गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

मुकदमे /विवाद में तंत्र से विजय के उपाय

मुकदमे /विवाद और तंत्र शक्ति का प्रयोग
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आज के समय में विवाद ,मुकदमे ,कानूनी लड़ाई अथवा वर्चस्व की लड़ाई ,सम्पत्ति विवाद ,पारिवारिक विवाद ,आम हो गए हैं |पहले के समय में संस्कार ,बड़े -छोटो के सम्मान ,आपसी पंचायत ,विवाद से बचने और एक दुसरे के प्रति सहिष्णुता के कारण लोग विवाद अथवा मुकदमे आदि से बचने का प्रयत्न करते थे ,कभी कभी कुछ हानि पर भोग इनसे बचते थे ,पर आज की स्थिति उल्ट गयी है |छोटी -छोटी बातों पर ,छोटे -छोटे मुद्दों पर लोग कोर्ट -कचहरी चले जा रहे ,आपस में लड़ जा रहे ,मारपीट कर ले रहे |संपत्ति विवाद ,दहेज़ उत्पीडन ,पति -पत्नी विवाद ,फौजदारी ,मारपीट ,झूठे आरोप ,धोखा ,व्यापारिक विवाद ,साझेदारी के विवाद ,नौकरी आदि के विवाद मुख्यतया कानूनी लड़ाई में बदलते हैं और मुकदमे शुरू होते हैं |इनमे कितना पक्ष में निर्णय आएगा अनिश्चित होता है और सम्बंधित व्यक्ति लगातार तनावग्रस्त होने के साथ ही अपनी क्षमता योग्यतानुसार कार्य भी नहीं कर पाता ,जो हानि आदि हो रही हो वह अलग से |
कुछ मामले तो बड़े कष्टदायक होते हैं ,जबकि किसी को झूठा किसी केस -मुकदमे में फंसा दिया जाता है ,जैसे झूठा दहेज़ उत्पीडन का मुकदमा ,कोई आत्महत्या कर ले या किसी की ह्त्या हो जाए और किसी और को कोई फंसा दे या पुलिस किसी और के विरुद्ध केस बना दे ,किसी कर्मचारी को बिन गलती निलम्बित कर दिया जाए या नौकरी से हटा दिया जाए ,कोई किसी की संपत्ति हड़प ले झूठे आधार प्रस्तुत कर उसे उसके अधिकार से वंचित करे ,कोई किसी को बिना मतलब किसी मुकदमे में उलझा दे ,आदि आदि |ऐसी स्थितियों में सम्बंधित व्यक्ति बेवजह उलझ कर पीड़ित होता है |अनेक उपरोक्त मामले सामने आने पर हमें यह लेख लिखने की प्रेरणा मिली और कुछ तंत्रिकीय सुझाव देने का विचार आया जिससे मुकदमों आदि में उलझे लोगों को इससे मुक्ति मिल सके अथवा उनके मुकदमे /विवाद उनके पक्ष में हो सके |हम कारणों का विश्लेष्ण न कर सीधे उपाय और तरीके लिखते हैं क्योंकि कारण बहुत सारे हो सकते हैं जिनके लिए कई लेख कम पड़ जायेंगे |कुछ उपाय मुकदमे में विजय या अनावश्यक इस तरह के कष्ट से निकलने के निम्न हो सकते हैं |
. सामान्यतया पारंपरिक ज्योतिषी ,कर्मकांडी ,पुरोहित आदि किसी तरह के कष्ट ,समस्या ,विपत्ति ,संकट पर चंडी पाठ ,सप्तशती ,महामृत्युंजय ,हनुमान उपासना ,रुद्राभिषेक आदि की सलाह देते हैं |यह क्रियाएं और पूजा -अनुष्ठान सकारात्मक ऊर्जा बढाती हैं ,व्यक्ति की शक्ति बढाती हैं ,संकट कम करती हैं ,हानि कम करती हैं किन्तु सीधे मुकदमे आदि विवाद से इनका कम सम्बन्ध होता है ,यद्यपि इनका प्रभाव विस्तृत होता है किन्तु समग्रता लिए होता है |यदि मुकदमे आदि के लिए इन्हें किया जाए तो संकल्प पूर्ण रुपें मुकदमे के लिए होना चाहिए ,तब यह उसी दिशा में क्रिया करेंगे |
. मुकदमे /विवाद आदि के लिए सबसे सटीक प्रयोग बगलामुखी का प्रयोग होता है ,जो शत्रु का स्तम्भन कर देता है और विजय दिलाता है |साथ ही शत्रु स्वयं हतबुद्धि हो अपना विनाश कर लेता है |बेहतर तो यह होता है की जो व्यक्ति मुकदमे से सम्बंधित हो वह खुद बगलामुखी के मंत्र का अनुष्ठान /जप करे और बगलामुखी का यन्त्र धारण करे ,किन्तु यदि वह सक्षम नहीं है तो योग्य बगला साधक से दो तरह के यंत्र बनवाये |एक बगलामुखी का यन्त्र और दूसरा मुकदमा विजय का गदाधारी यन्त्र या हनुमान यंत्र |दोनों की अलग अलग प्राण प्रतिष्ठा कराये और फिर इन्हें बगला मंत्र से अभिमंत्रित कराये |इसके बाद दोनों को चांदी के ताबीज में प्रतिष्ठित करा धारण करे |चूंकि बगला ,विष्णु की आराध्या और ब्रह्मास्त्र शक्ति हैं और हनुमान रुद्रावतार होने के साथ विष्णु के सहायक |इस प्रकार इन शक्तियों का तालमेल एक ऐसा प्रभाव उत्पन्न करता है की व्यक्ति के पक्ष में विवाद /मुकदमे होने की संभावना बन जाती है |यदि भाग्य बिलकुल ही विपरीत न हुआ तो व्यक्ति हर प्रकार से विजयी होता जाता है |
. मुकदमे /विवाद में विजय हेतु बगलामुखी अनुष्ठान की ही तरह भगवती काली का भी अनुष्ठान किया जा सकता है |यह भी सर्वत्र विजय दिलाती हैं बस अंतर इतना आता है की यह शत्रुता -विवाद समाप्त करने की बजाय शत्रु ही समाप्त कर सकती हैं ,क्योकि इनकी प्रकृति सम्पूर्ण विनाश और अपने भक्त की सर्वत्र हर प्रकार से विजय की होती है |काली के रूपों में दक्षिण काली ,श्मशान काली ,भद्रकाली आदि का प्रयोग आवश्यकतानुसार किया जा सकता है |इनके यंत्रों का प्रयोग एकल रूप में ही किया जाता है धारण करने के लिए |
. भूमि /संपत्ति सम्बन्धी विवाद /मुकदमे के लिए वराह मंत्र अथवा वाराही साधना बहुत उपयोगी होता है जो स्थिर संपत्ति के लिए बहुत कारगर है |वाराही शक्ति भगवती त्रिपुरा की सहायक शक्ति है जो स्तम्भन और आकर्षण दोनों कार्य करती है |यह शत्रु को ताड़ित भी करते हैं और सम्पति पक्ष में करने में भी सहायक हैं |इनके साथ वाराही यन्त्र का धारण करना लाभ कई गुना बढ़ा देता है |वाराही के कई रूप भी होते हैं जो उद्देश्य विशेष के अनुसार पूजित हैं |
५. जब शत्रु पक्ष प्रबल हो और अधिक हानि होने की संभावना हो तब शत्रुनाशक प्रयोग में भद्रकाली के मन्त्रों का प्रयोग किया जाता है |तीव्र प्रयोगों के लिए इनके मन्त्रों के साथ सप्तशती के सम्पुट से पाठ किया जाता है अथवा दक्षिण काली के मंत्र के सम्पुट से पाठ किया जाता है |
. मुकदमे में विजय और शत्रु संहार के लिए बगलामुखी की सहायक शक्ति ज्वालामुखी को प्रमुख स्थान तंत्र में दिया जाता है |यह देवी शत्रु का संहार करती है और अपने भक्त को अभय प्रदान करती है |इनकी आराधना के साथ इनके यन्त्र की पूजा भी होनी चाहिए |यह षट्कर्म भी सिद्ध करती हैं और विजय भी दिलाती हैं |
७. शत्रु नाश अथवा विजय के लिए जातवेद दुर्गा का भी प्रयोग किया जा सकता है |जिनका मंत्र वैदिक ऋचा मन्त्र है और यह संकटों से रक्षा करती हैं |इसी प्रकार शत्रु उच्चाटन के लिए पक्षी दुर्गा अथवा भ्रमर दुर्गा का भी प्रयोग किया जा सकता है |
. शत्रु अथवा विवाद में विजय के लिए कालरात्रि प्रयोग भी किया जा सकता है जो शत्रु का संहार करने के साथ ही उसका सम्मोहन भी करती हैं |यह शक्ति दुर्गा की एक रूप हैं किन्तु इनका प्रयोग बगला ,प्रत्यंगिरा ,शरभराज आदि के साथ भी किया जा सकता है |शत्रुनाश के लिए चामुंडा प्रयोग भी श्रेष्ठ होता है जो काली रूप अथवा दुर्गा रूप हो सकता है |
. शत्रुनाश और विजय के लिए रुद्रावतार क्रोध भैरव साधना /उपासना भी शीघ्र फलदायी होती है यद्यपि यह पूर्ण तंत्रोक्त साधना है जो बहुत दक्षता के साथ की जानी चाहिए |बटुक भैरव उपासना ज्ञानी के मार्गदर्शन में करने से संकटों का और शत्रु का नाश होता है |
इसके अतिरिक्त अनेक टोटके भी मुकदमों के लिए अपनाए जाते हैं ,किन्तु टोटकों की एक सीमा होती है और इनकी शक्ति निश्चित होती है |करने को तो हर मुकदमे में उलझा व्यक्ति अनेक उपाय और टोटके करता रहता है ,लाभ कितना और किसको किसको होता है व्यक्ति ही जानता है |विषयवश इन्हें भी स्थान दिया जा रहा है |
1.जब भी आप अदालत मे जायें तो किसी भी हनुमान मंदिर में धूप अगरबत्ती जलाकर, लड्डू या गुड़ चने का भोग लगाकर ,एक बार हनुमान चालीसा और बजरंग बान का पाठ करके संकटमोचन बजरंग बलि से अपने मुक्दमे से सफलता की प्रार्थना करे |निसंदेह सफलता प्राप्त होगी।
2. आप जब भी अदालत जाऍं तो गहरे रंग के कपड़े ही पहन कर जाऍ |
3.अपने अधिवक्ता को उसके काम की कोई भी वस्तु जैसै पैन गिफ्ट करें |
4.अपने कोर्ट के केस की फाइलें घर मे बने मंदिर ,धार्मिक स्थान मे रखकर ईश्वर से अपनी सफलता अपनी रक्षा के लिए प्रार्थना करे।
5.मुकदमे मे विजय पाने के लिये कोर्ट जाने से पहले 4 गोमती चक्र को अपनी जेब मे रखकर ,जो स्वर चल रहा हो वह पांव पहले कोर्ट मे रखे अगर स्वर सुनाई न दे रहा हो या समझ ना आ रहा हो ,.तो दाहिना पैर यानी लेफ्ट पैर आगे रखें |मुकदमे मे निर्णय आपके पक्ष मे होने की संभावना प्रबल होगी।
. शत्रु शमन के लिए साबुत उड़द की काली दाल के 38 और चावल के 40 दाने मिलाकर किसी गड्ढे में दबा दें और ऊपर से नीबू निचोड़ दें। नीबू निचोड़ते समय शत्रु का नाम लेते रहें, उसका शमन होगा और वह आपके विरुद्ध कोई कदम नहीं उठाएगा। 
७. यदि शत्रु अधिक तंग कर रहें हो तो मोर के पंख पर हनुमान जी के मस्तक के सिन्दूर से मंगलवार या शनिवार रात्री में उसका नाम लिख कर अपने घर के मंदिर में रात भर रखें प्रातःकाल उठकर बिना नहाये धोए चलते पानी में भा देने से शत्रु, शत्रुता छोड़ कर मित्रता का व्यवहार करने लगता है |
. जब आपका मुकदमा चल रहा हो तो आप थोड़े से चावल अपने साथ घर से ले आजायें और कोर्ट में चावल डाल दें |बेहतर हो जिस कोर्ट में मुकदमा चल रहा हो उसके आहार चावल डाल दें |ध्यान रहे की आपको चावल ले जाते और कोर्ट में बिखेरते कोई देखे नहीं ,नहं तो आपका काम नहीं बनेगा |
. जिस दिन आपको कोर्ट कचहरी जाना हो उस दिन एक कागजी नीम्बू अपने ईष्ट को समर्पित करें फिर बलि की भावना से उसमे चारो कोनों में किसी नुकीली चीज से छिद्र करें और चारो छिद्रों में एक एक लौंग डाल दें |इस नीम्बू को आप अपने साथ ले जाएँ और वापस आने पर किसी मंदिर अथवा वृक्ष के नीचे डाल दें |
१०. यदि आपको लगता है की आप सही हैं और आपको फंसाया गया है तो लाल कनेर के फूल पीसकर उसे अपने ईष्ट को समर्पित कर उसका तिलक करके जाएँ |परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना बनेगी |
११. रविवार अथवा मंगलवार को एक मुट्ठी तिल में थोड़ी शक्कर मिलाएं तथा अपने उपर से सात बात उतारे और किसी सुनसान तिराहे पर उसे डाल दें और चुपचाप घर आकर हाथ पाँव धो लें |ध्यान दें आपको कोई ऐसा करते न देखे न टोके |तिराहे पर डालते समय ईश्वर से प्रार्त्न करें की आपके कष्ट दूर हों और आपको मुकदमे में विजय मिले |
उपरोक्त टोटकों के अतिरिक्त हजारों टोटके विभिन्न ,मार्गों ,सम्प्रदायों ,धर्मों में प्रचलित हैं ,जिनका प्रयोग लोग करते रहे हैं |..........................................................हर-हर महादेव


