सोमवार, 13 अप्रैल 2020

वर्षों की साधना का परिणाम भी नगण्य क्यूँ ?

मंत्र जप सवा लाख ,मिला कुछ नहीं [ समय -श्रम दोनों बर्बाद ]
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          आज के समय में साधकों की बाढ़ आई हुई है ,ज्योतिषियों की बाढ़ आई हुई है |ज्योतिषी सलाह देता है ,अमुक मंत्र इतना संख्या में जपो ,अमुक पूजा करो ,आपकी समस्या हल हो जायेगी |उसके बारे में बताया कुछ नहीं की कैसे करें ,पद्धति-तरीका क्या हो ,बस जप लो |आधे को तो खुद पता नहीं होता ,कुछ को पता होता है तो समय बचाने के लिए बस मंत्र बता कर छुट्टी कर लेते हैं |मंत्र जपने वाल दुगुना जप लेता है पर उसे कोई परिणाम समझ नहीं आता ,तो वह सोचता है की ज्योतिषी सही नहीं ,पूजा -मंत्र जप से कुछ नहीं होता |उसकी गलती भी नहीं होती |उसे जितना पता होता है वह करता तो है ही |
           ऐसा ही नवागंतुक साधकों के साथ होता है ,तंत्र अथवा मंत्र -यन्त्र के क्षेत्र में अधिकतर आते हैं शक्ति पाने ,चमत्कार करने के लालच में ,कुछ अपनी समस्या दूर करने चक्कर में और कुछ वास्तव में मुक्ति की इच्छा से ,पर ९९ प्रतिशत को अपेक्षित सफलता नहीं मिलती |कारण सही पद्धति -सही ज्ञान -सही तरीका नहीं पता |या तो किताब से कुछ करने का प्रयास करते हैं या अधकचरे ज्ञान वाले गुरुओं के चक्कर में पड़ जाते हैं जिन्हें या तो खुद कुछ आता नहीं या एकाध मंत्र अपने गुरु से पाकर कुछ सिद्धियाँ करके गुरु बन बैठते हैं |साधक बेचारे क्या करेंगे जब गुरु ही उन्हें सही मार्गदर्शन नहीं दे पाता |गुरु जी को मंत्र का विज्ञान पता ही नहीं है |कैसे काम करता है ,कहाँ किस मंत्र का क्या प्रभाव होता है |कैसे इसकी ऊर्जा साधक तक आती है ,कहाँ से आती है |कैसे इस ऊर्जा को प्राप्त किया जाए |कैसे मंत्र को जपा जाए |कैसे उसका उच्चारण हो |कहाँ आरोह अवरोह हो |कहाँ नाद हो |किस मंत्र को करने में कितना समय लें |आदि आदि [[व्यक्तिगत विचार अलौकिक शक्तियां पेज के पाठकों के लिए ]]
           अधिकतर व्यक्ति या साधक मंत्र जप करते समय जप की संख्या पर ध्यान देते हैं |अधिकतर का ध्यान होता है की इतनी संख्या करनी है या इतनी संख्या करेंगे तो इतने दिन में इतना हो जाएगा और साधना या अनुष्ठान या संकल्प पूरा हो जाएगा |रेट रटाये ढंग से जल्दबाजी में मंत्र जप करते हैं ,करते रोज हैं और निश्चित संख्या के दिनों तक भी करते हैं पर जब कर चुकते हैं और जितनी जानकारी है उस हिसाब से हवन आदि भी कर लेते हैं तो परिणाम की प्रतीक्षा करते हैं पर समझ में कुछ नहीं आता |अब उनमे अविश्वास जन्म लेता है की किया तो इतना दिन ,इतनी तपस्या की कुछ नहीं हुआ ,मंत्र जप पूजा आदि से कुछ नहीं होता जो भाग्य में लिखा है वाही होता है |आदि आदि |
लोग यह ध्यान नहीं देते की वह जिस मंत्र का जप कर रहे हैं वह सही है की नहीं ,शुद्ध है की नहीं ,सही लक्ष्य के लिए सही मंत्र है की नहीं |मंत्र का उच्चारण क्या होना चाहिए ,मंत्र कितने समय में होना चाहिए या कितना लम्बा या किस स्वर  में होना चाहिए |इसका समय क्या होना चाहिए |आदि |अधिकतर का ध्यान मंत्र जप के समय कहीं और घूमता रहता है |अधिकतर जल्दबाजी में होते हैं की कब जप पूरा हो और अमुक कार्य किया जाए |जैसे साधना -पूजा न कर रहे हों एक जिम्मेदारी पूरी कर रहे हों |जैसे पहाडा रत रहे हों देवता को नहीं सूना रहे होते या बुला रहे होते वह तो कर्त्तव्य की आईटीआई श्री कर रहे होते हैं |देवता या ईष्ट की ओर ध्यान एकाग्र होता ही नहीं |भावहीनता में होते हैं ,एकमात्र अपना लक्ष्य दिखाई देता है |देवता से मानसिक जुड़ाव हुआ ही नहीं होता |परिणाम होता है की प्रकृति की सम्बंधित ऊर्जा मंत्र के द्वारा व्यक्ति से जुड़ पाती ही नहीं |देवता को मंत्र सुनाई देता ही नहीं |मंत्र जप मात्र रटने से ,बिना नाद के जपने से उसमे कोई ऊर्जा उत्पन्न नहीं होती ,वह आपके ही चक्रों को आंदोलित नहीं करता तो प्रकृति की ऊर्जा से क्या जुड़ पायेगा और उन्हें आकर्षित कर पायेगा |यहाँ तक की शाबर मन्त्र जिनमे न अर्थ होते हैं न नाद वह भी बिना भाव के काम नहीं करते |बिना भाव और आत्मबल के आप शाबर मंत्र भी रटेंगे तो आपको परिणाम मुश्किल है मिलना |
         ध्यान दीजिये हर मंत्र की एक विशिष्ट नाद होती है ,विशिष्ट उच्चारण होता है ,विशिष्ट देवता होते हैं |विशिष्ट मंत्र का विशिष्ट चक्र से सम्बन्ध होता है |विशिष्ट मंत्र प्रकृति के विशिष्ट प्रकार की ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है और उसे आकर्षित करता है ,साधक या मंत्र जपने वाले से जोड़ता है |अतः उसका पाठ उसी तरह के भाव ,नाद ,उच्चारण के साथ होना चाहिए |आपका मानसिक तारतम्य सम्बंधित शक्ति और मंत्र की ऊर्जा से बना होना चाहिए |नहीं तो वह अगर आकर्षित हो भी गई तो आपसे जुड़ नहीं पाएगी और वातावरण में पुनः बिखर जायेगी |महत्त्व मंत्र की संख्या जपने का नहीं होता ,सही उच्चारण ,सही नाद का होता है |सही भाव का होता है ,सही भावना का होता है |सही तरीके और पद्धति का होता है |सही समय का होता है .एकाग्रता का होता है |अगर यह सब नहीं है तो आप कई लाख भी जप कर लीजिये आपको परिणाम मिलना मुश्किल है |मंत्र असंदिग्ध रूप से काम करते हैं बशर्ते आप सही ढंग से उन्हें जप सकें |अगर रटंत जप करेंगे तो कुछ नहीं मिलेगा ,इससे तो अच्छा होगा की आप कोई जप न करो और केवल सम्बंधित देवता के रूप -गुण -भाव में ही डूबिये आपको जरुर लाभ मिलेगा |अगर मंत्र कर रहे हैं तो ढंग से कीजिये |
          सवा लाख ,लाखों लाख या निश्चित संख्या में जप करना कोई मायने नहीं रखता |आप कुछ हजार ही जप कर लीजिये और सही ढंग से कर लीजिये तो आपको लाखों लाख से अधिक लाभ हो जाएगा |उदाहरण के लिए ॐ का जप कुछ लोग करते हैं ,अधिकतर ॐ को मंत्र के आगे लगाते हैं |पर बहुत कम को पता है की अगर ॐ का सही ढंग से जप कर दिया जाए तो दीवार टूट जाती है ,यह वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित हो चूका है |हम क्या करते हैं ॐ को लगाया या ॐ ॐ करते चले गए ,न नाद न समयांतराल न उच्चारण न गूँज किसी पर ध्यान नहीं दिया |ऊर्जा उत्पन्न हुई ही नहीं ,आपके चक्र को आन्दोलित की ही नहीं |प्रकृति की ऊर्जा से जुडी ही नहीं तो लाभ क्या होगा |ॐ का जप जब भी हो एक गूँज पैदा होनी चाहिए ,जो आपको और वातावरण को गुंजित करें |इसकी गूँज ह्रदय में गुंजित होनी चाहिए |तभी यह आंदोलित करेगा आपके सम्बंधित चक्र को और वहां से तरंग उत्पादन बढ़ेगा और वातावरण की ऊर्जा को आकर्षित करेगा |ऐसा ही सभी मन्त्रों में है |अगर ऐसा न होता तो अलग बीज और बिन्दुओं का प्रयोग क्यों होता |हर बीज का हर मंत्र का अपना उच्चारण ,नाद है उसे उसी ढंग से किया जाना चाहिए |सही ढंग से कर दीजिये कुछ हजार में आपको लाभ मिल जाएगा |रोज हजारों जप मत कीजिये कुछ सौ कीजिये पर आराम से धीरे धीरे पूरी एकाग्रता ,ध्यान ,भाव ,नाद ,उच्चारण से कीजिये देवता प्रसन्न हो जाएगा |[[व्यक्तिगत विचार ब्लॉग पाठकों के लिए ]]…………………………………………………………….हर -हर महादेव 

