभी क्रियाये आप पर या आपके पति-पत्नी या बच्चों पर हो सकती हैं |अगर आपके कुलदेवता शशक्त नहीं हैं तो यह क्रियाएं आपको अधिक प्रभावित करती हैं |
उपरोक्त समस्याएं अगर पहले से उत्पन्न हो चुकी हैं तब तो उन्हें समाप्त होने में समय लगता है और कभी कभी सक्षम तांत्रिक की मदद लेनी होती है किन्तु इनसे बचने का उपाय पहले से किया जा सकता है |यदि पति अथवा पत्नी अथवा बच्चों को किसी अच्छे साधक द्वारा उच्च और उग्र शक्तियों के यन्त्र बनाकर और उन्हें अच्छे से अभिमंत्रित करके धारण कराया जाए तो इस तरह होने वाली तांत्रिक क्रियाओं से बचाव हो जाता है |यदि समस्या उत्पन्न हो चुकी है और कोई अभिचार किया जा चूका है तो वह धीरे-धीरे कम हो जाता है और पुनः कोई क्रिया प्रभावित नहीं करती |यद्यपि इन कवचों की शक्ति साधक की शक्ति और अभिमंत्रित मन्त्रों की संख्या पर निर्भर करती हैं और गंभीर और विशेष लक्षित तांत्रिक क्रियाओं को रोक ही लें आवश्यक नहीं होता किन्तु सामान्य तांत्रिक क्रियाओं को यह रोक लेती हैं और व्यक्ति को इनसे प्रभावित होने से बचा लेती हैं अथवा धीरे -धीरे पहले की क्रियाओं के प्रभाव को समाप्त कर देती हैं |विशेष व्यक्ति को लक्ष्य कर की गयी गंभीर क्रियाओं की समाप्ति हेतु अच्छे तांत्रिक की मदद लेनी चाहिए |यदि पहले से सुरक्षा रहे तो ऐसी स्थिति बहुत कम ही आती है ,क्योकि ऐसी क्रियाओं के लिए खुद व्यक्ति को क्रियाएं करनी होती हैं |
जिन व्यक्तियों के घर परिवार में उपरोक्त समस्या नजर आये वे यह न मानें की यह अपने आप हो रहा है या विचार नहीं मिल रहे या यह व्यक्ति का स्वभाव होता है |अचानक अगर कोई परिवर्तन दिखे अथवा लगे की कोई किसी से जुड़ रहा है अथवा अपनों से विमुख हो रहा है तो इस पर जरुर ध्यान दें |यह अभिचार या वशीकरण-आकर्षण का प्रभाव हो सकता है |कोई आपका अहित चाहकर कोई क्रिया कर अथवा करवा सकता है |आप भले आधुनिकता और अपनी वैज्ञानिक समझ का लोहा मानते हुए इन्हें न मानें पर यह होता है और इनमे भी उसी वैज्ञानिक ऊर्जा की तकनिकी का उपयोग होता है जो रासायनिक और भौतिक क्रियाओं में होता है |यह सारा खेल ऊर्जा प्रक्षेपण और ऊर्जा ग्रहण का है |जिस पर पर जैसी ऊर्जा फेंकी जाती है उस पर वैसा प्रभाव होता है |तेज़ाब या आग या पानी फेंकने पर वह दीखता है पर तरंगों का प्रभाव दिखता नहीं होता अवश्य है |जैसे निश्चित ध्वनि आवृत्ति की तरंगे व्यक्ति को मौत भी दे सकती हैं ,जैसे विशेष सूर्य तरंगे व्यक्ति पर विशेष प्रभाव डालती हैं जैसे सौर तरंगें इलेक्ट्रानिक उपकरणों को प्रभावित कर देती हैं और दिखती नहीं उसी तरह यह तरंगे भी प्रभाव डाल देती हैं और दिखती नहीं |
अगर लगे की कोई समस्या है तब तो अवश्य ध्यान दीजिये ,नहीं दिखे तब भी पहले से सुरक्षा करके रखे |कब कौन क्या सोचे ,क्या करे कोई भरोसा नहीं |हर व्यक्ति खुद के स्वार्थ और दुसरे के सुख से चिंतित है |कोई आपके बारे में नहीं सोचता सब अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं |सुरक्षा कवच धारण करें और अपने प्रिय को धारण कराकर रखें ,कब कौन क्या क्रिया उसपर कर दे |इसके लिए भले खुद को आधुनिक समझते हों और आपको लगता हो की कवच पहनने से लोग आपको पिछड़ा न समझ लें ,भले इसे छिपाकर धारण करें और कराएं |क्योकि आने वाले कष्ट इस सोच से बड़े हो सकते हैं |इस हेतु काली ,बगलामुखी ,भैरव ,नृसिंह आदि शक्तियों के यन्त्र के साथ अभिचार रोकने और नष्ट करने वाली तांत्रिक वस्तुओं का उपयोग किया जाता है जो इस तरह के अभिचार के प्रभाव को क्रमशः कम करते हैं और कोई नया अभिचार होने से रोकते हैं |अगर समस्या उत्पन्न हो चुकी हो और कवच धारण आपका प्रियजन नहीं करता तो उसके तकिये आदि में इसे रखें अथवा उसे यह कहकर धारण कराएं की यह उसकी उन्नति और सुख के लिए है ,लोग आकर्षित और प्रभावित होंगे |इस तरह कहकर उसे धारण कराये |गंभीर समस्या उत्पन्न हो चुकी है तो अच्छे तांत्रिक की मदद लें तथा प्रति तांत्रिक क्रिया करें |अन्य उपाय उसके बताये अनुसार करें || [कवच के लिए दिए हुए मोबाइल नम्बर पर संपर्क किया जा सकता है ]|.........................................................हर-हर महादेव

महाशंख  क्या होता है ?

                      महाशंख के विषय में समस्त प्रभावशाली तथ्य केवल कुछ शाक्त ही जानते हैं |इसके अलावा सभी लोग tantra में शंख का प्रयोग इसी...