भाग्य का पूरा फल अक्सर नहीं मिलता

भाग्य का पूरा मिलना भी बड़े भाग्य की बात है
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जन्म लेने वाला हर मनुष्य अपने पिछले कर्मों के अनुसार कुछ इस तरह का भाग्य लेकर जन्म लेता है जो उसके पिछले कर्मों का परिणाम उसे प्रदान करते हैं अर्थात यह उसके गत कर्मों के अनुसार निर्मित हुए होते हैं |जन्म कालिक विशिष्ट ग्रह स्थितियां व्यक्ति के भाग्य का निर्धारण करती हैं |ऐसा अक्सर देखने में आता है की व्यक्ति के भाग्य में जो लिखा है वह उसे पूरा का पूरा मिल जाए ऐसा बहुत कम होता है |भाग्य अथवा कुंडली कहती है की संतान होगा ,फिर भी कुछ लोग संतानहीन रह जाते हैं ,कुंडली कहती है २२ साल में विवाह होगा किन्तु ३० साल में भी विवाह नहीं हो पाता ,भाग्य कहता है की सरकारी नौकरी या नौकरी के प्रबल योग २५ साल में हैं व्यक्ति ३५ साल में भी बेरोजगार है ,कुंडली कहती है व्यक्ति में राजयोग है पर वह चपरासी की स्थिति में जीने को विवश है |ऐसा अक्सर होता है |
इसका सीधा मतलब है की जो भाग्य में लिखा है वह पूरा कम ही मिलता है अर्थात भाग्य में कमी हो जाती है |इसके साथ ही यह भी देखा जाता है की भाग्य से अधिक भी नहीं मिलता |कहावत भी है समय से पहले भाग्य से ज्यादा ,किसी को कुछ नहीं मिलता ,अर्थात भाग्य से ज्यादा मिलेगा नहीं ,कम जरुर हो सकता है |ऐसा क्यों होता है |
यदि इसके कारणों का विश्लेषण करें तो हम पाते हैं की इसका कारण नेगेटिविटी [नकारात्मकता ]होती है जो मिलने वाले भाग्य में अवरोधक बन उसमे कमी करवा देती है |आज आपको किसी व्यक्ति से एक लाख रुपये मिलने हैं ,उसमे से आपका लाभ १० हजार का है |आप आलस्यवश उसे टाल देते हैं की बाद में ले लेंगे |आज आपके भाग्य में वह लाभ था किन्तु नकारात्मक ऊर्जा के कारण उत्पन्न आलस्य ने आपको आज उसे प्राप्त करने से रोक दिया |एक छोटे से निर्णय ने आपके भाग्य में अवरोध उत्पन्न कर दिया |आप कुछ दिन बाद प्रयास करते हैं ,पैसा मिल भी जाता है ,किन्तु उस समय उससे कोई उपयोग होने का समय नहीं है तो वह नुक्सान भी हो सकता है अथवा गिर भी सकता है |भाग्य में मिलना था मिला किन्तु आपने समय गलत चुना ,सही समय पर लिया नहीं ,इसलिए उसका नुक्सान हो गया |जितने दिन बाद आप उसे लेते हैं उतने दिन उसे किसी अन्य काम में लगाते तो उन्नति अलग से होती |यही है नकारात्मकता जो आपके भाग्य में कमी कर देती है |आज किसी का इंटरव्यू है ,उसके भाग्य में नौकरी है ,घर में अचानक कोई बीमार हो गया ,उसे तत्काल सहायता चाहिए ,इंटरव्यू छोड़ वह तीमारदारी में जुट गया ,भाग्य में लिखी नौकरी हाथ से निकल गयी ,यह घर की नकारात्मक उर्जा है जो उन्नति में अवरोधक हो गयी |भाग्य में संतान लिखी थी ,पर नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव में आकर हम गलत कर्मों की और मुड़ गए जिसके कुछ ऐसी कमी उत्पन्न हो गयी की संतान हो ही नहीं रही है |ऐसा भी होता है |आप माने या न माने |कहने वाले कुछ भी कहें ,भाग्य को अटल माने पर हमने कमियाँ होते बहुतों में देखा है |
भाग्य में आने वाली कमी को ही आप पूजा-पाठ, साधना-अनुष्ठान ,यन्त्र -ताबीज से ठीक करते हैं |99.9% लोग भाग्य नहीं बदल सकते ,यद्यपि भाग्य बदलना असंभव नहीं है ,किन्तु इसके लिए साधना से बहुत उच्च स्तर पर जाना होता है जो अधिकतर के लिए संभव नहीं होता |जो बदलने की क्षमता प्राप्त कर लेते हैं उनके लिए इसका महत्व ही समाप्त हो जाता है |उनमे से १% लीग ही सामाजिक रूचि रखते हैं अन्यथा निर्लिप्त हो जाते हैं |ऐसे में अधिकतर भाग्य भुगतने को विवश होते हैं |सामान्य लोगों द्वारा किया जाने वाला पूजा-पाठ ,साधना -अनुष्ठान अथवा यन्त्र ताबीज धारण उनके भाग्य पर छाये नकारात्मकता के प्रभाव को ही हटाता है और भाग्य का लिखा पूरा दिलाने का माध्यम होता है |यह सकारात्मकत बढ़ाकर पूर्ण फल प्राप्ति में ही सहायक होता है |सामान्य रूप से इससे भाग्य में परिवर्तन नहीं होता ,हां जो मिलना है वह पूरा मिले इसकी सम्भावना बनती है |पूजा-साधना, यन्त्र-ताबीज धारण से शक्ति का आगमन व्यक्ति और उसके आसपास होता है जो व्यक्ति में ऊर्जा का स्तर और मात्रा बढ़ा देती है फलतः कर्म प्रभावित होता है ,सोच बदलती है ,व्यवहार परिवर्तित होता है फलतः समस्त परिणाम बदल जाते हैं |इसलिए भाग्य का पूरा मिले इसके लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहे इसके उपाय किये जाने चाहिए क्योकि नकारात्मकता तो हर जगह आज के समय में प्रभावी हो चुकी है |
पृथ्वी के वातावरण अर्थात सतह से कुछ नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न होता है ,जो कहीं अधिक कहीं कम होता है |ज्योतिष की समस्त विवेचना इनके सामान्य प्रभाव के आधार पर होती है जबकि जहाँ प्रभाव अधिक है वहां ग्रहों के प्रभाव में परिवर्तन आ जाता है | कुलदेवता /देवी दोष ,ईष्ट नाराजगी ,वास्तु दोष ,गलत जीवन चर्या ,किये-कराये का दोष ,पित्र दोष ,पितरों के साथ जुड़ गयी अन्य आत्माओं आदि से नकारात्मकता में वृद्धि होती है ,जो हर जगह अड़चने उत्पन्न करते हैं ,स्वास्थय ,मानसिक स्थिति ,पारिवारिक सौहार्द ,आर्थिक स्थिति ,निर्णय क्षमता आदि को प्रभावित करते हैं और जो मिलना है वह भी नहीं मिलने देते |माध्यम व्यक्ति खुद हो जाता है पर उसे समझ नहीं आता |पूजा -आराधना जरुर से और रोज करने चाहिए ,भले १० मिनट ही करें पर पूरी एकाग्रता से करें ,जिससे धनात्मक और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो ,नकारात्मकता दूर रहे ,तभी भाग्य का लिखा पूरा मिल पायेगा |यदि गंभीरता से उपयुक्त पूजा-साधना नहीं कर पा रहे हैं तो किसी सिद्ध साधक से उच्च शक्ति का यन्त्र ताबीज बनवाकर धारण करें ,यह आपके उपार से और आसपास से नकारात्मक ऊर्जा हटा देंगे और आपके भाग्य का पूरा मिलेगा |कुछ लोगों को लग सकता है की हम यंत्रादी का प्रचार कर रहे हैं ,किन्तु यह हमने खुद अनेकों पर परीक्षण-अनुभव किया है यन्त्र/ताबीज तुरंत असर करते हैं ,भले पूजा-साधना में समय लगे |नकारात्मक ऊर्जा से ग्रस्त व्यक्ति के हाथों में ताबीज रखते ही गंभीर प्रतिक्रिया हमने पाई है ,गंभीर बीमार को यन्त्र पहनाने पर उसे स्वस्थ हुआ पाया है |गंभीर व्यसनों में लिप्त को यन्त्र पहनते ही अंतरात्मा जागते और व्यसनों से मुक्त होते पाया है |जवानी के उमंग में माँ-बाप ,परिवार की अवहेलना कर प्यार मुहब्बत में पड़े को सुधरते और परिवार के ,जीवन के अनुकूल आचरण बदलते पाया है |इसलिए व्यक्तिगत रूप से हमारा मानना रहा है की यह सबसे अधिक उपयुक्त इलाज होता है नकारात्मकता को हटाने का |यही कारण है की शुरू से इस पर हमारा विशेष ध्यान रहा और हम इसको सर्वाधिक प्राथमिकता देते रहे |इसके सर्वाधिक पोस्ट भी लिखते रहे हैं |हो सकता है कुछ को अतिशयोक्ति लगे ,किन्तु यह अकाट्य सत्य है की यन्त्र-ताबीज अगर उपयुक्त व्यक्ति द्वारा अपने हाथों से बनाकर अभिमंत्रित कर दिया जाए तो ,उससे त्वरित लाभ मिलता है |
भाग्य जानने के लिए अक्सर लोग यहाँ वहां अपनी कुंडलियाँ लिए फिरते हैं ,अनेको जगह पोस्ट करते रहते हैं ,पर संतुष्टि कम ही मिल पाती है |इसका कारण है की जो ज्योतिषी बता रहे हैं वैसा उनके जीवन में घटित कम हो रहा है |यहाँ गलती ज्योतिषी की नहीं होती |जो आपके भाग्य में लिखा है वही ज्योतिषी बता रहा है |गलती आपकी भी नहीं है ,क्योकि वह हो नहीं रहा जो ज्योतिषी बता रहा है |गलती तो आपसे या परिवार से जुडी नकारात्मकत का है जो ,आपके भाग्य के अनुसार घटनाएं होने नहीं दे रहा |ज्योतिषी ने बताया पित्र दोष है ,उससे उत्पन्न समस्याएं भी बता दी ,किन्तु आपकी कुंडली यह नहीं बताती की पितरों के साथ दूसरों की आत्माएं भी जुड़कर आपको प्रभावित कर रही हैं ,यह आत्माएं आपका अधिक अहित करती हैं क्योकि इनको आपसे कोई लगाव नहीं होता |पित्र तो जल्दी नुक्सान नहीं करते ,इसलिए उनसे उत्पन्न सामान्य समस्या ज्योतिषी बता देता है |पर समस्या गंभीर होती है क्योकि दुसरे उसे उत्पन्न करते हैं ,चूंकि पित्र खुद असंतुष्ट होते हैं इसलिए दूसरी आत्माओं को रोकते नहीं |