समस्या को पकड़ना मुश्किल ,समस्या से निकलना आसान होता है।

समस्या को पकड़ना मुश्किल ,समस्या से निकलना आसान होता है।  
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                       प्रकृति ने सर्वत्र व्यवस्था संचालन हेतु अपने नियम बना रखे रखे हैं ,सब कुछ इन्ही नियमिन के अनुसार संचालित होता है |प्रकृति कभी असंतुलन बना कर नहीं रखती ।अगर कोई समस्या किसी व्यक्ति के जीवन में उतपन्न होती है तो वह किन्ही क्रियाओं की प्रतिक्रिया होती है ,परिणाम होता है |फिर ,उसका हल भी प्रकृति 99℅ मामलों में जरूर रखती है ।मात्र 1 प्रतिशत वह समस्या होती है ,जो कर्मों का वह परिणाम होती है ,जिसे केवल भुगतना बाकी रहता है ,सुधार का समय बीत चुका होता है ।अधिकतर समस्या का समाधान सदैव उपलब्ध होता है ,किंतु वास्तव में समस्या है कहाँ ,किस कारण यह उतपन्न हुआ है , इसका क्या वास्तविक निराकरण होगा ,सबसे मुश्किल यही पता लगाना होता है ।निराकरण करना या बताना तो आसान होता है ,बशर्ते वास्तविक समस्या की उतपत्ति का कारण पकड़ में आ जाए ।
                        अधिकतर मामलों में स्थिति नीम हाकिम वाली होती है |जैसे नीम हकीम अक्सर हर मरीज को एक दर्द बुखार निवारक दवा, एक एंटी बायोटिक ,एक स्टेराइड और एक मल्टी विटामिन देकर तात्कालिक राहत दे देता है और व्यक्ति को कुछ राहत मिल जाती है ,भले उसकी इम्युनिटी खराब हो ,दूसरी समस्या उतपन्न हो ।रोग भले दुबारा उतपन्न हो या बढ़ के उतपन्न हो ।जबकि एक विशेषज्ञ एम डी डाक्टर पहले ढेर सारे जांच कराता है ।भारी भरकम फीस लेता है पर दवा सटीक लिखता है जो वास्तव में उसी मर्ज के लिए बना होता है ,और कम भी लिखता है या देता है ।मरीज पूरी तरह उस मर्ज से मुक्त हो जाता है ।ऐसा ही कुछ ज्योतिष और तंत्र क्षेत्र में भी होता है ।
                              सामान्य ज्योतिषी या तांत्रिक या पंडित हर समस्या में राहु केतु दिखायेगा ,कालसर्प ,मंगली ,साढ़े साती बताएगा ।सबको भूत -प्रेत ,ब्रह्म ,पित्र ,मरी ,अकाल मौत या अभिचार बताएगा ।उपाय के घिसे पिटे दान ,जल प्रवाह ,पूजा ,अनुष्ठान घुमा फिराकर बताता रहेगा ।टोटके ,भस्म ,पानी छिड़कना ,पीना ,अगरबत्ती ,दिया ,मंदिर परिक्रमा ,पीपल ,तुलसी बताता रहेगा सबको घुमा फिराकर ।इन उपायों से नीम हकीम की तरह कुछ राहत कुछ समय तो मिल सकती है पर पूर्ण निदान नहीं हो पाता ।एक विशेषज्ञ ज्योतिषी या तांत्रिक पूरी कुंडली का सूक्ष्म विश्लेषण करेगा ,वास्तु ,पित्र ,कुलदेवता ,अभिचार अथवा किसी वायव्य बाधा ,नकारात्मक ऊर्जा का विश्लेषण और जांच करेगा ,समस्या के मूल कारण खोजेगा ,लक्षणों का विश्लेषण करेगा ,तब जाकर एक दो उपाय बताएगा जो सटीक समस्या पर चोट करेंगे और मुक्ति देंगे ।जाहिर है यह भी विशेषज्ञ डॉक्टर की तरह अच्छी फीस लेगा ,पर वास्तविक विशेषज्ञ निदान भी करेगा ।जब तक कारण पता न हो तब तक सही समाधान पूर्ण रूपेण नहीं हो पाता जबकि कारण पता हो जाए तो समाधान बहुत आसान हो जाता है ।
                       कौन सी शक्ति या ऊर्जा कहाँ क्या काम करेगी ।किसका कहाँ क्या प्रभाव होगा यह केवल विशेषज्ञ ही जानता है ।किस तरह के कर्म अथवा क्रिया का परिणाम आज की समस्या है ,क्या करने पर इन्हें सुधारा जा सकता है यह जब तक पकड में न आये किसी समस्या को समाप्त नहीं किया जा सकता |सतही उपयों से समस्या को रोक या दबा देना उसे और बढाना होता है जो कुछ ही समय में विस्फोटक हो जाती है और तब फिर उसे सुलझाना मुश्किल हो जाता है |अक्सर शुरू में लोग यही करते हैं ,यहाँ वहां से टोने -टोटके उपाय उठाये और कर डाले ,किसी से भी मुफ्त सलाह की कोशिश की और उसके बताये आधे अधूरे उपाय कर दिए |यह नहीं समझा की इन उपायों ,टोने टोटकों से जो ऊर्जा उत्पन्न हुई वह किस दिशा में काम करेगी |ऐसा तो नहीं यह समस्या को और कुरेद कर उसे बढ़ा रही |लोग ध्यान नहीं देते किन्तु जब तक सही जगह उपयुक्त शक्ति न लगाया जाए समस्या समाप्त नहीं होती |कम शक्ति लगाने पर उसमे और विक्षोभ उत्पन्न होता है जिससे उसकी प्रकृति बिगडती है और समस्या गंभीर हो जाती है |90 प्रतिशत मामलों में लोग शुरूआत में ऐसा ही करते हैं इसी कारण बाद में निराश होते हैं और उनकी समस्या गंभीर हो जाती है |…………………………….हर हर महादेव

क्यों अपना कष्ट खुद दूर नहीं करते ?

पारलौकिक सहारे के लिए क्यूँ भटकते हो ?
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                                सामान्य लोगों में भी और यहाँ तक कि साधकों ,पंडितों ,ज्योतिषियों में भी एक बात अक्सर देखि जाती है ,जब जीवन में संघर्ष उत्पन्न होता है ,जब कष्टों के दौर आते हैं ,जब समस्याएं उत्पन्न होती हैं तो बुद्धि काम करना बंद कर देती है ,कोई उपाय नहीं सूझता या यूँ कहें की कोई उपाय सटीक नहीं लगता ,कभी कभी तो उपाय पर उपाय भी बेकार जाते हैं |विश्वास हिलता है और मान्यताएं मिथक लगती हैं |फिर शुरू होता है लौकिक समस्याओं का समाधान अलुकिक शक्तियों द्वारा हल करने की कोशिशों का दौर और लोग खोजने लगते हैं अपनी समस्या का हल ग्रहों ,पारलौकिक शक्तियों ,देवियों देवताओं में |सामान्य लोगों को तो छोडिये ,खुद को अच्छा ज्योतिषी ,तांत्रिक ,साधक ,पंडित मानने वाला भी यहाँ वहां कारण खोजने लगता है |सामान्य लोग पंडितों ,ज्योतिषियों ,तांत्रिकों के यहाँ चक्कर लगाने लगते हैं और फिर शोषण का एक दौर शुरू हो जाता है |99% को उनकी समस्या का वास्तविक समाधान या तो मिलता नहीं या समाधान हो नहीं पाता |अक्सर आश्वासन और उपाय पर उपाय मिलता है |90% तो साधक ,तांत्रिक ,पंडित भी खुद पर आये समस्या को हल करने में असफल हो जाते हैं |कारण बहुत से होते हैं |कारणों का विश्लेषण करने में कई पोस्ट कम पद जायेंगे ,यद्यपि इन विषयों पर हमने पहले भी बहुत से पोस्ट लिखे हैं और कारण समझाने के प्रयत्न किये हैं |
                          लोगों की स्थिति ,हमसे अक्सर संपर्क करने वाले समस्या पीड़ित अथवा तांत्रिकों ,पंडितों ,ज्योतिषियों द्वारा शोषित जनों की बातें सुनते सुनते हमारा वर्षों पहले से यह मानना रहा है कि ,क्यों हम किसी के पास दौड़ें ,क्यूँ इनके द्वारा शोषित हों ,क्यूँ न खुद के कष्ट हम खुद दूर करें |क्यूँ न इतना सक्षम खुद को बनाएं की समस्या समाप्त हो जाए |क्यूँ न अपनी क्षमता को इतना बढायें कि समस्या छोटी हो जाए |हम इस विचारधारा पर वर्षों से चल रहे हैं और हमें जानने वाले जानते हैं की हम तंत्र साधक होने के बावजूद स्वयं किसी की समस्या हल करने का प्रयास नहीं करते ,अपनी साधना द्वारा प्राप्त ऊर्जा को कुछ पैसों के लिए खर्च करने से बचते रहे हैं |हम सदैव लोगों को साधनाएँ ,पूजा ,उपासना ,उपाय ,तरीके बताने में विश्वास करते रहे हैं ताकि लोग खुद सक्षम हो सकें और अपनी समस्या खुद हल कर सकें |इससे एक लाभ और होता है की एक बेसिक शक्ति व्यक्ति को प्राप्त होती है जो उसके जीवन के हर क्षेत्र में उसकी मदद करती है साथ ही भविष्य में यहाँ वहां किसी के पास भटकने की जरूरत नहीं होती |