 इसीतरह आपके कुलदेवता/देवी नाराज हैं या आपके परिवार से निर्लिप्त हैं तो कोई भी नकारात्मक शक्ति आपको बेरोक टोक प्रभावित कर सकती है और आपके लिए समस्या उत्पन्न कर बाधा खड़ी करती रहती है |इसका भी उल्लेख कुंडली में नहीं मिलता फलतः आपको आपके भाग्य का पूरा नहीं मिलता |अतः गलत ज्योतिषी नहीं होता ,आपके नकारात्मकता से प्रभावित होने से वह नहीं हो रहा होता जो सामान्य रूप से होना चाहिए | इसी तरह वास्तु दोष ,ईष्ट दोष ,कर्म दोष ,किये कराये आदि से उत्पन्न नकारात्मकता भी प्रभावित करती है जिनका ज्ञान सामान्य रूप से कुंडली से कम ही हो पाता है |वास्तु की समस्या आप द्वारा या परिवार द्वारा बिन सोचे समझे निर्माण आदि से उत्पन्न होती है जो आपको प्रभावित करती है ,इससे जन्मकालिक ग्रहों का कोई लेना देना नहीं होता और इसके प्रभाव आपकी दिनचर्या ,जीवन स्थिति ,मानसिक स्थिति पर पड़ते हैं ,जो भाग्य में है वह भी आप अपनी उत्पन्न कमियों से नहीं ले पाते |ईष्ट की पूजा कर रहे रोज किन्तु तरीका पता नहीं है और अनुपयुक्त तरीके से फल -फूल- पदार्थ चढ़ा रहे ,ईष्ट के प्रतिकूल आचरण -कर्म कर रहे ,ऐसे में ईष्ट प्रसन्न न होकर नाराज हो गया |आ रही ऊर्जा अनियंत्रित होकर नुक्सान कर रही |कोई बाहरी बाधा या शक्ति आपके घर में है या आपको प्रभावित कर रही है और आप उससे मुक्ति के लिए राहत के लिए टोटकों का सहारा ले रहे हैं ,जिससे उस शक्ति पर कोई प्रभाव तो नहीं पड़ रहा ,वह चिढ जरुर जा रही तथा और अधिक नुक्सान कर रही ,आप अस्त व्यस्त होकर अपनी दिनचर्या में असंतुलित हो भाग्य का नहीं ले पा रहे |यह सब भी ग्रहा -कुंडली -भाग्य नहीं बताते हैं |किसी ने आपके परिवार या ,सदस्यों पर या आप पर कोई तांत्रिक अभिचार कर दिया ,आप परेशान हो गए ,सब अस्त व्यस्त है ,भाग्य में जो मिलना है उसे नहीं ले पा रहे |खुद बीमार हो रहे या मन नहीं लग रहा ,जरुरी अवसर पर परिवार का कोई बीमार हो गया ,अचानक कोई दुर्घटना हो गयी ,कोई पैसे ले दबा लिया ,ऐसी स्थिति आई की कर्ज हो गया ,इतना तनाव बधा की घर में कलह होने लगा |आप बुरी तरह डिस्टर्ब हो गए ,मानसिक -शारीरिक और आर्थिक रूप से ,ज्जब्की यह सब भाग्य में अथवा कुंडली में नहीं था |यह तो दुसरे द्वारा नकारात्मक ऊर्जा या शक्ति का प्रक्षेपण था |आप भाग्य की भविष्यवाणी के लिए यथा क्षमता ,यथा समय प्रयास ही नहीं कर पा रहे और जो भाग्य में मिलना है वह भी नहीं ले पा रहे |ऐसे में ज्योतिषी की भविष्यवाणी तो गलत हो ही जायेगी |वह तो ग्रह स्थतियों के अनुसार बता रहा और यहाँ आप दूसरी शक्तियों से प्रभावित हैं |इसके लिए आपको अपने नकारात्मकता को हटाना चाहिए चाहे वह किसी भी तरह की हो ,अच्छे जानकार से विश्लेषण कराना चाहिए जो इन बातों को समझता हो ,यह ज्योतिष के विषय नहीं हैं |जब सामान्य स्थिति होगी तभी भाग्य का भी मिलेगा और ज्योतिषी की भविष्यवाणी भी सच होगी |.......[व्यक्तिगत विचार ]..............................................................................हर-हर महादेव 

भाग्य बदल सकता है

भाग्य में परिवर्तन असंभव नहीं
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सामान्यतया 99 प्रतिशत लोग भाग्यवादी होते हैं और अपने जीवन की स्थितियों के लिए अपने भाग्य को ,प्रकारांतर से भगवान को जिम्मेदार मानते हैं |यह आपको हर समय और स्थान पर कहते मिलेंगे की जो भाग्य में लिखा है वही होगा या होता है ,या जो भगवन की मर्जी है वही हो रह जो उन्होंने लिख दिया |पर यह सही नहीं हैं |भगवान खुद कुछ भी नहीं करता वह तो ऊर्जा या शक्ति स्वरुप है और तब तक कभी भी हस्तक्षेप नहीं करता जब तक की उसे इसके लिए कहा न जाय |वह खुद कुछ नहीं देखता उसे दिखाना होता है ,सुनाना होता है |भाग्य भी वह नहीं लिखता ,यह तो आपके कर्मों का परिणाम होता है जो प्रकृति के नियमों के अनुसार निर्मित होता है |इसके लिए प्रकृति ने एक निश्चित नियम बना रखें हैं जिनमे ग्रह ,नक्षत्र सहयोग करते हैं |यदि किसी में प्रकृति में हलचल मचाने की क्षमता आ जाए तो वह भाग्य बदल भी सकता है |
 हमारा यह लेख अनेक मिथकों और सोचों के विरुद्ध लोगों को लगेगा ,कुछ लोगों को बहुत बुरा भी लगेगा ,जो भी यह सोचते हैं की सबकुछ भाग्य द्वारा निर्धारित होता है ,उससे अलग कुछ नहीं हो सकता ,कोई कुछ भी करे |अनेक ज्योतिष में अतिविश्वास करने वालों को भी अच्छा नहीं लगेगा क्योकि यह सामान्य सोच के विपरीत है की सब कुछ ग्रहों -नक्षत्रों द्वारा ही निर्धारित होता है ,उससे अलग कुछ हो ही नहीं सकता |पर हम कहना चाहेंगे की व्यक्ति अगर चाहे तो उसके भाग्य में परिवर्तन संभव है |जरा गंभीरता से सोचिये ,क्या सबकुछ वैसे ही होता है एक सामान्य व्यक्ति के जीवन में ,जितना ज्योतिष और भाग्य बताता है |उतना अच्छा तो नहीं ही होता और बुरा उससे अधिक हो जाता है |ऐसा इसलिए होता है की विभिन्न नकारात्मक प्रभाव से भाग्य और ग्रह की शुभता में कमी आती है और अच्छा होने में कमी आती है ,बुरा होने में अधिकता बढ़ जाती हैं |जब नकारात्मक प्रभाव से बुरे परिणाम में वृद्धि हो सकती है तो शुभ और सकारात्मक ऊर्जा बढाने पर अधिक शुभता और अच्छे परिणाम क्यों नहीं प्राप्त हो सकते |प्राचीन ऋषियों ने ज्योतिष आदि में और विभिन्न पूजा पाठों द्वारा उपाय की अवधारणा बुरे प्रभाव में कमी लाने के लिए की |इनके प्रभाव से ग्रहों से उत्पन्न अशुभ प्रभाव में कमी आती है | तो क्या उनके शुभ प्रभाव में वृद्धि नहीं की जा सकती |जब कमी -अधिकता हो सकती है तो सीधा मतलब है की हस्तक्षेप से भाग्य में जो लिखा है उससे अलग भी सम्भव है |क्यों कुछ महर्षि कई सौ सालों तक जीवन जीते हैं जबकि ज्योतिष के अनुसार तो आयु १२० वर्ष से अधिक होनी ही नहीं चाहिए |इससे अधिक की गणना ज्योतिष में है ही नहीं |कैसे बली ,व्यास ,परसुराम ,अश्वत्थामा आदि को चिरंजीवी कहा जाता है |कैसे देवरहा बाबा २५० साल ,तैलंग स्वामी ३०० साल जी गए |क्या इनपर ग्रहों का प्रभाव नहीं था |सीधा अर्थ है की अगर आप कुछ ऐसा करें की आप पर ग्रहीय प्रभाव बदल जाएँ या कम हो जाएँ तो आपके भाग्य बदल सकते हैं |हम साबित कर सकते हैं की भाग्य में परिवर्तन कैसे संभव है |अब तक हमने जो अनुभव किये हैं और जो तर्क से समझा है ,उसके अनुसार -
              .प्रत्येक व्यक्ति के जन्म से उसके चक्रों में से एक चक्र विशेष क्रियाशील रहता है ,जो ग्रह-स्थितियों और आनुवंशिक गुणों से प्रभावित होता है | इसी चक्र की क्रियाशीलता के अनुसार व्यक्ति के गुण- अवगुण, शरीर- मष्तिष्क- बुद्धि की स्थिति ,कर्म- भाग्य- प्रभाव शीलता आदि का निर्धारण होता है |व्यक्ति के जन्म समय पर उपस्थित ग्रह रश्मियों का प्रभाव जैसा होता है ,उसका असर मोटे तौर पर उसके पूरे जीवन पर पड़ता है |पूर्व जन्मों के कर्मों के अनुसार जो भाग्य उसका इस जीवन हेतु निर्धारित होता है ,उस भाग्य के अनुकूल जब ग्रह स्थितियां प्रकृति में बनती हैं तो वह व्यक्ति जन्म लेता है |अर्थात भाग्य उसका निश्चित होता है और उसी के अनुरूप ग्रह स्थितियों में उसका जन्म होता है जो पूरे जीवन उसे प्रभावित करते हैं |किन्तु जिस तरह से पूर्व कर्मों के अनुसार बने भाग्य का प्रभाव आज होगा ,उसी तरह आज का कर्म और मनोबल भी उस भाग्य को प्रभावित करेगा और उसमे कमी -अधिकता ला सकता है |प्राकृतिक शक्तियां भी इसमें कुछ परिवर्तन कर सकती हैं यदि वह इस दिशा में प्रक्षेपित की जाए |व्यक्ति इस भाग्य में अपने कर्म और प्रबल आत्मबल से परिवर्तन कर सकता है क्योकि वह इससे अपने शरीर के दुसरे किसी भी ऊर्जा चक्र को अधिक सक्रिय कर सकता है |इस सक्रियता के साथ ही परिवर्तन शुरू हो जाता है | यह प्रकारांतर से भाग्य में सीधा हस्तक्षेप न होकर पहले से उपस्थित सर्वाधिक प्रभावी ऊर्जा धारा के साथ ही एक अन्य ऊर्जा धारा को भी अधिक क्रियाशील कर उससे उत्पन्न बल द्वारा परिवर्तन होता है ,जो हर क्षेत्र को प्रभावित कर देता है और भाग्य में परिवर्तन हो सकता है |
,जब कोई अपने प्रबल आत्मबल से दूसरे चक्र को अधिक क्रियाशील करने का प्रयास करता है ,अथवा किसी उच्च देवी-देवता की साधना करता है ,किसी उच्च शक्ति के भाव में डूब जाता है तो उसका कोई दूसरा चक्र भी अधिक क्रियाशील हो जाता है [यह उस शक्ति पर निर्भर है की वह किस चक्र का प्रतिनिधित्व करता है ],| दूसरे चक्र की क्रियाशीलता के साथ ही शरीर की औरा ,प्रभावशीलता ,सोच, कर्म, दिशा सब बदल जाती है और एक अतीन्द्रिय मानसिक बल का उदय हो जाता है ,जो उसके मष्तिष्क के सोच की दिशा में कार्य करती है ,दूसरे चक्र की क्रियाशीलता के साथ ही चक्रों से तीब्र तरंगे निकलने लगती है ,और शरीर का प्रभामंडल बदलकर प्रभावी तथा उस शक्ति के अनुसार दीप्त हो जाता है ,साथ ही आस पास का वातावरण भी प्रभावित होता है | शारीरिक रासायनिक स्थितियों -क्रियाओं में भी परिवर्तन होता है और मानसिक बल ,सूक्ष्म शरीर सब अधिक उर्जावान हो जाते हैं जो ग्रहों के प्रभाव को सिमित या नियंत्रित कर देती है और व्यक्ति का भाग्य उसकी सोच के अनुसार परिवर्तित होने लगता है क्योकि कर्म परिवर्तित हो जाता है | चूंकि तात्कालिक प्रभावी ग्रह प्रभावों पर एक अलग शक्ति भी शरीर में कार्य करने लगती हैं फलतः ग्रहों की रश्मियों ,उनके प्रभावों की ग्रहण शीलता ,संवेदन शीलता भी बदल जाते हैं | इसके साथ ही पूर्वकर्म के प्रभाव में भी कमी जाती है और आज के कर्म के परिणाम प्राप्त होने लगते है ,यह उत्पन्न ऊर्जा मानसिक एकाग्रता से बढकर अन्य चक्रों का भेदन कर सकती है और व्यक्ति की कुंडलिनी जागने से उसका पूर्ण स्वरुप ही बदल सकता है जिससे वह दूसरों के भाग्य और प्रकृति में भी स्पंदन कर सकता है|यदि कोई न भी एकाग्र हो और न भी आगे बढ़े तो अलग परिवर्तन होने से भाग्य तो बदलने ही लगता है |
जब व्यक्ति में नए विशिष्ट प्रकार की औरा या प्रभामंडल का विकास होता है ,तो यह ग्रह रश्मियों के लिए भी अवरोधक हो जाता है ,और यह व्यक्ति के मानसिक बल और संकेत के अनुसार कार्य करता है ,जिससे हानिकारक ग्रहों का प्रभाव ,जो जन्मकालिक स्थिति में थे या गोचर से आते हैं ,उनके प्रभाव को रोक देता है |फलस्वरूप शुभ ग्रहों के प्रभाव में भी वृद्धि हो जाती है |होने वह लगता है जो शुभ ही शुभ हो |इस प्रकार भाग्य बदलता है |इसके साथ ही रासायनिक परिवर्तन से व्यक्ति की शारीरिक स्थिति बदलती है और कोशिका क्षय आदि रुक सकती है |सब कुछ मानसिक नियंत्रण और अवचेतन के अनुसार होने लगता है |ऐसी ही स्थिति कहानियों में पढ़ी जाने वाली योगियों की होती है |ठंडी गर्मी जैसे प्रभाव भी इससे बदलते हैं |यह सब कुंडलिनी और चक्रों के खेल हैं |मीरा इतना भाव में डूबी की उसकी कुंडलिनी जाग गई और विष का प्रभाव भी उनके लिए अमृत जैसा हो गया |इसी तरह व्यक्ति अगर सोच ही ले तो भाग्य भी बदल सकता है|