                          हमारे इस प्रयास को कुछ ज्योतिषी ,तांत्रिक ,पंडित आदि गलत कह सकते हैं ,अथवा उन्हें लग सकता है की हम उनके व्यवसाय के विरुद्ध काम कर रहे किन्तु फिर भी हमारा मानना है की हर व्यक्ति को खुद सक्षम होना चाहिए चाहे वह कुछ न जानता हो ,कोई पद्धति ,पूजा पाठ न समझता हो |उसे ऐसे सरल तरीके उपलब्ध होने चाहिए की दैवीय ,पारलौकिक ऊर्जा तक उसकी भी पहुँच बन सके और चारो तरफ व्याप्त नकारात्मक शक्तियों से वह यथासंभव बच सके |इसीलिए हम हथियार [सामग्री -यंत्रादी ] उपलब्ध कराते रहे हैं ,उसे चलाने के तरीके [पद्धति -प्रयोग ] बताते रहे हैं किन्तु सदैव युद्ध [क्रिया -उपासना ] व्यक्ति से ही करवाया है क्योकि शत्रु [समस्या ]उनकी है हमारी नहीं |मुक्ति मार्ग की साधना की ऊर्जा को कभी भौतिक लाभ हेतु खर्च करने से हम बचे हैं |
                                 सामान्यतया ईश्वरीय अथवा पारलौकिक शक्तियां अथवा धनात्मक /सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाना ,प्राप्त करना ,इतना भी मुश्किल नहीं जितना कहा जाता है अथवा जितना इन्हें किताबों आदि में कठिन बताया जाता है |शक्ति विशेष की पूर्ण प्राप्ति तो साधना का विषय होती है और इसके लिए जरुर विशेष पद्धति ,कर्मकांड ,नियम आदि होते हैं किन्तु उसी शक्ति की इतनी ऊर्जा जो की सामान्य समस्याएं हल कर सके प्राप्त कर पाना कत्तई बहुत मुश्किल नहीं |बिलकुल सामान्य लोग ,बिलकुल सामान्य तरीके से ,बिलकुल सामान्य जीवन जीते हुए ,कभी किसी परिस्थिति में रहते हुए इतनी ईश्वरीय शक्ति /ऊर्जा पा सकते हैं की उनकी अधिकतर समस्याएं हल हो जाएँ |जैसा की हम जानते हैं और हमने पहले के लेखों में लिखा भी है की अधिकतर समस्याएं विभिन्न प्रकार की नकारात्मक उर्जाओं के कारण उत्पन्न होती हैं .अतः यदि हम सकारात्मक अथवा धनात्मक ऊर्जा की मात्रा बढ़ा दें तो संतुलन हमारे पक्ष में आ सकता है और हमारे जीवन में खुशहाली बढ़ सकती है ,यह कठिन नहीं |यदि हम नकारात्मक ऊर्जा की मात्रा कम कर दें तो भी संतुलन हमारे पक्ष में आ जाएगा और हमारी समस्याएं हल हो जायेगीं |तरीका कोई भी अपनाएँ ,चाहे नकारात्मक ऊर्जा हटायें अथवा धनात्मक ऊर्जा बाधाएं प्रभाव संतुलन पर पड़ेगा और समस्या कम होगी ही |बस जरूरत खुद कोशिश करने की है |बजाय दुसरे का सहारा लेने के खुद का किया प्रयास अधिक लाभ भी देता है ,स्थायी भी होता है और विश्वास भी बढ़ता है |यहाँ अवचेतन का भी सहारा मिलता है जिससे व्यक्ति उस ऊर्जा से जुड़ भी जाता है |
                                    समस्या होने पर व्यक्ति अगर किसी अन्य से जैसे पंडित ,तांत्रिक ,ज्योतिषी आदि से सहयोग लेता है या उस पर छोड़ देता है की वह कुछ क्रियाएं कर देगा और व्यक्ति की समस्या हल हो जायेगी तो यहाँ कई बातें हो सकती हैं जिससे व्यक्ति को पूर्ण लाभ न मिले |प्रथम तो यह की चाहे दूसरा व्यक्ति संकल्प के साथ ही किसी के लिए कोई क्रिया करे ,उसका पूर्ण अंश व्यक्ति तक नहीं पहुँचता ,कुछ अंश क्रिया कने वाले के साथ ही रह जाता है |दूसरा यदि दुसरे व्यक्ति ने शुल्क लेकर भी क्रिया नहीं किया तो व्यक्ति को कोई लाभ नहीं मिलता |तीसरा यदि क्रिया की शक्ति व्यक्ति को प्रभावित कर रही समस्या की शक्ति से कम हुई तो भी लाभ नहीं मिलता |चौथा समस्याग्रस्त खुद उस क्रिया से नहीं जुड़ा होता अतः अतः सम्बंधित ऊर्जा उससे नहीं जुड़ पाती और दीर्धकालिक लाभ नहीं मिलते |पांचवा ,यदि समस्या का कारण अगला व्यक्ति नहीं पकड पाया और भिन्न क्रिया की तो भी लाभ नहीं मिलता |यदि समस्या के कारण की शक्ति उग्र हुई और उसकी शक्ति का आकलन किये बिन उसे छेड़ दिया गया तो वह समस्या और बढ़ा देगा अथवा उपद्रव शुरू कर देगा |इसीतरह अनेक कारण संभव हैं की व्यक्ति को लाभ न मिले |इसी तरह के कारण होते हैं की व्यक्ति यहाँ वहां भटकता रहता है और उसकी समस्या का निराकरण नहीं होता |
                                तो क्यूँ न ऐसा कोई तरीका अपनाया जाए की लाभ भी हो ,प्रतिक्रिया भी न हो ,उपद्रव भी न हो ,किसी द्वारा शोषण की भी गुंजाइश न रहे ,यहाँ वहां भटकना भी न पड़े ,खुद से एक शक्ति या ऊर्जा भी जुड़े ,और समस्या भी हल हो जाए |एक ऐसी शक्ति का साथ मिल जाए जो जीवन भर सहायता करे |यह असंभव नहीं ,मुश्किल नहीं |बहुत कठिन नहीं |सबके लिए संभव है |न इसके लिए शिक्षा महत्त्व रखती है ,न जाती ,सम्प्रदाय ,धर्म |हां हमारे लिए धर्म महत्त्व रखता है ,क्योकि हमें भिन्न धर्म की पद्धति नहीं आती अतः हम केवल हिन्दू का ही मार्गदर्शन कर सकते हैं |कोई भी व्यक्ति किसी स्तर पर हो वह अलौकिक ऊर्जा पा सकता है ,दैवीय कृपा प्राप्त कर सकता है |नकारात्मक ऊर्जा हटा सकता है ,धनात्मक ऊर्जा बढ़ा सकता है ,नकारात्मक शक्ति को दूर कर सकता है ,सकारात्मक शक्ति का सानिध्य पा सकता है और अपने जीवन को खुशहाल बना सकता है ,अपने भाग्य का अधिकतम पा सकता है ,बिलकुल सामान्य नियमों ,तरीकों से |[[ देखें अगला अंक -- गृहस्थ कैसे ईश्वरीय शक्ति प्राप्त करे ]]|
                  इसके लिए खुद खड़े होइए ,खुद प्रयास कीजिये ,बजाय यहाँ वहां दौड़ने के केवल थोडा सा समय निकालिए |बहुत समय ,पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं |खुद नियम से थोड़ी देर की कोशिश आपकी अधिकतर समस्याएं ,कष्ट ,दुःख दूर कर देगा |आप ईश्वरीय सानिध्य ,अलौकिक शक्ति ,जीवनी ऊर्जा ,आत्मविश्वास ,उम्मीद की किरण भी पायेंगे और आपका अवचेतन भी जाग्रत होगा ,शक्तिशाली होगा ,ईश्वरीय ऊर्जा से जुड़ेगा ,जरूरत अनुसार सहायत करेगा |आप यहाँ वहां दौड़ ,निराशा में डूबने से बचेंगे ,फ़ालतू पैसों की बर्बादी से बचेंगे |आप कह सकते हैं अथवा सोच सकते हैं की यह सामान्य लोगों के लिए मुश्किल है ,किन्तु ऐसा नहीं है ,सबकुछ संभव है आप खुद को तैयार तो कीजिये |आप सक्षम होंगे खुद के कष्ट दूर करने में |...................[[क्षमा करें ,तरीका और पद्धति नहीं लिख पा रहे ,क्योंकि पोस्ट लम्बा हो गया है पहले ही |तरीका और पद्धति अगले अंक -- गृहस्थ कैसे ईश्वरीय शक्ति प्राप्त करे ,, में ,, यद्यपि हमने इन विषयों पर पहले भी बहुत कुछ लिखा है ,जिसे आपको पढना चाहिए यदि आपकी रूचि है तो ,इस हेतु आप हमारे blog का अवलोकन करें ]]...........................................................हर-हर महादेव 