यह एक शाश्वत परिवर्तन है जो ब्रह्मांडीय शक्ति द्वारा होता है और अधिकतर योगी ,तांत्रिक ,साधक के भाग्य में परिवर्तन इस प्रकार से ही होता है |इसके साथ ही एक और तकनीक भाग्य में परिवरतन लाती है ,जिसके बारे में अधिकतर लोग नहीं जानते ,जबकि वे खुद ऐसा कर सकते हैं ,क्योंकि यह शक्ति उनमे ही होती है |यह शक्ति हर मनुष्य में मौजूद अवचेतन मन है ,जो सैकड़ो जन्मों के ज्ञान ,यादें अपने में समेटे रहती है |यह अगर सही से क्रियाशील हो जाए ,अगर सही दिशा में कार्य करने लगे ,आज की परिस्थितियों के अनुसार खुद व्यक्ति में रहकर ही उसका मार्गदर्शन करने लगे तो व्यक्ति अपने भाग्य को भी बदल सकता है ,अपने भाग्य में लिखे समस्त शुभ परिणामों को पा सकता है ,अपने रोग ,शोक ,कष्ट ,असफलता ,अवरोध ,विकलांगता से मुक्ति पा सकता है |ग्रहों द्वारा उत्पन्न कष्ट ,रोग ,असफलता ,अवरोध ,शारीरिक कमियां अगर दूर होती हैं तो यह तो भाग्य में परिवर्तन ही हुआ ना |जबकि हर व्यक्ति में उपस्थित उसका अवचेतन यह सब आसानी से कर सकता है |बस उसे जगाने की जरुरत होती है ,उसे बताने की जरुरत होती है ,उसे अपने लक्ष्य की दिशा में लगाने की जरूरत होती है |हर व्यक्ति में उपस्थित अवचेतन से बड़ा कोई डाक्टर नहीं ,कोई वैज्ञानिक नहीं ,कोई ज्ञानी नहीं ,क्योकि इससे सदियों की ,सैकड़ों जन्मों की यादें और ज्ञान संगृहीत होती हैं |इसे जगाकर सिद्ध पूर्व जीवन को जानते हैं और भविष्य सुधारते हैं ,अपनी कमियों को दूर करते हैं |इससे इस संसार में सबकुछ पाया जा सकता है |इसकी क्रिया प्रणाली पर हमने अपने लेखों में "" चमत्कार ईश्वर नहीं आप करते हैं ""शीर्षक के अंतर्गत प्रकाश डाला है और इसके २० अंक हम अपने इसी ब्लॉग पर पोस्ट कर चुके हैं ,की कैसे व्यक्ति चाहे तो खुद चमत्कार कर सकता है ,असफलता ,कष्ट ,दुःख ,रोग ,समस्या से अपनी ही शक्ति से मुक्त हो सकता है |अगले अंक लिखने पर हम यहीं ब्लॉग पर पोस्ट करेंगे भी |यह सब परिवर्तन भाग्य में परिवर्तन ही होते हैं ,क्योकि जो आप सामान्यतया भुगत रहे होते हैं वही तो भाग्य है |उसमे किसी भी शक्ति से बदलाव ,परिवर्तन भाग्य में परिवर्तन ही तो है ,फिर वह शक्ति चाहे देवी- देवता की हो ,कुंडलिनी की हो या खुद आपमें ही मौजूद अवचेतन की |यह सभी क्रियाएं एक तकनीक हैं ,जिनका अपना विज्ञानं होता है |यह विज्ञानं आज के विज्ञान से बहुत आगे भी है और विकसित भी |जो समझ लेता है तो परिवर्तन कर लेता है और तब भाग्य तो बदलता है |हम आजमा चुके हैं ,परिवर्तन देख चुके हैं ,इसलिए यहाँ लिख रहे और नहीं मानते की सबकुछ भाग्य द्वारा ही निर्धारित है |कुछ मायनों में यह सच होता है पर बहुत कुछ ऐसा है जो बदला भी जा सकता है |बदलाव चाहे छोटा हो या बड़ा पर अगर होता है तो भाग्य परिवर्तन तो होता है ,क्योकि एक परिवर्तन ,फिर परिवर्तनों की अलग श्रृंखला शुरू करती है जो निर्धारित से अलग होता है |..... ...[व्यक्तिगत विचार ]   ....................................हर -हर महादेव 

तंत्र अभिचार आप और बच्चे पर हो सकता है

ताकि आप और बच्चा सुरक्षित रहें
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आज के समय में सुरक्षा को लेकर हर व्यक्ति कहीं न कहीं से परेशान रहता है |घर और बाहर की भौतिक की व्यक्तियों से सुरक्षा तो व्यक्ति कर लेता है क्योकि वह अपने स्थान और स्तर के अनुसार जानता है की उसे कहाँ और कैसी सुरक्षा चाहिए |किन्तु वह ऐसे व्यक्तियों ,प्रभावों अथवा अभिचारों से सुरक्षित नहीं हो पाता जो दिखाई न दे ,जो समझ में न आये ,जो केवल नज़रों से अथवा छोटी क्रियाओं से असुरक्षित कर दें |यह अभिचार हो सकते हैं ,नजर दोष हो सकते हैं ,अनायास आकर्षित कोई वायव्य बाधा हो सकती है |इनसे प्रभावित होने पर कुछ स्पष्ट न दिखने पर भी समस्या होती है ,स्वास्थ्य प्रभावित होता है ,मानसिक स्तर प्रभावित होता है और कभी कभी जान के खतरे भी उत्पन्न हो जाते हैं |यह सब अधिकतर महिलाओं और बच्चों के साथ होता है ,क्योकि यह भावुक होते हैं ,इनका आत्मबल कमजोर होता है ,इनका ब्लड पतला होता है ,यह जल्दी प्रभावित हो जाते हैं |
अक्सर लोगों को नजर लगाने वाले अपने होते हैं ,अक्सर अभिचार करने करने वाले नजदीकी ही होते हैं जिनकी पहुँच आप तक हो और जो आपसे जलन या ईर्ष्या रखते हों |कुछ ऐसे भी अपने या नजदीकी होते हैं जो आपकी सही तरीके से हो रही उन्नति भी नहीं देख पाते और चाहते हैं की आप उन्नति न कर पायें ,आपकी उन्नति रुक जाए ,अथवा आप उनसे आगे न निकल पायें ,भले आपमें क्षमता अधिक हो और आप अधिक मेहनत करते हों |कुछ सहकर्मी अथवा व्यावसायिक प्रतिद्वंदी भी सामने आने से बचते हुए आपका अहित करने के लिए अभिचार का सहारा लेते हैं |कुछ पडोसी और नजदीकी भी छोटी छोटी बातों पर रुष्ट होकर आपका अहित करने के लिए टोटकों -टोनों- अभिचार का सहारा लेते हैं |कभी -कभी अपनी भी नजर अपने ही बच्चों को लग जाती है |कभी कभी -कोई कोई काली जुबान का होता है अथवा उनकी नज़रों में विशेष तीक्ष्णता होती है ,उनके कहने अथवा देखने मात्र से आप अथवा बच्चा प्रभावित हो जाता है |
कभी -कभी ऐसे मामले हमारे पास आते हैं की  किसी अपने अथवा नजदीकी ने ही जलन -ईर्ष्या वश किसी बच्चे पर कुछ टोटके /टोन करवा दिए जिससे बच्चे का मन पढ़ाई से उचाट जाए ,उसकी उन्नति रुक जाए ,वह बीमार हो जाए जिससे आपकी पारिवारिक वृद्धि और उन्नति प्रभावित हो |आप कैसे उन्नति कर रहे जबकि उनका बच्चा अथवा वह नहीं कर रहे या आप किसी तरह से आगे न बढ़ पायें |कभी कभी ऐसा भी देखा जाता है की कुछ लोग अपने बच्चे की समस्या का उतारा करके किसी नजदीकी के बच्चे पर क्रिया कर देते हैं और वह निर्दोष बच्चा पीड़ित हो जाता है |कुछ लोग दुशमनी अथवा विरोध बस किसी के बच्चे की बुद्धि और स्वास्थय बिगाड़ने का भी प्रयत्न करते हैं |अगर सीधे बरगलाने पर अथवा माँ बाप के विरिद्ध करने पर बच्चा नहीं मानता तो तंत्र क्रियाओं के सहारे बच्चे को अपने से मिला लेते हैं और माँ बाप -परिवार के विरुद्ध कर देते हैं या उसमे दुर्व्यसन अथवा गलत आदतें उत्पन्न कर देते हैं |आपको शायद इस सब पर यकींन न हो किन्तु ऐसा होता है और हमारे पास ऐसे बहुत से मामले आते हैं |ऐसे बच्चों की नींद प्रभावित होती है |उन्हें भय अँधेरे अथवा अकेले में लग सकता है |अचानक उनका स्वभाव बिगड़ सकता है अथवा उग्र हो सकता है |अक्सर ऐसे कार्य करते हैं जो माँ बाप के स्वभाव और परिवार के संस्कारों से मेल नहीं खाता |बुरी संगत ,बुरी आदतें अच्छी लगती हैं बुरी लत लग जाती है |
कभी कभी कुछ लोगों की की हुई आपकी बड़ाई भी आपको लग जाती है और आपका उस बड़ाई से सम्बंधित क्षेत्र में नुक्सान होने लगता है |कभी -कभी कोई कह देता है की अरे आज तो बहुत अच्छे लग रहे हैं ,अथवा बहुत तेज दिमाग है ,बहुत अच्छी सफलता पा रहा है |यह प्रशंशा का भाव भी कभी आपको अथवा आपके बच्चे को लग जाता है और स्वास्थ्य बिगड़ जाता है या पढ़ाई लिखाई से मन उचाट जाता है अथवा प्रशंसा के क्षेत्र में असफलता मिलने लगती है |यदि गर्भ में बच्चा हो तो महिलाओं के वायव्य बाधाओं से प्रभावित होने की बहुत अधिक सम्भावना होती है |कहीं सुनसान अथवा एकांत अथवा तेज दोपहर अथवा अकेले रात्री में इनके डरने और प्रभावित होने की संभावना होती है |इस समय बच्चे को भी खतरा होता है |वायव्य आत्माएं ऐसी महिलाओं की ओर आकर्षित होती हैं ,जिनमे कुछ की प्रवृत्ति बच्चे के लिए घातक होती है |यह डराने और नुकसान का प्रयास करती हैं |आज के आधुनिक युग में लोग भले न माने पर पुराने समय में इसीलिए घर की बुजुर्ज महिलाए और पुरुष इसे समझते हुए विशेष ध्यान देते थे |
यह सब नजर का दुष्प्रभाव ,जबान का दुष्प्रभाव ,अभिचार अथवा टोन -टोटकों का दुष्प्रभाव हो सकता है ,जो दिखाई नहीं देता |चूंकि इनका पता स्पष्ट रूप से नहीं चलता और करने वाले का पता भी नहीं होता ,इसलिए समझ में नहीं आता और क्षति होती रहती है |पढ़े -लिखे और ज्यादा शिक्षित आधुनिक कहे जाने वाले लोग ही इनसे अधिक प्रभावित होते हैं क्योकि बह मानते नहीं इन्हें और उनकी समझ में यह सब आता ही नहीं |वह तो हर बात के लिए डाक्टर के यहाँ भागते हैं जहाँ इनका कोई इलाज होता नहीं |कभी -कभी तो डाक्टर के अनुसार कुछ होता ही नहीं फिर भी बच्चा या आप बीमार होते हैं |आज के आधुनिक लोगों में ही गर्भपात की समस्या बहुत अधिक है ,गर्भ में बच्चे के ख़तम होने की समस्या अधिक है |बच्चों के बिगड़ने की समस्या अधिक है ,जबकि अशिक्षित कहे जाने वाले अथवा ग्रामीण अथवा पुराने संस्कारों के परिवारों में लोगों के कई कई बच्चे होते हैं ,सब सुरक्षित रहते हैं |माँ और बच्चा दोनों गर्भावस्था में भी सुरक्षित होते हैं और बाद में भी |वह स्वस्थ भी रहते हैं ,क्यों ,क्योंकि वह इन सब बातों को जानते हैं ,समझते हैं और उपाय करते हैं |
यद्यपि जो समस्या से पहले से उत्पन्न कर दी गयी हो उसके समाप्त होने में तो समय लगता है और अचानक उसे समाप्त नहीं किया जा सकता ,किन्तु आगे ऐसी समस्या कम आये ऐसा उपाय पहले से किया जा सकता है |इसके लिए अपने घर के बच्चों को ,महिलाओं को ,गर्भवती महिलाओं को कवच /ताबीज जरुर पहनाना चाहिए |ताकि उनपर नजर ,अभिचार ,टोन-टोटके ,वायव्य -भूत -प्रेत अथवा अनचाही -अनजान आत्मा या शक्ति का प्रभाव रोका जा सके ,जो उनका नुकसान कर सकता हो |उन नजदीकी लोगों ,पड़ोसियों ,रिश्तेदारों अथवा विरोधियों से सुरक्षा रहे जो आपसे जलन -ईर्ष्यावश आपके यहाँ अभिचार कर सकते हों |आपके बच्चे की उन्नति रोक सकते हों ,आपको कष्ट दे सकते हों |इसके लिए सुरक्षा कवच /ताबीज सबसे बेहतर उपाय है जो इस तरह की बाधाओं से बचाता है |किसी अच्छे तंत्र साधक से बनवाया और अभिमंत्रित किया हुआ कवच उन्नति और स्वास्थ्य में उत्पन्न बाधाओं को रोकता  भी है और शमन भी करता है |जिस साधक के जैसे ईष्ट हों वह उस तरह की शक्ति का उपयोग इन ताबीज में करता है ,जैसे हम भगवती काली की कृपा का उपयोग करते हैं

|इस तरह के ताबीजों /कवच में ईष्ट की शक्ति के साथ विभिन्न नजर दोष निवारक ,अभिचार रक्षक /निवारक ,वायव्य बाधाओं से सुरक्षा देने वाली तांत्रिक वस्तुओं का उपयोग होता है जिन्हें विशिष्ट तांत्रिक मुहूर्तों में निकालकर या प्राप्त कर ,अभिमंत्रित करके ,प्राण प्रतिष्ठित करके भरा जाता है |उसके बाद व्यक्ति के नाम से अभिमंत्रित भी किया जा सकता है और सीधे भी उपयोग में लिया जा सकता है |यद्यपि इस तरह के सुरक्षा कवच का निर्माण हम खुद भी करते हैं किन्तु व्यक्ति इसे किसी भी अच्छे साधक से बनवाकर अपने प्रियजन को धारण करा सकता है जिससे वह सुरक्षित -स्वस्थ रह उन्नति कर सकें और अपने भाग्य का पा सकें ,कोई उनके भाग्य का लिखा पाने में बाधा न उत्पन्न करे |व्यक्ति की सुविधा और विश्वास सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है |पोस्ट का उद्देश्य अपने ब्लॉग अपने दोनों फेसबुक पेजों के पाठकों को जागरूक करना तथा उन्हें इन समस्याओं के बारे में बताना है ,क्योकि इस तरह की समस्याएं हमारे सामने पीड़ित लोगों द्वारा अक्सर लाइ जाती हैं |यदि आपको आपके आसपास कोई इस तरह का साधक नहीं मिलता तो आप हमसे संपर्क कर सकते हैं |..........................................................हर-हर महादेव 

संतान में कमी क्यों आ रही

संतान बिगड़ रही है ,गलत रास्ते पर जा रही
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संतान न होना किसी भी दम्पति के लिए बेहद कष्टकारक होता है ,किन्तु संतान हो फिर भी वह अच्छी न हो तो स्थिति और कष्टकारक हो जाती है |संतान हो और वह कुमार्गी हो जाए ,भविष्य के प्रति लापरवाह ,अपनों की ही क्षति करने वाली हो जाए तो माता -पिता -परिवार के लिए जीवन भर का कष्ट हो जाता है |संतान न होने से कोई आर्थिक -सामाजिक हानि नहीं होती किन्तु संतान हो और वह गलत रास्ते पर हो तो सामाजिक -आर्थिक -मानसिक ,सभी तरह के कष्ट देती है |जबकि कोई भी माता -पिता अथवा खानदान -परिवार के लोग नहीं चाहते की उनके घर का कोई सदस्य या बच्चा गलत रास्ते पर जाए |खुद कोई कितना भी बिगड़ा हो पर अपनी संतान को हमेशा अच्छा बनाना चाहता है और उसकी उन्नति के लिए उससे जितना भी हो सकता है जरुर करता है ,भले संतान को यह लगे की उसके माता -पिता उसके लिए कुछ नहीं कर रहे |
अक्सर सुनने में आता है की संतान अथवा बच्चा बिगड़ रहा है या बिगड़ गया है ,बात नहीं मानता ,गलत आदतों का शिकार हो गया है ,गलत संगत में पड़ गया है ,गलत या अनुचित कार्य ही उसे पसंद आते हैं |परिवार -खानदान-माँ-बाप  की प्रतिष्ठा को ठेस पंहुचा रहा है ,अपना भविष्य बिगाड़ रहा है | दुर्जनों के बहकावे में आ जा रहा है ,माँ-बाप या परिवार के विरोधियों के भड़काने में आकर अपने ही लोगों को अपना दुश्मन समझ रहा है ,अपने लोगों की अवहेलना कर रहा है ,अनुचित कार्यों -प्यार-मुहब्बत में रूचि ले रहा है जिसके परिणामों की उसे समझ नहीं रही ,सम्मान की चिंता नहीं है ,भविष्य की चिंता नहीं है ,|किसी बच्चे में नशे की लत लग गयी है तो किसी बच्ची में उश्रीन्ख्लता आ गयी है |किसी को गुंडागर्दी ,नेतागिरी पसंद आ रही तो किसी को क्लब ,पब ,होटल और उन्मुक्त क्रिया कलाप पसंद आ रहे |  यह आज के समय में बहुत अधिक दिख रहा है ,जिसके अनेक कारण है ,नैतिकता का पतन,संस्कार हीनता ,समाज का खुलापन ,माता -पिता का ध्यान न दे पाना या खुद में व्यस्त रह आदर्श प्रस्तुत न कर पाना ,मीडिया के मनोरंजन का अत्यधिक उपलब्ध होना ,सिनेमा आदि का प्रभाव ,भौतिकता की इच्छा ,आदि आदि ,किन्तु फिर भी हर माता -पिता का प्रयास रहता है की उनका बच्चा सबसे अच्छा ,सद्गुणी ,प्रगतिशील ,उच्च पद पाने वाला ,सम्मानित हो |
सामाजिक कारण ,आसपास का वातावरण ,परिवारियों का स्वभाव तो कुछ कारण बच्चों के बिगड़ने के हैं ही पर अक्सर ऐसा भी देखने में आता है की उसी माहौल में रहते हुए ,उससे भी खराब आर्थिक स्थिति में जीते हुए ,कम सुख -सुविधा पाते हुए भी कुछ बच्चे बहुत उन्नति कर जाते हैं और कुछ बहुत पीछे चले जाते हैं ,जबकि जिन्हें हर सुख सुविधा दी गयी ,अच्छा माहौल देने का प्रयास किया गया ,अच्छे स्कूल ,वातावरण दिए गए वे नहीं उन्नति कर पा रहे ,या एक ही माहौल में कोई उपर निकल गया ,उन्नति कर गया ,कोई नीचे गिरता गया ,किसी में बहुत कमिय आ गयी और किसी में अच्छे गुणों का विकास हो गया |अब यहाँ पर वातावरण -आर्थिक स्थिति -सामाजिक स्थिति  कारक नहीं तो फिर ऐसा क्या है जो यह बच्चे उन्नति नहीं कर पा रहे या बिगड़ जा रहे |जब हम इसका विश्लेष्ण करते हैं तो पाते हैं की यहाँ  कुछ अन्य कारक अपना प्रभाव दिखाते हैं जैसे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव ,कुलदेवता /देवी दोष ,पित्र दोष ,किसी शक्ति का परिवार अथवा बच्चों को प्रभावित करना ,किसी अभिचार आदि का प्रभाव आदि आदि अनेकानेक  कारण हैं इनके और अक्सर रोकथाम के उपाय या समझाना व्यर्थ जाता है |
इस प्रकार के मामले किसी के भी साथ हो सकते हैं |स्त्री-पुरुष-बालक-बालिका सभी में किन्ही परिवारों में यह देखा जाता है |यह स्थिति परिवारीजन या सम्बंधित व्यक्ति से जुड़े लोगों के लिए बहुत कष्टकारक होती है |इनका प्रभाव भी परिवार के सभी बच्चों पर समान हो जरुरी नहीं ,क्योकि जब भाग्य बहुत प्रबल हो तब कम प्रभाव होगा और जब ग्रह स्थितियां थोड़ी भी कमजोर हों तो प्रभाव अधिक हो जाता है |इन प्रभावों से बच्चे तथा परिवार की उन्नति रुक जाती है |बच्चों का मन भटकता है ,मानसिक चंचलता बढ़ जाती है ,जिससे नशे -धूम्रपान आदि की ओर रुझान बनता है |याददास्त बिगडती है क्योकि दिनचर्या और भोजन -शयन का समय अनियमित होता है | पारिवारिक संस्कारों के प्रति ,संस्कृति के प्रति विद्रोह उत्पन्न होता है क्योकि प्रभाव नकारात्मक हो तो उल्टा ही होता है | धार्मिक रूचि कम हो जाती है ,बड़ों की बातें अच्छी नहीं लगती ,घर में अकेले में रहना अच्छा लगता है ,घर में रहते हुए अशांति ,चिडचिडाहट ,अनमनापन बढ़ जाता है ,जबकि बाहर निकलते ही अच्छा लगता है |रोग -बीमारी बढ़ जाती है ,अक्सर बच्चों में आँख और सर की समस्या उत्पन्न होती है |उनका मन घर में नहीं लगता ,पढ़ाई और संस्कारों से मन उचटता है ,ख़्वाब बड़े किन्तु प्रयास अपूर्ण होते हैं |कितना भी वह प्रयास भी करें फिर भी सफलता नहीं मिलती |किसी की शादी नहीं हो रही तो किसी की नौकरी नहीं लग रही |
इस तरह की समस्याओं के लिए अनेक उपाय तंत्र में हैं |इनमे उच्चाटन भी एक क्रिया है जो तांत्रिक षट्कर्म के अंतर्गत आती है |यह क्रिया किसी के मन , स्थिति , समस्या ,स्थान ,व्यक्ति सम्बन्ध आदि को उच्चाटित करने के लिए की जाती है |यह क्रिया किसी भी समस्या पर की जा सकती है जिसमे अलगाव की आवश्यकता हो |समस्या विशेष के साथ मंत्र -विधि-प्रक्रिया और वस्तु बदल जाते हैं |इस क्रिया में विभिन्न शक्तियों और वस्तुओं की उर्जा का उपयोग समस्या विशेष के अनुसार किया जाता है |किसी के प्रति किसी पर यह क्रिया कर देने पर उसके प्रति व्यक्ति का मन उचट जाता है |किसी समस्या के प्रति क्रिया कर देने पर उस समस्या या आदत के प्रति मन उचट जाता है |नशे आदि के प्रति मन उचट जाता है यदि इस समस्या के लिए विशिष्ट क्रिया कर दी जाए तो |प्रभाव के उच्चाटन पर व्यक्ति अपने दिमाग से अच्छा बुरा समझने लगता है और सुधर जाता है |सम्बंधित व्यक्ति या समस्या के प्रति जब मन उच्चाटित ही जाता है तो वह छूट जाता है और व्यक्ति समस्या या प्रभाव से मुक्त हो जाता है |इस क्रिया का दुरुपयोग भी हो सकता है अतः कोई प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से नहीं दी जा सकती |यदि किसी के यहाँ ऐसी कोई समस्या हो तो किसी अच्छे तंत्र के जानकार से संपर्क करना चाहिए और उसके बताये अनुसार चलना चाहिए |वह आपको कुछ क्रियाएं बता भी सकता है और कुछ स्वयं कर सकता है ,जो सम्बंधित समस्या के लिए निर्दिष्ट  होते हैं |प्रक्रिया करने पर सम्बंधित समस्या समाप्त हो जाती है |
इस तरह की समस्या से निकलने का दूसरा तरीका यन्त्र /कवच होता है |ऐसे कवच विशिष्ट यन्त्र से परिपूर्ण होते है ,जिसके साथ विभिन्न प्रकार के अन्य घटक होते हैं |यह कवच संतान अथवा प्रियजन को आपके अनुकूल या वशीभूत नहीं करता है ,न ही किसी प्रकार से मष्तिष्क पर बोझ डालकर उसे परिवर्तित करता है ,,अपितु इसकी कार्यप्रणाली पूर्णतः प्रकृति की ऊर्जा संरचना के अनुरूप कार्य करती है और धारक के स्वचेतना में परिवर्तन कर देता है ,आतंरिक और शारीरिक ऊर्जा में सकारात्मकता के संचार से व्यक्ति के सोचने-समझने की दृष्टि में परिवर्तन हो जाता है और वह अपना हित -अहित ,अच्छा-बुरा ,भूत-भविष्य-वर्त्तमान के प्रति सजग और सतर्क हो जाता है |अंतरात्मा ,नैतिकता कवच की अलौकिक ऊर्जा से जाग उठती है |नकारात्मक ऊर्जा ,किये-कराये ,तांत्रिक अभिचार ,पित्र दोष ,वास्तु दोष ,स्थान गत नकारात्मकता आदि का प्रभाव रूक जाता है और व्यक्ति अपने खुद के मष्तिष्क और सोच के अनुरूप अपने हित के लिए कार्य करने लगता है |शरीर और आसपास सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने से संस्कार-परिवार-माता-पिता-पति-पत्नी-धर्म-समाज-इज्जत के प्रति संवेदनशील हो जाता है और उन्नति के साथ भविष्य की और सोचने लगता है |उच्च शक्ति से सम्बंधित कवच होने से एक अलौकिक अदृशीय ऊर्जा उसे प्रेरित करती है फलतः उसके आचार-व्यवहार-सोच-कर्म में परिवर्तन होने लगता है और वह सुधरकर  उन्नति की और अग्रसर हो जाता है  |