टोना -टोटका ,तंत्र क्रिया हटायें खुद से एक दिन में

 किये -कराये ,टोन -टोटके ,तंत्र क्रिया हटाने का उपाय 
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                                        हमारे समाज में कुछ लोग स्वाभाविक रूप से दूसरों को परेशान करने में सुख महसूस करने वाले होते हैं |कुछ ऐसे लोग होते हैं जिन्हें अपने सुख से ख़ुशी नहीं मिलती अपितु दुसरे को दुखी देखकर या दुसरे को दुःख देकर ख़ुशी मिलती है |कुछ अपने ही परिवार -रिश्तेदारी के लोग होते हैं जो हमें रोग -शोक ,बीमारी कष्ट में देखना चाहते हैं ,हमारी उन्नति रोकना चाहते हैं |यह सभी लोग अक्सर सामने न आकर टोन टोटकों का भी प्रयोग करते हैं |यह दूसरों पर रोग ,शोक ,दुःख -दरिद्रता का प्रकोप कर अथवा करा देते हैं |इसके लिए तांत्रिक का सहारा लेते हैं या खुद तांत्रिक क्रियाएं करते हैं |मूठ ,बाण ,मारण आदि तक की क्रियाएं यह लोग करते हैं ,टोन -टोटके तो बहुत आम हैं |यदि कोई ऐसा करके किसी को बीमार कर दे ,रोग दे दे ,शारीरिक समस्या दे दे तो इसका इलाज चाहे बड़े बड़े डाक्टर से ही क्यों न करवा लें लाभ नजर नहीं आता |कुछ तंत्र क्रियाएं तो व्यक्ति के हार्ट पर असर करके ठिकाने तक लगा देती हैं तो कुछ कैंसर जैसी जहरबाद रोग उत्पन्न कर देती हैं |हमने अनेक ऐसे रोगियों को देखा है जिन्हें ब्रह्म आदि भेजकर ब्रेन टी वी उत्पन्न करा दी गयी ,डाक्टर इलाज नहीं कर पाए जबकि पूजा से व्यक्ति ठीक हो गया |जिस प्रकार विष की औषधि विष से ही निकलती है उसी तरह तंत्र मंत्र की काट तंत्र मंत्र से ही संभव है |ऐसी परिस्थिति में जब कोई आप पर कुछ कर दे या करा दे तो आप कुछ प्रयोग खुद से कर सकते हैं ,यद्यपि बड़ी समस्या के लिए तो आपको अच्छे साधक की ही मदद लेनी होगी |
१. आपको लगता है की आप पर तंत्र क्रिया है और आप पर ठीक से दवा काम नहीं कर रही तो आप एक सकोरे या मिटटी के पात्र में गंगा जल भरकर प्रातः काल के समय इस गंगाजल को मन्त्र से १०८ बार अभिमंत्रित करें और पिए ,आप खुद नहीं कर सकते तो आपके परिवार का कोई व्यक्ति इसे करे |इससे कुकृत्य दूर होता है और व्यक्ति को आरोग्य प्राप्त होता है |
मंत्र - ॐ सं सां सिं सीं सु सूं सें सैं सों सौं सं सः वं वां विं वीं वुं वूं वें वैं वों वौं वं वः हँसः अमृत वर्च्चसे स्वाहा |
२. यदि आप शत्रु के अभिचार को नष्ट करना चाहते हैं ,व्यक्ति पर से हटाना चाहते हैं तो यह दूसरा प्रयोग आप कर सकते हैं |ताम्र पात्र में गंगाजल भरकर ,गंगाजल न मिल सके तो सात हैण्ड पम्प या सात कुएं के जल में तुलसी पत्र डालकर अपने हाथ में लें और भगवान् महामृत्युंजय शिव का स्मरण करते हुए इस मंत्र को सात बार पढकर जल में फूंक मारें और जल स्वयं पी लें |इस मन्त्र में मा तथा में के स्थान पर व्यक्ति स्वयम का नाम ले |
मन्त्र - मां भयात सर्वतोरक्ष श्रियं वर्धय सर्वदा | शरीरारोग्यं में देहि देव देव नमोस्तुते  |
३. यदि आपको लगता है की किसी पर या आप पर नकारात्मक ऊर्जा ,बुरी शक्ति ,भूत -प्रेत आदि का प्रभाव है तो इस मंत्र से १०८ बार गंगाजल अभिमंत्रित करके जिस किसी व्यक्ति को पिलाया जाएगा उसके शरीर से भूत -प्रेत -पिशाच ,नकारात्मक ऊर्जा ,बुरी शक्ति का प्रभाव कम होगा अथवा दूर हो जाएगा |रोग आदि का प्रभाव खत्म होगा और मानसिक स्थिति ,पागलपन ठीक होगा |  
मन्त्र - ॐ हं हाँ हिं हीं हुँ हूँ हें हैं हों हौं हं हः क्षं क्षां क्षिं क्षीं क्षुं क्षूं क्षें क्षैं क्षों क्षौ क्षं क्षः हं |
कई बार पुरानी जमीन ,मकान ,खँडहर ,घर में भूत प्रेत रहते हैं ,उस पर बहुत बड़ा मकान निर्मित करा दिया जाता है परन्तु फिर भूत -प्रेत उस मकान मालिक को और वहां रहने वालों को दुखी करते रहते हैं ,ऐसे में भी उपरोक्त मंत्र का ही प्रयोग किया जाता है |१२ अंगुल पलाश की लकड़ी की कील को उक्त मंत्र से १०००० बार अभिमंत्रित करके जिस घर में गाड़ दिया जाता है वहां से सभी प्रकार के स्थावर ,जंगम एवं कृत्रिम विष दूर हो जाते हैं तथा भूत -प्रेत ,पिशाच ,दुष्ट नर ,विषैले प्रभाव आदि की पीडाओं से मुक्ति मिल जाती है |यह प्रयोग हमारा अनुभूत है और हमने अनेक लोगों के मकानों में यह प्रयोग किया है तथा इसके परिणाम देखे हैं |
                         यह कुछ साधारण प्रयोग थे जो आप स्वयं कर सकते हैं और किये -कराये ,टोन -टोटके ,तांत्रिक अभिचार से मुक्त हो सकते हैं ,यद्यपि सारा खेल शक्ति संतुलन का होता है किन्तु यदि कोई सामान्य टोन टोटके लगातार कर रहा हो तो यह सभी प्रयोग कारगर हैं |अधिक उच्च शक्ति को कोई भेजा हो या सीधे कोई तांत्रिक in क्रियाओं में शामिल हो तब बड़ी क्रियाएं करनी होती हैं अथवा अच्छे साधक से सम्पर्क करना बेहतर होता है |हम एक और प्रयोग अपने अगले विडिओ में बताएँगे जिससे किसी भी तरह की तांत्रिक क्रिया हो उसे हटाया जा सकता है चाहे सीधे तांत्रिक हो क्यों न विरोध में हो |हमारा ब्लॉग tantricsolution.blogspot.com और हमारे वेबसाईट alaukik-shaktiya.xyz पर यह सभी प्रयोग प्रकाशित हैं पहले से जहाँ से आप इनका लिखित रूप पढ़ सकते हैं |.....................................................हर हर महादेव 