इस तरह की समस्या समस्या से निकलने का तीसरा तरीका परिवार को प्रभावित कर रहे किसी भी तरह की नकारात्मक शक्ति /ऊर्जा ,किये -कराये ,अभिचार ,वास्तु दोष ,स्थान दोष ,भूत -प्रेत -वायव्य बाधा ,पित्र दोष ,आदि के प्रभाव को रोक देना है |जब तक इन सब प्रभावों को समाप्त करने लायक स्थितियां न बने तब तक तो उन्नति होनी ही चाहिए ,अतः तब तक के लिए इनके प्रभावों को रोक दिया जाए ,जिससे परिवार और बच्चे उन्नति तो कर लें ,इस लायक परिवार की स्थिति तो हो जाए की बाधाओं ,नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के प्रयास वह कर सकें ,क्योकि समाप्त करने की प्रक्रिया कई चरणों वाली तथा बड़े आर्थिक खर्च वाली होती है |अतः जब प्रभाव रुके रहेंगे तो सफलता -उन्नति मिलती रहेगी ,दुर्गुणों में कमी आएगी |यह हमारे अनुभव और सोच हैं ,जो हम अपने पास आने वाली समस्याओं को देखकर बने हैं ,जिसे हम अपने ब्लॉग और पेजों के पाठकों के लिए लिख दे रहे |जरुरी नहीं की सबकी समझ में आये ,किन्तु यदि कुछ माता -पिता की समझ में आये और उनके बच्चों का भला हो जाए तो अच्छा है |..........................................................हर -हर महादेव 

पति /पत्नी पर तंत्र क्रिया की संभावना

किसी ने आपके पति या पत्नी पर कुछ किया तो नहीं
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एक कहावत है की ,किसी को अपने बच्चे और दुसरे की बीबी अधिक अच्छी लगती है या किसी को अपने बच्चे और दुसरे का पति ज्यादा सक्षम नजर आता है |तुलना और तर्क करते देखिये आपके यहाँ भी यह देखने को मिलेगा |पुरुष दुसरे की पत्नी को प्रशंसा और प्यार की दृष्टि से देखता मिलेगा तो पत्नी बार -बार किसी अन्य से आपकी तुलना करती मिलेगी |यह हर घर की कहानी है ,हालांकि इसके अपवाद भी होते हैं किन्तु यह सामान्यतया देखा ही जाता है |यहाँ तक तो सब सामान्य रहता है क्योकि यह मनुष्य का स्वभाव है |बहुत कम मिलेंगे जो खुद में या खुद से संतुष्ट रहें |समस्या तब उत्पन्न हो जाती है जब कोई अपनों से पूरी तरह या अधिक असंतुष्ट हो जाता है या अपने स्वभाव की कमियों से मजबूर हो जाता है |कोई किसी दुसरे की तरफ आकर्षित इतना हो जाता है की उसे पाने के लिए कोई भी प्रयास करने लगता है |कोई अपनी समस्या से तंग आकर किसी और को खुद से जोड़ने का प्रयास करता है |कोई अपनी तरक्की का हथियार किसी को बनाने का प्रयास करता है या कोई अपनी अतृप्त वासनाओं की पूर्ती का माध्यम किसी को बनाने का प्रयत्न करता है |
कुछ लोगों का स्वभाव भी होता है की उन्हें अपने से अधक दुसरे में रूचि होती है या कुछ लोगों का स्वभाव होता है की वह यहाँ वहां मुंह मारते घूमते रहते हैं |इन्हें जल्दी संतुष्टि नहीं मिलती अथवा इन्हें वास्तविक लगाव किसी से न होकर केवल स्वार्थ की भूख होती है |यह अपने मतलब के लिए तंत्र अभिचारों का सहारा ले सकते हैं जिससे यह इच्छित को पा सकें |कुछ लोग अपनों से असंतुष्ट होकर कभी -कभी दूसरी तरफ देखने लगते हैं तो कुछ लोग दूसरों से अधिक पाने की इच्छा में अपने के अलावा किसी दुसरे से भी जुड़ जाते हैं |कुछ लोग भावनात्मक मूर्ख भी होते हैं जो दुसरे द्वारा भावना उभारकर स्वार्थ सिद्धि का माध्यम बन जाते हैं |कुछ लोग दुसरे से इतना आकर्षित हो जाते हैं की उन्हें अपनों में कमियाँ ही कमियाँ नजर आने लगती हैं |यह स्थिति अधिक दिन रहने पर उनके अन्दर एक गहरा खालीपन उत्पन्न हो जाता है जो उन्हें कहीं भी संतुष्ट नहीं रहने देता और वह यहाँ वहां अथवा उसे पाने का प्रयत्न करते हैं जिसके प्रति आकर्षित हों अथवा जो उन्हें अपनों से अधिक सक्षम लगे |ऐसे लोग भी तंत्र अभिचारों का सहारा लेते हैं उस लक्ष्य को अथवा अपने लक्ष्यों को पाने के लिए |
कुछ लोग अपने आसपास के किसी को अथवा अपने सहकर्मी को अथवा अपने रिश्तेदार को अथवा अपने पडोसी को अथवा अपने क्लासमेट को देखकर उसमे इतने इंटरेस्टेड हो जाते हैं की उसे पाने का हर संभव प्रयत्न करते हैं ,यहाँ तक की यहाँ वहां तांत्रिकों के यहाँ दौड़ते रहते हैं |कोई -कोई तो किसी -किसी का कहीं निश्चित रिश्ता तक तुडवाने का प्रयत्न करता है तो कोई किन्ही पत्नी पत्नी के रिश्ते को तोडना चाहता है |कुछ लोग अपने बॉस ,उच्चाधिकारी अथवा उच्च स्तर के महिला /पुरुष को अपनी उन्नति का माध्यम बनाने के प्रयास में उन्हें वशीभूत करने का प्रयत्न करते हैं और तंत्र का सहारा लेते हैं |इससे होता यह है की व्यक्ति उनकी ओर आकर्षित होता है और अपने बीबी अथवा पति से उसका लगाव कम होने लगता है |अधिक प्रभाव होने पर व्यक्ति उस अभिचार करने वाले के बारे में पहले सोचता है और पति या पत्नी के बारे में बाद में |
उपरोक्त स्थितियों में ली गयी तांत्रिक प्रणालियों की क्षमता करने वाले पर निर्भर करती हैं की व्यक्ति कितना प्रभावित होता है ,किन्तु यह बिलकुल सत्य है की इनका अच्छा जानकार या अच्छी क्षमता रखने वाला साधक यह क्रियाये करवा सकता है |सभी क्रियाओं का ,यहाँ तक की टोटकों का भी कुछ प्रभाव तो हो ही जाता है ,जबकि मान्त्रिक अनुष्ठानों का प्रभाव अधिक होता है |परिणाम यह होता है की व्यक्ति दुसरे के तरफ आकर्षित हो अपनों से विमुख होने लगता है |वह खर्च भी दुसरे के लिए करता है और अपने बीबी ,बच्चों अथवा घर के दायित्व से मुंह मोड़ने लगता है |उसे अपनी पत्नी अच्छी नहीं लगती ,उसे उसमे कोई आकर्षण नजर नहीं आता |वह पत्नी और प्रेमिका की तुलना करता है और पत्नी को किसी लायक नहीं पाता ,भले पत्नी अधिक सुन्दर ,सक्षम और बुद्धिमान हो ,क्योकि व्यक्ति की बुद्धि पर तो अभिचार का पर्दा पड़ा होता है और वह आसक्ति में इतना डूबा होता है की उसे सही गलत का भान नहीं रहता |वह तर्क भी करता है तो खुद को ही सही मानता है |यदि अभिचार ग्रस्त स्त्री है तो उसे अपने पति में कमियां ही कमियां नजर आने लगती हैं ,वह पति से असंतुष्ट हो जाती है |दूसरा व्यक्ति उसे अधिक आकर्षक ,सक्षम और सुन्दर लगता है |वह उसकी ओर झुकती और अपनों से दूर होने लगती है |कुछ दिन में दूरियां बहुत बढ़ जाती हैं जो कभी कभी अलगाव का भी कारण बन सकती हैं अगर स्त्री सक्षम हुई तो ,अन्यथा कलह तो रोज आम हो जाती हैं |
एक समस्या इससे भी अधिक गंभीर देखि जाती है सामान्य जीवन में |लोग दुसरे की उन्नति से अधिक दुखी होते हैं बजाय अपने दुखों के |उन्हें दुसरे की ख़ुशी देखि नहीं जाती भले खुद उनके यहाँ कोई कमी न हो |कुछ लोग अपनी कमियां और कमजोरियां कम करने ,अपनी समस्या दूर करने की बजाय दुसरे को नीचे लाने का प्रयत्न भी करते देखे जाते हैं |यह सोचते हैं की भले हम नहीं उन्नति कर पा रहे किन्तु अगला भी नहीं करना चाहिए |वह कैसे अमसे आगे चला जाएगा |इस हेतु भी कुछ लोग अभिचार का सहारा लेकर दुःख-कष्ट -बीमारी का आक्रमण दूसरों पर करवा देते हैं अथवा कर देते हैं |अक्सर तोनो-टोटकों का सहारा लेते हैं |तांत्रिकों से जाकर कहते हैं की अमुक हमें परेशां कर रहा अथवा हमारे ऊपर टोन -टोटके कर रहा ,हमें भी कुछ ऐसा दे दीजिये या कर दीजिये की उसकी उन्नति रुक जाए या उसका नुक्सान हो |सामान्य तांत्रिक यह नहीं देख पाता की व्यक्ति गलत बोल रहा है या सही ,वह कुछ क्रियाएं कर देता है या बता देता है बिना सोचे की इसका गलत उपयोग हो सकता है |इससे घर में पति-पत्नी और बच्चों पर कष्ट -रोग आ जाते हैं या नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न हो सकता है या वायव्य बाधाएं प्रभावित कर सकती हैं |घर में अशांति और दुःख उत्पन्न हो जाता है |
कुछ लोग अपनी बीमारी का भी उतारा करके दुसरे को दे देते हैं |आप माने या न माने किन्तु यह होता है और उतारा जिसको दिया जाता है उसे वह बीमारी हो जाती है |कभी कभी उतारा करके सड़क-चौराहे पर रख दिया जाता है और उसको लांघने वाला उस सम्बंधित कष्ट की चपेट में आ जाता है |कभी कभी तो किसी स्त्री को बच्चे न होने पर उसका उतारा किसी अन्य स्त्री पर कर दिया जाता है |कभी किसी का दाम्पत्य जीवन सुखी न होने पर या किन्ही पत्नी -पति पर कोइ क्रिया होने पर उसका उतारा करके किसी अन्य को भी दे दिया जाता है |उपरोक्त सभी क्रियाये आप पर या आपके पति-पत्नी या बच्चों पर हो सकती हैं |अगर आपके कुलदेवता शशक्त नहीं हैं तो यह क्रियाएं आपको अधिक प्रभावित करती हैं |
उपरोक्त समस्याएं अगर पहले से उत्पन्न हो चुकी हैं तब तो उन्हें समाप्त होने में समय लगता है और कभी कभी सक्षम तांत्रिक की मदद लेनी होती है किन्तु इनसे बचने का उपाय पहले से किया जा सकता है |यदि पति अथवा पत्नी अथवा बच्चों को किसी अच्छे साधक द्वारा उच्च और उग्र शक्तियों के यन्त्र बनाकर और उन्हें अच्छे से अभिमंत्रित करके धारण कराया जाए तो इस तरह होने वाली तांत्रिक क्रियाओं से बचाव हो जाता है |यदि समस्या उत्पन्न हो चुकी है और कोई अभिचार किया जा चूका है तो वह धीरे-धीरे कम हो जाता है और पुनः कोई क्रिया प्रभावित नहीं करती |यद्यपि इन कवचों की शक्ति साधक की शक्ति और अभिमंत्रित मन्त्रों की संख्या पर निर्भर करती हैं और गंभीर और विशेष लक्षित तांत्रिक क्रियाओं को रोक ही लें आवश्यक नहीं होता किन्तु सामान्य तांत्रिक क्रियाओं को यह रोक लेती हैं और व्यक्ति को इनसे प्रभावित होने से बचा लेती हैं अथवा धीरे -धीरे पहले की क्रियाओं के प्रभाव को समाप्त कर देती हैं |विशेष व्यक्ति को लक्ष्य कर की गयी गंभीर क्रियाओं की समाप्ति हेतु अच्छे तांत्रिक की मदद लेनी चाहिए |यदि पहले से सुरक्षा रहे तो ऐसी स्थिति बहुत कम ही आती है ,क्योकि ऐसी क्रियाओं के लिए खुद व्यक्ति को क्रियाएं करनी होती हैं |
जिन व्यक्तियों के घर परिवार में उपरोक्त समस्या नजर आये वे यह न मानें की यह अपने आप हो रहा है या विचार नहीं मिल रहे या यह व्यक्ति का स्वभाव होता है |अचानक अगर कोई परिवर्तन दिखे अथवा लगे की कोई किसी से जुड़ रहा है अथवा अपनों से विमुख हो रहा है तो इस पर जरुर ध्यान दें |यह अभिचार या वशीकरण-आकर्षण का प्रभाव हो सकता है |कोई आपका अहित चाहकर कोई क्रिया कर अथवा करवा सकता है |आप भले आधुनिकता और अपनी वैज्ञानिक समझ का लोहा मानते हुए इन्हें न मानें पर यह होता है और इनमे भी उसी वैज्ञानिक ऊर्जा की तकनिकी का उपयोग होता है जो रासायनिक और भौतिक क्रियाओं में होता है |यह सारा खेल ऊर्जा प्रक्षेपण और ऊर्जा ग्रहण का है |जिस पर पर जैसी ऊर्जा फेंकी जाती है उस पर वैसा प्रभाव होता है |तेज़ाब या आग या पानी फेंकने पर वह दीखता है पर तरंगों का प्रभाव दिखता नहीं होता अवश्य है |जैसे निश्चित ध्वनि आवृत्ति की तरंगे व्यक्ति को मौत भी दे सकती हैं ,जैसे विशेष सूर्य तरंगे व्यक्ति पर विशेष प्रभाव डालती हैं जैसे सौर तरंगें इलेक्ट्रानिक उपकरणों को प्रभावित कर देती हैं और दिखती नहीं उसी तरह यह तरंगे भी प्रभाव डाल देती हैं और दिखती नहीं |

अगर लगे की कोई समस्या है तब तो अवश्य ध्यान दीजिये ,नहीं दिखे तब भी पहले से सुरक्षा करके रखे |कब कौन क्या सोचे ,क्या करे कोई भरोसा नहीं |हर व्यक्ति खुद के स्वार्थ और दुसरे के सुख से चिंतित है |कोई आपके बारे में नहीं सोचता सब अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं |सुरक्षा कवच धारण करें और अपने प्रिय को धारण कराकर रखें ,कब कौन क्या क्रिया उसपर कर दे |इसके लिए भले खुद को आधुनिक समझते हों और आपको लगता हो की कवच पहनने से लोग आपको पिछड़ा न समझ लें ,भले इसे छिपाकर धारण करें और कराएं |क्योकि आने वाले कष्ट इस सोच से बड़े हो सकते हैं |इस हेतु काली ,बगलामुखी ,भैरव ,नृसिंह आदि शक्तियों के यन्त्र के साथ अभिचार रोकने और नष्ट करने वाली तांत्रिक वस्तुओं का उपयोग किया जाता है जो इस तरह के अभिचार के प्रभाव को क्रमशः कम करते हैं और कोई नया अभिचार होने से रोकते हैं |अगर समस्या उत्पन्न हो चुकी हो और कवच धारण आपका प्रियजन नहीं करता तो उसके तकिये आदि में इसे रखें अथवा उसे यह कहकर धारण कराएं की यह उसकी उन्नति और सुख के लिए है ,लोग आकर्षित और प्रभावित होंगे |इस तरह कहकर उसे धारण कराये |गंभीर समस्या उत्पन्न हो चुकी है तो अच्छे तांत्रिक की मदद लें तथा प्रति तांत्रिक क्रिया करें |अन्य उपाय उसके बताये अनुसार करें |.........................................................हर-हर महादेव 

विशेष :- किसी समस्या पर परामर्श अथवा समाधान हेतु संपर्क सूत्र -mob. 8299886532 ,, समय सायंकाल 5 से 7 बजे के बीच ,भारतीय समयानुसार . 

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