पौरुष ,प्रतिरोधक शक्ति बढाता है सफ़ेद मूसली

  सफ़ेद मूसली के चमत्कार
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                               भारत प्राचीन काल से ही सांस्कृतिक धरोहर के साथ जड़ी-बूटियों के लिए भी प्रसिद्ध रहा है। यहां विभिन्न औषधीय पौधे पाए जाते हैं। इसी लिए यहां विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों जैसे, आयुर्वेद, यूनानी, प्राकृतिक चिकित्सा आदि प्राचीन काल से ही न केवल चलन में हैं, बल्कि विज्ञान और तकनीक के विकास के बाद भी इनकी प्राथमिकता कम नहीं हुई है। सफेद मूसली भी ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है, जो शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए काफी मशहूर है।  यह एक प्रकार का पौधा है, जिसके अंदर छोटे सफ़ेद फूल होते हैं। वैसे तो सफ़ेद मूसली के फ़ायदे अनेक हैं, लेकिन इसका सबसे बड़ा योगदान पुरुषों में यौन शक्ति बढ़ाने में और नपुंसकता का इलाज करने में किया जाता है।  इसके अलावा भी सफेद मूसली के कई लाभ हैं,सफ़ेद मुसली (क्लोरोफाइटम बोरिविलियनम) एक ऐसा पौधा है जिसका आयुर्वेद में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है क्योंकि इसमें उपचार के गुण हैं। सफ़ेद मुसली के सबसे महत्वपूर्ण लाभों में से एक है यौन कमजोरी और नपुंसकता को ठीक करने की क्षमता है। इसे “भारतीय वियाग्रा” या “हर्बल वियाग्रा” के नामों से भी जाना जाता है| 
                          यह इतनी पौष्टिक तथा बलवर्धक होती है की इसे दूसरे शब्दों में शिलाजीत की संज्ञा दी गई है। चीन, उत्तरी अमेरिका में पाए जाने वाले मूसली के पौधे जिनका वानस्पतिक नाम पेनेक्स जिंन्सेग है। इन जिंन्सेग से फलेक्स बनाए जाने पर भी कार्य चल रहा है, जो नाश्ते के रूप में इस्तेमाल किए जा सकेंगे। इसके अतिरिक्त इससे मां का दूध बढाने, प्रसव के बाद होने वाली बीमारियों तथा शिथिलता को दूर करने के एव मधुमेह आदि जैसे अनेकों रोगों के निवारण हेतु भी दवाईया बनाई जाती है।सफ़ेद मुसली विटामिन, अल्कलॉइड, प्रोटीन, स्टेरॉयड, कार्बोहाइड्रेट और पॉलीसैकराइड्स से भरपूर होता है।इसमें फाइबर, सैपोनिन, कैल्शियम, पोटैशियम व मैग्नीशियम जैसे पौष्टिक तत्व मौजूद हैं। सफ़ेद मुसली का अंग्रेजी नाम इंडियन स्पाइडर प्लांट है।सफ़ेद मूसली में कई गुण हैं, जो आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद हैं। ऐसे ही ज़रूरी सफ़ेद मूसली के लाभ के बारे में हम नीचे लिख रहे हैं।
1. शरीर में ऊर्जा व रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है
यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है कि सफ़ेद मुसली शरीर की प्रतिरक्षा में सुधार करता है और इसे मजबूत बनाता है। एक अच्छी प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ  शरीर रोगों से लड़ सकता है और मजबूत हो सकता है। सफ़ेद मुसली आपके समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है और अधिक जीवन शक्ति उत्पन्न करके सामान्य कमजोरी का मुकाबला करता है।
अगर आपको हमेशा सर्दी-ज़ुकाम हो या आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, तो सफ़ेद मूसली का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके सेवन से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कई बीमारियों से छुटकारा मिलता है। यह संक्रमण से आपका बचाव करेगी। 
अगर आपको अक्सर बदन दर्द की शि‍कायत बनी रहती है, तो प्रतिदिन सफेद मूसली की जड़ का सेवन फायदेमंद होता है। उच्च रक्तचाप, गठिया रोग में भी यह लाभकारी है। पेशाब में जलन की शिकायत होने पर तो सफेद मूसली की जड़ को पीसकर इलायची के साथ दूध में उबालकर पीना बेहद फायदेमंद होता है। दिन में दो बार इस दूध को पीना लाभदायक होगा।
2. जोड़ों के दर्द और अर्थराइटिस में फायदेमंद
बढ़ती उम्र के साथ लोगों में हड्डियों और जोड़ों की शिकायत भी बढ़ने लगती है। ऐसे में सफ़ेद मूसली के सेवन से अर्थराइटिस, जोड़ों और हड्डियों के दर्द में कुछ हद तक आराम मिल सकता है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेट व विटामिन जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो आपके शरीर और हड्डियों के लिए ज़रूरी होते हैं।
सफ़ेद मुसली में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द, गठिया और गठिया के इलाज में बहुत कुशल होते हैं। यह श्लेष द्रव के बनने को प्रभावित करता है और जोड़ों के क्षरण को रोकता है। 
सफ़ेद मुसली(Safed Musli)को एक बेहतरीन एंटी-ऑक्सिडेंट कहा जाता है जो शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है। यह शरीर से मुक्त कणों को खत्म करता है और स्वस्थ बनाता है। यह तनाव मुक्त करने और ऑक्सीडेटिव तनाव संबंधी परेशानियों का इलाज करने में भी मदद करता है।
3.महिलाओं के लिए मूसली अत्यधिक लाभकारी होती है। यह उम्र के असर को कम कर सुन्दरता बढ़ाने में भी मददगार साबित होती है। इसके अलावा अन्य नारी प्रमुख समस्याओं में भी इसका सेवन फायदेमंद होता है।  गर्भावस्था में भी सफ़ेद मूसली अच्छी औषधि है। प्रेग्नेंसी में सफ़ेद मूसली का सेवन करने से महिला और होने वाला शिशु स्वस्थ रहता है। सिर्फ़ गर्भावस्था के दौरान ही नहीं, बल्कि डिलीवरी के बाद भी मां मूसली का सेवन करें तो दूध की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार होता है।  हालांकि, गर्भावस्था में सफ़ेद मूसली का प्रयोग करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से इस बारे में सलाह ज़रूर कर ले लें।सफ़ेद मुसली(Safed Musli) एक गलाक्टागोग के रूप में काम करता है। गन्ने, ब्राउन शुगर और जीरा के साथ मिलाने पर यह स्तनपान कराने वाली माताओं में दूध को बढ़ाता है।सफ़ेद मुसली के लाभों में महिलाओं में फ्रिजिडिटी और योनि के सूखेपन को कम करना भी शामिल है। 
4.यह मधुमेह से पीड़ित मरीजों के लिए भी अच्छी औषधि है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीहाइपरग्लिसिमिक (antihyperglycemic) और एंटीडाइबिटिक गुण होते हैं और ये सभी गुण मधुमेह के मरीज़ के उपचार में काम आते हैं। यहां तक कि यह एलोपैथिक दवा गिलबेक्‍लामाइड (Glibenclamide) से भी ज्यादा फ़ायदेमंद है।हालांकि, यह भी माना जाता है कि यह पतले या कम वज़न वाले मधुमेह के मरीज़ों के लिए ज्‍यादा फ़ायदेमंद है, वहीं मधुमेह के जो मरीज़ मोटे होते हैं, उस पर इसका असर कम हो सकता है।
5.तनाव को कम करता है
मूसली का सेवन करने से तनाव भी कम होता है। हालांकि, इसका अभी तक कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन माना जाता है कि इसमें मौजूद पोषक तत्व काफ़ी हद तक तनाव को दूर कर मानसिक तौर पर स्वस्थ रखते हैं।
6. नपुंसकता में सहायक
सफेद मुसली (क्लोरोफाइटम बोरिविलिनम एल.) के मूल कंदों के क्लिनिकल मूल्यांकन और वीर्य और टेस्टोस्टेरोन पर इसके प्रभाव के बारे में एक शोध ने निष्कर्ष निकाला कि स्पर्म की गिनती और स्पर्म की गतिशीलता बढ़ाने में सफ़ेद मुसली बहुत प्रभावी है। इसने सीमेन और टेस्टोस्टेरोन के स्तर की मात्रा में भी बहुत महत्वपूर्ण सुधार दिखाया है।
                    चाईनीस जर्नल ओफ़ इंटीग्रेटड मेडिसन में प्रकाशित एक रपट के अनुसार पोलीसेकेराईड और सेपोनिन से भरपूर इस जडीबूटी को सेक्सुअल डिसफंक्शन जैसी समस्याओं के निवारण के लिए सटीक माना गया है, इसके क्लिनिकल प्रमाण वाकई चौकाने वाले हैं।आर्काइव्स ओफ़ सेक्सुअल बिहेवियर जर्नल में भी ऐसी ही शोध पर रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी हैं, इसके अलावा सैकडों ऐसे शोधपत्र हैं जिनमें इसके गुणों का बखान किया गया है और अनेक एनिमल स्ट्डीस भी की गयी।
                     कई शोध ये भी बताते हैं कि डायबिटीज के बाद होने वाली नपुंसकता की शिकायतों में भी सफेद मूसली सकारात्मक असर दिखाती है। सफ़ेद मुसली पुरुषों को शारीरिक तौर पर पुष्ट बनाने के अलावा इनके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढाने में मददगार है। सफ़ेद मूसली से वीर्य की गुणवत्ता बढ़ती है और नपुंसकता जैसी बीमारी से भी काफ़ी हद तक छुटकारा मिलता है। कई बार मधुमेह या अन्य किसी बीमारी के वजह से इरेक्टाइल डिसफंक्शन (इसमें संभोग के दौरान लिंग उत्तेजित नहीं होता) की आशंका होती है, ऐसे में मूसली के सेवन से इसे ठीक किया जा सकता है। इसका प्रभाव स्पर्म काउंट यानी शुक्राणुओं पर भी होता है, जिससे यौन शक्ति बढ़ती है। शीघ्रपतन में भी इसका उपयोग किया जाता है।  सफ़ेद मुसली( Safed Musli) का उपयोग उम्र की वजह से कुछ यौन कठिनाइयों जैसे कि प्रीमैच्योर ईजेकुलेशन और इरेक्टाइल डिसफंक्शन को ठीक करने के लिए किया जाता है। यौन कामेच्छा बढ़ाने के लिए यह जड़ी बूटी एक टॉनिक के रूप में काम करती है। 
इस चूर्ण का सेवन लम्बे समय तक करने पर भी किसी तरह की परेशानी नहीं। चाहे वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम हो, नपुंसकता की शिकायत हो या स्वप्नदोष, मूसली हमेशा हर्बल जानकारों द्वारा सुझाई जाती है।सफेद मूसली शीघ्रपतन के देसी इलाज के काफी मशहूर है। कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बनाकर एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम एक कप दूध के साथ लेने से शीघ्रपतन और वीर्य की कमी जैसी समस्याएं दूर हो जाती हैं। कामोत्तेजना बढ़ाने में भी मूसली काफी लाभदायक होती है। इसके लिए कौंचबीज चूर्ण, सफेद मूसली, तालमखाना, अश्वगंधा चूर्ण को बराबर मात्रा में तैयार कर 10 ग्राम ठंडे दूध के साथ सेवन करना होता है। ये काफी कारगर नुस्खा माना जाता है। 
7.बॉडी बिल्डिंग में मदद करता है
मूसली से शारीरिक शक्ति तो बढ़ती ही है, साथ ही इससे वज़न भी बढ़ता है। अगर कोई अपना वज़न बढ़ाना चाहता है, तो वो मूसली का सेवन कर सकता है। मूसली में मौजूद पोषक तत्व कुपोषण से पीड़ित शरीर को पोषण प्रदान कर वज़न बढ़ने में मददगार साबित होते हैं। 
सफ़ेद मुसली(Safed Musli) मांसपेशियों की वृद्धि, टिश्यूओं की बहाली और वसूली से संबंधित लाभ देता है। ये गुण इसे शरीर के सौष्ठव के लिए एक आदर्श पूरक बनाते हैं। सभी बॉडी बिल्डरों को यह सलाह दी जाती है कि वे अपने काम को नियमित करने में सहायता के लिए एक निश्चित मात्रा में सफ़ेद मुसली का सेवन करें।शारीरिक शिथिलता को दूर कर ऊर्जा को बढ़ाने में सफेद मूसली बेहद लाभकारी होती है, यही कारण है कि कई तरह की दवाइयों के निर्माण में सफेद मूसली का प्रयोग किया जाता है।   
8.वजन कम करने में मदद करता है
यदि आप वजन कम करना चाहते हैं तो सफेद मुसली का सेवन बहुत मददगार साबित हो सकता है। यह पाचन तंत्र को ठीक रखता है और मेटाबोलिज्म को बढ़ाता है। यह शरीर को ताकत भी देता है और थकान से छुटकारा पाने में मदद करता है। अगर आपको वज़न घटाना है, तो आप गर्म पानी में आधा चम्मच मूसली पाउडर मिलाकर पिएं। इससे आपका वज़न काफ़ी हद तक कम हो सकता है। वहीं, अगर आपको वज़न बढ़ाना है, तो आप दूध के साथ इसका सेवन कर सकते हैं।
 9.पथरी यानि स्टोन की समस्या में सफेद मूसली बहुत कारगर उपाय है। इसे इन्द्रायण की सूखी जड़ के साथ बराबर मात्रा (1-1 ग्राम) में पीसकर, एक गिलास पानी में डालकर खूब मिलाएं। इस मिश्रण को मरीज को हर दिन सुबह पिलाने से महज सात दिन में ही प्रभाव दिखता है। इसके सेवन से बड़ी पथरी भी गल जाती है।
आयुर्वेद ने मुंह के इन्फेक्शन के इलाज में शक्ति या सफद मुसली की व्याख्या की है। सफ़ेद मुसली की जड़ का पाउडर घी में तलकर और गले और मुंह के इन्फेक्शन को कम करने के लिए सेवन किया जाता है।
10.डायरिया का इलाज करता है
सफ़ेद मुसली(Safed Musli) के लाभों में से एक दस्त और पेचिश जैसे पाचन संबंधी मुद्दों से संबंधित है। सफ़ेद मुसली के सेवन से इनसे प्रभावी रूप से निपटा जा सकता है। यहां तक ​​कि शिशुओं में दस्त का इलाज करने के लिए सफ़ेद मुसली की एक छोटी खुराक दी जा सकती है
सफेद मूसली के नुकसान – 
हर चीज़ के फ़ायदे और नुकसान दोनों होते हैं। इसलिए, सफ़ेद मूसली के भी फ़ायदे के साथ कुछ नुकसान भी हैं। नीचे हम ऐसे ही कुछ नुकसानों के बारे में आपको बता रहे हैं।
• पचने में वक़्त लगता है, इसलिए पाचन तंत्र पर प्रभाव पड़ सकता है।
• कब्ज़ की परेशानी हो सकती है।
• भूख कम हो सकती है।
• इसकी तासीर ठंडी होती है, इसलिए यह कफ की परेशानी को बढ़ा सकता है।
• त्वचा संबंधी एलर्जी हो सकती है।
सफेद मूसली खाने के तरीके – 
इसका सेवन करने से हमें फायदा हो, इसके लिए यह जानना ज़रूरी है कि इसकी कितनी ख़ुराक ली जाए। इसकी खुराक व्यक्ति की उम्र और शरीर पर निर्भर करता है। नीचे हम सफेद मूसली खाने की विधि के बारे में आपको बता रहे हैं। इससे आप आसानी से समझ सकेंगें कि सफ़ेद मूसली का उपयोग कैसे कर सकते हैं ? जानिए क्या है सफ़ेद मूसली खाने का तरीका।
बच्चों को एक ग्राम तक मूसली दे सकते हैं, लेकिन पहले बार सेवन करने के बाद बच्चे को पेट संबंधी या कोई और स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो, तो इसे न दें।
13 से 19 वर्ष के किशोर दो ग्राम तक सफ़ेद मूसली का सेवन कर सकते हैं।
60 वर्ष तक के लोग 6 ग्राम तक मूसली का सेवन कर सकते हैं।वैसे तो गर्भवती महिलाएं या स्तनपान कराने वाली मां दो ग्राम तक मूसली खा सकती है, लेकिन इस बारे में एक बार अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।सफ़ेद मुसली को भोजन के दो घंटे बाद लेना चाहिए।
              इसके उपयोग के कई तरीक़े हैं, आप चाहे तो इसका कैप्सूल खा सकते हैं या फिर दूध व शहद के साथ मिलाकर इसके पाउडर का सेवन कर सकते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे खाना पसंद करेंगे।मूसली बेहद गुणकारी औषधि है। इसका सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करने से यह शरीर के लिए वरदान साबित हो सकती है।
                     एक फार्मास्युटिकल्स कंपनी अपनी वेबसाइट पर ये दावा करते हैं कि मूसली के कोई ज्ञात नकारात्मक साइड इफेक्ट नहीं हैं और क्योंकि यह पूरी तरह कार्बनिक हर्बल सामग्री से बनाया जाता है, इसलिए मानव उपभोग के लिए सुरक्षित है। कंपनी दावा करती है कि इस उत्पाद को उच्च रक्तचाप, रुमेटी गठिया वाले तथा स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भी इसका सेवन सुरक्षित है। हालांकि, इस संबंध में उन्होंने कोई चिकित्सकीय प्रमाण नहीं दिया। ……………………………..हर हर महादेव 

क्या वायरस से तंत्र -मंत्र बचा सकते हैं ?

 
                    यह लेख एक ऐसा प्रयास है जिसमे हम निष्पक्ष रूप से समझने का प्रयत्न कर रहे हैं की हम तंत्र मन्त्र और अवचेतन की शक्ति से किसी रोग से बच सकते हैं अथवा उसका निराकरण कर सकते हैं या नहीं |इसे इस रूप में न लिया जाय की हम तंत्र मन्त्र को प्रचारित कर रहे |हम अपने ज्ञान के अनुसार आज सामने आई एक समस्या पर दैवीय शक्तियों के प्रभाव को समझने का प्रयत्न मात्र कर रहे |
                 जहाँ और जब इंसान खुद को असक्षम मानने लगता है तब उसे अक्सर भगवान् की याद आती है और यही होता है तब जब विज्ञान अथवा चिकित्सकीय औषधियां असफल होती हैं या इलाज होने पर भी खतरे की संभावना दिखती है तब डाक्टर तक कहने लगते हैं भगवान् से प्रार्थना कीजिये |आज के समय में चीन से फैलना शुरू हुआ एक वायरस कोरोना वैश्विक महामारी बना हुआ है और विश्व स्वास्थय संगठन ने इसे वैश्विक महामारी घोषित कर दिया है |हमारे देश में भी यह तेजी से फ़ैल रहा है और इसका कोई भी कारगर इलाग अब तक नहीं खोजा जा सका है |दावे और नुस्खे तो बहुत बताये जा रहे किन्तु कोई भी इलाज प्रामाणिक नहीं है |अनेक मेसेज और पोस्ट वायरल हो रहे मिडिया में और लोग इसके नाम पर अपनी रोटियां सेकने का भी प्रयत्न कर रहे किन्तु वास्तविकता यह है की इसका कोई इलाज अभी नहीं है |हमसे किसी ने प्रश्न किया की गुरु जी क्या तंत्र में इसका कोई इलाज हो सकता है या ऐसा कोई उपाय जिससे इससे बचा जाए तो हम सोच में पड़ गए और हमें जो समझ आया वह आपके सामने प्रस्तुत करने का प्रयत्न कर रहे हैं |हमने अपने इस अलौकिक शक्तियाँ चैनल पर पहले भी रोग बीमारी आदि पर अवचेतन की भूमिका ,मन्त्र तंत्र के प्रभाव आदि प्रकाशित किये हैं ,आज एक निश्चित विषय पर चर्चा करते हैं |
                    हम तंत्र ,ज्योतिष और अध्यात्म से लगभग बचपन से जुड़े रहे हैं ,साथ ही हम साइंस ग्रजुयेट भी हैं तो हम समझ सकते हैं की तंत्र -मंत्र कैसे काम करते हैं ,कहाँ काम करते हैं ,किस तरह प्रभावित करते हैं ,इनका प्रभाव कब और कैसे होता है |हमने महामृत्युंजय और मृत संजीवनी के भी प्रयोग किये हैं और शरीर की इम्यून सिस्टम अर्थात प्रतिरोधक क्षमता का भी अध्ययन किया है |मूलतः काली और कुंडलिनी साधक होने से हमें चक्रों की शक्ति ,ऊर्जा और मन्त्रों की शक्ति का भी अनुभव है |किन मन्त्रों ,किन चक्रों ,किन शक्तियों का प्रभाव प्रतिरोधकता बढाता है और क्या करने से प्रतिरोधक क्षमता बढती है |किस स्थिति में तंत्र मंत्र आज के समय में प्रभावी हो सकते हैं और कब इनसे बहुत लाभ नहीं मिलता ,in सबका हमने अध्ययन किया है अतः समझ सकते हैं की क्या हो सकता है ,कब क्या किया जाना चाहिए |इंटरनेट और सोसल मिडिया पर ज्योतिष और तंत्र के जानकारों ने अपने ज्ञान का पिटारा कोरोना और वायरस को भी लेकर खोलना शुरू कर दिया है जबकि इसके आने से पहले किसी ने कोई भविष्यवाणी नहीं की कि कोई ऐसी महामारी आने वाली है |आने के बाद लोग ग्यानी बनना शुरू हो चुके हैं |घरेलू नुस्खे से लेकर अनेक दवाएं भी बताये जा रहे ,ज्योतिषीय योग भी गिनाये जा रहे और जल्दी ही यह दावे भी होंगे की अमुक गुरु ने अमुक चमत्कार कर दिए |हमारा पूरा जीवन ही तंत्र और ज्योतिष में रहा तो हमें पता है क्या हो सकता है आज के दौर तथा समय में और क्या सच है |
                          अब हम अपने मूल प्रश्न पर आते हैं की कोरोना अथवा ऐसे किसी भी वायरस ,विषाणु आक्रमण के वातावरण में अथवा किसी भी रोग की सम्भावना में तंत्र -मन्त्र ,पूजा -पाठ से क्या वास्तव में इनसे मुक्ति पाई जा सकती है या इनसे बचाव हो सकता है |तो इसका उत्तर है कि हाँ इनसे बचाव हो सकता है और कुछ स्थितियों में मुक्ति भी पाई जा सकती है |मुक्ति की स्थिति के लिए ऐसा सक्षम साधक या सिद्ध चाहिए जो अपनी शक्ति से रोग हटा सके अथवा शक्तिपात कर सके या कम से कम मूलाधार का जागरण कर उसकी शक्ति बढ़ा सके |मूलाधार ही क्यों यह हम आगे बता रहे |आज के समाज में ऐसा सिद्ध मिलना बहुत कठिन है फिर भी इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता की किसी को भाग्य से एस साधक सिद्ध मिल सकता है जो उसकी समस्या दूर कर दे |सामान्य स्थितियों में चूंकि ऐसा होना मुश्किल होता है अतः बचाव के उपाय अथवा यह उपाय की रोग होने पर भी वह जानलेवा न हो यह किया जाना बेहतर होगा |हम कहना चाहेंगे की आध्यात्मिक दुनिया में ऐसे उपचार और उपाय है जो मृत्यु की सम्भावना को समाप्त कर सकते हैं |
                           यहाँ सच है की तंत्र की कोई सीमा नहीं है और शक्ति की भी कोई सीमा नहीं है किन्तु आज के समय में क्या स्थिति है ,क्या वास्तविकता है ,यह देखना अधिक आवश्यक है |पहले के समय में ऐसी कहानियां सुनी जाती हैं की अमुक सिद्ध ने ,अमुक साधू ने अमुक स्थान पर लोगों की मदद की ,लोगों के कष्ट दूर कर दिए ,अमुक महामारी को रोक दिया या उसे समाप्त कर दिया किन्तु आज के समय में ऐसे साधक मिलने मुश्किल है ,अगर हैं भी तो उन्हें कोई सामाजिक रूचि नहीं अतः सामूहिक कल्याण की बात सोचना कल्पना होगी किसी के द्वारा |व्यक्तिगत किसी किसी के लिए कोई साधक अथवा सिद्ध उनके कष्ट दूर कर्ट सकता है किन्तु बहुत विशेष अवस्था में ही क्योंकि जो इस अवस्था में पहुँचता है उसे अक्सर किसी से कोई लगाव नहीं होता और अगर किसी का कोई भला कर भी दे तो एक दो के भले से समाज पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ना ,जबकि समस्या पूरे समाज की है |इस तरह किसी साधक अथवा सिद्ध के सहारे तो यह समस्या जाने से आज रही |अब हम खुद क्या कर सकते हैं की इस तरह की समस्या से निकल सकें यह सोचना महत्वपूर्ण है |वैसे तो सभी लोग बचाव के उपाय अपनी समझ से कर रहे ,चिकित्सकीय और घरेलू उपाय किये जा रहे किन्तु आध्यात्मिक रूप से ,ईश्वरीय शक्तियों के सहारे सुरक्षा और समस्या होने पर उपचार के क्या उपाय हो सकते हैं इस पर हम चर्चा करते हैं |
                        किसी भी समस्या के ,किसी भी रोग के होने में ,किसी भी उपचार में सबसे बड़ी भूमिका आपके प्रतिरक्षा प्रणाली और प्रतिरोधक क्षमता की होती है |शायद आप न जानते हों किन्तु प्रतिरक्षा प्रणाली ही रोगों को ठीक करती है न की दवाएं ठीक करती हैं |दवाएं मात्र दो काम करती हैं एक तो आपकी रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ा देती हैं तात्कालिक रूप से और दुसरे यह बाहरी किसी संक्रमण से बचाती हैं बस |दवाएं रोग ठीक नहीं करती |रोग ,बीमारी ,घाव सबकुछ आपका शरीर ही ठीक करता है और यह सब करता है आपके शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र |प्रतिरक्षा प्रणाली की क्षमता निर्भर करती है आपकी प्रतिरोधक शक्ति पर |प्रतिरोधक शक्ति अच्छी है तो प्रतिरक्षा प्रणाली तेजी से काम करती है और आप किसी भी रोग ,बीमारी ,चोट ,घाव ,संक्रमण से बचते भी हैं और जल्दी ठीक भी होते हैं |अर्थात सबसे मुख्या हो गया आपकी प्रतिरोधक क्षमता और यह प्रतिरोधक क्षमता केवल खान पान ,वातावरण पर निर्भर नहीं होती अपितु इसका सीधा सम्बन्ध होता है आपके अवचेतन मन से |अगर आपका अवचेतन मन सक्रिय है ,सही काम कर रहा ,पूरा सहारा दे रहा तो आपकी प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होगी खानपान आपका सामान्य हो तब भी |
                     आपकी प्रतिरोधक क्षमता का आपके बहुत अच्छे खानपान से कोई मतलब नहीं होता |आप चिंता ,तनाव ,मानसिक दबाव ,भय ,दुविधा ,असंतुलित हों तो आपकी प्रतिरोधक् क्षमता कम हो जाती है ,शारीरिक स्वास्थ्य गिरने लगता है जबकि बहुत अच्छा आप भोजन कर रहे हों तब भी जबकि मानसिक निर्द्वन्दता ,निश्चिन्तता ,साहस ,मजबूत आत्मबल ,आत्मविश्वास ,तनावमुक्त ,निर्भय स्थिति में आपका सामान्य भोजन भी आपको स्वस्थ बना जाता है ,सोचिये ऐसा क्यों होता है |ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपके भावों से आपका अवचेतन प्रभावित होता है और आपकी प्रतिरोधक क्षमता घट या बढ़ जाती है |आपको विश्वास हो डाक्टर पर तो उसके द्वारा दी गयी विटामिन की गोली भी आपको ठीक कर देती है और विश्वास न हो तो बहुत अच्छी दवा भी देर से काम करती है |गाँव में घाव पर राख बाँध देने वाले के घाव ठीक हो जाते हैं और शहर के साफ़ वातावरण में रहने वाले के घाव बढ़ते जाते हैं ,यह सब है प्रतिरोधक क्षमता का कमाल और विश्वास तथा मानसिक स्थिति की देन,अवचेतन का प्रभाव |सीधा सा अर्थ है अवचेतन जैसा होगा शारीरिक स्थिति और रोग से लड़ने की क्षमता वैसी होगी |
                          अब बात करते हैं चक्र और मंत्र की तो हम आपको बताना चाहेंगे की आपकी प्रतिरोधक क्षमता और आतंरिक प्रतिरक्षा प्रणाली मूलाधार की शक्ति पर निर्भर करती है ,कमजोर मूलाधार का मतलब है कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली |कमजोर कमर के हिस्से वाला कभी मजबूत व्यक्ति नहीं होता यह उदाहरण है मूलाधार की शक्ति का |मूलाधार की अधिष्ठात्री काली है जो मूलाधार का नियंत्रण करती है और जो मूलाधार को शक्ति देती है |काली की उपासना से साहस ,निश्चिन्तता ,भय मुक्ति ,आत्मबल ,आत्मविश्वास प्राप्त होता है जो अवचेतन को सक्रीय भी करता है और प्रतिरोधक क्षमता तथा प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है |काली की उपासना से मूलाधार को बल मिलता है ,दूसरी ओर मूलाधार की मजबूती से काली की शक्ति भी बढती है अर्थात दोनों एक दुसरे से जुड़े हैं |इस प्रकार काली के मंत्र और उपासना आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है साथ ही किसी भी नकारात्मक प्रभाव को भी हटाती है |तो यदि हम अपने अवचेतन की स्थिति सुधारें और मूलाधार और काली को बल दें तो हम किसी भी रोग से लड़ सकते हैं और सभी रोगों से सुरक्षा के हमारे प्रयास अधिक सफल होंगे |इस तरह मन्त्र तंत्र और अवचेतन की सक्रियता सभी रोगों और वायरस ,बैक्टीरिया आदि में प्रभावी है बस समझने वाला जानकार चाहिए की समस्या क्या है और क्या मन्त्र ,क्या तरीका अपनाया जाना चाहिए ,कैसे अवचेतन को सुधारा जाए और कैसे प्रतिरोधक क्षमता बढाया जाए |रोग से पहले भी यह कारगर है रोग होने के बाद भी यह कारगर है |हमने अपने पहले के विडिओ में बताया है की अवचेतन में इतनी शक्ति है की वह आपकी कोई भी समस्या ठीक कर सकता है ,गम्भीर से गम्भीर रोग भी और गम्भीर से गम्भीर समस्या भी |
                        जब रोग ,बीमारी और समस्या का निवारण प्रतिरक्षा प्रणाली ,प्रतिरोधक तंत्र ही करता है तो उसे सक्षम बनाना चाहिए इसके लिए हमारे कुछ सुझाव हैं |आप किसी अच्छे उच्च स्तरीय काली साधक से काली जी के यन्त्र का निर्माण करा कम से कम २१ हजार मन्त्र से अभिमंत्रित करा ताबीज में धारण करें ,खुद भी काली जी के मंत्र का जप करें जबकि आपको कोई रोग न हुआ हो तब सुरक्षा की दृष्टि से ,यह आपकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा |रोग हो जाए तो ताबीज धारण के साथ महामृत्युंजय का जप करें |यह मंत्र जप और ताबीज धारण आपकी मूलाधार की स्थिति सुधारेगा और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाएगा |आप सुबह नंगे पांव थोड़ी देर मिटटी पर या घास पर चला करें ,सुविधा न हो तो घर में किसी टब में काली मिटटी डालकर पानी दाल पाँव से उसे १५ मिनट गूथें अर्थात उसमें घूमें और फिर उसे सूखने दें सूख जाए तो छुडा कर पाँव धो लें |कमर में काला धागा लोहे की मुदरी डालकर धारण करें |इससे आपके मूलाधार को बल मिलेगा और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी |एक काम और किया करें अपनी नाभि में शुद्ध गाय का घी लगाया करें |सुबह थोड़ी देर गायत्री मन्त्र का जप करें इससे आपकी जीवनी शक्ति बढ़ेगी |मृत संजीवनी मंत्र गायत्री मंत्र और महा मृत्युंजय मंत्र का संयोग है जो मृत्यु की स्थिति में भी कारगर होता है इसमें गायत्री मंत्र जीवनी शक्ति देने वाली और महा मृत्युंजय मृत्यु से बचाने वाला होता है |अतः गायत्री का जप आपकी जीवनी उर्जा बढ़ा देगा |साथ ही काली के मन्त्र का भी जप जरुर करें यह आपके प्रतिरक्षा प्रणाली को बल देता है और मानसिक शक्ति बढाता है जिसका सीधा सम्बन्ध अवचेतन से से होता है |
           किसी अच्छे जानकार से अवचेतन की सक्रियता के लिए अपनी स्थिति के अनुसार कुछ लाइनें लिखवा लें और उनको लगातार दोहरायें |यह शब्द अवचेतन में बैठ जायेंगे तो आपकी किसी समस्या के प्रति संवेदनशीलता बदल जायेगी ,अपने आप परिवर्तन आ जायेंगे |आप विश्वास करें या न करें पर यह सच है की आपमें प्रबल विश्वास हो और कोई संदेह न हो कि आपको कोई रोग नहीं हो सकता तो यकींन मानिए आपकी स्थिति अन्य की तुलना में बहुत मजबूत हो जाती है और आपके किसी रोग से प्रभावित होने की आशंका 90 प्रतिशत तक कम हो जाती है |अब थोडा ज्योतिष से भी ,आप अपने लग्नेश को मजबूत कर लीजिये क्योंकि यही आपके शरीर को प्रभावित करता है और स्वास्थ्य इसी पर निर्भर होता है |साथ ही षष्ठेश और षष्ठ भाव की शक्ति कम हो यह भी ध्यान में रखें |किसी ज्योतिषी से जब ये कहेंगे कि रोग बचने के लिए क्या उपाय हों तो वह बता देगा |अब कुछ सामान्य आध्यात्मिक उपचार ,घर में रोज कपूर जलाने से विषाणु और बैक्टीरिया नष्ट होते हैं |महीने में एक दिन कम से कम घर में हवन कर देने से हानिकारक बैक्टीरिया ,वाइरस और संक्रमण से बचाव होता है |
                         ऐसे अनेक और छोटे उपाय हैं जिनसे सुरक्षा हो सकती है |ऐसा नहीं की तंत्र मन्त्र में वह शक्ति नहीं की किसी समस्या का निवारण नहीं हो सकता किन्तु समस्या सही और श्रेष्ठ जानकार मिलने की होती है |मन्त्र -तन्त्र की शक्ति असीम है किन्तु वास्तविक साधक मिलना कठिन होता है और उसमे भी सही समय सही जानकारी रखने वाला चाहिए |बेहतर हो खुद प्रयास करें अधिक लाभ भी होगा और अपनी क्षमता भी बढ़ेगी |पूर्व में भी रहे हैं और आज भी ऐसे साधक हैं जो हाथ रख दें आप पर तो समस्या समाप्त हो जाए किन्तु उन्हें किसी में रूचि नही होती ,जो पैसे के लिए कुछ करते हैं उनमे शक्ति हो जरूरी नही अतः सबसे बेहतर खुद थोडा समय दें और स्वस्थ सुखी रहें |अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी किन्तु हमारा मानना है की आप खुद अनुभव करेंगे जो मजबूत आत्मबल वाले हैं ,जिनका मूलाधार मजबूत है ,जो साहसी और संघर्षशील हैं ,जो प्रबल धार्मिक और आस्था वाले हैं ,जो मन्त्रज्ञ ,तंत्रज्ञ हैं ,जो उग्र शक्तियों काली अथवा गायत्री ,मृत्युंजय के साधक हैं ,जिनके घरों में साफ़ सफाई ,पूजा -हवन हो रहे उनके यहाँ संक्रमण कम होगा और वहां मृत्यु आदि की सम्भावना भी कम होगी |...........................................हर हर महादेव 

अप्सरा साधना असफल क्यों हो जाती है ?

अप्सरा साधना असफल क्यों हो जाती है 
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                       अक्सर लोग हमसे सम्पर्क करते हैं की उन्होंने अप्सरा साधनाएं की लेकिन न तो अप्सरा सिद्ध हुई न ही कोई अनुभूति हुई ,ज्यादातर लोगों को विपरीत परिणाम ही मिले |लाभ तो कुछ नहीं हुआ परेशानी और महसूस हुई |इसके बाद भी लोगों में चाहत इतनी है की हर कोई अप्सरा सिद्ध करना चाहता है ,यक्षिणी सिद्ध करना चाहता है ,बेताल ,जिन्न सिद्ध करना चाहता है ,कर्ण पिशाचिनी ,कर्ण मातंगी ,स्वप्नेश्व्री और पंचंगुली सिद्ध करना चाहता है |सबके उद्देश्य भौतिक होते हैं और धन अथवा शारीरिक सुख की चाह ही इनमे अधिक होती है |हर कोई ऐसी शक्ति चाहता है जो उनके सारे काम भी कर दे और धन समृद्धि ,सौन्दर्य ,शक्ति भी दे दे |आज के युवा और सामान्य लोग इसके पीछे पागल हुए पड़े हैं |इन्हें देखकर इनको बेचने की हजारों दुकाने खुली पड़ी हैं जहाँ यहाँ तक दावा किया जा रहा की इतने पैसे दे दो हम तुम्हे अप्सरा ,परी ,यक्षिणी ,जिन्न ,बेताल ,पिशाचिनी ,पंचंगुली ,भुतेश्वरी दे देते हैं ,दिला देते हैं ,सिद्ध करा देते हैं |लोग पैसे दे भी रहे और ठगे भी जा रहे |लोग यह नहीं सोचते की जिसके पास ऐसी शक्ति होगी वह इंटरनेट पर ,सोशल मिडिया पर यह क्यों कहेगा की वह आपको सिद्ध करा देगा ,सिद्धि दे देगा ,कोई शक्ति आपको दे देगा ,क्योंकि उसके काम तो वह शक्ति ही कर देगी तो उसे आपसे पैसे लेने की क्या जरूरत |अब यह सभी मोक्ष ,मुक्ति की शक्तियाँ तो हैं नहीं ,यह सभी तो भौतिक सुख वाली ही शक्तियाँ हैं |
                   लोगो में सबसे अधिक चाहत अप्सरा और कर्ण पिशाचिनी को लेकर होती है |कर्ण पिशाचिनी भूत काल और वर्त्तमान बताती है जिससे लोग चाहते हैं किसी का भूत काल और आज का बता सके ,भविष्य का तुक्का लगा सकें और पैसे कमा सकें |लोग यह भी सोचते हैं की कर्ण पिशाचिनी से वह शारीरिक सुख भी प्राप्त कर सकते हैं |ऐसा ही कुछ अप्सरा के बारे में लोग सोचते हैं |लोगों की मान्यता है की अप्सरा उनके सारे काम कर देगी ,भौतिक सुख सुविधाएं दे देगी ,आरोग्य और सुन्दरी दे देगी ,यौवन देगी |अप्सरा शारीरिक सुख भी देगी ऐसा लोग सोचते हैं |इनमे कुछ बातें सही भी हैं किन्तु दोनों ही शक्तियों में शारीरिक सुख की बात पूरी तरह सही नहीं है |जिस सुख की बात इनके सम्बन्ध में कही जाती है वह एक अलग सुख है |हमें इससे मतलब नहीं की यह क्या देती है क्या नहीं देती हमारा विषय यह मात्र है की अप्सरा की सिद्धि होती क्यों नहीं |
                                हम आपको बताना चाहेंगे की अप्सरा की सिद्धि और साधना मुख्यतया सामान्य लोगों के लिए थी ही नहीं |यह उच्च स्तर के साधकों नें अपनी सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए विकसित की थी जिससे वह अपनी साधना में रमे रहें और कोई शक्ति ऐसी उनके पास रहे जो उनके लिए सुविधाएं उपलब्ध कराती रहे |बाद इनका प्रसार सामान्य लोगों में भी हो गया |ऐसा नहीं की किसी को यह सिद्ध होती ही नहीं किन्तु अधिकतर सामान्य लोग इसकी सिद्धि में असफल ही होते हैं कारण अनेक होते हैं जिनका विश्लेषण हम आगे करेंगे |सबसे पहले तो हम यह देखते हैं की अप्सरा आखिर है क्या |हम आपको बताना चाहेंगे की अप्सरा नाम की दो तरह की शक्तियाँ होती हैं ,एक तो स्वर्ग लोग अथवा उच्चस्तर के लोक से सम्बन्धित पारलौकिक शक्ति अप्सरा होती है जो बहुत ही मुश्किल से सिद्ध होती है ,बहुत ही उच्च स्तर के साधक को ही |दूसरी पृथ्वी की सतह से सम्बन्धित शक्ति जो अलौकिक शक्तियों से सम्पन्न होती है |यही अधिकतर अघोरियों ,साधकों और किसी किसी सामान्य व्यक्ति को सिद्ध होती है जिसकी गति मात्र पृथ्वी की सतह तक ही होती है और केवल कुछ हद तक ही यह भविष्य में गति कर सकती है |यह सतही अप्सरा पृथ्वी लोक में ही रहती और विचरण करती है जिसका भौतिक प्रमाण भी मिलता रहा है |यह सुख सुविधाएं जुटा सकती है ,सौन्दर्य ज्ञान दे सकती है ,आरोग्य में सहायक हो सकती है ,रसायनों की जानकारी दे उन्हें उपलब्ध करा सकती है और ज्ञानवान बना सकती है |
                 भारतीय संस्कृति में अप्सरा एक जाना -पहचाना नाम है ,यह नाम वैदिक युग से ही विभिन्न कारणों से जाना जाता है ,,तंत्र जगत में कई धर्मो -सम्प्रदायों में अप्सरा की साधना की जाती है विभिन्न नामों से |अप्सरा देवलोक में रहने वाली अनुपम, अति सुंदर, अनेक कलाओं में दक्ष, तेजस्वी और अलौकिक दिव्य स्त्री है। वेद और पुराणों में उल्लेख मिलता है कि देवी, परी, अप्सरा, यक्षिणी, इन्द्राणी और पिशाचिनी आदि कई प्रकार की स्त्रियां हुआ करती थीं। उनमें अप्सराओं को सबसे सुंदर और जादुई शक्ति से संपन्न माना जाता है। अप्सराओं को इस्लाम में हूर अथवा परि कहा गया है। भारतीय पुराणों में यक्षों, गंधर्वों और अप्सराओं का जिक्र आता रहा है। यक्ष, गंधर्व और अप्सराएं देवताओं की इतर श्रेणी में माने गए हैं। कहते हैं कि इन्द्र ने 108 ऋचाओं की रचना कर अप्सराओं को प्रकट किया। मंदिरों के कोने-कोने में आकर्षक मुद्रा में अंकित अप्सराओं की ‍मूर्तियां सुंदर देहयष्टि और भाव-भंगिमाओं से ध्यान खींच लेती हैं।
            वेद और पुराणों की गाथाओं में उर्वशी, मेनका, रम्भा, घृताची, तिलोत्तमा, कुंडा आदि नाम की अप्सराओं का जिक्र होता रहा है। सभी अप्सराओं की विचित्र कहानियां हैं। माना जाता है कि ये अप्सराएं गंधर्व लोक में रहती थीं। ये देवलोक में नृत्य और संगीत के माध्यम से देवताओं का मनोरंजन करती थीं।
                 पुराणों के अनुसार देवताओं के राजा इन्द्र ने सिंहासन की रक्षा के लिए अनेक बार संत-तपस्वियों के कठोर तप को भंग करने के लिए अप्सराओं का इस्तेमाल किया है। वेद-पुराण में कई स्थानों में इन अप्सराओं के नाम आए हैं, जहां इन्होंने घोर तपस्या में लीन ऋषियों के तप को भंग किया।
           अपनी व्युत्पति (अप्सु सरत्ति गच्छतीति अप्सरा:) के अनुसार ही अप्सरा जल में रहने वाली मानी जाती है। अथर्ववेद तथा यजुर्वेद के अनुसार ये पानी में रहती हैं। अथर्ववेद के अनुसार ये अश्वत्थ तथा न्यग्रोध वृक्षों पर रहती हैं, जहां ये झूले में झूला करती हैं और इनके मधुर वाद्यों (कर्करी) की मीठी ध्वनि सुनी जाती है। ये नाच-गान तथा खेलकूद में निरत होकर अपना मनोविनोद करती हैं। अप्सराओं की कोई उम्र निर्धारित नहीं है। ये सभी अजर-अमर हैं। शास्त्रों के अनुसार देवराज इन्द्र के स्वर्ग में 11 अप्सराएं प्रमुख सेविका थीं। ये 11 अप्सराएं हैं-कृतस्थली, पुंजिकस्थला, मेनका, रम्भा, प्रम्लोचा, अनुम्लोचा, घृताची, वर्चा, उर्वशी, पूर्वचित्ति और तिलोत्तमा। इन सभी अप्सराओं की प्रधान अप्सरा रम्भा थी। अलग-अलग मान्यताओं में अप्सराओं की संख्या 108 से लेकर 1008 तक बताई गई है।
          अप्सराएँ देवलोक से इतर योनी की हैं अर्थात देवता या देवी नहीं है ,मनुष्य यह हैं नहीं |इस प्रकार यह बीच की योनी है जो देवताओं की इच्छा से और मनुष्यों की आराधना से कार्य सम्पादन करती हैं |इस तात्विक दृष्टि से देखें तो इनका स्थान बीच का आता है ,,अर्थात पृथ्वी से ऊपर और देलोक से नीचे |पृथ्वी की सतह पर नैसर्गिक नकारात्मक शक्तियां रहती हैं यथा पिशाच-पिशाचिनी आदि किन्तु अप्सरा नकारात्मक शक्तियां नहीं हैं इसलिए इनका स्थान सतह से कुछ ऊपर होता है और मूलतः इन्हें ऋणात्मक शक्तियों की श्रेणी में रखा जा सकता है |अप्सराएँ सहायिका की भूमिका निभाती है और भौतिक सुख-समृद्धि दे सकती है ,चुकी इनमे विलक्षण जादुई या अलुकिक शक्तियां होती हैं अतः साधकों या मनुष्यों के लिए बहुत प्रकार से लाभदायक होती हैं |इसी कारण बहुत से साधक इनकी साधना करके इन्हें अपने वशीभूत कर लेते हैं जिससे उन्हें अपनी उच्च साधनाएं निर्विघ्न से संपन्न करने में सहायत मिले |यद्यपि इनकी साधना बेहद कठिन होती है किन्तु देव-देवी जितनी नहीं ,,चुकी ऋणात्मक शक्तियां हैं अतः सामान्य रूप से तामसिक प्रवृत्ति की और शीघ्र आकृष्ट होती हैं और नियंत्रित हो सकती हैं |
 कुछ नाम और- अम्बिका, अलम्वुषा, अनावद्या, अनुचना, अरुणा, असिता, बुदबुदा, चन्द्रज्योत्सना, देवी, घृताची, गुनमुख्या, गुनुवरा, हर्षा, इन्द्रलक्ष्मी, काम्या, कर्णिका, केशिनी, क्षेमा, लता, लक्ष्मना, मनोरमा, मारिची, मिश्रास्थला, मृगाक्षी, नाभिदर्शना, पूर्वचिट्टी, पुष्पदेहा, रक्षिता, ऋतुशला, साहजन्या, समीची, सौरभेदी, शारद्वती, शुचिका, सोमी, सुवाहु, सुगंधा, सुप्रिया, सुरजा, सुरसा, सुराता, उमलोचा आदि।
       सभी अप्सराओं के गुण ,प्रकृति और साधना विधियाँ अलग अलग होती हैं |मुख्यतः इनकी साधनाओं में असफलता पूर्ण नियमों का और पूर्ण पद्धति का ज्ञान न होने से ही होती है |अप्सराएं तामसिक प्रवृत्ति से आकर्षित जरुर होती हैं किन्तु गंदे वातावरण में इन्हें सिद्ध नहीं किया जा सकता |यह पवित्रता और शुद्धता का वातावरण भी चाहती हैं |जब आप किसी भी अलैकिक ऊर्जा सम्पन्न शक्ति को नियंत्रित अथवा वशीभूत करने का प्रयत्न करते हैं तो वह तीव्र प्रतिक्रिया करती है |कोई भी शक्ति अपनी इच्छा से किसी के नियंत्रण में नहीं आना चाहती तो यह तो बहुत बड़ी शक्ति होती है |अक्सर लोगों को मंत्र दे दिए जाते हैं किन्तु पूर्ण पद्धति का ज्ञान नहीं होता ,या तो देने वाले को ही पूरा ज्ञान नहीं होता या वह जानबूझकर नहीं देता ,किताबों में तो तकनिकी और पूर्ण ज्ञान होता ही नहीं |इनसे या वातावरण की अन्य नकारात्मक शक्तियों से जितनी मजबूत सुरक्षा की आवश्यकता होती है वह नहीं की गयी होती है |इस तरह से जब साधना की जाती है तो जब ऊर्जा प्रतिक्रिया करती है तो गंभीर विक्षोभ उत्पन्न होता है और सबकुछ असता व्यस्त हो जाता है |पहले तो शक्ति आकर्षित ही नहीं होती और अगर हो भी गयी तो जरा सी चूक और हानि ही देती है |अधिकतर लोग आ रही शक्ति को सम्भाल ही नहीं पाते जिससे उनमे और घर परिवार में दूसरी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है |हमारे संपर्क में अनेक ऐसे लोग आये हैं जिन्होंने साधनाए तो की किताबों या विभिन्न गुरुओं को पैसे देकर मंत्र लेकर किन्तु साधना के बाद शारीरिक ,मानसिक अथवा आर्थिक हानियाँ हो गयी |
         हमने अप्सरा साधना के नियम अलग विडिओ में और लेख में प्रकाशित कर रखे हैं इसलिए यहाँ उन्हें फिर से देने का कोई औचित्य नहीं किन्तु नियम पालन न होने ,तकनिकी जानकारी न होने ,भाव शुद्ध न होने से ही असफलता मिलती है वर्ना यह इतनी भी बड़ी शक्तियाँ नहीं जिन्हें सिद्ध न किया जा सके |जब देवी देवताओं की सिद्धियाँ की जा सकती हैं तो यह तो उनसे बहुत नीचे की शक्तियाँ हैं |इनकी साधना में प्रत्यक्षीकरण तो किसी किसी को ही होता है किन्तु सिद्ध तो यह बहुतों को हो सकती हैं |सही गुरु ,सही मार्गदर्शन ,सुरक्षा की पूर्ण व्यवस्था ,पूर्ण तकनिकी जानकारी ,अनवरत साधना ,समय समय पर निर्देशन इनकी सिद्धि करा सकता है |गलत उद्देश्य न हो यह आवश्यक है क्योंकि यह अलौकिक शक्तियाँ हैं जो मन पढ़ लेती हैं और तब विपरीत प्रतिक्रिया करती हैं जिन्हें संभालना ही मुश्किल होता है |जब भी जो भी करें स्थिर मन ,मजबूत आत्मबल और शुद्ध सही लक्ष्य और भावना के साथ |.......................................हर हर महादेव 

महाशंख  क्या होता है ?

                      महाशंख के विषय में समस्त प्रभावशाली तथ्य केवल कुछ शाक्त ही जानते हैं |इसके अलावा सभी लोग tantra में शंख का प्रयोग इसी...